Kishkindha Kanda

Sarga 15: Tara suspects Sugriva's intention -- advises Vali to make alliance with Rama -- obstructs Vali from going for war

किष्किन्धाकाण्डम् · सर्ग 15

30 shlokas

ShlokaShloka 1
अथ तस्य निनादं तं सुग्रीवस्य महात्मनः। शुश्रावान्तः पुर गतो वाली भ्रातुरमर्षणः4.15.1।।
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उस समय अमर्षशील वाली अपने अन्तःपुर में था। उसने अपने भाई महामना सुग्रीव का वह सिंहनाद वहीं से सुना
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The indignant Vali, who was in the harem, heard the roaring of his venerable brother, Sugriva.
ShlokaShloka 2
श्रुत्वा तु तस्य निनदं सर्वभूतप्रकम्पनम्। मदश्चैकपदे नष्टः क्रोधश्चापतितो महान्4.15.2।।
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समस्त प्राणियों को कम्पित कर देने वाली उनकी वह गर्जना सुनकर उसका सारा मद सहसा उतर गया और उसे महान् क्रोध उत्पन्न हुआ
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The roar (of Sugriva) that frightened all beings gave Vali's vanity a jolt and at once aroused in him violent rage.
ShlokaShloka 3
स तु रोषपरीताङ्गो वाली सन्ध्याकनकप्रभः। उपरक्त इवादित्यस्सद्यो निष्प्रभतां गतः4.15.3।।
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फिर तो सुवर्ण के समान पीले रंग वाले वाली का सारा शरीर क्रोध से तमतमा उठा। वह राहुग्रस्त सूर्य के समान तत्काल श्रीहीन दिखायी देने लगा
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Overcome with anger, Vali looked pale like the eclipsed Sun with the golden radiance faded from his face.
ShlokaShloka 4
वाली दंष्ट्राकरालस्तु क्रोधाद्दीप्ताग्निसन्निभः। भात्युत्पतितपद्मस्तु समृणाळ इव ह्रदः4.15.4।।
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वह दुःसह शब्द सुनकर वाली अपने पैरों की धमक से पृथ्वी को विदीर्ण-सी करता हुआ बड़े वेग से निकला
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Vali, who looked fierce with his teeth and whose eyes shone like a flaming fire through anger looked like a pond with the lotuses and their stalks uprooted.
ShlokaShloka 5
शब्दं दुर्मर्षणं श्रुत्वा निष्पपात ततो हरिः। वेगेन चरणन्यासैर्दारयन्निव मेदिनीम्4.15.5।।
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वह दुःसह शब्द सुनकर वाली अपने पैरों की धमक से पृथ्वी को विदीर्ण-सी करता हुआ बड़े वेग से निकला
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Unable to tolerate Sugriva's roar, Vali stepped out hurriedly, taking long strides as if breaking the earth.
ShlokaShloka 6
तं तु तारा परिष्वज्य स्नेहाद्दर्शितसौहृदाः। उवाच त्रस्तसम्भ्रान्ता हितोदर्कमिदं वचः4.15.6।।
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उस समय वाली की पत्नी तारा भयभीत हो घबरा उठी। उसने वाली को अपनी दोनों भुजाओं में भर लिया और स्नेह से सौहार्द का परिचय देते हुए परिणाम में हित करने वाली यह बात कही-
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Tara, perplexed out of fear, glanced at Vali lovingly, embraced him and gave him wise counsel:
ShlokaShloka 7
साधु क्रोधमिमं वीर नदीवेगमिवागतम्। शयनादुत्थितः काल्यं त्यज भुक्तामिव स्रजम्4.15.7।।
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'O valiant Vali anger has overtaken you like the flood of a river. It is natural for you to be angry at this time, but shake off your anger just as the wise discard a flower garland already used up.
ShlokaShloka 8
काल्यमेतेन सङ्ग्रामं करिष्यसि च वानर। वीर ते शत्रुबाहुल्यं फल्गुता वा न विद्यते4.15.8।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘वानरवीर! कल प्रातःकाल सुग्रीव के साथ युद्ध कीजियेगा (इस समय रुक जाइये) यद्यपि युद्ध में कोई शत्रु आपसे बढ़कर नहीं है और आप किसी से छोटे नहीं हैं। तथापि इस समय सहसा आपका घर से बाहर निकलना मुझे अच्छा नहीं लगता है, आपको रोकने का एक विशेष कारण भी है। उसे बताती हूँ, सुनिये
Show English Translation
'O monkey fight him only tomorrow morning. By this you are not going to prove your weakness or increase your respect for the enemy.
ShlokaShloka 9
सहसा तव निष्क्रामो मम तावन्न रोचते। श्रूयतां चाभिधास्यामि यन्निमित्तं निवार्यसे4.15.9।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘वानरवीर! कल प्रातःकाल सुग्रीव के साथ युद्ध कीजियेगा (इस समय रुक जाइये) यद्यपि युद्ध में कोई शत्रु आपसे बढ़कर नहीं है और आप किसी से छोटे नहीं हैं। तथापि इस समय सहसा आपका घर से बाहर निकलना मुझे अच्छा नहीं लगता है, आपको रोकने का एक विशेष कारण भी है। उसे बताती हूँ, सुनिये
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'I do not like your rashness. I will explain the reason I am preventing you. Listen:
ShlokaShloka 10
पूर्वमापतितः क्रोधात्स त्वामाह्वयते युधि। निष्पत्य च निरस्तस्ते हन्यमानो दिशो गतः4.15.10।।
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‘सुग्रीव पहले भी यहाँ आये थे और क्रोधपूर्वक उन्होंने आपको युद्ध के लिये ललकारा था। उस समय आपने नगर से निकलकर उन्हें परास्त किया और वे आपकी मार खाकर सम्पूर्ण दिशाओं की ओर भागते हुए मतङ्ग वन में चले गये थे
Show English Translation
'Earlier, he (Sugriva) came and challenged you to a duel. You struck him in anger, and defeated, he fled, running in all directions. Now his challenge rouses my suspicion.
ShlokaShloka 11
त्वया तस्य निरस्तस्य पीडितस्य विशेषतः। इहैत्य पुनराह्वानं शङ्कां जनयतीव मे4.15.11।।
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‘इस प्रकार आपके द्वारा पराजित और विशेष पीड़ित होने पर भी वे पुनः यहाँ आकर आपको युद्ध के लिये ललकार रहे हैं। उनका यह पुनरागमन मेरे मन में शङ्का-सी उत्पन्न कर रहा है
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'One who is defeated and badly mauled by you is again coming and inviting you to a duel in this manner arouses suspicion in me.
ShlokaShloka 12
दर्पश्च व्यवसायश्च यादृशस्तस्य नर्दतः। निनादश्चापि संरम्भो नैतदल्पं हि कारणम्4.15.12।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘इस समय गर्जते हुए सुग्रीव का दर्प और उद्योग जैसा दिखायी देता है तथा उनकी गर्जना में जो उत्तेजना जान पड़ती है, इसका कोई छोटा-मोटा कारण नहीं होना चाहिये
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'His determination, his insolence, his roaring, his arroganceall this cannot be for a small reason.
ShlokaShloka 13
नासहायमहं मन्ये सुग्रीवं तमिहागतम्। अवष्टब्धसहायश्च यमाश्रित्यैष गर्जति4.15.13।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘मैं समझती हूँ सुग्रीव किसी प्रबल सहायक के बिना अबकी बार यहाँ नहीं आये हैं। किसी सबल सहायक को साथ लेकर ही आये हैं, जिसके बल पर ये इस तरह गरज रहे हैं
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'Certainly Sugriva has not come here to give a warcry without any external help. The person whose refuge he has sought is not a small one.
ShlokaShloka 14
प्रकृत्या निपुणश्चैव बुद्धिमांश्चैव वानरः। अपरीक्षितवीर्येण सुग्रीवस्सहनैष्यति।।4.15.14।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘वानर सुग्रीव स्वभाव से ही कार्यकुशल और बुद्धिमान् हैं। वे किसी ऐसे पुरुष के साथ मैत्री नहीं करेंगे, जिसके बल और पराक्रम को अच्छी तरह परख न लिया हो
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'Sugriva is clever by nature. He is wise. Without assessing the ability of the ally he will not enter into friendship.
ShlokaShloka 15
पूर्वमेव मया वीर श्रुतं कथयतो वचः। अङ्गदस्य कुमारस्य वक्ष्यामित्वा हितं वचः4.15.15।।
हिन्दी अर्थ देखें
इस प्रकार श्रीवाल्मीकि निर्मित आर्षरामायण आदिकाव्य के किष्किन्धाकाण्ड में पंद्रहवाँ सर्ग पूरा हुआ
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'O hero I have heard the news earlier from our son Angada. I will tell you what he had heard and what he has said to me:
ShlokaShloka 16
अङ्गदस्तु कुमारोऽयं वनान्तमुपनिर्गतः। प्रवृत्तिस्तेन कथिता चारै राप्तैर्निवेदिता4.15.16।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘एक दिन कुमार अङ्गद वन में गये थे। वहाँ गुप्तचरों ने उन्हें एक समाचार बताया, जो उन्होंने यहाँ आकर मुझसे भी कहा था
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'When our son Angada was out into the forest he had collected some reports from the spies which he has transmitted to me.
ShlokaShloka 17
अयोध्याधिपतेः पुत्रौ शूरौ समरदुर्जयौ। इक्ष्वाकूणां कुले जातौ प्रथितौ रामलक्ष्मणौ4.15.17।। सुग्रीवप्रियकामार्थं प्राप्तौ तत्र दुरासदौ।
हिन्दी अर्थ देखें
‘वह समाचार इस प्रकार है-अयोध्यानरेश के दो शूर-वीर पुत्र, जिन्हें युद्ध में जीतना अत्यन्त कठिन है, जिनका जन्म इक्ष्वाकुकुल में हुआ है तथा जो श्रीराम और लक्ष्मण के नाम से प्रसिद्ध हैं, यहाँ वन में आये हुए हैं
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'Rama and Lakshmana, two heroic sons of the king of Ayodhya born of the Ikshvaku race, are invincible in war. They have come there to help Sugriva.
ShlokaShloka 18
तव भ्रातुर्हि विख्यातस्सहायो रणकर्कशः। रामः परबलामर्दी युगान्ताग्निरिवोत्थितः4.15.18।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘वे दोनों दुर्जय वीर सुग्रीव का प्रिय करने के लिये उनके पास पहुँच गये हैं। उन दोनों में से जो आपके भाई के युद्ध-कर्म में सहायक बताये गये हैं, वे श्रीराम शत्रुसेना का संहार करने वाले तथा प्रलयकाल में प्रज्वलित हुई अग्नि के समान तेजस्वी हैं। वे साधु पुरुषों के आश्रयदाता कल्पवृक्ष हैं और संकट में पड़े हुए प्राणियों के लिये सबसे बड़ा सहारा हैं
Show English Translation
'Rama, famous for crushing foes in war, like the fire that breaks out at the dissolution of the world, has slain strong enemies like Khara and will help your brother.
ShlokaShloka 19
निवासवृक्षः साधूनामापन्नानां परा गतिः। आर्तानां संश्रयश्चैव यशसश्चैकभाजनम्4.15.19।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘वे दोनों दुर्जय वीर सुग्रीव का प्रिय करने के लिये उनके पास पहुँच गये हैं। उन दोनों में से जो आपके भाई के युद्ध-कर्म में सहायक बताये गये हैं, वे श्रीराम शत्रुसेना का संहार करने वाले तथा प्रलयकाल में प्रज्वलित हुई अग्नि के समान तेजस्वी हैं। वे साधु पुरुषों के आश्रयदाता कल्पवृक्ष हैं और संकट में पड़े हुए प्राणियों के लिये सबसे बड़ा सहारा हैं
Show English Translation
'He is like a sheltering tree to the virtuous, an ultimate refuge for the destitutes and a protector of the distressed. He is the sole repository of fame.
ShlokaShloka 20
ज्ञानविज्ञानसम्पन्नो निदेशे निरतः पितुः। धातूनामिव शैलेन्द्रो गुणानामाकरो महान्4.15.20।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘आर्त पुरुषों के आश्रय, यश के एकमात्र भाजन, ज्ञान-विज्ञान से सम्पन्न तथा पिता की आज्ञा में स्थित रहने वाले हैं
Show English Translation
'He is endowed with the knowledge of science and scriptures. He stood by his father's command. He is like a mine of virtues just as the lord of the mountain is a mine of minerals.
ShlokaShloka 21
तत्क्षमं न विरोधस्ते सह तेन महात्मना। दुर्जयेनाप्रमेयेन रामेण रणकर्मसु4.15.21।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘आप दान-मान आदि सत्कारों के द्वारा उन्हें अपना अत्यन्त अन्तरङ्ग बना लीजिये, जिससे वे इस वैरभाव को छोड़कर आपके पास रह सकें
Show English Translation
'Rama is immeasurable in prowess and unconquerable in war. Therefore, enmity with him is not desirable for you.
ShlokaShloka 22
शूर वक्ष्यामि ते किञ्चिन्न चेच्छाम्यभ्यसूयितुम्। श्रूयतां क्रियतां चैव तव वक्ष्यामि यद्धितम्4.15.22।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘आप दान-मान आदि सत्कारों के द्वारा उन्हें अपना अत्यन्त अन्तरङ्ग बना लीजिये, जिससे वे इस वैरभाव को छोड़कर आपके पास रह सकें
Show English Translation
'O hero, this I tell you not because I dislike you, but because I wish your welfare. Listen, and do as I say
ShlokaShloka 23
यौवराज्येन सुग्रीवं तूर्णं साध्वभिषेचय। विग्रहं मा कृथा वीर भ्रात्रा राजन्बलीयसा4.15.23।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘आप दान-मान आदि सत्कारों के द्वारा उन्हें अपना अत्यन्त अन्तरङ्ग बना लीजिये, जिससे वे इस वैरभाव को छोड़कर आपके पास रह सकें
Show English Translation
'O king O hero consecrate your brother Sugriva as prince at once. Do not create enmity with him.
ShlokaShloka 24
अहं हि ते क्षमं मन्ये तेन रामेण सौहृदम्। सुग्रीवेण च सम्प्रीतिं वैरमुत्सृज्य दूरतः4.15.24।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘आप दान-मान आदि सत्कारों के द्वारा उन्हें अपना अत्यन्त अन्तरङ्ग बना लीजिये, जिससे वे इस वैरभाव को छोड़कर आपके पास रह सकें
Show English Translation
'Leave enmity with Sugriva far behind. Make friendship with Rama. I think it is the right thing for you.
ShlokaShloka 25
लालनीयो हि ते भ्राता यवीयानेष वानरः। तत्र वा सन्निहस्थो वा सर्वथा बन्धुरेव ते4.15.25।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘आप दान-मान आदि सत्कारों के द्वारा उन्हें अपना अत्यन्त अन्तरङ्ग बना लीजिये, जिससे वे इस वैरभाव को छोड़कर आपके पास रह सकें
Show English Translation
'This monkey is your younger brother and, therefore, deserves your protection. Whether he is here or there, he is your brother.
ShlokaShloka 26
न हि तेन समं बन्धुं भुवि पश्यामि कञ्चन4.15.26।। दानमानादिसत्कारैः कुरुष्व प्रत्यनन्तरम्। वैरमेतत्समुत्सृज्य तव पार्श्वे स तिष्ठतु4.15.27।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘आप दान-मान आदि सत्कारों के द्वारा उन्हें अपना अत्यन्त अन्तरङ्ग बना लीजिये, जिससे वे इस वैरभाव को छोड़कर आपके पास रह सकें
Show English Translation
'Indeed I do not see any of your relatives comparable to him on earth. Give up enmity with him. Give him wealth. Give him respect. Keep him by your side.
ShlokaShloka 27
सुग्रीवो विपुलग्रीवस्तवबन्धुस्सदा मतः। भ्रातृस्सौहृदमालम्ब नान्या गतिरिहास्ति ते4.15.28।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘आप दान-मान आदि सत्कारों के द्वारा उन्हें अपना अत्यन्त अन्तरङ्ग बना लीजिये, जिससे वे इस वैरभाव को छोड़कर आपके पास रह सकें
Show English Translation
'Extend your brotherly affection to broadnecked Sugriva. He is always your great relation. There is no alternative for you other than this at present.
ShlokaShloka 28
यदि ते मत्प्रियं कार्यं यदि चावैषि मां हिताम्। याच्यमानः प्रयत्नेन साधु वाक्यं कुरुष्व मे4.15.29।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘पुष्ट ग्रीवावाले सुग्रीव आपके अत्यन्त प्रेमी बन्धु हैं, ऐसा मेरा मत है। इस समय भ्रातृप्रेम का सहारा लेने के सिवा आपके लिये यहाँ दूसरी कोई गति नहीं है
Show English Translation
'Pray, do me this favour. Treat me as your wellwisher. Heed my advice given with care.
ShlokaShloka 29
प्रसीद पथ्यं शृणु जल्पितं हि मे न रोष मेवानुविधातुमर्हसि। क्षमो हि ते कोसलराजसूनुना न विग्रहश्शक्रसमानतेजसा4.15.30।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘यदि आपको मेरा प्रिय करना हो तथा आप मुझे अपनी हितकारिणी समझते हों तो मैं प्रेमपूर्वक याचना करती हूँ, आप मेरी यह नेक सलाह मान लीजिये
Show English Translation
'Do not lose your temper. Quieten your mind. My advice is beneficial to you. You should not fight with the prince of Kosala who is comparable to Indra in splendour.It is not proper for you.'
ShlokaShloka 30
तदा हि तारा हितमेव वाक्यं तं वालिनं पथ्यमिदं बभाषे। न रोचते तद्वचनं हि तस्य कालाभिपन्नस्य विनाशकाले4.15.31।।
Show English Translation
Even though Tara gave good counsel to Vali at the hour of destruction, the advice did not find favour with him as he was under the influence of unfavourable time (seized by death). इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये किष्किन्धाकाण्डे पञ्चदशस्सर्गः।। Thus ends the fifteenth sarga of Kishkindakanda of the holy Ramayana, the first epic composed by sage Valmiki.