बालकाण्ड
दोहा 194
5 पद
Chaupai1 / 5
ध्वज पताक तोरन पुर छावा। कहि न जाइ जेहि भाँति बनावा।।
सुमनबृष्टि अकास तें होई। ब्रह्मानंद मगन सब लोई।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
ध्वज (झण्डे), पताका, तोरण (बन्दनवार) से पुर (नगर) छाया। जिस भाँति बनावट — कही नहीं जाती। आकाश से सुमनवृष्टि (पुष्पवर्षा) होती। ब्रह्मानन्द-मग्न सब लोग।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
The city was decorated with flags, banners, and festive arches — their beauty beyond description. Flowers rained from the sky; all the people were immersed in the bliss of Brahman.
Chaupai2 / 5
बृंद बृंद मिलि चलीं लोगाई। सहज संगार किएँ उठि धाई।।
कनक कलस मंगल धरि थारा। गावत पैठहिं भूप दुआरा।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
वृन्द-वृन्द (समूह-समूह) मिलकर लोगाई (स्त्रियाँ) चलीं — सहज श्रृंगार किए उठकर दौड़ीं। कनक (सोने) के कलश, मंगल-थाल धारण करके — गाती हुई भूप-द्वार (राजमहल) में प्रवेश करतीं।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Throngs upon throngs of women gathered and rushed out with their natural adornments. Carrying golden pitchers and auspicious trays, they sang as they entered the king's gate.
Chaupai3 / 5
करि आरति नेवछावरि करहीं। बार बार सिसु चरनन्हि परहीं।।
मागध सूत बंदिगन गायक। पावन गुन गावहिं रघुनायक।।
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आरती करके — नेवछावरी (निछावर) करतीं। बार-बार शिशु के चरणों पर गिरतीं। मागध (स्तुतिपाठक), सूत (चारण), बन्दीजन, गायक — रघुनायक (श्रीराम) के पावन गुण गाते।
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They performed the arati ceremony and made offerings to avert the evil eye; again and again they touched the infant's feet. Bards, minstrels, heralds, and singers sang the holy praises of the Lord of the Raghus.
Chaupai4 / 5
सर्बस दान दीन्ह सब काहू। जेहिं पावा राखा नहिं ताहू।।
मृगमद चंदन कुंकुम कीचा। मची सकल बीथिन्ह बिच बीचा।।
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सर्बस्व (सब कुछ) दान सबने दिया — जिसने पाया, उसने भी नहीं रखा (आगे दे दिया)। मृगमद (कस्तूरी), चन्दन, कुंकुम (केसर) की कीचड़ (लेप) — सकल गलियों में बीच-बीच में मची (फैली)।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Everyone gave away all they had; whoever received anything did not keep it but gave it away in turn. A paste of musk, sandalwood, and saffron was smeared all over the streets.
Doha5 / 5
गृह गृह बाज बधाव सुभ प्रगटे सुषमा कंद।
हरषवंत सब जहँ तहँ नगर नारि नर बृंद।।194।।
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घर-घर बाज-बधावा (शुभ संगीत) — प्रकट हुए सुषमा (शोभा) के कन्द (मूल)। हर्षवन्त सब — जहाँ-तहाँ — नगर के नारी-नर-वृन्द (समूह)।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
In every home auspicious music and celebrations resounded; the very source of grace had appeared. Everywhere, men, women, and throngs of people rejoiced.