बालकाण्ड
दोहा 318
6 पद
Chaupai1 / 6
बिधुबदनीं सब सब मृगलोचनि। सब निज तन छबि रति मदु मोचनि।।
पहिरें बरन बरन बर चीरा। सकल बिभूषन सजें सरीरा।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
सब विधुवदनी (चन्द्रमुखी), सब मृगलोचनी (हिरन-नेत्री)। सब निज तन-छबि (शरीर-शोभा) — रति-मद (कामदेव-पत्नी का गर्व)-मोचनी (नाशक)। वर्ण-वर्ण (अनेक रंगों) के श्रेष्ठ चीर (वस्त्र) पहने। सकल विभूषण (आभूषण) शरीर पर सजे।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
All were moon-faced, all were doe-eyed, all had beauty that would make Rati abandon her pride. They wore garments of various fine colors, their bodies adorned with all kinds of ornaments.
Chaupai2 / 6
सकल सुमंगल अंग बनाएँ। करहिं गान कलकंठि लजाएँ।।
कंकन किंकिनि नूपुर बाजहिं। चालि बिलोकि काम गज लाजहिं।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
सकल सुमंगल अंग सजाकर — गान करतीं — कलकंठी (कोयल) लजातीं। कंकण (चूड़ी), किंकिणी (करधनी), नूपुर (पायल) बजतीं। चाल देखकर काम-गज (कामदेव-हाथी) भी लजाते।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Having prepared all auspicious marks on their limbs, they sang songs that put the cuckoo to shame. Bangles, anklets, and ankle-bells jingled; their gait would make even Kamadeva's elephant feel ashamed.
Chaupai3 / 6
बाजहिं बाजने बिबिध प्रकारा। नभ अरु नगर सुमंगलचारा।।
सची सारदा रमा भवानी। जे सुरतिय सुचि सहज सयानी।।
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विविध प्रकार बाजने बजते — नभ (आकाश) और नगर में सुमंगलचार (शुभ-आचरण)। सची (इन्द्राणी), शारदा (सरस्वती), रमा (लक्ष्मी), भवानी (पार्वती) — जो सुरतिय (देव-स्त्रियाँ) — शुचि (पवित्र), सहज सयानी (बुद्धिमान)।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Musical instruments of many kinds were playing; the sky and the city resounded with auspiciousness. Sachi, Saraswati, Lakshmi, and Parvati—those divine women who are naturally wise and pure—
Chaupai4 / 6
कपट नारि बर बेष बनाई। मिलीं सकल रनिवासहिं जाई।।
करहिं गान कल मंगल बानीं। हरष बिबस सब काहुँ न जानी।।
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कपट (छद्म) — सुन्दर स्त्री-वेष बनाकर — सब रनिवास (रानियों) में जाकर मिलीं। कल (मधुर) मंगल-वाणी में गान करतीं — हर्ष-विवश — सबको किसी ने नहीं जाना (पहचाना)।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
—assuming the guise of beautiful mortal women, they all mingled with the queens' entourage. They sang sweet and auspicious songs; overcome with joy, no one recognized them.
Chhand5 / 6
को जान केहि आनंद बस सब ब्रह्मु बर परिछन चली।
कल गान मधुर निसान बरषहिं सुमन सुर सोभा भली।।
आनंदकंदु बिलोकि दूलहु सकल हियँ हरषित भई।।
अंभोज अंबक अंबु उमगि सुअंग पुलकावलि छई।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
कौन जाने किसे — आनन्दवश सब — ब्रह्मु (सब लोग) श्रेष्ठ परिछन (आरती/स्वागत) चलीं। कल (मधुर) गान, मधुर निशान (नगाड़े), सुर (देवता) सुमन (फूल) बरसाते — शोभा भली। आनन्दकन्द (आनन्द-मूल) दूल्हे को देखकर — सब हृदय में हर्षित हुईं। अम्भोज (कमल) अम्बक (नेत्र) — अम्बु (जल) उमगा — सुअंग (सुन्दर शरीर) पर पुलकावली (रोमांच) छाई।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Who could know anyone? Overcome with bliss, the entire company went forth to welcome the groom. With sweet songs and melodious instruments, the gods showered flowers—the scene was magnificent. Beholding the groom, the Fountain of Joy, all were delighted at heart. Tears welled up in their lotus-eyes, and waves of goosebumps spread across their beautiful limbs.
Doha6 / 6
जो सुख भा सिय मातु मन देखि राम बर बेषु।
सो न सकहिं कहि कलप सत सहस सारदा सेषु।।318।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
सीता-माता के मन में जो सुख हुआ — राम का वर-वेष (दूल्हे का रूप) देखकर। वह सत (सौ) कल्प (में भी) नहीं कह सकते — सहस (हजारों) शारदा (सरस्वती) और शेष।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
The joy that filled Sita's mother's heart upon seeing Rama in his wedding attire—a hundred kalpas and a thousand Sharadas and Sheshas together could not express.