उत्तरकाण्ड
दोहा 20
5 पद
Chaupai1 / 5
पुनि कृपाल लियो बोलि निषादा। दीन्हे भूषन बसन प्रसादा।।
जाहु भवन मम सुमिरन करेहू। मन क्रम बचन धर्म अनुसरेहू।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
फिर कृपालु ने निषादराज (गुह) को बुलाया। आभूषण, वस्त्र और प्रसाद दिए। (श्रीराम ने कहा) घर जाओ — मेरा स्मरण करना।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
puni kṛpāla liyo boli niṣādā. dīnhe bhūṣana basana prasādā.
jāhu
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Then the merciful Lord called the Nishad chief and gave him ornaments, garments, and blessings. 'Go home, dear friend.'
Chaupai2 / 5
तुम्ह मम सखा भरत सम भ्राता। सदा रहेहु पुर आवत जाता।।
बचन सुनत उपजा सुख भारी। परेउ चरन भरि लोचन बारी।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
(श्रीराम ने कहा) तुम मेरे सखा — भरत-समान भाई। सदा नगर में आते-जाते रहना। वचन सुनकर सुख उमड़ा।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
tumha mama sakhā bharata sama bhrātā. sadā rahehu pura āvata jātā.
bacana suna
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
'You are My friend, a brother like Bharata. Always come and go freely to the city.' Hearing these words, the Nishad chief was overwhelmed with emotion.
Chaupai3 / 5
चरन नलिन उर धरि गृह आवा। प्रभु सुभाउ परिजनन्हि सुनावा।।
रघुपति चरित देखि पुरबासी। पुनि पुनि कहहिं धन्य सुखरासी।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
चरण-कमल हृदय में धारण करके घर आया। प्रभु का स्वभाव परिजनों को सुनाया। श्रीरघुपति का चरित्र देखकर —
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
carana nalina ura dhari gṛha āvā. prabhu subhāu parijanahi sunāvā.
raghu
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Holding the lotus feet in his heart, he went home and told his family of the Lord's gracious nature.
Chaupai4 / 5
राम राज बैंठें त्रेलोका। हरषित भए गए सब सोका।।
बयरु न कर काहू सन कोई। राम प्रताप बिषमता खोई।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
श्रीराम के राज्य में बैठते ही तीनों लोक हर्षित हुए — सब शोक चले गए। किसी से किसी का वैर नहीं।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
rāma rāja baiṃṭheṃ trailokā. haraṣita bhae gae saba sokā.
bayaru na kara ka
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
When Rama ascended the throne, all the three worlds rejoiced and all sorrows vanished. Enmity ceased everywhere.
Doha5 / 5
बरनाश्रम निज निज धरम बनिरत बेद पथ लोग।
चलहिं सदा पावहिं सुखहि नहिं भय सोक न रोग।।20।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
वर्णाश्रम (के लोग) अपने-अपने धर्म में — वेद-मार्ग पर निरत (लगे)। सदा चलते — सुख पाते — न भय, न रोग, न शोक।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
barnāśrama nija nija dharama banirata beda patha loga.
calahiṃ sadā pāvahiṃ sukhaha
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
People of all classes and stages of life followed their own dharma, devoted to the Vedic path. They always walked the righteous way and attained happiness without grief.