बालकाण्ड

दोहा 281

5 पद

Chaupai1 / 5
बंधु कहइ कटु संमत तोरें। तू छल बिनय करसि कर जोरें।। करु परितोषु मोर संग्रामा। नाहिं त छाड़ कहाउब रामा।।
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(परशुराम ने कहा) बन्धु (भाई) तुम्हारी सम्मति (अनुमोदन) से कटु (कड़वा) कहता। तू छल (से) विनय करता — हाथ जोड़कर। मेरा परितोष (सन्तुष्टि) करो — संग्राम (युद्ध) से। नहीं तो छोड़ो 'राम' कहलाना।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'Your brother speaks rudely with your approval, while you make a show of humility with folded hands. Satisfy me in combat, or else give up the name of Rama.'
Chaupai2 / 5
छलु तजि करहि समरु सिवद्रोही। बंधु सहित न त मारउँ तोही।। भृगुपति बकहिं कुठार उठाएँ। मन मुसकाहिं रामु सिर नाएँ।।
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(परशुराम ने कहा) छल त्यागकर समर (युद्ध) करो, शिवद्रोही! बन्धु सहित नहीं तो मारूँ तुझे। भृगुपति (परशुराम) बकते (बोलते) — कुठार (फरसा) उठाए। मन मुस्कुराते राम — सिर नवाए।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'Abandon your deceit and fight, O enemy of Shiva, or I shall slay you along with your brother.' Bhrigu's lord railed on, axe raised; Rama smiled within and bowed his head.
Chaupai3 / 5
गुनह लखन कर हम पर रोषू। कतहुँ सुधाइहु ते बड़ दोषू।। टेढ़ जानि सब बंदइ काहू। बक्र चंद्रमहि ग्रसइ न राहू।।
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(श्रीराम ने कहा) लक्ष्मण के गुनह (अपराध) का हम पर रोष (क्रोध)। कहीं सुधाओ (ठीक करो) — तो बड़ा दोष। टेढ़ जानकर सब कोई वन्दन करता (क्या)? बक्र (टेढ़े) चन्द्रमा को राहु नहीं ग्रसता (निगलता)?
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'You are angry at me for Lakshmana's fault. If you ever find any fault anywhere, it is a great failing. Who respects one known to be crooked? Even Rahu does not devour the crescent moon.'
Chaupai4 / 5
राम कहेउ रिस तजिअ मुनीसा। कर कुठारु आगें यह सीसा।। जेंहिं रिस जाइ करिअ सोइ स्वामी। मोहि जानि आपन अनुगामी।।
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राम ने कहा — रिस (क्रोध) त्यागो, मुनीश (मुनीश्वर)! हाथ में कुठार (फरसा) — आगे यह सिर। जिससे रिस (क्रोध) जाए — वही करो, स्वामी! मुझे अपना अनुगामी (अनुयायी) जानकर।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Rama said, 'Cast aside your anger, O lord of sages. Here is your axe, and here is my head. Do whatever will make your anger depart, my master. Consider me your own follower.'
Doha5 / 5
प्रभुहि सेवकहि समरु कस तजहु बिप्रबर रोसु। बेषु बिलोकें कहेसि कछु बालकहू नहिं दोसु।।281।।
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(श्रीराम ने कहा) प्रभु-सेवक में समर (युद्ध) कैसा? त्यागो, विप्रवर (श्रेष्ठ ब्राह्मण)! रोष (क्रोध)। वेष (मेरा रूप) देखकर बालक ने कुछ कहा — बालक को भी दोष नहीं।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'How can there be battle between a master and his servant? Abandon your wrath, O best of Brahmins. Seeing my appearance, the boy said some things — even a child cannot be blamed for that.'

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