बालकाण्ड
दोहा 350
6 पद
Chaupai1 / 6
चारि सिंघासन सहज सुहाए। जनु मनोज निज हाथ बनाए।।
तिन्ह पर कुअँरि कुअँर बैठारे। सादर पाय पुनित पखारे।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
चार सिंहासन — सहज सुहावने — मानो मनोज (कामदेव) ने निज हाथ बनाए। उन पर कुँवरी (बहुओं)-कुँवर (राजकुमारों) को बैठाया — सादर पुनीत (पवित्र) पाँव (पैर) पखारे (धोए)।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Four naturally beautiful thrones, as if fashioned by Kamadeva's own hands, were there. The princes and princesses were seated upon them, and their sacred feet were reverently washed.
Chaupai2 / 6
धूप दीप नैबेद बेद बिधि। पूजे बर दुलहिनि मंगलनिधि।।
बारहिं बार आरती करहीं। ब्यजन चारु चामर सिर ढरहीं।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
धूप, दीप, नैवेद्य (भोग) — वेद-विधि से — श्रेष्ठ दूल्हा-दुल्हन — मंगलनिधि (शुभता-भण्डार) — पूजे। बार-बार आरती करतीं — सुन्दर ब्यजन (पंखा)-चामर (चँवर) सिर पर ढलते।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Incense, lamps, and offerings were presented as prescribed by the Vedas; the auspicious groom and bride, treasuries of blessings, were worshipped. Arati was performed again and again; beautiful fans and whisks were waved over their heads.
Chaupai3 / 6
बस्तु अनेक निछावर होहीं। भरीं प्रमोद मातु सब सोहीं।।
पावा परम तत्व जनु जोगीं। अमृत लहेउ जनु संतत रोगीं।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
अनेक वस्तुएँ निछावर (न्योछावर) होतीं — प्रमोद (आनन्द) भरी सब माताएँ शोभित। मानो योगी ने परम तत्त्व पाया — मानो सन्तत (सदा) रोगी ने अमृत पाया।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Many articles were waved as offerings; all the mothers shone, filled with delight. It was as if a yogi had found the supreme truth, or one perpetually ill had found the nectar of immortality.
Chaupai4 / 6
जनम रंक जनु पारस पावा। अंधहि लोचन लाभु सुहावा।।
मूक बदन जनु सारद छाई। मानहुँ समर सूर जय पाई।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
मानो जन्म-रंक (जन्म से गरीब) ने पारस (पत्थर) पाया — अन्धे को लोचन (नेत्र)-लाभ सुहावना। मूक (गूँगे) बदन (मुख) पर मानो शारदा (सरस्वती) छाई। मानो समर (युद्ध) में शूर (वीर) ने जय पाई।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
As if one born a pauper had found the philosopher's stone, or a blind person had regained the gift of sight. As if Saraswati had graced a mute person's tongue, or a warrior had won victory in battle.
Doha5 / 6
एहि सुख ते सत कोटि गुन पावहिं मातु अनंदु।।
भाइन्ह सहित बिआहि घर आए रघुकुलचंदु।।350(क)।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
इस सुख से सत (सौ) कोटि (करोड़) गुना — माताएँ आनन्द पातीं। भाइयों सहित ब्याहकर घर आए — रघुकुलचन्दु (रघुवंश-चन्द्रमा)। लोक-रीति जननी (माताएँ) करतीं — वर-दुलहिनी सकुचातीं। मोद-विनोद (आनन्द-खेल) देखकर — बड़ — राम मन में मुस्कुराते।
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
A hundred million times greater than such joys was the mothers' bliss. With his brothers, having married, the Moon of the Raghu dynasty had come home. The mothers performed the customary rites; the brides shyly submitted. Seeing the great joy and merriment, Rama smiled within his heart.
Doha6 / 6
लोक रीत जननी करहिं बर दुलहिनि सकुचाहिं।
मोदु बिनोदु बिलोकि बड़ रामु मनहिं मुसकाहिं।।350(ख)।।