बालकाण्ड

दोहा 338

5 पद

Chaupai1 / 5
सुक सारिका जानकी ज्याए। कनक पिंजरन्हि राखि पढ़ाए।। ब्याकुल कहहिं कहाँ बैदेही। सुनि धीरजु परिहरइ न केही।।
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शुक (तोते)-सारिका (मैना) — जानकी ने जिलाए (पाले)। कनक (सोने) पिंजरों में रखकर पढ़ाए (बोलना सिखाया)। व्याकुल कहते — कहाँ बैदेही (सीता)? सुनकर कौन धीरज नहीं छोड़े?
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Parrots and mynas that Janaki had lovingly reared in golden cages called out distractedly: "Where is Vaidehi?" Hearing them, who could keep their composure?
Chaupai2 / 5
भए बिकल खग मृग एहि भाँति। मनुज दसा कैसें कहि जाती।। बंधु समेत जनकु तब आए। प्रेम उमगि लोचन जल छाए।।
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इस भाँति खग (पक्षी)-मृग (पशु) विकल हुए — मनुज (मनुष्य) दशा कैसे कही जाती? बन्धु (भाई कुशध्वज) समेत जनक तब आए — प्रेम उमगा, लोचन (नेत्रों) में जल छाया।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
When even birds and beasts were so distressed, how can the condition of humans be described? Then Janaka came with his brothers, love swelling and tears filling his eyes.
Chaupai3 / 5
सीय बिलोकि धीरता भागी। रहे कहावत परम बिरागी।। लीन्हि राँय उर लाइ जानकी। मिटी महामरजाद ग्यान की।।
हिन्दी अर्थ देखें
सीता देखकर धीरता भागी — रहे (जो) कहाते परम विरागी। राजा ने जानकी को उर (हृदय) से लगाई — ज्ञान की महामर्यादा मिटी।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Seeing Sita, his composure fled; he who was called the supreme renunciant could not control himself. The king pressed Janaki to his heart; the grand boundary of wisdom crumbled.
Chaupai4 / 5
समुझावत सब सचिव सयाने। कीन्ह बिचारु न अवसर जाने।। बारहिं बार सुता उर लाई। सजि सुंदर पालकीं मगाई।।
हिन्दी अर्थ देखें
सब सयाने (बुद्धिमान) सचिव (मन्त्री) समझाते — अवसर न जाना, विचार नहीं किया। बार-बार सुता (पुत्री) को उर (हृदय) से लगाकर — सुन्दर पालकियाँ सजाकर मँगवाईं।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
All the wise ministers tried to console him, but he heeded no counsel, not recognizing the moment. Again and again he pressed his daughter to his chest. Then beautiful palanquins were sent for.
Doha5 / 5
प्रेमबिबस परिवारु सबु जानि सुलगन नरेस। कुँअरि चढ़ाई पालकिन्ह सुमिरे सिद्धि गनेस।।338।।
हिन्दी अर्थ देखें
प्रेमविवश परिवार सब — सुलग्न (शुभ-मुहूर्त) जानकर नरेश (राजा) ने — कुँवरियों (राजकुमारियों) को पालकियों पर चढ़ाया — सिद्धि-गणेश स्मरण करके।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
The entire family was overwhelmed with love. Knowing it was the auspicious hour, the king placed the princesses in the palanquins, invoking Siddhi and Ganesha.

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