अयोध्याकाण्ड
दोहा 205
5 पद
Chaupai1 / 5
जानहुँ रामु कुटिल करि मोही। लोग कहउ गुर साहिब द्रोही।।
सीता राम चरन रति मोरें। अनुदिन बढ़उ अनुग्रह तोरें।।
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(भरत ने कहा) चाहे राम मुझे कुटिल (धूर्त) जानें — लोग कहें गुरु-स्वामी-द्रोही। (पर) सीता-राम-चरण में मेरी रति (प्रेम) — प्रतिदिन बढ़ती रहे — यही (प्रार्थना)।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
jānahūṃ rāmu kuṭila kari mohī. logu kahau gura sāhiba drohī.
sītā rāma carana rati mora
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
'Even if Rama considers me wicked, even if the world calls me a traitor to Guru and master — let my love for Sita and Rama's feet never waver.'
Chaupai2 / 5
जलदु जनम भरि सुरति बिसारउ। जाचत जलु पबि पाहन डारउ।।
चातकु रटनि घटें घटि जाई। बढ़े प्रेमु सब भाँति भलाई।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
(भरत ने कहा) जैसे जलद (मेघ) जन्मभर स्मृति भुलाए — (चातक) जल माँगते (पर मेघ) पत्थर (ओले) डालता। चातक की पुकार से (मेघ) घटता नहीं — (बल्कि) प्रेम और बढ़ता — (ऐसा मेरा राम-प्रेम)।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
jaladu janama bhari surati bisārau. jācata jalu pabi pāhana ḍārau.
cātaku raṭani ghaṭeṃ ghaṭi jāī
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
'Let the cloud forget its origin and, when asked for water, hurl thunderbolts. Let the chataka bird's plea diminish with each cry.'
Chaupai3 / 5
कनकहिं बान चढ़इ जिमि दाहें। तिमि प्रियतम पद नेम निबाहें।।
भरत बचन सुनि माझ त्रिबेनी। भइ मृदु बानि सुमंगल देनी।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
जैसे कनक (सोना) अग्नि में तपकर और शुद्ध होता — वैसे प्रियतम (राम) पद-नेम निभाने से। भरत के वचन सुनकर त्रिवेणी (गंगा-यमुना-सरस्वती) के बीच — मूर्तिमान (प्रकट) होकर (त्रिवेणी बोलीं)।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
kanakahiṃ bāna caḍhai jimi dāheṃ. timi priyatama pada nema nibāheṃ.
bharata bacana suni mājha
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
'As gold grows purer through fire, so may my love grow firmer through trials.' Hearing Bharata's words in midstream of the Ganges.
Chaupai4 / 5
तात भरत तुम्ह सब बिधि साधू। राम चरन अनुराग अगाधू।।
बाद गलानि करहु मन माहीं। तुम्ह सम रामहि कोउ प्रिय नाहीं।।
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(त्रिवेणी ने कहा) तात भरत! तुम सब विधि साधु (सज्जन) — राम-चरण में अगाध अनुराग। व्यर्थ ग्लानि (पछतावा) मन में मत करो — तुम-सम (तुम्हारे जैसा) राम को कोई प्रिय नहीं।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
tāta bharata tumha saba bidhi sādhū. rāma carana anurāga agādhū.
bāda galāni karahu mana māhīṃ.
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
'Dear Bharata, you are virtuous in every way. Your love for Rama's feet is unfathomable. Cast aside this needless remorse in your heart.'
Doha5 / 5
तनु पुलकेउ हियँ हरषु सुनि बेनि बचन अनुकूल।
भरत धन्य कहि धन्य सुर हरषित बरषहिं फूल।।205।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
शरीर पुलकित हुआ, हृदय हर्षित — त्रिवेणी के अनुकूल वचन सुनकर। 'भरत धन्य' कहकर देवता हर्षित होकर फूल बरसाते।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
tanu pulkeu hiyaṃ haraṣu suni beni bacana anukūla.
bharata dhanya kahi dhanya sura haraṣita baraṣaha
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
His body thrilled and his heart rejoiced hearing the Triveni's favorable words. The gods showered flowers, saying 'Bharata is blessed, blessed!'