अयोध्याकाण्ड
दोहा 70
5 पद
Chaupai1 / 5
समाचार जब लछिमन पाए। ब्याकुल बिलख बदन उठि धाए।।
कंप पुलक तन नयन सनीरा। गहे चरन अति प्रेम अधीरा।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
समाचार जब लक्ष्मण ने पाए — व्याकुल, विलख (दुखी) बदन (मुख) — उठकर दौड़े। काँपता-पुलकित तन — नयन (नेत्र) सनीर (आँसू-भरे)। अत्यन्त प्रेम-अधीर (विह्वल) — चरण पकड़े।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
samācāra jaba lacchimana pāe. byākula bilakha badana uṭhi dhāe.
kampa pulaka tana nayana sanīrā. gahe carana a
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
When Lakshmana received the news, he rushed out distraught, his face pale. With body trembling and thrilling, eyes full of tears, he clasped Rama's feet.
Chaupai2 / 5
कहि न सकत कछु चितवत ठाढ़े। मीनु दीन जनु जल तें काढ़े।।
सोचु हृदयँ बिधि का होनिहारा। सबु सुखु सुकृत सिरान हमारा।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
कुछ कह नहीं सकते — खड़े देखते। मीन (मछली) दीन (दयनीय) — मानो जल से काढ़ा (निकाला)। सोच (चिन्ता) हृदय में — विधि (भाग्य) क्या होने वाला? सब सुख-सुकृत (पुण्य) हमारा सिराना (समाप्त)।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
kahi na sakata kachu citavata ṭhāḍhe. mīnu dīna janu jala teṃ kāḍhe.
socu hṛdayaṃ bidhi kā honihā
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
He could not speak; he stood gazing in distress, like a fish pulled from water. Anxiety filled his heart — what will fate bring?
Chaupai3 / 5
मो कहुँ काह कहब रघुनाथा। रखिहहिं भवन कि लेहहिं साथा।।
राम बिलोकि बंधु कर जोरें। देह गेह सब सन तृनु तोरें।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
(लक्ष्मण सोचते) मुझे क्या कहेंगे रघुनाथ? भवन (घर) रखेंगे या साथ लेंगे? राम ने देखा — बन्धु (भाई) हाथ जोड़े। देह (शरीर)-गृह (घर) सबसे तृण (तिनका) तोड़े (सम्बन्ध त्यागे)।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
mo kahuṃ kāha kahaba raghunāthā. rakhihahiṃ bhavana ki lehahiṃ sāthā.
rāma biloki bandhu kara joreṃ.
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
'What will Raghunath tell me? Will He keep me at home or take me along?' Rama saw His brother standing with folded hands.
Chaupai4 / 5
बोले बचनु राम नय नागर। सील सनेह सरल सुख सागर।।
तात प्रेम बस जनि कदराहू। समुझि हृदयँ परिनाम उछाहू।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
राम बोले — नय (नीति)-नागर (चतुर) — शील-स्नेह-सरल-सुख-सागर। (कहा) तात! प्रेमवश कदराहो (डरो) मत। हृदय में परिणाम (अन्तिम फल) का उछाह (उत्साह) समझो।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
bole bacanu rāma naya nāgara. sīla saneha sarala sukha sāgara.
tāta prema basa jani kadrahū. samujhi hṛda
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Rama, skilled in wisdom and propriety, an ocean of virtue, love, simplicity, and joy, spoke: 'Dear brother, do not be afraid out of love. Think carefully in your heart.'
Doha5 / 5
मातु पिता गुरु स्वामि सिख सिर धरि करहि सुभायँ।
लहेउ लाभु तिन्ह जनम कर नतरु जनमु जग जायँ।।70।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
(श्रीराम ने कहा) माता-पिता-गुरु-स्वामी — शिक्षा (सलाह) — सिर पर सुभाव (स्वभाव) से धारकर करें। उन्होंने जन्म का लाभ पाया — नहीं तो जन्म जग (संसार) में व्यर्थ।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
mātu pitā guru svāmi sikha sira dhari karahi subhāyaṃ.
laheu lābhu tinha janama kara nataru janamu
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Those who joyfully bear on their heads the teaching of mother, father, guru, and master — they reap the reward of life; otherwise, life is wasted.