बालकाण्ड
दोहा 255
5 पद
Chaupai1 / 5
नृपन्ह केरि आसा निसि नासी। बचन नखत अवली न प्रकासी।।
मानी महिप कुमुद सकुचाने। कपटी भूप उलूक लुकाने।।
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नृपों (राजाओं) की आशा-निशि (रात) नष्ट हुई — वचन-नक्षत्र (तारों-जैसे वचन) अवली (पंक्ति) प्रकाशित नहीं। मानी (गर्वीले) महीप (राजा) कुमुद (कमलिनी)-जैसे सकुचाए (मुरझाए)। कपटी भूप (राजा) उलूक (उल्लू)-जैसे लुकाए (छिपे)।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
The night of the kings' hopes was destroyed; the star-like glory of their words faded away. The proud kings shrank like water-lilies, and the deceitful kings hid like owls.
Chaupai2 / 5
भए बिसोक कोक मुनि देवा। बरिसहिं सुमन जनावहिं सेवा।।
गुर पद बंदि सहित अनुरागा। राम मुनिन्ह सन आयसु मागा।।
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कोक (चकवा-पक्षी)-जैसे मुनि-देवता विशोक (शोक-रहित) हुए — सुमन (फूल) बरसाकर सेवा जनाते। गुरु-पद वन्दन करके अनुराग (प्रेम) सहित — राम ने मुनियों से आज्ञा माँगी।
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The gods and sages, like chakravaka birds, were freed from sorrow. They rained flowers and expressed their devotion. Bowing at the guru's feet with deep love, Rama sought the sages' permission.
Chaupai3 / 5
सहजहिं चले सकल जग स्वामी। मत्त मंजु बर कुंजर गामी।।
चलत राम सब पुर नर नारी। पुलक पूरि तन भए सुखारी।।
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सहज ही सकल जग-स्वामी चले — मत्त (मस्त) मञ्जु (सुन्दर) श्रेष्ठ कुंजर (हाथी)-गामी (चाल वाले)। चलते राम — सब पुर (नगर) नर-नारी — पुलक (रोमांच) से पूर्ण तन — सुखी हुए।
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The Lord of all the worlds walked naturally with the graceful gait of a majestic young elephant. As Rama walked, all the men and women of the city were filled with joy, their bodies thrilling with delight.
Chaupai4 / 5
बंदि पितर सुर सुकृत सँभारे। जौं कछु पुन्य प्रभाउ हमारे।।
तौ सिवधनु मृनाल की नाईं। तोरहुँ राम गनेस गोसाईं।।
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(लोगों ने) पितर (पूर्वज), सुर (देवता) वन्दन करके सुकृत (पुण्य) सँभारे (याद किए)। (प्रार्थना) यदि कुछ हमारे पुण्य-प्रभाव है — तो शिवधनु मृनाल (कमल-नाल) की भाँति — तोड़ें राम — गणेश गोसाईं!
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Remembering their ancestors, the gods, and their own good deeds, they prayed, 'If we have any merit, then let Rama break Shiva's bow as easily as a lotus stem, O Lord Ganesha!'
Doha5 / 5
रामहि प्रेम समेत लखि सखिन्ह समीप बोलाइ।
सीता मातु सनेह बस बचन कहइ बिलखाइ।।255।।
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राम को प्रेम समेत देखकर — सखियों को समीप बुलाकर — सीता-माता (मैना) ने स्नेहवश — विलखाकर (दुखी होकर) वचन कहे।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Seeing Rama with love, Sita's mother called her companions near and, overcome with maternal affection, spoke with anguish.