बालकाण्ड

दोहा 235

5 पद

Chaupai1 / 5
जानि कठिन सिवचाप बिसूरति। चली राखि उर स्यामल मूरति।। प्रभु जब जात जानकी जानी। सुख सनेह सोभा गुन खानी।।
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शिवचाप (शिव-धनुष) कठिन जानकर बिसूरतीं (दुखी होतीं)। श्यामल (साँवली) मूर्ति (रूप) उर (हृदय) में रखकर चलीं। प्रभु ने जब जानकी को जाते जाना — सुख, स्नेह, शोभा, गुण की खानी (भण्डार)।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Knowing Shiva's bow to be unyielding, she sighed, but departed carrying the dark image of the Lord in her heart. When the Lord saw Janaki departing — she who was a mine of happiness, love, beauty, and virtue —
Chaupai2 / 5
परम प्रेममय मृदु मसि कीन्ही। चारु चित भीतीं लिख लीन्ही।। गई भवानी भवन बहोरी। बंदि चरन बोली कर जोरी।।
हिन्दी अर्थ देखें
परम प्रेममय मृदु (कोमल) मसि (स्याही) बनाई — चारु (सुन्दर) चित्त (मन) की भीत (दीवार) पर लिख ली (चित्र अंकित किया)। सीता भवानी-भवन (पार्वती-मन्दिर) में लौटीं — चरण वन्दन करके हाथ जोड़कर बोलीं।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
He made supremely loving ink in his heart and painted her beautiful image on the canvas of his mind. Sita returned to Bhavani's temple, and bowing at her feet, she spoke with folded hands.
Chaupai3 / 5
जय जय गिरिबरराज किसोरी। जय महेस मुख चंद चकोरी।। जय गज बदन षड़ानन माता। जगत जननि दामिनि दुति गाता।।
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(सीता ने कहा) जय-जय गिरिवरराज-किशोरी (पर्वतराज हिमवान की पुत्री)! जय महेश (शिव)-मुख-चन्द-चकोरी (शिव के मुख-चन्द्रमा की चकोरी)! जय गजवदन (गणेश) और षडानन (कार्तिकेय) की माता! जगज्जननी (जगत-माता) — दामिनी (बिजली)-दुति (कान्ति) शरीर।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'Victory, victory to you, O daughter of the king of mountains! Victory to you, the chakori bird gazing at the moon-face of Lord Mahesha! Victory, O mother of Ganesha and Kartikeya! O mother of the world, whose body gleams like lightning!'
Chaupai4 / 5
नहिं तव आदि मध्य अवसाना। अमित प्रभाउ बेदु नहिं जाना।। भव भव बिभव पराभव कारिनि। बिस्व बिमोहनि स्वबस बिहारिनि।।
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(सीता ने कहा) आपका न आदि, न मध्य, न अवसान (अन्त)। अमित (अपार) प्रभाव — वेद भी नहीं जानते। भव (संसार) के भव (सृष्टि), विभव (ऐश्वर्य), परभव (प्रलय) कारिणी। विश्व-विमोहनी — स्वबस (स्वतन्त्र) विहारिणी।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'You have no beginning, middle, or end; the Vedas cannot comprehend your infinite power. You are the cause of creation, sustenance, and dissolution of worldly existence; you enchant the universe yet sport according to your own will.'
Doha5 / 5
पतिदेवता सुतीय महुँ मातु प्रथम तव रेख। महिमा अमित न सकहिं कहि सहस सारदा सेष।।235।।
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(सीता ने कहा) पतिदेवता (पति को देवता मानने वाली) सतियों में — माता! आपकी प्रथम रेख (श्रेणी)। अमित (अपार) महिमा — सहस (हजारों) शारदा (सरस्वती)-शेष भी नहीं कह सकतीं।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'Among devoted wives, O Mother, you hold the foremost place. Your glory is limitless — even a thousand Saraswatis and Sheshas cannot describe it.'

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