बालकाण्ड

दोहा 360

6 पद

Chaupai1 / 6
सुदिन सोधि कल कंकन छौरे। मंगल मोद बिनोद न थोरे।। नित नव सुखु सुर देखि सिहाहीं। अवध जन्म जाचहिं बिधि पाहीं।।
हिन्दी अर्थ देखें
सुदिन (शुभ दिन) शोधकर — कल (सुन्दर) कंकन (चूड़ियाँ) छोरे (उतारे)। मंगल-मोद (आनन्द)-विनोद (खेल) कम नहीं। नित नव (रोज नया) सुख — सुर (देवता) देखकर सिहाते (ईर्ष्या करते)। विधि (ब्रह्मा) से अवध (अयोध्या)-जन्म माँगते।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
On an auspicious day, the wedding bracelets were ceremonially removed—no small festivity and joy. The ever-new happiness made even the gods envious; they prayed to Brahma for birth in Ayodhya.
Chaupai2 / 6
बिस्वामित्रु चलन नित चहहीं। राम सप्रेम बिनय बस रहहीं।। दिन दिन सयगुन भूपति भाऊ। देखि सराह महामुनिराऊ।।
हिन्दी अर्थ देखें
विश्वामित्र नित्य चलना चाहते — राम सप्रेम विनय-वश रखते। दिन-दिन सयगुन (सद्गुण) भूपति (राजा) का भाव — देखकर महामुनिराय (विश्वामित्र) सराहते।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Vishwamitra wished to leave every day, but Rama's loving entreaties kept him there. Day by day, the sage praised the king's growing devotion and excellent conduct.
Chaupai3 / 6
मागत बिदा राउ अनुरागे। सुतन्ह समेत ठाढ़ भे आगे।। नाथ सकल संपदा तुम्हारी। मैं सेवकु समेत सुत नारी।।
हिन्दी अर्थ देखें
(अन्ततः) विदा माँगते — राजा अनुरागे (प्रेममग्न)। सुतों (पुत्रों) समेत आगे खड़े हुए। (कहा) नाथ! सकल सम्पदा आपकी। मैं सेवक — समेत सुत (पुत्र)-नारी (पत्नी)।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
When at last Vishwamitra asked for leave, the loving king stood before him with his sons: "My Lord, all my wealth is yours; I am your servant, together with my sons and queens."
Chaupai4 / 6
करब सदा लरिकनः पर छोहू। दरसन देत रहब मुनि मोहू।। अस कहि राउ सहित सुत रानी। परेउ चरन मुख आव न बानी।।
हिन्दी अर्थ देखें
(दशरथ ने कहा) सदा लरिकन (बच्चों) पर छोह (कृपा) करना। दर्शन देते रहना, मुनि! मुझे। ऐसा कहकर राजा सुत (पुत्र)-रानी सहित — चरणों पर गिरे — मुख से वाणी नहीं आती।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
"Always show your grace to these children; grant me your presence again, O sage." So saying, the king with his sons and queens fell at the sage's feet, unable to speak further.
Chaupai5 / 6
दीन्ह असीस बिप्र बहु भाँती। चले न प्रीति रीति कहि जाती।। रामु सप्रेम संग सब भाई। आयसु पाइ फिरे पहुँचाई।।
हिन्दी अर्थ देखें
विप्र (ब्राह्मण = विश्वामित्र) ने बहु भाँति आशीष दिया — चले — प्रीति-रीति कहा नहीं जाती। राम सप्रेम — सब भाई संग — आज्ञा पाकर — पहुँचाकर लौटे।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
The sage gave many blessings and departed—the parting love cannot be described. Rama with all his brothers lovingly accompanied him and, receiving permission, returned after escorting him.
Doha6 / 6
राम रूपु भूपति भगति ब्याहु उछाहु अनंदु। जात सराहत मनहिं मन मुदित गाधिकुलचंदु।।360।।
हिन्दी अर्थ देखें
राम-रूप, भूपति (राजा)-भक्ति, विवाह-उछाह (उत्सव)-आनन्द — मन ही मन सराहते जाते — मुदित (प्रसन्न) गाधिकुलचन्दु (गाधिवंश-चन्द्रमा विश्वामित्र)।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Reflecting on Rama's beauty, the king's devotion, the wedding festivities, and the bliss, the delighted Moon of Gadhi's dynasty praised them in his heart as he went.

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