बालकाण्ड

दोहा 309

5 पद

Chaupai1 / 5
रामहि देखि बरात जुड़ानी। प्रीति कि रीति न जाति बखानी।। नृप समीप सोहहिं सुत चारी। जनु धन धरमादिक तनुधारी।।
हिन्दी अर्थ देखें
राम को देखकर बारात जुड़ानी (शीतल/प्रसन्न हुई)। प्रीति की रीति — वर्णन नहीं हो सकती। नृप (राजा) समीप चारों सुत शोभित — मानो धन (कुबेर), धर्म आदि ने तनु (शरीर) धारा।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Seeing Rama, the wedding party felt refreshed. The ways of love cannot be described. Near the king, the four sons shone like Dharma, Artha, Kama, and Moksha incarnate.
Chaupai2 / 5
सुतन्ह समेत दसरथहि देखी। मुदित नगर नर नारि बिसेषी।। सुमन बरिसि सुर हनहिं निसाना। नाकनटीं नाचहिं करि गाना।।
हिन्दी अर्थ देखें
सुतों समेत दशरथ को देखकर — नगर नर-नारी विशेष मुदित (प्रसन्न)। सुमन (फूल) बरसाकर सुर (देवता) निशान (नगाड़े) बजाते। नाकनटी (स्वर्ग की नर्तकियाँ) गान करके नाचतीं।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Seeing Dasharatha with his sons, the men and women of the city were especially delighted. Gods showered flowers and beat their drums; heavenly nymphs danced and sang.
Chaupai3 / 5
सतानंद अरु बिप्र सचिव गन। मागध सूत बिदुष बंदीजन।। सहित बरात राउ सनमाना। आयसु मागि फिरे अगवाना।।
हिन्दी अर्थ देखें
शतानन्द और विप्र (ब्राह्मण)-सचिव-गण। मागध (स्तुतिपाठक), सूत (चारण), विदुष (विद्वान), बन्दीजन। बारात सहित राजा का सम्मान किया — आज्ञा माँगकर अगवान (स्वागत-दल) लौटे।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Shatananda, the Brahmins, ministers, bards, minstrels, the learned, and panegyrists—all honored the king with his wedding party. Having received permission, the welcomers returned.
Chaupai4 / 5
प्रथम बरात लगन तें आई। तातें पुर प्रमोदु अधिकाई।। ब्रह्मानंदु लोग सब लहहीं। बढ़हुँ दिवस निसि बिधि सन कहहीं।।
हिन्दी अर्थ देखें
पहले बारात — लग्न (शुभ तिथि) से आई। इसलिए पुर (नगर) में प्रमोद (हर्ष) अधिक। ब्रह्मानन्द सब लोग पाते — (विधि से कहते) बढ़ें दिवस-निशि (दिन-रात)!
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Since the wedding party had arrived before the auspicious date, the city's joy was all the greater. Everyone experienced the bliss of Brahman, and prayed to the Creator to lengthen the days and nights.
Doha5 / 5
रामु सीय सोभा अवधि सुकृत अवधि दोउ राज। जहँ जहँ पुरजन कहहिं अस मिलि नर नारि समाज।।।309।।
हिन्दी अर्थ देखें
राम-सीता — शोभा-अवधि (सीमा)। सुकृत (पुण्य)-अवधि (सीमा) — दोनों राज (राजा)। जहाँ-जहाँ पुरजन (नगरवासी) कहते — ऐसा — मिलकर नर-नारी समाज।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Rama and Sita are the very limits of beauty; the two kings are the very limits of merit. Wherever the citizens gathered, men and women all spoke thus.

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