बालकाण्ड

दोहा 279

5 पद

Chaupai1 / 5
अति बिनीत मृदु सीतल बानी। बोले रामु जोरि जुग पानी।। सुनहु नाथ तुम्ह सहज सुजाना। बालक बचनु करिअ नहिं काना।।
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अत्यन्त विनीत (विनम्र), मृदु (कोमल), शीतल वाणी — दोनों हाथ जोड़कर राम बोले। (कहा) सुनो, नाथ! आप सहज सुजान (बुद्धिमान)। बालक-वचन — कान (ध्यान) नहीं देना चाहिए।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
With utmost humility and cool, gentle words, Rama spoke with folded hands, 'Listen, lord — you are naturally wise. A child's words should not be taken to heart.'
Chaupai2 / 5
बररै बालक एकु सुभाऊ। इन्हहि न संत बिदूषहिं काऊ।। तेहिं नाहीं कछु काज बिगारा। अपराधी में नाथ तुम्हारा।।
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(श्रीराम ने कहा) सब बालकों का एक स्वभाव — बरराना (प्रलापना)। इन्हें सन्त कभी नहीं दूषते (दोष देते)। इन्होंने कुछ काज (काम) नहीं बिगाड़ा — अपराधी मैं हूँ, नाथ! आपका।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'It is the one nature of all children to prattle thus; even saints never take offense at them. He has done no real harm; I, my lord, am the offender before you.'
Chaupai3 / 5
कृपा कोपु बधु बँधब गोसाईं। मो पर करिअ दास की नाई।। कहिअ बेगि जेहि बिधि रिस जाई। मुनिनायक सोइ करौं उपाई।।
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(श्रीराम ने कहा) कृपा, कोप, वध (मार डालना), बँधब (बाँधना) — गोसाईं! मुझ पर दास की भाँति करो। कहो शीघ्र — जिस विधि रिस (क्रोध) जाए — मुनिनायक! वही उपाय करूँ।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'Grace or anger, death or bondage, my master — deal with me as you would with a slave. Tell me quickly how your anger may be appeased, O chief of sages, and I shall do accordingly.'
Chaupai4 / 5
कह मुनि राम जाइ रिस कैसें। अजहुँ अनुज तव चितव अनैसें।। एहि के कंठ कुठारु न दीन्हा। तौ मैं काह कोपु करि कीन्हा।।
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मुनि ने कहा — राम! रिस (क्रोध) कैसे जाए? अभी भी तुम्हारा अनुज ऐसे (विद्रोहपूर्वक) देखता। इसके कण्ठ पर कुठार (फरसा) नहीं दिया — तो मैंने कोप करके क्या किया?
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
The sage said, 'Rama, how can my anger be appeased? Even now your brother glares at me defiantly. Unless I put my axe to his throat, what meaning has my wrath?'
Doha5 / 5
गर्भ स्त्रवहिं अवनिप रवनि सुनि कुठार गति घोर। परसु अछत देखउँ जिअत बैरी भूपकिसोर।।279।।
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(परशुराम ने कहा) गर्भ स्रवित (गिरते) होते — अवनिप (राजाओं) की रवनि (स्त्रियाँ) — मेरे कुठार (फरसे) की घोर गति सुनकर। परसु (फरसा) विद्यमान (मौजूद) रहते — जीवित देखता हूँ — बैरी (शत्रु) भूपकिशोर (राजकुमार)!
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
'The very mention of my axe's terrible power causes pregnant queens to miscarry, and yet this princeling stands alive before me, with the axe right here!'

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