बालकाण्ड
दोहा 179
5 पद
Chaupai1 / 5
रहे तहाँ निसिचर भट भारे। ते सब सुरन्ह समर संघारे।।
अब तहँ रहहिं सक्र के प्रेरे। रच्छक कोटि जच्छपति केरे।।
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वहाँ निशाचर भट (योद्धा) भारे (बड़े) रहते थे — वे सब देवताओं ने समर (युद्ध) में संहारे (मारे)। अब वहाँ शक्र (इन्द्र) के प्रेरणा से रहते — करोड़ों यक्षपति (कुबेर) के रक्षक।
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Great demon warriors had lived there; they were all slain by the gods in battle. Now, at Indra's command, millions of Kubera's Yaksha guards dwelt there as protectors.
Chaupai2 / 5
दसमुख कतहुँ खबरि असि पाई। सेन साजि गढ़ घेरेसि जाई।।
देखि बिकट भट बड़ि कटकाई। जच्छ जीव लै गए पराई।।
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दसमुख (रावण) ने कहीं ऐसी खबर पाई — सेना सजाकर गढ़ (किला) घेर लिया। विकट (भयंकर) भट (योद्धा) और बड़ी कटकाई (सेना) देखकर — यक्ष जीव (प्राण) लेकर भाग गए।
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Ravana somehow received this intelligence and, marshalling his army, went and besieged the fortress. Seeing the terrible warriors and the huge army, the Yakshas fled for their lives.
Chaupai3 / 5
फिरि सब नगर दसानन देखा। गयउ सोच सुख भयउ बिसेषा।।
सुंदर सहज अगम अनुमानी। कीन्हि तहाँ रावन रजधानी।।
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फिरकर सब नगर दसानन (रावण) ने देखा — सोच (चिन्ता) गई, विशेष सुख हुआ। सुन्दर, सहज अगम (दुर्गम) अनुमानकर — रावण ने वहाँ राजधानी बनाई।
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Ravana inspected the entire city; his worries vanished and he felt great joy. Judging it to be naturally beautiful and impregnable, Ravana made it his capital.
Chaupai4 / 5
जेहि जस जोग बाँटि गृह दीन्हे। सुखी सकल रजनीचर कीन्हे।।
एक बार कुबेर पर धावा। पुष्पक जान जीति लै आवा।।
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जिसे जैसा योग्य — बाँटकर गृह (घर) दिए — सकल रजनीचर (राक्षसों) को सुखी किया। एक बार कुबेर पर धावा (आक्रमण) किया — पुष्पक यान (विमान) जीतकर ले आया।
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He distributed houses to all according to their rank and made all the demons content. Once he attacked Kubera and captured the Pushpaka flying chariot in victory.
Doha5 / 5
कौतुकहीं कैलास पुनि लीन्हेसि जाइ उठाइ।
मनहुँ तौलि निज बाहुबल चला बहुत सुख पाइ।।179।।
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कौतुक (खेल) से कैलास को फिर जाकर उठा लिया — मानो अपना बाहुबल तौलकर (मापकर) — बहुत सुख पाकर चला।
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For sport, he went and lifted Mount Kailasa itself, as if to weigh his own arm-strength, and departed greatly pleased.