उत्तरकाण्ड

दोहा 16

5 पद

Chaupai1 / 5
बिसरे गृह सपनेहुँ सुधि नाहीं। जिमि परद्रोह संत मन माही।। तब रघुपति सब सखा बोलाए। आइ सबन्हि सादर सिरु नाए।।
हिन्दी अर्थ देखें
घर भूल गए — सपने में भी याद नहीं। जैसे सन्तों के मन में पर-द्रोह (नहीं होता)। तब श्रीरघुपति ने सबको —
रोमन लिप्यंतरण देखें
bisare gṛha sapanehūṃ sudhi nāhīṃ. jimi paradroha santa mana māhīṃ.
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
They forgot their homes — not even in dreams did they remember them, just as malice never enters the mind of a saint.
Chaupai2 / 5
परम प्रीति समीप बैठारे। भगत सुखद मृदु बचन उचारे।। तुम्ह अति कीन्ह मोरि सेवकाई। मुख पर केहि बिधि करौं बड़ाई।।
हिन्दी अर्थ देखें
परम प्रीति से समीप बैठाया। भक्तों को सुख देने वाले मृदु वचन बोले। (श्रीराम ने कहा) तुम्हने मेरी बहुत सेवा की।
रोमन लिप्यंतरण देखें
parama prīti samīpa baiṭhāre. bhagata sukhada mṛdu bacana ucāre. tumha ati
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Seating them close with supreme affection, the Lover of devotees spoke gentle, pleasing words: 'You are exceedingly dear to Me.'
Chaupai3 / 5
ताते मोहि तुम्ह अति प्रिय लागे। मम हित लागि भवन सुख त्यागे।। अनुज राज संपति बैदेही। देह गेह परिवार सनेही।।
हिन्दी अर्थ देखें
(श्रीराम ने कहा) इसलिए तुम मुझे अत्यन्त प्रिय हो — मेरे हित के लिए भवन (घर) का सुख त्यागा। अनुज (विभीषण) को राज्य दिया —
रोमन लिप्यंतरण देखें
tāte mohi tumha ati priya lāge. mama hita lāgi bhavana sukha tyāge.
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'Therefore you are very dear to Me, for you forsook the pleasures of home for My sake.'
Chaupai4 / 5
सब मम प्रिय नहिं तुम्हहि समाना। मृषा न कहउँ मोर यह बाना।। सब के प्रिय सेवक यह नीती। मोरें अधिक दास पर प्रीती।।
हिन्दी अर्थ देखें
(श्रीराम ने कहा) सब मुझे प्रिय हैं — पर तुम्हारे समान कोई नहीं। यह झूठ नहीं कहता — मेरा यह स्वभाव है। सबके बच्चे समान — पर पिता मन्द (कमज़ोर) बच्चे पर विशेष स्नेह करता।
रोमन लिप्यंतरण देखें
saba mama priya nahiṃ tumhahi samānā. mṛṣā na kahauṃ mora yaha bānā. saba
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'All are dear to Me, but none is equal to you. This is not false — it is My nature. All beings are My children; a father loves all equally, but his heart especially favors the meek child.'
Doha5 / 5
अब गृह जाहु सखा सब भजेहु मोहि दृढ़ नेम। सदा सर्बगत सर्बहित जानि करेहु अति प्रेम।।16।।
हिन्दी अर्थ देखें
(श्रीराम ने कहा) अब सब सखा घर जाओ! दृढ़ नियम से मेरा भजन करो। सदा सर्वव्यापी, सबके हितकारी — जानकर प्रेम करो।
रोमन लिप्यंतरण देखें
aba gṛha jāhu sakhā saba bhajehu mohi dṛḍha nema. sadā sarbagata sarbahita ja
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'Now go home, friends, and worship Me with firm resolve. I am ever omnipresent and beneficent to all.'

Read this doha in English →