बालकाण्ड

दोहा 331

5 पद

Chaupai1 / 5
दंड प्रनाम सबहि नृप कीन्हे। पूजि सप्रेम बरासन दीन्हे।। चारि लच्छ बर धेनु मगाई। कामसुरभि सम सील सुहाई।।
हिन्दी अर्थ देखें
सबको नृप (राजा) ने दण्डप्रणाम किए — सप्रेम पूजकर श्रेष्ठ आसन दिए। चार लक्ष (चार लाख) श्रेष्ठ धेनु (गाय) मँगवाईं — कामसुरभि (कामधेनु)-सम शील (स्वभाव) — सुहाई (सुन्दर)।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
The king prostrated before all and, worshipping them with love, offered them fine seats. He sent for four hundred thousand excellent cows, as gentle as Kamadhenu.
Chaupai2 / 5
सब बिधि सकल अलंकृत कीन्हीं। मुदित महिप महिदेवन्ह दीन्हीं।। करत बिनय बहु बिधि नरनाहू। लहेउँ आजु जग जीवन लाहू।।
हिन्दी अर्थ देखें
सब विधि सकल अलंकृत (सजी) कीं — मुदित (प्रसन्न) महीप (राजा) ने महीदेवों (ब्राह्मणों) को दीं। बहु विधि विनय करते नरनाह (राजा) — (कहते) आज जग-जीवन (जीवन) का लाहू (लाभ) पाया।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
He had them all adorned in every way and joyfully gave them to the Brahmins. Humbly, the king said again and again: "Today I have obtained the true reward of worldly life."
Chaupai3 / 5
पाइ असीस महीसु अनंदा। लिए बोलि पुनि जाचक बृंदा।। कनक बसन मनि हय गय स्यंदन। दिए बूझि रुचि रबिकुलनंदन।।
हिन्दी अर्थ देखें
आशीष पाकर महीश (राजा) आनन्दित — फिर याचक (माँगने वालों) के वृन्द (समूह) बुलाए। कनक (सोना), वसन (वस्त्र), मणि, हय (घोड़े), गय (हाथी), स्यन्दन (रथ) — रुचि (पसन्द) पूछकर रविकुलनन्दन (सूर्यवंश-आनन्द दशरथ) ने दिए।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Receiving blessings, the king was overjoyed. Then he summoned groups of supplicants. Gold, garments, gems, horses, elephants, and chariots—the Joy of the Solar Race gave them, inquiring about each one's preference.
Chaupai4 / 5
चले पढ़त गावत गुन गाथा। जय जय जय दिनकर कुल नाथा।। एहि बिधि राम बिआह उछाहू। सकइ न बरनि सहस मुख जाहू।।
हिन्दी अर्थ देखें
गुण-गाथा (यशोगान) पढ़ते-गाते चले — (कहते) जय-जय-जय दिनकर (सूर्य)-कुल-नाथ! इस प्रकार राम-विवाह-उछाह (उत्सव) — सहस (हजारों) मुख भी वर्णन नहीं कर सकते।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
They departed, reciting and singing his glorious deeds: "Victory, victory, victory to the Lord of the Solar Dynasty!" In this way, the festivities of Rama's wedding—even a thousand-mouthed Shesha could not describe them.
Doha5 / 5
बार बार कौसिक चरन सीसु नाइ कह राउ। यह सबु सुखु मुनिराज तव कृपा कटाच्छ पसाउ।।331।।
हिन्दी अर्थ देखें
बार-बार कौशिक (विश्वामित्र)-चरण पर सिर नवाकर राजा कहते। (कहते) यह सब सुख — मुनिराज! — आपकी कृपा-कटाक्ष (कृपादृष्टि) का प्रसाद (कृपा)।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Again and again, bowing at Kaushika's feet, the king said: "All this happiness, O King of Sages, is the gift of your gracious glance."

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