बालकाण्ड
दोहा 339
5 पद
Chaupai1 / 5
बहुबिधि भूप सुता समुझाई। नारिधरमु कुलरीति सिखाई।।
दासीं दास दिए बहुतेरे। सुचि सेवक जे प्रिय सिय केरे।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
बहु विधि भूप (राजा) ने सुताओं (पुत्रियों) को समझाया — नारीधर्म (स्त्री-धर्म), कुलरीति (कुल-परम्परा) सिखाई। दासी-दास बहुत दिए — शुचि (पवित्र) सेवक — जो सीता के प्रिय।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
In many ways, the king counseled his daughters, teaching them the duties of a wife and family customs. He gave them many male and female servants—devoted attendants dear to Sita.
Chaupai2 / 5
सीय चलत ब्याकुल पुरबासी। होहिं सगुन सुभ मंगल रासी।।
भूसुर सचिव समेत समाजा। संग चले पहुँचावन राजा।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
सीता चलते पुरवासी (नगरवासी) व्याकुल — शुभ-मंगल-राशि शगुन (शकुन) होते। भूसुर (ब्राह्मण), सचिव (मन्त्री), समाज समेत — संग चले राजा (जनक) पहुँचाने।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
As Sita departed, the citizens were distraught, yet omens appeared that were auspicious and full of blessings. The Brahmins, ministers, and the entire court accompanied the king to see them off.
Chaupai3 / 5
समय बिलोकि बाजने बाजे। रथ गज बाजि बरातिन्ह साजे।।
दसरथ बिप्र बोलि सब लीन्हे। दान मान परिपूरन कीन्हे।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
समय देखकर बाजने बजे — रथ-गज (हाथी)-बाजि (घोड़े) बारातियों ने सजाए। दशरथ ने सब विप्र (ब्राह्मण) बुलाकर लिए — दान-मान (सम्मान) परिपूर्ण किए।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Seeing the right time, the instruments began to play; the chariots, elephants, and horses of the wedding party were readied. Dasharatha summoned all the Brahmins and fulfilled their wishes with gifts and honors.
Chaupai4 / 5
चरन सरोज धूरि धरि सीसा। मुदित महीपति पाइ असीसा।।
सुमिरि गजाननु कीन्ह पयाना। मंगलमूल सगुन भए नाना।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
चरण-सरोज (चरण-कमल) की धूलि सिर पर धारकर — मुदित (प्रसन्न) महीपति (राजा दशरथ) आशीष पाकर। गजानन (गणेश) स्मरण करके प्रयाण (यात्रा) किया — नाना मंगलमूल शुभ शगुन (शकुन) हुए।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Placing the dust of their lotus feet upon his head, the joyful king received their blessings. Invoking Lord Ganesha, the departure began, and many auspicious omens appeared.
Doha5 / 5
सुर प्रसून बरषहि हरषि करहिं अपछरा गान।
चले अवधपति अवधपुर मुदित बजाइ निसान।।339।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
सुर (देवता) प्रसून (फूल) बरसाते हर्षित — अप्सराएँ गान करतीं। अवधपति (दशरथ) अवधपुर (अयोध्या) मुदित (प्रसन्न) चले — निशान (नगाड़े) बजाते।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
The gods joyfully showered flowers, and celestial nymphs sang. The King of Ayodhya set out for Ayodhya, happily sounding the drums.