बालकाण्ड

दोहा 283

5 पद

Chaupai1 / 5
निपटहिं द्विज करि जानहि मोही। मैं जस बिप्र सुनावउँ तोही।। चाप स्त्रुवा सर आहुति जानू। कोप मोर अति घोर कृसानु।।
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(परशुराम ने कहा) निपट (केवल) द्विज (ब्राह्मण) ही मुझे जानते हो! मैं जैसा विप्र (ब्राह्मण) — सुनाता हूँ तुझे। चाप (धनुष) — स्रुवा (हवन-चम्मच), सर (बाण) — आहुति जानो। मेरा कोप — अत्यन्त घोर कृसानु (अग्नि)।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'You take me for a mere Brahmin — let me tell you what kind of Brahmin I am. Know the bow as my sacrificial ladle, the arrows as my offerings, and my wrath as the fiercest sacrificial fire.'
Chaupai2 / 5
समिधि सेन चतुरंग सुहाई। महा महीप भए पसु आई।। मै एहि परसु काटि बलि दीन्हे। समर जग्य जप कोटिन्ह कीन्हे।।
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(परशुराम ने कहा) समिधि (ईंधन) — सुहावनी चतुरंग सेना। महामहीप (महाराजा) — पशु आकर बने। मैंने इस परसु (फरसे) से काटकर बलि (आहुति) दी — समर-यज्ञ जप करोड़ों किए।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'The four-fold armies are the fine sacrificial fuel, and the great kings are the sacrificial animals. I have offered them with this axe as oblations and performed millions of battle-sacrifices.'
Chaupai3 / 5
मोर प्रभाउ बिदित नहिं तोरें। बोलसि निदरि बिप्र के भोरें।। भंजेउ चापु दापु बड़ बाढ़ा। अहमिति मनहुँ जीति जगु ठाढ़ा।।
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(परशुराम ने कहा) मेरा प्रभाव तुझे विदित (ज्ञात) नहीं। बोलता — विप्र (ब्राह्मण) के भोर (सरलता) का निदर (अपमान) करके। चाप (धनुष) भंजा — दर्प बड़ा बढ़ा। अहंकार — मानो जगत जीतकर खड़ा।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'My power is not known to you; you dare speak slightingly, presuming on the Brahmin's meekness. You broke the bow and your pride has swelled — as though you stand having conquered the world through arrogance.'
Chaupai4 / 5
राम कहा मुनि कहहु बिचारी। रिस अति बड़ि लघु चूक हमारी।। छुअतहिं टूट पिनाक पुराना। मैं कहि हेतु करौं अभिमाना।।
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राम ने कहा — मुनि! विचारकर कहो — रिस (क्रोध) अत्यन्त बड़ी, लघु (छोटी) चूक हमारी। छूते टूट गया पुराना पिनाक (शिव-धनुष) — मैं किस हेतु (कारण) अभिमान करूँ?
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Rama said, 'Sage, speak with reflection — your anger is very great, and my fault is small. The ancient Pinaka broke at a mere touch — on what basis should I claim any pride?'
Doha5 / 5
जौं हम निदरहिं बिप्र बदि सत्य सुनहु भृगुनाथ। तौ अस को जग सुभटु जेहि भय बस नावहिं माथ।।283।।
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(श्रीराम ने कहा) यदि हम विप्र (ब्राह्मणों) को निदर (अपमान) करते — सत्य सुनो, भृगुनाथ (परशुराम)! तो ऐसा कौन जग (संसार) में सुभट (योद्धा) — जिसके भय-वश माथा (मस्तक) नवाएँ?
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'If we disrespect Brahmins as you say, O lord of the Bhrigus, hear the truth — who then is such a warrior in this world that he could make us bow our heads in fear?'

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