बालकाण्ड
दोहा 308
5 पद
Chaupai1 / 5
मुनिहि दंडवत कीन्ह महीसा। बार बार पद रज धरि सीसा।।
कौसिक राउ लिये उर लाई। कहि असीस पूछी कुसलाई।।
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मुनि को महीश (राजा) ने दण्डवत किया — बार-बार पद-रज (चरण-धूलि) सिर पर धरकर। कौशिक (विश्वामित्र) ने राजा को उर (हृदय) से लगाया — आशीष कहकर कुशलता पूछी।
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The king prostrated before the sage, placing the dust of his feet on his head again and again. Kaushika embraced the king to his heart, gave blessings, and asked after his welfare.
Chaupai2 / 5
पुनि दंडवत करत दोउ भाई। देखि नृपति उर सुखु न समाई।।
सुत हियँ लाइ दुसह दुख मेटे। मृतक सरीर प्रान जनु भेंटे।।
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फिर दोनों भाई दण्डवत करते — देखकर नृपति (राजा) के उर (हृदय) में सुख नहीं समाता। सुत (पुत्रों) को हृदय से लगाकर दुःसह (असहनीय) दुख मिटाए — मानो मृतक शरीर ने प्राण पाए।
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Then both brothers prostrated before their father; seeing them, the king's joy knew no bounds. Pressing his sons to his heart, his unbearable sorrow vanished—as if a dead body had met its life-breath.
Chaupai3 / 5
पुनि बसिष्ठ पद सिर तिन्ह नाए। प्रेम मुदित मुनिबर उर लाए।।
बिप्र बृंद बंदे दुहुँ भाईं। मन भावती असीसें पाईं।।
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फिर वसिष्ठ-पद (चरणों) पर उन्होंने (राम-लक्ष्मण ने) सिर नवाया — प्रेम-मुदित (प्रसन्न) मुनिवर ने उर (हृदय) से लगाया। दोनों भाइयों ने विप्रवृन्द (ब्राह्मण-समूह) वन्दना की — मनभावती (मन को प्रिय) आशीषें पाईं।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Then they bowed their heads at Vasishtha's feet, and the great sage lovingly embraced them. Both brothers honored the assembly of Brahmins and received heartfelt blessings.
Chaupai4 / 5
भरत सहानुज कीन्ह प्रनामा। लिए उठाइ लाइ उर रामा।।
हरषे लखन देखि दोउ भ्राता। मिले प्रेम परिपूरित गाता।।
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भरत ने सहानुज (शत्रुघ्न सहित) प्रणाम किया — राम ने उठाकर उर (हृदय) से लगाया। लक्ष्मण ने दोनों भ्राता (भरत-शत्रुघ्न) देखकर हर्षित — प्रेम-परिपूरित शरीर से मिले।
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Bharata with his younger brother bowed to Rama, who lifted them up and embraced them. Lakshmana was delighted to see both brothers; they met with bodies overflowing with love.
Doha5 / 5
पुरजन परिजन जातिजन जाचक मंत्री मीत।
मिले जथाबिधि सबहि प्रभु परम कृपाल बिनीत।।308।।
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पुरजन (नगरवासी), परिजन (रिश्तेदार), जातिजन (जाति-बन्धु), याचक (माँगने वाले), मन्त्री, मित्र — प्रभु ने यथाविधि (उचित रीति से) सबसे मिले — परम कृपालु, विनीत (विनम्र)।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
The Lord, supremely gracious and humble, met everyone properly—citizens, relatives, kinsmen, supplicants, ministers, and friends.