उत्तरकाण्ड

दोहा 102

5 पद

Chhand1 / 5
अबला कच भूषन भूरि छुधा। धनहीन दुखी ममता बहुधा।। सुख चाहहिं मूढ़ न धर्म रता। मति थोरि कठोरि न कोमलता।।1।। नर पीड़ित रोग न भोग कहीं। अभिमान बिरोध अकारनहीं।। लघु जीवन संबतु पंच दसा। कलपांत न नास गुमानु असा।।2।।
हिन्दी अर्थ देखें
स्त्रियाँ — सुन्दर केश-आभूषण, पर सदा भूखी। धनहीन — दुखी, अनेक प्रकार की ममता। मूढ़ सुख चाहते — पर धर्म (नहीं करते)।
रोमन लिप्यंतरण देखें
abalā kaca bhūṣana bhūri chudhā. dhanahīna dukhī mamatā bahudhā. sukha cāhahiṃ mūḍha na dharma
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Women have fine hair and ornaments but are always hungry. The poor are miserable, with attachment in many forms. Fools desire happiness but do not follow dharma.
Chhand2 / 5
कलिकाल बिहाल किए मनुजा। नहिं मानत क्वौ अनुजा तनुजा। नहिं तोष बिचार न सीतलता। सब जाति कुजाति भए मगता।।3।। इरिषा परुषाच्छर लोलुपता। भरि पूरि रही समता बिगता।। सब लोग बियोग बिसोक हुए। बरनाश्रम धर्म अचार गए।।4।।
Chhand3 / 5
दम दान दया नहिं जानपनी। जड़ता परबंचनताति घनी।। तनु पोषक नारि नरा सगरे। परनिंदक जे जग मो बगरे।।5।।
Doha4 / 5
सुनु ब्यालारि काल कलि मल अवगुन आगार। गुनउँ बहुत कलिजुग कर बिनु प्रयास निस्तार।।102(क)।।
हिन्दी अर्थ देखें
(काकभुशुण्डि ने कहा) सुनो व्यालारि (गरुड़)! कलियुग — मल, अवगुण का आगार (भण्डार)। पर इसमें बहुत गुण भी — बिना प्रयास।
रोमन लिप्यंतरण देखें
sunu byālāri kāla kali mala avaguna āgāra. gunaūṃ bahuta kalijuga kara binu prayāsa
अंग्रेज़ी अनुवाद देखें
Hear, O enemy of serpents — the Kali Yuga is a storehouse of sin and vice. Yet it has one great virtue that comes without effort.
Doha5 / 5
कृतजुग त्रेता द्वापर पूजा मख अरु जोग। जो गति होइ सो कलि हरि नाम ते पावहिं लोग।।102(ख)।।

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