बालकाण्ड

दोहा 166

5 पद

Chaupai1 / 5
तातें मै तोहि बरजउँ राजा। कहें कथा तव परम अकाजा।। छठें श्रवन यह परत कहानी। नास तुम्हार सत्य मम बानी।।
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(तापस ने कहा) इसलिए मैं तुम्हें बरजता (रोकता) हूँ, राजा! कथा कहने से तुम्हारा परम अकाज (विनाश) होगा। छठे श्रवण (कान) — अर्थात् तीसरे व्यक्ति — तक यह कहानी पहुँचने पर — तुम्हारा नाश — मेरी वाणी सत्य।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'Therefore I warn you, O King — if this tale is told, it would bring you supreme ruin. If this story reaches a sixth ear, your destruction is certain — my words are true.'
Chaupai2 / 5
यह प्रगटें अथवा द्विजश्रापा। नास तोर सुनु भानुप्रतापा।। आन उपायँ निधन तव नाहीं। जौं हरि हर कोपहिं मन माहीं।।
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(तापस ने कहा) यह प्रकट होने पर अथवा द्विज-शाप (ब्राह्मण-शाप) से — तुम्हारा नाश, सुनो भानुप्रताप (प्रतापभानु)! अन्य उपाय से तुम्हारा निधन (मृत्यु) नहीं — चाहे हरि (विष्णु) और हर (शिव) मन में कोपें (क्रोधित हों)।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'If this is revealed, or through a Brahmin's curse — listen, O Pratapabhanu — your destruction shall come. By no other means can your death occur, even if Hari and Hara become wrathful.'
Chaupai3 / 5
सत्य नाथ पद गहि नृप भाषा। द्विज गुर कोप कहहु को राखा।। राखइ गुर जौं कोप बिधाता। गुर बिरोध नहिं कोउ जग त्राता।।
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(नृप ने कहा) सत्य, नाथ! पद (चरण) पकड़कर नृप बोला — द्विज (ब्राह्मण), गुरु के कोप से कहो, कौन बचाता? गुरु बचाता है यदि विधाता (ब्रह्मा) कोपे — (पर) गुरु-विरोध में जग में कोई त्राता (रक्षक) नहीं।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Grasping the sage's feet, the king said truthfully: 'Tell me, who can save one from a Brahmin's or guru's wrath? If the guru is angry, even if the Creator protects, no savior exists; but if the guru is against you, no one in the world can protect you.'
Chaupai4 / 5
जौं न चलब हम कहे तुम्हारें। होउ नास नहिं सोच हमारें।। एकहिं डर डरपत मन मोरा। प्रभु महिदेव श्राप अति घोरा।।
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(नृप ने कहा) यदि तुम्हारे कहे पर नहीं चलूँगा — नाश हो, मुझे सोच (चिन्ता) नहीं। एक ही डर से मेरा मन डरता — प्रभु! महीदेव (ब्राह्मण) का शाप अत्यन्त घोर।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'If I do not follow your instructions, let me be destroyed — I care not. Only one fear haunts my mind — Lord, the terrible curse of the Brahmins.'
Doha5 / 5
होहिं बिप्र बस कवन बिधि कहहु कृपा करि सोउ। तुम्ह तजि दीनदयाल निज हितू न देखउँ कोउँ।।166।।
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(नृप ने पूछा) विप्र (ब्राह्मण) किस विधि वश होंगे — कृपा करके वह भी कहो। तुम्हें छोड़कर, दीनदयाल! अपना कोई हितू (हितैषी) नहीं देखता।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'By what means can Brahmins be brought under control? Tell me, graciously. Other than you, O compassionate friend of the poor, I see no well-wisher.'

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