अयोध्याकाण्ड
दोहा 75
6 पद
Chaupai1 / 6
पुत्रवती जुबती जग सोई। रघुपति भगतु जासु सुतु होई।।
नतरु बाँझ भलि बादि बिआनी। राम बिमुख सुत तें हित जानी।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
(सुमित्रा ने कहा) पुत्रवती (सन्तान वाली) युवती (स्त्री) जग (संसार) में वही — रघुपति-भक्त जिसका सुत (पुत्र) हो। नहीं तो बाँझ (सन्तानहीन) भली — बादि (व्यर्थ) बिआनी (जन्म दी)। राम-विमुख सुत (पुत्र) से हित (भलाई) जानी।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
putravatī juvatī jaga soī. raghupati bhagatu jāsu sutu hoī.
nataru bāṃjha bhali bādi biānī. rāma
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
'She alone in this world is a blessed mother whose son is a devotee of Raghupati. Otherwise, better to be barren than to bear a son who is hostile to Rama.'
Chaupai2 / 6
तुम्हरेहिं भाग रामु बन जाहीं। दूसर हेतु तात कछु नाहीं।।
सकल सुकृत कर बड़ फलु एहू। राम सीय पद सहज सनेहू।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
(सुमित्रा ने कहा) तुम्हारे ही भाग्य से राम वन जाते — दूसरा कारण, तात! कुछ नहीं। सकल सुकृत (पुण्य) का बड़ा फल यही — राम-सीता-पद (चरणों) में सहज स्नेह।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
tumharehiṃ bhāga rāmu bana jāhīṃ. dūsara hetu tāta kachu nāhīṃ.
sakala sukṛta kara baḍa phalu ehū.
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
'It is by your good fortune that Rama goes to the forest — there is no other reason, dear son. This is the greatest fruit of all good deeds.'
Chaupai3 / 6
राग रोषु इरिषा मदु मोहू। जनि सपनेहुँ इन्ह के बस होहू।।
सकल प्रकार बिकार बिहाई। मन क्रम बचन करेहु सेवकाई।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
(सुमित्रा ने कहा) राग (आसक्ति), रोष (क्रोध), ईर्ष्या, मद (घमण्ड), मोह — सपने में भी इनके वश मत होना। सकल प्रकार विकार (दोष) छोड़कर — मन-कर्म-वचन सेवकाई (सेवा) करना।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
rāga roṣu iriṣā madu mohū. jani sapanehūṃ inha ke basa hohū.
sakala prakāra bikāra bihāī. ma
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
'Passion, anger, envy, pride, and delusion — never come under their sway, not even in dreams. Abandoning all kinds of faults, serve Rama wholeheartedly.'
Chaupai4 / 6
तुम्ह कहुँ बन सब भाँति सुपासू। सँग पितु मातु रामु सिय जासू।।
जेहिं न रामु बन लहहिं कलेसू। सुत सोइ करेहु इहइ उपदेसू।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
(सुमित्रा ने कहा) तुम्हें वन सब भाँति सुपास (सुखद) — संग पिता-माता (राम-सीता) जिनके जासू (साथ)। जिससे राम वन में क्लेश (कष्ट) न पाएँ — सुत (पुत्र)! वही करना — यही उपदेश।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
tumha kahuṃ bana saba bhāṃti supāsū. saṃga pitu mātu rāmu siya jāsū.
jehi na rāmu bana lahaha
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
'The forest will be comfortable for you in every way — your father, mother, Rama, and Sita will be with you. Those who do not find Rama in the forest.'
Chhand5 / 6
उपदेसु यहु जेहिं तात तुम्हरे राम सिय सुख पावहीं।
पितु मातु प्रिय परिवार पुर सुख सुरति बन बिसरावहीं।।
तुलसी प्रभुहि सिख देइ आयसु दीन्ह पुनि आसिष दई।
रति होउ अबिरल अमल सिय रघुबीर पद नित नित नई।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
(सुमित्रा ने कहा) यही उपदेश — जिससे, तात! तुम्हारे (साथ) राम-सीता सुख पाएँ। पिता-माता-प्रिय-परिवार-पुर (नगर)-सुख — सुरति (याद) वन में बिसराएँ (भुला दें)। (तुलसी कहते हैं) प्रभु को शिक्षा (उपदेश) देकर — आज्ञा दी — फिर आशीष दी। (कहा) रति (प्रेम) हो — अविरल (निरन्तर), अमल (निर्मल) — सीता-रघुवीर-पद (चरणों) में — नित-नित नई।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
upadesu yahu jehiṃ tāta tumhare rāma siya sukha pāvahīṃ.
pitu mātu priya parivāra pura sukha
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
'Follow this teaching, dear son, so that Rama and Sita may be happy with you. Forget the pleasures of parents, family, and city.'
Soratha6 / 6
मातु चरन सिरु नाइ चले तुरत संकित हृदयँ।
बागुर बिषम तोराइ मनहुँ भाग मृगु भाग बस।।75।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
माता-चरण सिर नवाकर — तुरन्त चले — संकित (भयभीत) हृदय। बागुर (जाल) विषम (भयंकर) तोड़ाकर — मानो भाग्यवश मृग (हिरन) भागा।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
mātu carana siru nāi cale turata saṅkita hṛdayaṃ.
bāgura biṣama torāi manahūṃ bhāga mṛgu bhāga basa.
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Bowing at his mother's feet, he left at once, his heart trembling. Like a deer breaking free from a terrible snare, he fled as if by fate.