उत्तरकाण्ड
दोहा 101
5 पद
Chhand1 / 5
बहु दाम सँवारहिं धाम जती। बिषया हरि लीन्हि न रहि बिरती।।
तपसी धनवंत दरिद्र गृही। कलि कौतुक तात न जात कही।।
कुलवंति निकारहिं नारि सती। गृह आनिहिं चेरी निबेरि गती।।
सुत मानहिं मातु पिता तब लौं। अबलानन दीख नहीं जब लौं।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
बहुत धन खर्च करके धाम (आश्रम) सँवारते यती (सन्न्यासी)। विषयों ने वैराग्य हर लिया। तपस्वी धनवान — दरिद्र (ज्ञान-हीन)।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
bahu dāma saṃvārahiṃ dhāma jatī. biṣayā hari līnhi na rahi biratī.
tapasī dhanavanta dara
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Ascetics spend lavishly decorating their dwellings; the spirit of renunciation has been robbed by sensual pleasures. Hermits have become wealthy, the wise impoverished.
Chhand2 / 5
ससुरारि पिआरि लगी जब तें। रिपरूप कुटुंब भए तब तें।।
नृप पाप परायन धर्म नहीं। करि दंड बिडंब प्रजा नितहीं।।
धनवंत कुलीन मलीन अपी। द्विज चिन्ह जनेउ उघार तपी।।
नहिं मान पुरान न बेदहि जो। हरि सेवक संत सही कलि सो।।
Chhand3 / 5
कबि बृंद उदार दुनी न सुनी। गुन दूषक ब्रात न कोपि गुनी।।
कलि बारहिं बार दुकाल परै। बिनु अन्न दुखी सब लोग मरै।।
Doha4 / 5
सुनु खगेस कलि कपट हठ दंभ द्वेष पाषंड।
मान मोह मारादि मद ब्यापि रहे ब्रह्मंड।।101(क)।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
(काकभुशुण्डि ने कहा) सुनो खगेश! कलियुग — कपट, हठ, दम्भ, द्वेष, पाखण्ड। मान, मोह, मद — सारे ब्रह्माण्ड में व्याप्त।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
sunu khagesa kali kapaṭa haṭha dambha dveṣa pāṣaṇḍa.
māna moha mārādi mada byāpi rahe bra
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Hear, O king of birds — Kali Yuga is full of deceit, obstinacy, hypocrisy, malice, and heresy. Pride, delusion, death, and intoxication pervade the entire universe.
Doha5 / 5
तामस धर्म करहिं नर जप तप ब्रत मख दान।
देव न बरषहिं धरनीं बए न जामहिं धान।।101(ख)।।