अयोध्याकाण्ड
दोहा 92
5 पद
Chaupai1 / 5
भइ दिनकर कुल बिटप कुठारी। कुमति कीन्ह सब बिस्व दुखारी।।
भयउ बिषादु निषादहि भारी। राम सीय महि सयन निहारी।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
दिनकर (सूर्य)-कुल-बिटप (वृक्ष) की कुठारी (कुल्हाड़ी) हुई। कुमति (दुर्बुद्धि कैकेयी) ने सब विश्व दुखी किया। निषाद को भारी विषाद (दुख) हुआ — राम-सीता मही (पृथ्वी) पर शयन निहारकर।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
bhai dinakara kula biṭapa kuṭhārī. kumati kīnha saba bisva dukhārī.
bhayau biṣādu niṣādahi
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
She became the axe to the tree of the Solar dynasty. Her evil deed made the whole world miserable. The Nishad chief was filled with sorrow.
Chaupai2 / 5
बोले लखन मधुर मृदु बानी। ग्यान बिराग भगति रस सानी।।
काहु न कोउ सुख दुख कर दाता। निज कृत करम भोग सबु भ्राता।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
लक्ष्मण मधुर मृदु (कोमल) वाणी बोले — ज्ञान-वैराग्य-भक्ति-रस सानी (भीगी)। (कहा) काहू (किसी) को कोई सुख-दुख का दाता नहीं। निज कृत (स्वयं किए) कर्म — भोग सब, भ्राता!
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
bole lakhana madhura mṛdu bānī. gyāna birāga bhagati rasa sānī.
kāhu na kou sukha dukha kara da
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Lakshmana spoke in sweet, gentle tones, steeped in the essence of knowledge, dispassion, and devotion: 'No one is the cause of anyone's joy or sorrow.'
Chaupai3 / 5
जोग बियोग भोग भल मंदा। हित अनहित मध्यम भ्रम फंदा।।
जनमु मरनु जहँ लगि जग जालू। संपती बिपति करमु अरु कालू।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
(लक्ष्मण ने कहा) योग-वियोग, भोग — भला-मन्दा (बुरा)। हित (मित्र)-अनहित (शत्रु)-मध्यम (तटस्थ) — भ्रम-फन्दा (माया-जाल)। जन्म-मरण — जहाँ तक जग (संसार) जाल। सम्पत्ति-विपत्ति, कर्म और काल।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
joga biyoga bhoga bhala maṃdā. hita anahita madhyama bhrama phaṃdā.
janamu maranu jahaṃ lagi jaga jāla
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Union and separation, good and bad fortune, friend, foe, and the neutral — all are snares of delusion. Birth, death, and all the world's affairs.
Chaupai4 / 5
धरनि धामु धनु पुर परिवारू। सरगु नरकु जहँ लगि ब्यवहारू।।
देखिअ सुनिअ गुनिअ मन माहीं। मोह मूल परमारथु नाहीं।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
(लक्ष्मण ने कहा) धरनी (पृथ्वी), धाम (घर), धन, पुर (नगर), परिवार। स्वर्ग, नरक — जहाँ तक व्यवहार। देखिए-सुनिए-गुनिए (विचारिए) मन में — मोह-मूल (माया-जनित) — परमार्थ (सत्य) नहीं।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
dharani dhāmu dhanu pura parivārū. saragu naraku jahaṃ lagi byavahārū.
dekhia sunia gunia ma
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Earth, home, wealth, city, and family — heaven, hell, and all worldly dealings. All that is seen, heard, thought, and spoken of in the mind.
Doha5 / 5
सपनें होइ भिखारि नृप रंकु नाकपति होइ।
जागें लाभु न हानि कछु तिमि प्रपंच जियँ जोइ।।92।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
(लक्ष्मण ने कहा) सपने में राजा भिखारी होता — रंक (दरिद्र) नाकपति (इन्द्र) होता। जागने पर न लाभ, न हानि — वैसे ही प्रपंच (संसार) जी (मन) में देखो।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
sapaneṃ hoi bhikhāri nṛpa raṃku nākapati hoi.
jāgeṃ lābhu na hāni kachu timi prapaṃca jiyu
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
In a dream, a king becomes a beggar and a pauper becomes the lord of heaven. Upon waking, there is neither gain nor loss — thus know the world's illusion.