Kishkindha Kanda

Sarga 35: Tara consoles Lakshmana -- gives reasons for the delay in action -- Tara's request pacifies Lakshmana -- Sugriva commands the army.

किष्किन्धाकाण्डम् · सर्ग 35

23 shlokas

ShlokaShloka 1
तथा ब्रुवाणं सौमित्रिं प्रदीप्तमिव तेजसा। अब्रवील्लक्ष्मणं तारा ताराधिपनिभानना।।4.35.1।।
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सुमित्राकुमार लक्ष्मण अपने तेज के कारण प्रज्वलित-से हो रहे थे। वे जब उपर्युक्त बात कह चुके, तब चन्द्रमुखी तारा उनसे बोली-
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While Lakshmana, the son of Sumitra, was glowing like fire with his brilliance, thus spoke the moonfaced Tara:
ShlokaShloka 2
नैवं लक्ष्मण वक्तव्यो नायं परुषमर्हति। हरीणामीश्वरश्श्रोतुं तव वक्त्राद्विशेषतः।।4.35.2।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘कुमार लक्ष्मण! आपको सुग्रीव से ऐसी बात नहीं कहनी चाहिये। ये वानरों के राजा हैं; अतः इनके प्रति कठोर वचन बोलना उचित नहीं है। विशेषतः आप जैसे सुहृद् के मुख से तो ये कदापि कटु वचन सुनने के अधिकारी नहीं हैं
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'O Lakshmana you, in particular, should not speak to the king of vanaras in that manner. He does not deserve to hear from your mouth words which are harsh.
ShlokaShloka 3
��ैवाकृतज्ञस्सुग्रीवो न शठो नापि दारुणः। नैवानृतकथो वीर न जिह्मश्च कपीश्वरः।।4.35.3।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘वीर! कपिराज सुग्रीव न कृतघ्न हैं, न शठ हैं, न क्रूर हैं, न असत्यवादी हैं और न कुटिल ही हैं
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'O hero Sugriva, king of monkeys, is not ungrateful or deceitful, He is neither crooked nor false.
ShlokaShloka 4
उपकारं कृतं वीरो नाप्ययं विस्मृतः कपिः। रामेण वीर सुग्रीवो यदन्यैर्दुष्करं रणे।।4.35.4।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘वीर लक्ष्मण! श्रीरामचन्द्रजी ने इनका जो उपकार किया है, वह युद्ध में दूसरों के लिये दुष्कर है। उसे इन वीर कपिराज ने कभी भुलाया नहीं है
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'O hero this warrior Sugriva has not forgotten the help rendered by Rama in combat which was difficult (to win).
ShlokaShloka 5
रामप्रसादात्कीर्तिञ्च कपिराज्यं च शाश्वतम्। प्राप्तवानिह सुग्रीवो रुमां मां च परन्तप ।।4.35.5।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘काल का ज्ञान रखने वालों में श्रेष्ठ महातेजस्वी विश्वामित्र को भी जब भोगासक्त होने पर काल का ज्ञान नहीं रह गया, तब फिर दूसरे साधारण प्राणी को कैसे रह सकता है ?
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'O scorcher of enemies it is by Rama's grace that Sugriva has attained fame, the kingdom of monkeys and Ruma and me.
ShlokaShloka 6
सुदुःखं शयितः पूर्वं प्राप्येदं सुखमुत्तमम्। प्राप्तकालं न जानीते विश्वामित्रो यथा मुनिः।।4.35.6।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘काल का ज्ञान रखने वालों में श्रेष्ठ महातेजस्वी विश्वामित्र को भी जब भोगासक्त होने पर काल का ज्ञान नहीं रह गया, तब फिर दूसरे साधारण प्राणी को कैसे रह सकता है ?
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'Sleep did not come to him in deep distress in the past, and now that great happiness has come, he does not realize that it is time to act (search for Sita). He behaves like sage Viswamitra.
ShlokaShloka 7
घृताच्यां किल संसक्तो दशवर्षाणि लक्ष्मण। अहोऽमन्यत धर्मात्मा विश्वामित्रो महामुनिः।।4.35.7।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘काल का ज्ञान रखने वालों में श्रेष्ठ महातेजस्वी विश्वामित्र को भी जब भोगासक्त होने पर काल का ज्ञान नहीं रह गया, तब फिर दूसरे साधारण प्राणी को कैसे रह सकता है ?
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'O Lakshmana great sage Visvamitra was in union with an apsara Gritachi for ten years and felt it was just one day indeed
ShlokaShloka 8
स हि प्राप्तं न जानीते कालं कालविदां वरः। विश्वामित्रो महातेजाः किं पुनर्यः पृथग्जनः।।4.35.8।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘काल का ज्ञान रखने वालों में श्रेष्ठ महातेजस्वी विश्वामित्र को भी जब भोगासक्त होने पर काल का ज्ञान नहीं रह गया, तब फिर दूसरे साधारण प्राणी को कैसे रह सकता है ?
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'If the brilliant and the most distinguished of those who knew the value of time did not realise the passing of time, what can be said of an ordinary person?
ShlokaShloka 9
देहधर्मं गतस्यास्य परिश्रान्तस्य लक्ष्मण। अवितृप्तस्य कामेषु कामं क्षन्तुमिहार्हसि।।4.35.9।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘कुमार लक्ष्मण! आहार, निद्रा और मैथुन आदि जो देह के धर्म हैं, (जो पशुओं में भी समान रूप से पाये जाते हैं) उनमें स्थित हुए ये सुग्रीव पहले तो चिरकालतक दुःख भोगने के कारण थके-माँदे एवं खिन्न थे। अब भगवान् श्रीराम की कृपा से इन्हें जो काम-भोग प्राप्त हुए हैं, उनसे अभी तक इनकी तृप्ति नहीं हुई (इसीलिये इनसे कुछ असावधानी हो गयी); अतः परम कृपालु श्रीरघुनाथजी को यहाँ इनका अपराध क्षमा करना चाहिये
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'O Lakshmana you should pardon him since he is not yet satisfied, though tired, with the struggle for the fulfilment of his sensual pleasures.
ShlokaShloka 10
न च रोषवशं तात गन्तुमर्हसि लक्ष्मण। निश्चयार्थमविज्ञाय सहसा प्राकृतो यथा।।4.35.10।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘तात लक्ष्मण! आपको यथार्थ बात जाने बिना साधारण मनुष्य की भाँति सहसा क्रोध के अधीन नहीं होना चाहिये
Show English Translation
'O dear Lakshmana not knowing the true intention of Sugriva, it is not proper for you to be rashly angry like an ordinary man.
ShlokaShloka 11
सत्त्वयुक्ता हि पुरुषास्त्वद्विधाः पुरुषर्षभ। अविमृश्य न रोषस्य सहसा यान्ति वश्यताम्।।4.35.11।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘पुरुषप्रवर! आप-जैसे सत्त्वगुणसम्पन्न पुरुष विचार किये बिना ही सहसा रोष के वशीभूत नहीं होते हैं।
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'O bull among men men with right vision like you do not become angry instantly without right thinking.
ShlokaShloka 12
प्रसादये त्वां धर्मज्ञ सुग्रीवार्थे समाहिता। महान्रोषसमुत्पन्न स्संरम्भस्त्यज्यतामयम्।।4.35.12।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘धर्मज्ञ! मैं एकाग्र हृदय से सुग्रीव के लिये आपसे कृपा की याचना करती हूँ। आप क्रोध से उत्पन्न हुए इस महान् क्षोभ का परित्याग कीजिये
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'O Lakshmana, knower of dharma, give up your agitation arising out of great anger. Be composed for the sake of Sugriva.
ShlokaShloka 13
रुमां मां कपि राज्यं च धनधान्यवसूनि च। रामप्रियार्थं सुग्रीवस्त्यजेदिति मतिर्मम।।4.35.13।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘मेरा तो ऐसा विश्वास है कि सुग्रीव श्रीरामचन्द्रजी का प्रिय करने के लिये रुमा का, मेरा, कुमार अङ्गद का तथा धन-धान्य और पशुओं सहित सम्पूर्ण राज्य का भी परित्याग कर सकते हैं
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'I feel Sugriva should (is prepared to) renounce the monkeykingdom, wealth, grains and other treasures and even Ruma and me for the pleasure of Rama.
ShlokaShloka 14
समानेष्यति सुग्रीव स्सीतया सह राघवम्। शशाङ्कमिव रोहिण्या निहत्वा रावणं रणे।।4.35.14।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘सुग्रीव उस अधम राक्षस का वध करके श्रीराम को सीता से उसी तरह मिलायेंगे, जैसे चन्द्रमा का रोहिणी के साथ संयोग हुआ हो
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'Killing Ravana in war, Sugriva will restore Sita soon to Rama.Rama will join Sita like Moon joins Rohini.
ShlokaShloka 15
शतकोटिसहस्राणि लङ्कायां किल राक्षसाः। आयुतानि च षट्त्रिंशत्सहस्राणि शतानि च।।4.35.15।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘वे सब-के-सब राक्षस इच्छानुसार रूप धारण करने वाले तथा दुर्जय हैं। उन सबका संहार किये बिना रावण का, जिसने मिथिलेशकुमारी सीता का अपहरण किया है, वध नहीं हो सकता
Show English Translation
'The number of demons in Lanka is reported to be a hundred thousand crore, three lakh, ninetynine thousand and six hundred. (Note: Indian tradition has numbers up to eighteen digits. One hundred thousand crores is equal to a 'mahapadma' which has thirteen digits. The number described here is 1000000399600.)
ShlokaShloka 16
अहत्वा तांश्च दुर्धर्षान्राक्षसान्कामरूपिणः। न शक्यो रावणो हन्तुं येन सा मैथिली हृता।।4.35.16।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘वे सब-के-सब राक्षस इच्छानुसार रूप धारण करने वाले तथा दुर्जय हैं। उन सबका संहार किये बिना रावण का, जिसने मिथिलेशकुमारी सीता का अपहरण किया है, वध नहीं हो सकता
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'It is not possible to kill Ravana who has stolen Sita without killing those unassailable demons who can assume any form at their will.
ShlokaShloka 17
ते न शक्या रणे हन्तुमसहायेन लक्ष्मण। रावणः क्रूरकर्मा च सुग्रीवेण विशेषतः।।4.35.17।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘लक्ष्मण! किसीकी सहायता लिये बिना अकेले किसी वीर के द्वारा न तो उन राक्षसों का संग्राम में वध किया जा सकता है और न क्रूरकर्मा रावण का ही इसलिये सुग्रीव से सहायता लेने की विशेष आवश्यकता है
Show English Translation
'O Lakshmana moreover it is not possible for Sugriva alone to kill the wicked Ravana without the help of the monkeys.
ShlokaShloka 18
एवमाख्यातवान्वाली स ह्यभिज्ञो हरीश्वरः। आगमस्तु न मे व्यक्तश्श्रवात्तस्माद्ब्रवीम्यहम्।।4.35.18।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘वानरराज वाली लङ्का के राक्षसों की इस संख्या से परिचित थे, उन्होंने मुझे उनकी इस तरह गणना बतायी थी। रावण ने इतनी सेना का संग्रह कैसे किया? यह तो मुझे नहीं मालूम है। किंतु इस संख्या को मैंने उनके मुँह से सुना था। वह इस समय मैं आपको बता रही हूँ
Show English Translation
Vali, the wellinformed lord of the monkeys, has given an account of the demons. The source of the account is not known to me.Therefore I am speaking from what I have heard.
ShlokaShloka 19
त्वत्सहायनिमित्तं वै प्रेषिता हरिपुङ्गवाः। आनेतुं वानरान्युद्धे सुबहून्हरियूधपान्।।4.35.19।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘आपकी सहायता के लिये सुग्रीव ने बहुतेरे श्रेष्ठ वानरों को युद्ध के निमित्त असंख्य वानर वीरों की सेना एकत्र करने के लिये भेज रखा है
Show English Translation
'Monkey chiefs have been sent to bring multitudes of monkey leaders to help you in the battle.
ShlokaShloka 20
तांश्च प्रतीक्षमाणोऽयं विक्रान्तात्सुमहाबलान्। राघवस्यार्थसिध्यर्थं न निर्याति हरीश्वरः।।4.35.20।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘वानरराज सुग्रीव उन महाबली और पराक्रमी वीरों के आने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अतएव भगवान् श्रीराम का कार्य सिद्ध करने के लिये अभी नगर से बाहर नहीं निकल सके हैं।
Show English Translation
'Sugriva is awaiting the arrival of the powerful and strong vanaras without whose help he cannot accomplish Rama's task.Therefore he has not yet started (the search).
ShlokaShloka 21
कृता तु संस्था सौमित्रे सुग्रीवेण पुरा यथा। अद्य तैर्वानरैस्सर्वैरागन्तव्यं महाबलैः।।4.35.21।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘सुमित्रानन्दन! सुग्रीव ने उन सबके एकत्र होने के लिये पहले से ही जो अवधि निश्चित कर रखी है, उसके अनुसार उन समस्त महाबली वानरों को आज ही यहाँ उपस्थित हो जाना चाहिये
Show English Translation
'O Lakshmana since Sugriva has already promulgated an ordinance to all the mighty vanaras, they should be all arriving by now.
ShlokaShloka 22
ऋक्षकोटिसहस्राणि गोलाङ्गूलशतानि च। अद्य त्वामुपयास्यन्ति जहि कोपमरिन्दम। कोट्योऽनेकास्तु काकुत्स्थ कपीनां दीप्ततेजसाम्।।4.35.22।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘शत्रुदमन लक्ष्मण! आज आपकी सेवा में कोटि सहस्र (दस अरब) रीछ, सौ करोड़ (एक अरब) लंगूर तथा और भी बढ़े हुए तेजवाले कई करोड़ वानर उपस्थित होंगे। इसलिये आप क्रोध को त्याग दीजिये
Show English Translation
ShlokaShloka 23
तव हि मुखमिदं निरीक्ष्य कोपात् क्षतजनिभे नयने निरीक्षमाणाः। हरिवरवनिता न यान्ति शान्तिं प्रथमभयस्य हि शङ्कितास्तु सर्वाः।।4.35.23।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘आपका मुख क्रोध से तमतमा उठा है और आँखें रोष से लाल हो गयी हैं। यह सब देखकर हम वानरराज की स्त्रियों को शान्ति नहीं मिल रही है। हम सबको प्रथम भय (वालिवध) के समान ही किसी अनिष्ट की आशङ्का हो रही है
Show English Translation
'Looking at your angry countenance with bloodred eyes, the wives of the foremost of monkeys are frightened by the possibility of similar danger of the past (of Vali's death) and do not find peace of mind.' इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये किष्किन्धाकाण्डे पञ्चत्रिंशस्सर्गः।। Thus ends the thirtyfifth sarga in Kishkindakanda of the first epic, the Holy Ramayana composed by sage Valmiki.