उत्तरकाण्ड
दोहा 13
8 पद
Chhand1 / 8
जय सगुन निर्गुन रूप रूप अनूप भूप सिरोमने।
दसकंधरादि प्रचंड निसिचर प्रबल खल भुज बल हने।।
अवतार नर संसार भार बिभंजि दारुन दुख दहे।
जय प्रनतपाल दयाल प्रभु संजुक्त सक्ति नमामहे।।1।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
जय! सगुण-निर्गुण रूप! अनुपम रूप! राजाओं के शिरोमणि! दशकण्ठ आदि प्रचण्ड राक्षसों — प्रबल दुष्टों — की भुजाओं (का दर्प मर्दन करने वाले)!
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
jaya saguna nirguna rūpa rūpa anūpa bhūpa siromanē.
dasakaṇḍharādi pracaṇḍa nisicara prabala khala bhuja ba
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Glory to You — embodied and formless, of incomparable beauty, O crown jewel of kings! You who vanquished the terrible demons like ten-headed Ravana and other mighty wicked warriors.
Chhand2 / 8
तव बिषम माया बस सुरासुर नाग नर अग जग हरे।
भव पंथ भ्रमत अमित दिवस निसि काल कर्म गुननि भरे।।
जे नाथ करि करुना बिलोके त्रिबिधि दुख ते निर्बहे।
भव खेद छेदन दच्छ हम कहुँ रच्छ राम नमामहे।।2।।
Chhand3 / 8
जे ग्यान मान बिमत्त तव भव हरनि भक्ति न आदरी।
ते पाइ सुर दुर्लभ पदादपि परत हम देखत हरी।।
बिस्वास करि सब आस परिहरि दास तव जे होइ रहे।
जपि नाम तव बिनु श्रम तरहिं भव नाथ सो समरामहे।।3।।
Chhand4 / 8
जे चरन सिव अज पूज्य रज सुभ परसि मुनिपतिनी तरी।
नख निर्गता मुनि बंदिता त्रेलोक पावनि सुरसरी।।
ध्वज कुलिस अंकुस कंज जुत बन फिरत कंटक किन लहे।
पद कंज द्वंद मुकुंद राम रमेस नित्य भजामहे।।4।।
Chhand5 / 8
अब्यक्तमूलमनादि तरु त्वच चारि निगमागम भने।
षट कंध साखा पंच बीस अनेक पर्न सुमन घने।।
फल जुगल बिधि कटु मधुर बेलि अकेलि जेहि आश्रित रहे।
पल्लवत फूलत नवल नित संसार बिटप नमामहे।।5।।
Chhand6 / 8
जे ब्रह्म अजमद्वैतमनुभवगम्य मनपर ध्यावहीं।
ते कहहुँ जानहुँ नाथ हम तव सगुन जस नित गावहीं।।
करुनायतन प्रभु सदगुनाकर देव यह बर मागहीं।
मन बचन कर्म बिकार तजि तव चरन हम अनुरागहीं।।6।।
Doha7 / 8
सब के देखत बेदन्ह बिनती कीन्हि उदार।
अंतर्धान भए पुनि गए ब्रह्म आगार।।13(क)।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
सबके देखते वेदों ने उदार विनती की। फिर अन्तर्धान होकर ब्रह्मलोक गए।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
saba ke dekhata bedanha binatī kīnhi udāra.
antardhāna bhae puni gae brahma āgāra.
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Before all onlookers, the Vedas humbly prayed and then vanished, returning to the abode of Brahma.
Doha8 / 8
बैनतेय सुनु संभु तब आए जहँ रघुबीर।
बिनय करत गदगद गिरा पूरित पुलक सरीर।।13(ख)।।