बालकाण्ड

दोहा 274

5 पद

Chaupai1 / 5
कौसिक सुनहु मंद यहु बालकु। कुटिल कालबस निज कुल घालकु।। भानु बंस राकेस कलंकू। निपट निरंकुस अबुध असंकू।।
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(परशुराम ने कहा) कौशिक (विश्वामित्र)! सुनो — मन्द (दुष्ट) यह बालक। कुटिल (छली), कालवश (मृत्यु के वश), निज कुल घालक (नाशक)। भानुवंश (सूर्यवंश) — राकेश (चन्द्रमा) का कलंक। निपट (अत्यन्त) निरंकुश, अबुध (मूर्ख), अशंक (निडर)।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'Kaushika, listen — this boy is wicked, perverse, in the grip of Death, the destroyer of his own clan. He is a blot on the moon of the Solar dynasty — utterly unrestrained, ignorant, and fearless.'
Chaupai2 / 5
काल कवलु होइहि छन माहीं। कहउँ पुकारि खोरि मोहि नाहीं।। तुम्ह हटकउ जौं चहहु उबारा। कहि प्रतापु बलु रोषु हमारा।।
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(परशुराम ने कहा) काल-कवलु (मृत्यु-ग्रास) होगा क्षण में — पुकारकर कहता हूँ — खोरि (दोष) मुझे नहीं। तुम हटकओ (रोको) यदि उबार (बचाना) चाहो। (लक्ष्मण ने कहा) कहा — प्रताप, बल, रोष हमारा।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'He will be swallowed by Death in an instant. I proclaim this — the fault will not be mine. You had better restrain him if you want to save him.' So saying, he declared his valor, strength, and wrath.
Chaupai3 / 5
लखन कहेउ मुनि सुजस तुम्हारा। तुम्हहि अछत को बरनै पारा।। अपने मुँह तुम्ह आपनि करनी। बार अनेक भाँति बहु बरनी।।
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लक्ष्मण ने कहा — मुनि! आपका सुयश — आप विद्यमान रहते कौन वर्णन कर सकता? अपने मुँह से अपनी करनी (कर्म) — बार अनेक, बहुत भाँति वर्णन की।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Lakshmana said, 'O sage, who can possibly describe your famous glory while you yourself are present? With your own mouth, you have narrated your own deeds many a time and in many a way.'
Chaupai4 / 5
नहिं संतोषु त पुनि कछु कहहू। जनि रिस रोकि दुसह दुख सहहू।। बीरब्रती तुम्ह धीर अछोभा। गारी देत न पावहु सोभा।।
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(लक्ष्मण ने कहा) सन्तोष नहीं — तो फिर कुछ और कहो। रिस (क्रोध) रोककर दुःसह दुख मत सहो। वीरव्रती (वीरता-व्रत वाले) — आप धीर (धैर्यवान), अक्षोभ (शान्त) — गाली देते शोभा नहीं पाते।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'If you are still not satisfied, then say some more — do not suppress your anger and suffer unbearable pain. You claim to be a brave warrior, calm and unshakable — yet scolding and abusing does not befit you.'
Doha5 / 5
सूर समर करनी करहिं कहि न जनावहिं आपु। बिद्यमान रन पाइ रिपु कायर कथहिं प्रतापु।।274।।
हिन्दी अर्थ देखें
(लक्ष्मण ने कहा) शूर (वीर) समर (युद्ध) में करनी करते — कहकर अपने को नहीं जनाते। विद्यमान (उपस्थित) रण (युद्ध) में रिपु (शत्रु) पाकर — कायर (डरपोक) प्रताप (वीरता) कथते (बखानते)।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'True heroes prove themselves through deeds in battle, never boasting about themselves. When a warrior finds his foe present on the battlefield, it is only the coward who talks about his prowess.'

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