उत्तरकाण्ड

दोहा 130

10 पद

Chaupai1 / 10
यह सुभ संभु उमा संबादा। सुख संपादन समन बिषादा।। भव भंजन गंजन संदेहा। जन रंजन सज्जन प्रिय एहा।।
हिन्दी अर्थ देखें
यह शुभ शम्भु-उमा-संवाद — सुख-सम्पादक, विषाद-शमन। भव-भंजन, सन्देह-गंजन — (प्रेम) जगाने वाला।
रोमन लिप्यंतरण देखें
yaha subha sambhu umā saṃbādā. sukha saṃpādana samana biṣādā. bhava bhañjana gañjana saṃdehā. ja
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
This auspicious dialogue between Shambhu and Uma bestows happiness, removes sorrow, destroys worldly existence, and vanquishes all doubt. It awakens love.
Chaupai2 / 10
राम उपासक जे जग माहीं। एहि सम प्रिय तिन्ह के कछु नाहीं।। रघुपति कृपाँ जथामति गावा। मैं यह पावन चरित सुहावा।।
हिन्दी अर्थ देखें
श्रीराम-उपासक जो जगत में हैं — इसके समान उन्हें कुछ प्रिय नहीं। श्रीरघुपति की कृपा से (जिसे मिले)।
रोमन लिप्यंतरण देखें
rāma upāsaka je jaga māhīṃ. ehi sama priya tinha ke kachu nāhīṃ. raghupati kṛpāṃ
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
To worshippers of Rama in this world, nothing is as dear as this story. By Raghupati's grace, whoever receives it.
Chaupai3 / 10
एहिं कलिकाल न साधन दूजा। जोग जग्य जप तप ब्रत पूजा।। रामहि सुमिरिअ गाइअ रामहि। संतत सुनिअ राम गुन ग्रामहि।।
हिन्दी अर्थ देखें
इस कलियुग में कोई दूसरा साधन नहीं — न योग, न यज्ञ, न जप, न तप, न व्रत, न पूजा। श्रीराम को स्मरण करो, गाओ।
रोमन लिप्यंतरण देखें
ehiṃ kalikāla na sādhana dūjā. joga jagya japa tapa brata pūjā. rāmahi sumiriya gāia
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
In this Kali Yuga, there is no other means — no yoga, sacrifice, chanting, penance, vow, or worship. Simply remember and sing of Rama.
Chaupai4 / 10
जासु पतित पावन बड़ बाना। गावहिं कबि श्रुति संत पुराना।। ताहि भजहि मन तजि कुटिलाई। राम भजें गति केहिं नहिं पाई।।
हिन्दी अर्थ देखें
जिनका पतित-पावन (गिरे हुओं को पवित्र करना) बड़ा बिरुद (उपाधि) — कवि, श्रुति, सन्त, पुराण गाते। उन्हें मन, शरीर, वचन से भजो — अभिमान त्यागकर।
रोमन लिप्यंतरण देखें
jāsu patita pāvana baḍa bānā. gāvahiṃ kabi śruti santa purānā. tāhi bhajahi mana ta
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
He whose great vow is to purify the fallen — so sing the poets, Vedas, saints, and Puranas. Worship Him with mind, body, and speech, abandoning all pride.
Chhand5 / 10
पाई न केहिं गति पतित पावन राम भजि सुनु सठ मना। गनिका अजामिल ब्याध गीध गजादि खल तारे घना।। आभीर जमन किरात खस स्वपचादि अति अघरूप जे। कहि नाम बारक तेपि पावन होहिं राम नमामि ते।।1।।
हिन्दी अर्थ देखें
किसने श्रीराम भजकर गति नहीं पाई — पतित-पावन! सुन मूर्ख मन! गणिका (वेश्या), अजामिल, व्याध (शिकारी), गीध (गिद्ध) — (सब तरे)।
रोमन लिप्यंतरण देखें
pāī na kehiṃ gati patita pāvana rāma bhaji sunu saṭha manā. ganikā ajāmila byādha gīdha
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Who has not attained salvation by worshipping Rama, the Purifier of the fallen? Hear, O foolish mind! The courtesan, Ajamila, the hunter, the vulture — all were saved.
Chhand6 / 10
रघुबंस भूषन चरित यह नर कहहिं सुनहिं जे गावहीं। कलि मल मनोमल धोइ बिनु श्रम राम धाम सिधावहीं।। सत पंच चौपाईं मनोहर जानि जो नर उर धरै। दारुन अबिद्या पंच जनित बिकार श्रीरघुबर हरै।।2।।
Chhand7 / 10
सुंदर सुजान कृपा निधान अनाथ पर कर प्रीति जो। सो एक राम अकाम हित निर्बानप्रद सम आन को।। जाकी कृपा लवलेस ते मतिमंद तुलसीदासहूँ। पायो परम बिश्रामु राम समान प्रभु नाहीं कहूँ।।3।।
Doha8 / 10
मो सम दीन न दीन हित तुम्ह समान रघुबीर। अस बिचारि रघुबंस मनि हरहु बिषम भव भीर।।130(क)।।
हिन्दी अर्थ देखें
मुझ-समान कोई दीन नहीं — दीन-हित आप-समान नहीं, हे श्रीरघुवीर! ऐसा विचारकर, हे रघुवंशमणि! मेरी विषम (भयंकर) पीड़ा हरो।
रोमन लिप्यंतरण देखें
mo sama dīna na dīna hita tumha samāna raghubīra. asa bicāri raghubaṃsa mani harahu biṣama
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
None is as wretched as I, and none as compassionate to the lowly as You, O Raghubir. Considering this, O Jewel of the Raghu dynasty, remove this terrible anguish of mine.
Doha9 / 10
कामिहि नारि पिआरि जिमि लोभहि प्रिय जिमि दाम। तिमि रघुनाथ निरंतर प्रिय लागहु मोहि राम।।130(ख)।।
Shloka10 / 10
यत्पूर्वं प्रभुणा कृतं सुकविना श्रीशम्भुना दुर्गमं श्रॆमद्रामपदाब्जभक्तिमनिशम प्राप्त्यै तू रामायणं। मत्वा तद्रघुनाथनामनिरतम स्वान्तस्तम:शान्तये भाषाबद्ध्मिदम चकार तुलसीदासस्तथा मानसं।।1।। पुण्यं पापहरं सदा शिवकरं विज्ञानाभाक्तिप्रदम मायामोहमलापहं सुविमलं प्रेमाम्बुपूरं शुभम। श्रॆमद्रामचरितमानसमिदम भक्त्यावगाहन्ति ये ते सन्सारपतनगघोरकिरनैर्दह्यन्ति नो मानवाः।।2।।
हिन्दी अर्थ देखें
(तुलसीदासजी कहते हैं) जो पूर्व में प्रभु सुकवि श्रीशम्भु ने दुर्गम (कठिन) रचा — श्रीमद् रामपदाब्ज-भक्ति (श्रीराम-चरण-कमल-भक्ति) — (उसी को जनभाषा में गाया)।
रोमन लिप्यंतरण देखें
yatpūrvaṃ prabhuṇā kṛtaṃ sukavina śrīśambhunā durgamaṃ. śrēmadrāmapadābjabhakta
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
What was formerly composed by the great poet Lord Shambhu, that difficult and beautiful work — devotion to the lotus feet of Shri Rama — Tulsidas has sung in the vernacular for the benefit of himself and others.

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