बालकाण्ड
दोहा 165
5 पद
Chaupai1 / 5
कह तापस नृप ऐसेइ होऊ। कारन एक कठिन सुनु सोऊ।।
कालउ तुअ पद नाइहि सीसा। एक बिप्रकुल छाड़ि महीसा।।
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तापस ने कहा — नृप! ऐसे ही हो। (पर) कारण एक कठिन — सुनो वह भी। काल भी तुम्हारे पद (चरणों) पर सिर नवाएगा — एक विप्रकुल (ब्राह्मण-वंश) छोड़कर, महीश (राजा)!
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The ascetic said: 'O King, so shall it be. But listen — there is one difficult condition. Even Death shall bow his head at your feet, O King — except from the curse of a Brahmin.'
Chaupai2 / 5
तपबल बिप्र सदा बरिआरा। तिन्ह के कोप न कोउ रखवारा।।
जौं बिप्रन्ह सब करहु नरेसा। तौ तुअ बस बिधि बिष्नु महेसा।।
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(तापस ने कहा) तपबल से विप्र (ब्राह्मण) सदा बरिआरा (बलवान)। उनके कोप (क्रोध) से कोई रखवारा (रक्षक) नहीं। यदि सब विप्रों को वश करो, नरेश! — तो विधि (ब्रह्मा), विष्णु, महेश (शिव) भी तुम्हारे वश।
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'By the power of their austerity, Brahmins are always mighty; no one can protect you from their anger. But if you bring all Brahmins under your control, O King, then Brahma, Vishnu, and Mahesh themselves shall be in your power.'
Chaupai3 / 5
चल न ब्रह्मकुल सन बरिआई। सत्य कहउँ दोउ भुजा उठाई।।
बिप्र श्राप बिनु सुनु महिपाला। तोर नास नहि कवनेहुँ काला।।
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(तापस ने कहा) ब्रह्मकुल (ब्राह्मणों) से बरिआई (बल) नहीं चलती — सत्य कहता हूँ, दोनों भुजाएँ उठाकर। विप्र-शाप बिना, सुनो महीपाल (राजा)! — तुम्हारा नाश किसी भी काल में नहीं।
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'One cannot prevail against the Brahmin clan — I speak the truth, raising both arms. Listen, O King: without a Brahmin's curse, your destruction can never come by any means.'
Chaupai4 / 5
हरषेउ राउ बचन सुनि तासू। नाथ न होइ मोर अब नासू।।
तव प्रसाद प्रभु कृपानिधाना। मो कहुँ सर्ब काल कल्याना।।
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उसके वचन सुनकर राजा हर्षित हुआ — (कहा) नाथ! अब मेरा नाश नहीं होगा। आपके प्रसाद (कृपा) से, प्रभु कृपानिधान! — मुझे सर्वकाल कल्याण (शुभ) है।
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The king rejoiced hearing his words: 'Lord, now my destruction can never occur. By your grace, O merciful master, all times shall be auspicious for me.'
Doha5 / 5
एवमस्तु कहि कपटमुनि बोला कुटिल बहोरि।
मिलब हमार भुलाब निज कहहु त हमहि न खोरि।।165।।
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'एवमस्तु' (ऐसा ही हो) कहकर कपट-मुनि फिर कुटिल (छली) बोला — (कहा) हमारा मिलना भूल जाना — तो हमें खोरि (दोष) मत देना।
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Saying 'So be it,' the deceitful sage spoke again with cunning: 'If you forget about our meeting, then do not blame me.'