बालकाण्ड
दोहा 340
5 पद
Chaupai1 / 5
नृप करि बिनय महाजन फेरे। सादर सकल मागने टेरे।।
भूषन बसन बाजि गज दीन्हे। प्रेम पोषि ठाढ़े सब कीन्हे।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
नृप (जनक) ने विनय करके महाजन (प्रतिष्ठित लोगों) को फेरा (लौटाया)। सादर सकल माँगने (वालों) को बुलाया। भूषण (आभूषण), वसन (वस्त्र), बाजि (घोड़े), गज (हाथी) दिए — प्रेम पोषकर (जताकर) सबको खड़ा (सन्तुष्ट) किया।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
With humble entreaty, the king turned back the dignitaries. He respectfully called all the dependents and gave them ornaments, garments, horses, and elephants, nourishing them with love and making them stand firm.
Chaupai2 / 5
बार बार बिरिदावलि भाषी। फिरे सकल रामहि उर राखी।।
बहुरि बहुरि कोसलपति कहहीं। जनकु प्रेमबस फिरै न चहहीं।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
बार-बार विरिदावली (यशोगाथा) कहकर — सब राम को उर (हृदय) में रखकर फिरे (लौटे)। बार-बार कोसलपति (दशरथ) कहते (लौटने को) — जनक प्रेमवश फिरना (लौटना) नहीं चाहते।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Reciting their titles of honor again and again, they all turned back, treasuring Rama in their hearts. Again and again the King of Kosala urged Janaka to return, but Janaka, overcome with love, would not turn back.
Chaupai3 / 5
पुनि कह भूपति बचन सुहाए। फिरिअ महीस दूरि बड़ि आए।।
राउ बहोरि उतरि भए ठाढ़े। प्रेम प्रबाह बिलोचन बाढ़े।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
फिर भूपति (दशरथ) ने सुहावने वचन कहे — (कहा) लौटें, महीश (राजा)! बहुत दूर आए। राजा (जनक) फिर उतरकर खड़े हुए — प्रेम-प्रवाह (बहाव) — बिलोचन (नेत्रों) में जल बढ़ा।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Then the king spoke pleasant words: "Please return, O great king; you have come a very long distance." Janaka then dismounted and stood still; streams of love overflowed from his eyes.
Chaupai4 / 5
तब बिदेह बोले कर जोरी। बचन सनेह सुधाँ जनु बोरी।।
करौ कवन बिधि बिनय बनाई। महाराज मोहि दीन्हि बड़ाई।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
तब विदेह (जनक) हाथ जोड़कर बोले — वचन स्नेह-सुधा (अमृत) में मानो डुबोए। (कहा) कौन विधि विनय बनाकर करूँ? महाराज ने मुझे बड़ाई (सम्मान) दी।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Then Videha spoke with folded hands, his words drenched in the nectar of affection: "In what way can I compose my humble entreaty? O Great King, you have shown me such honor."
Doha5 / 5
कोसलपति समधी सजन सनमाने सब भाँति।
मिलनि परसपर बिनय अति प्रीति न हृदयँ समाति।।340।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
कोसलपति (दशरथ) ने समधी (ससुर जनक) — सजन (प्रिय) — सब भाँति सम्मान किए। मिलनी (विदाई) — परस्पर अत्यन्त विनय — प्रीति हृदय में समाती नहीं।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
The King of Kosala honored his in-law and dear relative in every way. Their mutual courtesies at parting were so full of love that their hearts could not contain it.