बालकाण्ड
दोहा 358
5 पद
Chaupai1 / 5
नीदउँ बदन सोह सुठि लोना। मनहुँ साँझ सरसीरुह सोना।।
घर घर करहिं जागरन नारीं। देहिं परसपर मंगल गारीं।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
नींद में भी मुख सुठि (अत्यन्त) लोना (सुन्दर) शोभित — मानो साँझ (सन्ध्या) का सरसीरुह (कमल) सोता। घर-घर नारियाँ जागरण करतीं — परस्पर मंगल-गालियाँ (हास्य-गीत) देतीं।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Even in sleep, his face looked supremely lovely, like a lotus at dusk drooping in gentle beauty. In every home, women kept night-vigils, exchanging auspicious humorous songs with one another.
Chaupai2 / 5
पुरी बिराजति राजति रजनी। रानीं कहहिं बिलोकहु सजनी।।
सुंदर बधुन्ह सासु लै सोई। फनिकन्ह जनु सिरमनि उर गोई।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
पुरी (नगरी) विराजती — रजनी (रात) राजती। रानियाँ कहतीं — देखो, सजनी (सखी)! सुन्दर बहुओं को सासुओं ने लेकर सुलाया — मानो फनिकन्या (नागकन्या) ने शिरमणि (मस्तक-मणि) उर (हृदय) में छिपाई।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
The city and the night both shone gloriously. The queens said: "Look, dear friend! The mothers-in-law took the lovely brides and put them to sleep, as a cobra hides its crest-jewel in its hood."
Chaupai3 / 5
प्रात पुनीत काल प्रभु जागे। अरुनचूड़ बर बोलन लागे।।
बंदि मागधन्हि गुनगन गाए। पुरजन द्वार जोहारन आए।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
प्रातः पुनीत (पवित्र) काल — प्रभु जागे। अरुणचूड़ (मुर्गे) श्रेष्ठ बोलने लगे। बन्दी (स्तुतिपाठक)-मागधों ने गुणगण (गुणगान) गाए। पुरजन (नगरवासी) द्वार जोहारने (अभिवादन करने) आए।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
At the pure hour of dawn, the Lord awoke; the fine roosters began to crow. Bards and panegyrists sang his glorious virtues; citizens came to the gate to pay their respects.
Chaupai4 / 5
बंदि बिप्र सुर गुर पितु माता। पाइ असीस मुदित सब भ्राता।।
जननिन्ह सादर बदन निहारे। भूपति संग द्वार पगु धारे।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
विप्र (ब्राह्मण), सुर (देवता), गुर (गुरु), पिता-माता — वन्दन करके। आशीष पाकर सब भ्राता (भाई) मुदित (प्रसन्न)। जननियों (माताओं) ने सादर बदन (मुख) निहारे। भूपति (राजा) संग द्वार पर पग (पैर) रखे।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
After honoring the Brahmins, gods, guru, and parents, all the brothers joyfully received blessings. The mothers lovingly gazed upon their faces, and they went with the king to the palace gate.
Doha5 / 5
कीन्ह सौच सब सहज सुचि सरित पुनीत नहाइ।
प्रातक्रिया करि तात पहिं आए चारिउ भाइ।।358।।
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शौच (स्नानादि) किया — सब सहज शुचि (पवित्र) — सरित (नदी) पुनीत (पवित्र) में नहाकर। प्रातःक्रिया (सुबह की विधि) करके तात (पिता) के पास — चारों भाई आए।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Performing their ablutions in the sacred river with natural purity, and completing their morning devotions, all four brothers came to their father.