उत्तरकाण्ड
दोहा 65
5 पद
Chaupai1 / 5
बहुरि राम अभिषेक प्रसंगा। पुनि नृप बचन राज रस भंगा।।
पुरबासिन्ह कर बिरह बिषादा। कहेसि राम लछिमन संबादा।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
(काकभुशुण्डि ने) फिर श्रीराम-अभिषेक प्रसंग। फिर राजा (दशरथ) के वचन — राज-रस-भंग। नगरवासियों का विरह (दुख)।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
bahuri rāma abhiṣeka prasaṅgā. puni nṛpa bacana rāja rasa bhaṅgā.
purabāsinha kara bira
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Then the topic of Rama's coronation, followed by the king's words that shattered the joy of the kingdom. He described the grief of the citizens.
Chaupai2 / 5
बिपिन गवन केवट अनुरागा। सुरसरि उतरि निवास प्रयागा।।
बालमीक प्रभु मिलन बखाना। चित्रकूट जिमि बसे भगवाना।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
(काकभुशुण्डि ने कहा) वन-गमन, केवट का अनुराग। गंगा पार करके प्रयाग में निवास। वाल्मीकि से प्रभु का मिलन।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
bipina gavana kevaṭa anurāgā. surasari utari nivāsa prayāgā.
bālamīka prabhu milana
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
The forest journey, Kevat's devotion, crossing the Ganges, staying at Prayag. The meeting with sage Valmiki.
Chaupai3 / 5
सचिवागवन नगर नृप मरना। भरतागवन प्रेम बहु बरना।।
करि नृप क्रिया संग पुरबासी। भरत गए जहँ प्रभु सुख रासी।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
(काकभुशुण्डि ने कहा) मन्त्री (सुमन्त्र) का आगमन, नगर में राजा (दशरथ) की मृत्यु। भरत का आगमन — बहुत प्रेम वर्णन किया। राजा की अन्त्येष्टि — नगरवासियों सहित।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
sacivāgavana nagara nṛpa maranā. bharatāgavana prema bahu baranā.
kari nṛpa kriyā saṅga pura
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
The arrival of ministers, the king's death in the city, Bharata's coming — he described with much love. The performance of the king's last rites with the citizens.
Chaupai4 / 5
पुनि रघुपति बहु बिधि समुझाए। लै पादुका अवधपुर आए।।
भरत रहनि सुरपति सुत करनी। प्रभु अरु अत्रि भेंट पुनि बरनी।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
(काकभुशुण्डि ने कहा) फिर श्रीरघुपति ने बहुत प्रकार से (भरत को) समझाया। पादुकाएँ लेकर अवधपुर आए। भरत का (नन्दिग्राम में) रहना। इन्द्रपुत्र (जयन्त) का प्रसंग।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
puni raghupati bahu bidhi samujhāe. lai pādukā avadhapura āe.
bharata rahani surapati suta
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
Then Raghupati consoled Bharata in many ways. Taking the sandals, they returned to Ayodhya. Bharata's stay and Indra's son's episode were narrated.
Doha5 / 5
कहि बिराध बध जेहि बिधि देह तजी सरभंग।।
बरनि सुतीछन प्रीति पुनि प्रभु अगस्ति सतसंग।।65।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
(काकभुशुण्डि ने) विराध-वध बताया — किस प्रकार शरभंग ने देह त्यागी। सुतीक्ष्ण की प्रीति वर्णन करके — फिर प्रभु और अगस्त्य (का मिलन)।
रोमन लिप्यंतरण देखेंरोमन लिप्यंतरण
kahi birādha badha jehi bidhi deha tajī sarabhaṅga.
barani sutīchana prīti puni prabhu a
अंग्रेज़ी अनुवाद देखेंअंग्रेज़ी अनुवाद
He told of the slaying of Viradha and how Sharabhanga shed his body. Then he described Sutikshna's love and the Lord's visit to sage Agastya.