बालकाण्ड

दोहा 282

5 पद

Chaupai1 / 5
देखि कुठार बान धनु धारी। भै लरिकहि रिस बीरु बिचारी।। नामु जान पै तुम्हहि न चीन्हा। बंस सुभायँ उतरु तेंहिं दीन्हा।।
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(श्रीराम ने कहा) कुठार (फरसा)-बाण-धनुष धारी (धारण किए) देखकर — लरिकहि (बालक को) रिस (क्रोध) आई — वीर विचारकर। नाम जानता है — पर आपको चीन्हा (पहचाना) नहीं। वंश-स्वभाव से उसने उत्तर दिया।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'Seeing you bearing an axe, arrows, and bow, the child thought you a warrior, not a sage. He knows your name but did not recognize you — it was the natural manner of his clan that prompted his reply.'
Chaupai2 / 5
जौं तुम्ह औतेहु मुनि की नाईं। पद रज सिर सिसु धरत गोसाईं।। छमहु चूक अनजानत केरी। चहिअ बिप्र उर कृपा घनेरी।।
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(श्रीराम ने कहा) यदि आप मुनि की भाँति आते — पद-रज (चरण-धूलि) शिशु सिर पर धरता, गोसाईं! अनजानत (अनजाने) की चूक क्षमा करो — विप्र (ब्राह्मण) के हृदय में बहुत कृपा चाहिए।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'If you had come in the manner of a sage, this child would have placed the dust of your feet upon his head. Forgive the error of one who did not know — a Brahmin's heart should hold abundant mercy.'
Chaupai3 / 5
हमहि तुम्हहि सरिबरि कसि नाथा।।कहहु न कहाँ चरन कहँ माथा।। राम मात्र लघु नाम हमारा। परसु सहित बड़ नाम तोहारा।।
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(श्रीराम ने कहा) हमारी-आपकी सरिबरि (तुलना) कैसी, नाथ? कहो — कहाँ चरण, कहाँ माथा (मस्तक)। राम-मात्र — लघु (छोटा) नाम हमारा। परसु (फरसा) सहित बड़ नाम तुम्हारा।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'How can there be any comparison between us, my lord? You tell me — where are the feet, and where is the forehead? Our name is merely "Rama" — small and short. Your name, with "Parashu" attached, is great and grand.'
Chaupai4 / 5
देव एकु गुनु धनुष हमारें। नव गुन परम पुनीत तुम्हारें।। सब प्रकार हम तुम्ह सन हारे। छमहु बिप्र अपराध हमारे।।
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(श्रीराम ने कहा) देव! एक गुण (तार) हमारे धनुष में — नव (नौ) गुण परम पुनीत (पवित्र) आपके (यज्ञोपवीत के)। सब प्रकार हम आपसे हारे — क्षमा करो, विप्र! हमारे अपराध।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'My lord, our bow has but one virtue; your bow has nine supreme and holy virtues. In every way we are defeated by you. Forgive our offenses, O Brahmin.'
Doha5 / 5
बार बार मुनि बिप्रबर कहा राम सन राम। बोले भृगुपति सरुष हसि तहूँ बंधु सम बाम।।282।।
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बार-बार मुनि विप्रवर (श्रेष्ठ ब्राह्मण) ने कहा — राम से 'राम'। भृगुपति (परशुराम) सरुष (क्रोध सहित) हँसकर बोले — (कहा) तू भी बन्धु-सम बाम (उलटा/चालाक)।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Again and again, the great Brahmin sage called Rama by name. Bhrigu's lord replied with an angry smile, 'Even you are as perverse as your brother.'

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