बालकाण्ड

दोहा 325

10 पद

Chaupai1 / 10
कुअँरु कुअँरि कल भावँरि देहीं।।नयन लाभु सब सादर लेहीं।। जाइ न बरनि मनोहर जोरी। जो उपमा कछु कहौं सो थोरी।।
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कुँवर-कुँवरी कल (सुन्दर) भाँवरी (फेरे) देतीं। सब सादर नयन-लाभ (नेत्रों का सुख) लेते। मनोहर जोड़ी — वर्णन नहीं जाती — जो उपमा कुछ कहूँ — वह थोड़ी (अपर्याप्त)।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
The prince and princess performed the beautiful wedding circumambulations, and all feasted their eyes with reverence. The enchanting couple defies description; any comparison I offer would fall short.
Chaupai2 / 10
राम सीय सुंदर प्रतिछाहीं। जगमगात मनि खंभन माहीं । मनहुँ मदन रति धरि बहु रूपा। देखत राम बिआहु अनूपा।।
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राम-सीता की सुन्दर प्रतिछाहीं (प्रतिबिम्ब) — मणि-खम्भों में जगमगातीं। मानो मदन (कामदेव)-रति ने बहुत रूप धारकर — राम-विवाह अनूप (अनुपम) देखता।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
The beautiful reflections of Rama and Sita gleamed in the jeweled pillars of the pavilion, as if Kamadeva and Rati had assumed many forms to watch the incomparable wedding of Rama.
Chaupai3 / 10
दरस लालसा सकुच न थोरी। प्रगटत दुरत बहोरि बहोरी।। भए मगन सब देखनिहारे। जनक समान अपान बिसारे।।
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दर्शन-लालसा (इच्छा) — संकोच कम नहीं — प्रकट होतीं, छिपतीं — बार-बार। सब देखने वाले मग्न — जनक-समान — अपना-पराया भूले।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
The longing for a glance warred with modesty—now appearing, now hiding, again and again. All the onlookers were lost in rapture; like Janaka, they forgot their very selves.
Chaupai4 / 10
प्रमुदित मुनिन्ह भावँरी फेरी। नेगसहित सब रीति निबेरीं।। राम सीय सिर सेंदुर देहीं। सोभा कहि न जाति बिधि केहीं।।
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प्रमुदित (अत्यन्त प्रसन्न) मुनियों ने भाँवरी (फेरे) फिराई — नेग (रीति) सहित सब रीति निबेरीं (पूरी कीं)। राम ने सीता के सिर में सेंदुर (सिन्दूर) दिया — शोभा किस विधि कहें!
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
The delighted sages completed the circumambulations and concluded all the rites with proper gifts. Rama applied vermilion to Sita's parting—that beauty no one can describe.
Chaupai5 / 10
अरुन पराग जलजु भरि नीकें। ससिहि भूष अहि लोभ अमी कें।। बहुरि बसिष्ठ दीन्ह अनुसासन। बरु दुलहिनि बैठे एक आसन।।
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अरुण (लाल) पराग (पराग) से जलज (कमल) भरी नीकें (अच्छी तरह)। शशि (चन्द्रमा) को भूषित — अहि (शेषनाग) अमी (अमृत) के लोभ (से)। फिर वसिष्ठ ने अनुशासन (आज्ञा) दिया — वर-दुलहिनी (दूल्हा-दुल्हन) एक आसन पर बैठे।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
It was as if a lotus were beautifully filled with red pollen, adorning the moon—a sight that makes the serpent covet the nectar. Then Vasishtha gave his blessing, and the groom and bride sat together upon one seat.
Chhand6 / 10
बैठे बरासन रामु जानकि मुदित मन दसरथु भए। तनु पुलक पुनि पुनि देखि अपनें सुकृत सुरतरु फल नए।। भरि भुवन रहा उछाहु राम बिबाहु भा सबहीं कहा। केहि भाँति बरनि सिरात रसना एक यहु मंगलु महा।।1।।
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बरासन (वर-आसन) पर राम-जानकी बैठे — मुदित (प्रसन्न) मन दशरथ हुए। तन पुलकित — बार-बार देखकर — अपने सुकृत (पुण्य)-सुरतरु (कल्पवृक्ष) नए (नये) फल। भुवनों (लोकों) में भरा उछाह (उत्साह) — राम-विवाह हुआ — सबने कहा। किस भाँति वर्णन करे — सिराती (थकती) एक रसना (जीभ) — यह महामंगल। तब जनक ने वसिष्ठ-आज्ञा पाकर — विवाह-साज सँवारकर। माण्डवी, श्रुतकीर्ति, ऊर्मिला — कुँवरी (राजकुमारियाँ) बुलवाकर लीं। कुशकेतु-कन्या प्रथम — जो गुण-शील-सुख-शोभामयी — सब रीति प्रीति समेत करके — वह ब्याहकर नृप (राजा) ने भरत को दी। जानकी की लघु (छोटी) भगिनी (बहन) — सकल सुन्दरियों में शिरोमणि जानकर — वह तनया (पुत्री) ब्याहकर लक्ष्मण को दी — सकल विधि सम्मान करके। जिनका नाम श्रुतकीर्ति — सुलोचनी (सुन्दर नेत्रों वाली), सुमुखी (सुन्दर मुख वाली), सब गुणों की आगरी (भण्डार)। वह रिपुसूदन (शत्रुघ्न) को भूपति (राजा) ने दी — रूप-शील उजागरी (शोभित)। अनुरूप (योग्य) वर-दुलहिनी — परस्पर लखकर (देखकर) — सकुचाकर हृदय में हर्षित। सब मुदित (प्रसन्न) — सुन्दरता सराहते — सुमन (फूल) सुरगण (देवता) बरसाते। सुन्दरी-सुन्दर वरों सह — सब एक मण्डप में राजतीं — मानो जीव के उर (हृदय) में चारों अवस्था — विमुन (निर्गुण) सहित विराजतीं।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Rama and Janaki sat upon the bridal seat; Dasharatha was delighted at heart. With thrilling body, gazing at them again and again, he saw the wish-fulfilling tree of his own merit bearing fresh fruit. Joy filled all the worlds—everyone said the marriage of Rama had taken place. How can a single tongue describe the exhaustless flow of this great festivity? Then Janaka, receiving Vasishtha's command, prepared the wedding arrangements. He summoned the princesses Mandavi, Shrutakirti, and Urmila. The daughter of Kushakethu, the eldest, endowed with virtue, goodness, joy, and beauty—her he gave in marriage to Bharata with all rites and love. Janaki's younger sister, acknowledged as the crown-jewel of all beauties, he gave in marriage to Lakshmana with all due honor. And the one named Shrutakirti, bright-eyed, fair-faced, and a mine of all virtues—that princess the king gave to Shatrughna, radiant in beauty and virtue. Beholding the well-matched brides and grooms, all felt shy delight in their hearts. Everyone praised the beauty and the gods showered flowers. The beautiful brides with their handsome grooms all shone in the single pavilion, as if the four states of the soul, together with liberation, sat enthroned in the heart.
Chhand7 / 10
तब जनक पाइ बसिष्ठ आयसु ब्याह साज सँवारि कै। माँडवी श्रुतिकीरति उरमिला कुअँरि लईं हँकारि के।। कुसकेतु कन्या प्रथम जो गुन सील सुख सोभामई। सब रीति प्रीति समेत करि सो ब्याहि नृप भरतहि दई।।2।।
Chhand8 / 10
जानकी लघु भगिनी सकल सुंदरि सिरोमनि जानि कै। सो तनय दीन्ही ब्याहि लखनहि सकल बिधि सनमानि कै।। जेहि नामु श्रुतकीरति सुलोचनि सुमुखि सब गुन आगरी। सो दई रिपुसूदनहि भूपति रूप सील उजागरी।।3।।
Chhand9 / 10
अनुरुप बर दुलहिनि परस्पर लखि सकुच हियँ हरषहीं। सब मुदित सुंदरता सराहहिं सुमन सुर गन बरषहीं।। सुंदरी सुंदर बरन्ह सह सब एक मंडप राजहीं। जनु जीव उर चारिउ अवस्था बिमुन सहित बिराजहीं।।4।।
Doha10 / 10
मुदित अवधपति सकल सुत बधुन्ह समेत निहारि। जनु पार महिपाल मनि क्रियन्ह सहित फल चारि।।325।।
हिन्दी अर्थ देखें
मुदित (प्रसन्न) अवधपति (दशरथ) — सकल सुत-बधुओं समेत निहारकर। मानो पार (श्रेष्ठ) महीपाल-मणि (राजाओं में रत्न) — क्रियाओं (कर्मों) सहित चारों फल।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
The joyful King of Ayodhya beheld all his sons together with their brides, like a supreme king among monarchs with all four fruits of life and their corresponding practices.

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