उत्तरकाण्ड
दोहा 19
8 पद
Chaupai1 / 8
भरत अनुज सौमित्र समेता। पठवन चले भगत कृत चेता।।
अंगद हृदयँ प्रेम नहिं थोरा। फिरि फिरि चितव राम कीं ओरा।।
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भरत, अनुज (शत्रुघ्न) और लक्ष्मण समेत — (वानरों को) विदा करने चले। भक्तों पर चित्त लगाए। अंगद के हृदय में प्रेम — (छोड़ना) नहीं।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
bharata anuja saumitra sametā. paṭhāvana cale bhagata kṛta cetā.
aṅgada hṛdayaṃ pra
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Bharata with his brother and Lakshmana went to see them off, the Lord having His mind fixed on His devotees. Angad's heart was filled with love.
Chaupai2 / 8
बार बार कर दंड प्रनामा। मन अस रहन कहहिं मोहि रामा।।
राम बिलोकनि बोलनि चलनी। सुमिरि सुमिरि सोचत हँसि मिलनी।।
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(अंगद) बार-बार दण्डवत प्रणाम करता। मन में (सोचता) — श्रीराम कहें कि रहो। श्रीराम का देखना, बोलना —
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
bāra bāra kara daṇḍa pranāmā. mana asa rahana kahahiṃ mohi rāmā.
rāma bilo
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Again and again he prostrated himself, thinking, 'Let Rama tell me to stay.' Rama saw his desire.
Chaupai3 / 8
प्रभु रुख देखि बिनय बहु भाषी। चलेउ हृदयँ पद पंकज राखी।।
अति आदर सब कपि पहुँचाए। भाइन्ह सहित भरत पुनि आए।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
प्रभु का रुख देखकर बहुत विनती कही। हृदय में चरण-कमल रखकर चला। अत्यन्त आदर से सब वानरों को विदा किया।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
prabhu rukha dekhi binaya bahu bhāṣī. caleu hṛdayaṃ pada paṅkaja rākhī.
ati
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Seeing the Lord's intent, he spoke many humble words and departed, holding the lotus feet in his heart. With great difficulty he left, turning back again and again.
Chaupai4 / 8
तब सुग्रीव चरन गहि नाना। भाँति बिनय कीन्हे हनुमाना।।
दिन दस करि रघुपति पद सेवा। पुनि तव चरन देखिहउँ देवा।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
तब सुग्रीव ने चरण पकड़े — हनुमानजी ने अनेक प्रकार की विनती की। (सुग्रीव ने कहा) दस दिन रहकर श्रीरघुपति (की सेवा करूँ)।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
taba sugrīva carana gahi nānā. bhāṃti binaya kīnhe hanumānā.
dina dasa
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Then Sugriva clasped the Lord's feet, and Hanuman made many entreaties in various ways. 'Stay ten more days, dear friend.'
Chaupai5 / 8
पुन्य पुंज तुम्ह पवनकुमारा। सेवहु जाइ कृपा आगारा।।
अस कहि कपि सब चले तुरंता। अंगद कहइ सुनहु हनुमंता।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
(सुग्रीव ने हनुमानजी से कहा) तुम पुण्यपुंज हो, हे पवनकुमार! जाकर कृपा के आगार (श्रीराम) की सेवा करो। ऐसा कहकर सब वानरों को गले लगाया।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
punya puṃja tumha pavanakumārā. sevahu jāi kṛpā āgārā.
asa kahi kapa
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
'You are a treasury of merit, O son of the Wind. Go and serve the abode of mercy.' So saying, the Lord embraced the monkey chief.
Doha6 / 8
कहेहु दंडवत प्रभु सैं तुम्हहि कहउँ कर जोरि।
बार बार रघुनायकहि सुरति कराएहु मोरि।।19(क)।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
(सुग्रीव ने हनुमानजी से कहा) प्रभु से मेरा दण्डवत कहना। तुम्हें हाथ जोड़कर कहता हूँ — बार-बार श्रीरघुनायक का स्मरण करना।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
kahehu daṇḍavata prabhu saiṃ tumhahi kahauṃ kara jori.
bāra bāra raghunāyakaha
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
'Offer my prostrations to the Lord. I tell you with folded hands — remember Raghunayak again and again.'
Doha7 / 8
अस कहि चलेउ बालिसुत फिरि आयउ हनुमंत।
तासु प्रीति प्रभु सन कहि मगन भए भगवंत।।!9(ख)।।
Doha8 / 8
कुलिसहु चाहि कठोर अति कोमल कुसुमहु चाहि।
चित्त खगेस राम कर समुझि परइ कहु काहि।।19(ग)।।