अयोध्याकाण्ड

दोहा 102

5 पद

Chaupai1 / 5
उतरि ठाड़ भए सुरसरि रेता। सीयराम गुह लखन समेता।। केवट उतरि दंडवत कीन्हा। प्रभुहि सकुच एहि नहिं कछु दीन्हा।।
हिन्दी अर्थ देखें
उतरकर सुरसरि (गंगा) रेता (रेत) पर खड़े हुए — सीता-राम-गुह-लक्ष्मण समेत। केवट (नाविक) उतरकर दण्डवत किया — प्रभु को संकोच — इसने कुछ नहीं दिया (लिया नहीं)।
रोमन लिप्यंतरण देखें
utari ṭhāḍa bhae surasari retā. sīyarāma guha lakhana sametā. kevaṭa utari daṃḍavata kīnhā. pra
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
They alighted and stood on the sand of the Ganges — Sita, Rama, Guha, and Lakshmana together. The boatman prostrated and the Lord gave him blessings.
Chaupai2 / 5
पिय हिय की सिय जाननिहारी। मनि मुदरी मन मुदित उतारी।। कहेउ कृपाल लेहि उतराई। केवट चरन गहे अकुलाई।।
हिन्दी अर्थ देखें
पिय (पति) हृदय की (बात) सीता जानने वाली — मणि-मुद्री (अँगूठी) मन मुदित (प्रसन्न) उतारी। कृपालु ने कहा — (कहा) उतराई (किराया) ले लो। केवट (नाविक) अकुलाकर (व्याकुल) चरण पकड़े।
रोमन लिप्यंतरण देखें
piya hiya kī siya jānanihārī. mani mudarī mana mudita utārī. kaheu kṛpāla lehi utarāī.
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Sita, who knows her beloved's heart, joyfully removed her gem ring. The gracious Lord said, 'Take your fare.'
Chaupai3 / 5
नाथ आजु मैं काह न पावा। मिटे दोष दुख दारिद दावा।। बहुत काल मैं कीन्हि मजूरी। आजु दीन्ह बिधि बनि भलि भूरी।।
हिन्दी अर्थ देखें
(केवट ने कहा) नाथ! आज मैंने क्या नहीं पाया! मिटे दोष-दुख-दारिद (दरिद्रता)-दावा (दावानल)। बहुत काल मैंने मजूरी (मेहनत) की — आज विधि (भाग्य) ने भली-भूरी (बहुत अच्छी) बनी दी।
रोमन लिप्यंतरण देखें
nātha āju maiṃ kāha na pāvā. miṭe doṣa dukha dārida dāvā. bahuta kāla maiṃ kīnhi majūrī
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'Lord, what have I not received today! My sins, sorrows, poverty, and afflictions are all destroyed. For a long time I have labored.'
Chaupai4 / 5
अब कछु नाथ न चाहिअ मोरें। दीनदयाल अनुग्रह तोरें।। फिरती बार मोहि जे देबा। सो प्रसादु मैं सिर धरि लेबा।।
हिन्दी अर्थ देखें
(केवट ने कहा) अब कुछ नहीं चाहिए मुझे, नाथ! दीनदयालु! आपके अनुग्रह (कृपा) से। लौटते समय जो देंगे — वह प्रसाद सिर पर धरकर लूँगा।
रोमन लिप्यंतरण देखें
aba kachu nātha na cāhia moreṃ. dīnadayāla anugraha toreṃ. phiratī bāra mohi je debā. sa
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'Now I need nothing more, Lord — by the grace of the Compassionate Friend of the lowly. Whatever you give me on the return trip, I shall accept.'
Doha5 / 5
बहुत कीन्ह प्रभु लखन सियँ नहिं कछु केवटु लेइ। बिदा कीन्ह करुनायतन भगति बिमल बरु देइ।।102।।
हिन्दी अर्थ देखें
बहुत दिया प्रभु-लक्ष्मण-सीता ने — कुछ नहीं लेता केवट। विदा किया करुणायतन (करुणा-निवास) ने — विमल (निर्मल) भक्ति श्रेष्ठ वर देकर।
रोमन लिप्यंतरण देखें
bahuta kīnha prabhu lakhana siyaṃ nahiṃ kachu kevaṭu lei. bidā kīnha karunāyatana bhagati bimala
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
The Lord, Lakshmana, and Sita gave much, but the boatman would accept nothing. The Compassionate One bade him farewell, granting him pure devotion.

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