बालकाण्ड
दोहा 329
5 पद
Chaupai1 / 5
पंच कवल करि जेवन लअगे। गारि गान सुनि अति अनुरागे।।
भाँति अनेक परे पकवाने। सुधा सरिस नहिं जाहिं बखाने।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
पंच-कवल (पाँच ग्रास) करके भोजन शुरू किया — गारी-गान (हास्य-गीत) सुनकर अत्यन्त प्रेममग्न। भाँति-अनेक पकवान परोसे — सुधा (अमृत)-सरिस (समान) — वर्णन नहीं हो सकता।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Taking the first five morsels as ritual offering, the feast began. They listened to the traditional humorous wedding songs with great delight. Many types of delicacies were served, sweet as nectar, beyond description.
Chaupai2 / 5
परुसन लगे सुआर सुजाना। बिंजन बिबिध नाम को जाना।।
चारि भाँति भोजन बिधि गाई। एक एक बिधि बरनि न जाई।।
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सुजान (बुद्धिमान) सुआर (रसोइये) परोसने लगे — विविध व्यंजन — नाम कौन जाने? चार भाँति (प्रकार) भोजन — विधि (शास्त्र) ने गाई — एक-एक विधि वर्णन नहीं जाती।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Expert servers began serving. The various side-dishes—who can name them all? There are four categories of food described in scripture, and each category is impossible to describe fully.
Chaupai3 / 5
छरस रुचिर बिंजन बहु जाती। एक एक रस अगनित भाँती।।
जेवँत देहिं मधुर धुनि गारी। लै लै नाम पुरुष अरु नारी।।
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छह रस (स्वाद) — रुचिर (स्वादिष्ट) व्यंजन बहुत जाति (प्रकार)। एक-एक रस — अगणित भाँति। जेवते (भोजन करते) — मधुर ध्वनि में गालियाँ (हास्य-गीत) देतीं — नाम ले-लेकर पुरुष और नारी के।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Delicious dishes of six flavors in many varieties, each flavor prepared in countless ways. While they ate, women sang sweet, humorous wedding songs, taking the names of men and women.
Chaupai4 / 5
समय सुहावनि गारि बिराजा। हँसत राउ सुनि सहित समाजा।।
एहि बिधि सबहीं भौजनु कीन्हा। आदर सहित आचमनु दीन्हा।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
समय-सुहावनी गालियाँ (हास्य-गीत) विराजतीं — हँसते राजा — समाज सहित सुनकर। इस प्रकार सबने भोजन किया — आदर सहित आचमन (कुल्ला) दिया।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
The timely humorous songs added charm; the king laughed hearing them, along with the whole company. In this way, everyone finished their meal, and water for rinsing was respectfully offered.
Doha5 / 5
देइ पान पूजे जनक दसरथु सहित समाज।
जनवासेहि गवने मुदित सकल भूप सिरताज।।329।।
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पान देकर — जनक ने दशरथ को समाज सहित पूजा। सकल भूप-सिरताज (राजाओं में श्रेष्ठ) — मुदित (प्रसन्न) जनवास गए।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Offering betel and worshipping them, Janaka honored Dasharatha and his entire company. The supreme king of kings then returned happily to the guest quarters.