बालकाण्ड

दोहा 291

5 पद

Chaupai1 / 5
सुनि पाती पुलके दोउ भ्राता। अधिक सनेहु समात न गाता।। प्रीति पुनीत भरत कै देखी। सकल सभाँ सुखु लहेउ बिसेषी।।
हिन्दी अर्थ देखें
पाती (पत्र) सुनकर दोनों भ्राता (भरत-शत्रुघ्न) पुलकित — अधिक स्नेह — शरीर में समाता नहीं। भरत की पुनीत (पवित्र) प्रीति देखकर — सकल सभा ने विशेष सुख पाया।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Hearing the letter, both brothers thrilled with joy; their bodies could not contain their great affection. Seeing Bharata's pure love, the entire court experienced special happiness.
Chaupai2 / 5
तब नृप दूत निकट बैठारे। मधुर मनोहर बचन उचारे।। भैया कहहु कुसल दोउ बारे। तुम्ह नीकें निज नयन निहारे।।
हिन्दी अर्थ देखें
तब नृप (राजा) ने दूतों को निकट बैठाया — मधुर मनोहर वचन कहे। (कहा) भैया! कुशल कहो — दोनों बालक? तुमने नीकें (अच्छी तरह) निज नयनों (आँखों) से निहारे (देखे)?
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Then the king seated the messengers near him and spoke sweet, charming words: "Brothers, tell me, are both my boys well? You have seen them clearly with your own eyes."
Chaupai3 / 5
स्यामल गौर धरें धनु भाथा। बय किसोर कौसिक मुनि साथा।। पहिचानहु तुम्ह कहहु सुभाऊ। प्रेम बिबस पुनि पुनि कह राऊ।।
हिन्दी अर्थ देखें
(दशरथ ने पूछा) श्यामल (साँवला)-गौर (गोरा) — धनुष-भाथा (तरकश) धरे। वय (आयु) किशोर — कौशिक (विश्वामित्र) मुनि के साथ। पहचानते हो? स्वभाव कहो। प्रेम-विवश बार-बार राजा कहते।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
"One dark and one fair, bearing bow and quiver, young in age, with the sage Kaushika—did you recognize them? Tell me about them." Overcome with love, the king asked again and again.
Chaupai4 / 5
जा दिन तें मुनि गए लवाई। तब तें आजु साँचि सुधि पाई।। कहहु बिदेह कवन बिधि जाने। सुनि प्रिय बचन दूत मुसकाने।।
हिन्दी अर्थ देखें
(दशरथ ने कहा) जिस दिन से मुनि लवाकर (ले जाकर) गए — तब से आज साँची (सच्ची) सुधि (समाचार) पाई। कहो — विदेह (जनक) ने किस विधि (प्रकार) जाने? प्रिय वचन सुनकर दूत मुस्कुराए।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
"From the day the sage took them away, only today have I received true news. Tell me, how did Videha come to know of them?" Hearing the dear words, the messengers smiled.
Doha5 / 5
सुनहु महीपति मुकुट मनि तुम्ह सम धन्य न कोउ। रामु लखनु जिन्ह के तनय बिस्व बिभूषन दोउ।।291।।
हिन्दी अर्थ देखें
(दूतों ने कहा) सुनो, महीपति-मुकुट-मणि (राजाओं में शिरोमणि)! आपसम धन्य कोई नहीं। राम-लक्ष्मण जिनके तनय (पुत्र) — विश्व-विभूषण (संसार के आभूषण) दोनों।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
"Listen, O crest-jewel of kings! None is as blessed as you, whose sons are Rama and Lakshmana, the two ornaments of the universe."

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