Kishkindha Kanda

Sarga 5: Rama and Lakshmana meet Sugriva -- Rama makes friendship with him -- Sugriva reveals the injustice done to him by Vali -- Rama assures him help -- Sugriva promises to send his troops to find Sita.

किष्किन्धाकाण्डम् · सर्ग 5

28 shlokas

ShlokaShloka 1
ऋश्यमूकात्तु हनुमान्गत्वा तु मलयं गिरिम्। आचचक्षे तदा वीरौ कपिराजाय राघवौ4.5.1।।
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श्रीराम और लक्ष्मण को ऋष्यमूक पर्वत पर सुग्रीव के वास-स्थान में बिठाकर हनुमान जी वहाँ से मलयपर्वत पर गये (जो ऋष्यमूक का ही एक शिखर है) और वहाँ वानरराज सुग्रीव को उन दोनों रघुवंशी वीरों का परिचय देते हुए इस प्रकार बोले-
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Leaving Rishyamuka, Hanuman reached the Malaya mountain. Seeing the chief of monkeys there, he announced the arrival of the heroic Raghavas.
ShlokaShloka 2
अयं रामो महाप्राज्ञ स्सम्प्राप्तो दृढविक्रमः। लक्ष्मणेन सह भ्रात्रा रामोऽयं सत्यविक्रमः4.5.2।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘महाप्राज्ञ! जिनका पराक्रम अत्यन्त दृढ़ और अमोघ है, वे श्रीरामचन्द्रजी अपने भाई लक्ष्मण के साथ पधारे हैं
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'This Rama of greatwisdom and valour, endowed with the power of truth has arrived here along with his brother Lakshmana.
ShlokaShloka 3
इक्ष्वाकूणां कुले जातो रामो दशरथात्मजः। धर्मे निगदितश्चैव पितुर्निर्देशपारगः4.5.3।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘इन श्रीराम का आविर्भाव इक्ष्वाकुकुल में हुआ है। ये महाराज दशरथ के पुत्र हैं और स्वधर्मपालन के लिये संसार में विख्यात हैं। अपने पिता की आज्ञा का पालन करने के लिये इस वन में इनका आगमन हुआ है
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'Born in the Ikshvaku race Rama Dasaratha's son, distinguished for his righteousness is here to carry out the orders of his father.
ShlokaShloka 4
तस्यास्य वसतोऽरण्ये नियतस्य महात्मनः। रावणेन हृता भार्या स त्वां शरणमागतः4.5.4।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘ये दोनों भाई श्रीराम और लक्ष्मण आपसे मित्रता करना चाहते हैं। आप चलकर इन्हें अपनावें और इनका यथोचित सत्कार करें; क्योंकि ये दोनों ही वीर हमलोगों के लिये परम पूजनीय हैं
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'While the great Rama armed with selfrestraint was living in the forest, his wife was abducted by Ravana. So he has come to you seeing refuge.
ShlokaShloka 5
राजसूयाश्वमेधैश्च वह्निर्येनाभितर्पितः। दक्षिणाश्च तथोत्सृष्टा गावश्शतसहस्रशः4.5.5।। तपसा सत्यवाक्येन वसुधा येन पालिता। स्त्री हेतोस्तस्य पुत्रोऽयं रामस्त्वां शरणं गतः4.5.6।।
हिन्दी अर्थ देखें
इस प्रकार श्रीवाल्मीकि निर्मित आर्षरामायण आदिकाव्य के किष्किन्धाकाण्ड में पाँचवाँ सर्ग पूरा हुआ
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'This Rama, son of a king who had gratified the firegod through many yajnas like Rajasuya and Aswamedha, gifted hundreds of thousands of cows and ruled this earth with truth and austerity, has come seeking help for a woman.'
ShlokaShloka 6
भवता सख्यकामौ तौ भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ। प्रतिगृह्यार्चयस्वैतौ पूजनीयतमावुभौ4.5.7।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘ये दोनों भाई श्रीराम और लक्ष्मण आपसे मित्रता करना चाहते हैं। आप चलकर इन्हें अपनावें और इनका यथोचित सत्कार करें; क्योंकि ये दोनों ही वीर हमलोगों के लिये परम पूजनीय हैं
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'Both the brothers, Rama and Lakshmana seek friendship with you. As both of them are worthiest of worship, welcome them with due reverence.'
ShlokaShloka 7
श्रुत्वा हनुमतो वाक्यं सुग्रीवो हृष्टमानसः। भयं चराघवाद्घोरं प्रजहौ विगतज्वरः।।4.5.8।। सकृत्वा मानुषं रूपं सुग्रीवः प्लवगर्षभः। दर्शनीयतमो भूत्वा प्रीत्या प्रोवाच राघवम्4.5.9।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘ये दोनों भाई श्रीराम और लक्ष्मण आपसे मित्रता करना चाहते हैं। आप चलकर इन्हें अपनावें और इनका यथोचित सत्कार करें; क्योंकि ये दोनों ही वीर हमलोगों के लिये परम पूजनीय हैं
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Hanuman's words took away Sugriva's great fear for Rama and filled him with cheer. This bull among monkeys gave up his natural appearance and and assuming an attractive human form spoke to Rama lovingly:
ShlokaShloka 8
भवान्धर्मविनीतश्च विक्रान्तस्सर्ववत्सलः। आख्याता वायुपुत्रेण तत्त्वतो मे भवद्गुणाः4.5.10।।
हिन्दी अर्थ देखें
हनुमान् जी का यह वचन सुनकर वानरराज सुग्रीव स्वेच्छा से अत्यन्त दर्शनीय रूप धारण करके श्रीरघुनाथजी के पास आये और बड़े प्रेम से बोले-
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'You are a great hero, affectionate to all and wellversed in all dharmas. The son of the Windgod has, in fact, apprised me of your virtues
ShlokaShloka 9
तन्ममैवैष सत्कारो लाभश्चैवोत्तमः प्रभो। यत्त्वमिच्छसि सौहार्दं वानरेण मया सह4.5.11।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘भगवन् ! मैं वानर हूँ और आप नर। मेरे साथ जो आप मैत्री करना चाहते हैं, इसमें मेरा ही सत्कार है और मुझे ही उत्तम लाभ प्राप्त हो रहा है
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'O Lord that you are eager to have friendship with me, who is a monkey is a great honour and is extremely beneficial to me.
ShlokaShloka 10
रोचते यदि वा सख्यं बाहुरेष प्रसारितः। गृह्यतां पाणिना पाणिर्मर्यादा बध्यतां ध्रुवा4.5.12।।
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‘भगवन् ! मैं वानर हूँ और आप नर। मेरे साथ जो आप मैत्री करना चाहते हैं, इसमें मेरा ही सत्कार है और मुझे ही उत्तम लाभ प्राप्त हो रहा है
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'If you are desirous of my friendship, here is my arm (palm) stretched out to you. With due regard, establish our bond firmly, holding my palm in yours.'
ShlokaShloka 11
एतत्तु वचनं श्रुत्वा सुग्रीवेण सुभाषितम्। सम्प्रहृष्टमना हस्तं पीडयामास पाणिना4.5.13।। हृद्यं सौहृदमालम्ब्यपर्यष्वजत पीडितम्।
हिन्दी अर्थ देखें
वालिना निकृतो भ्रात्रा कृतवैरश्च राघव। ‘रघुनन्दन! मेरे बड़े भाई वाली ने मुझे घर से निकालकर मेरे साथ वैर बाँध लिया है। उसी के त्रास और भय से उद्भ्रान्तचित्त होकर मैं इस वन में निवास करता हूँ
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Rama became very happy to hear Sugriva's warm words and pressed his hand with his. Delighted, he went close to Sugriva and hugged him tightly and affectionately.
ShlokaShloka 12
ततो हनूमान्सन्त्यज्य भिक्षुरूपमरिन्दमः।।4.5.14।। काष्ठयोस्स्वेन रूपेण जनयामास पावकम्। दीप्यमानं ततो वह्निं ह्निं पुष्पैरभ्यर्च्य सत्कृतम्4.5.15।। तयोर्मध्येऽथ सुप्रीतो निदधे सुसमाहितः।
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वालिना निकृतो भ्रात्रा कृतवैरश्च राघव। ‘रघुनन्दन! मेरे बड़े भाई वाली ने मुझे घर से निकालकर मेरे साथ वैर बाँध लिया है। उसी के त्रास और भय से उद्भ्रान्तचित्त होकर मैं इस वन में निवास करता हूँ
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Then, Hanuman vanquisher of enemies, gave up his guise of a mendicant, assumed his natural form and generated fire by rubbing two pieces of wood. Wellpleased at heart, he made an offering of flowers to the flaming fire and placed it between them.
ShlokaShloka 13
ततोऽग्निं दीप्यमानं तौ चक्रतुश्च प्रदक्षिणम्।।4.5.16।। सुग्रीवो राघवश्चैव वयस्यत्वमुपागतौ।
हिन्दी अर्थ देखें
वालिना निकृतो भ्रात्रा कृतवैरश्च राघव। ‘रघुनन्दन! मेरे बड़े भाई वाली ने मुझे घर से निकालकर मेरे साथ वैर बाँध लिया है। उसी के त्रास और भय से उद्भ्रान्तचित्त होकर मैं इस वन में निवास करता हूँ
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They both circumambulated the blazing fire and solemnized their friendship.
ShlokaShloka 14
ततस्सुप्रीतमनसौ तावुभौ हरिराघवौ4.5.17।। अन्योन्यमभिवीक्षन्तौ न तृप्तिमुपजग्मतुः।
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वालिना निकृतो भ्रात्रा कृतवैरश्च राघव। ‘रघुनन्दन! मेरे बड़े भाई वाली ने मुझे घर से निकालकर मेरे साथ वैर बाँध लिया है। उसी के त्रास और भय से उद्भ्रान्तचित्त होकर मैं इस वन में निवास करता हूँ
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Rama and the monkey contented at heart, yet not fully content, continued looking at each other.
ShlokaShloka 15
त्वं वयस्योऽसि मे हृद्यो ह्येकं दुःखं सुखं च नौ4.5.18।। सुग्रीवो राघवं वाक्यमित्युवाच प्रहृष्टवत्।
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वालिना निकृतो भ्रात्रा कृतवैरश्च राघव। ‘रघुनन्दन! मेरे बड़े भाई वाली ने मुझे घर से निकालकर मेरे साथ वैर बाँध लिया है। उसी के त्रास और भय से उद्भ्रान्तचित्त होकर मैं इस वन में निवास करता हूँ
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'You are a dear friend to me. Your sorrow is my sorrow, your pleasure is my pleasure. We are one and the same' said Sugriva to Rama, his heart overflowing with happiness.
ShlokaShloka 16
ततस्सुपर्णबहुलां छित्वा शाखां सुपुष्पिताम्4.5.19।। सालस्यास्तीर्य सुग्रीवो निषसाद सराघवः।
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वालिना निकृतो भ्रात्रा कृतवैरश्च राघव। ‘रघुनन्दन! मेरे बड़े भाई वाली ने मुझे घर से निकालकर मेरे साथ वैर बाँध लिया है। उसी के त्रास और भय से उद्भ्रान्तचित्त होकर मैं इस वन में निवास करता हूँ
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Then Sugriva cut the branch of a sala tree with luxuriant leaves and flowers, spread it on the ground and sat down along with Raghava.
ShlokaShloka 17
लक्ष्मणायाथ संहृष्टो हनूमान् प्लवगर्षभः4.5.20।। शाखां चन्दनवृक्षस्य ददौ परमपुष्पिताम्।
हिन्दी अर्थ देखें
वालिना निकृतो भ्रात्रा कृतवैरश्च राघव। ‘रघुनन्दन! मेरे बड़े भाई वाली ने मुझे घर से निकालकर मेरे साथ वैर बाँध लिया है। उसी के त्रास और भय से उद्भ्रान्तचित्त होकर मैं इस वन में निवास करता हूँ
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Then Hanuman, the bull among monkeys, felt very happy, cut the branch of a sandalwood tree full of flowers and gave it to Lakshmana.
ShlokaShloka 18
ततः प्रहृष्टस्सुग्रीवः श्लक्ष्णं मधुरया गिरा4.5.21।। प्रत्युवाच तदा रामं हर्षव्याकुललोचनः।
हिन्दी अर्थ देखें
वालिना निकृतो भ्रात्रा कृतवैरश्च राघव। ‘रघुनन्दन! मेरे बड़े भाई वाली ने मुझे घर से निकालकर मेरे साथ वैर बाँध लिया है। उसी के त्रास और भय से उद्भ्रान्तचित्त होकर मैं इस वन में निवास करता हूँ
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Then Sugriva, eyes sparkling with joy, replied to Rama in a sweet, gentle voice.
ShlokaShloka 19
अहं विनिकृतो राम चरामीह भयार्दितः4.5.22।। हृतभार��यो वने त्रस्तो दुर्गमेतदुपाश्रितः।
हिन्दी अर्थ देखें
वालिना निकृतो भ्रात्रा कृतवैरश्च राघव। ‘रघुनन्दन! मेरे बड़े भाई वाली ने मुझे घर से निकालकर मेरे साथ वैर बाँध लिया है। उसी के त्रास और भय से उद्भ्रान्तचित्त होकर मैं इस वन में निवास करता हूँ
Show English Translation
'O Rama, I have been insulted deeply and my wife hijacked. Stricken with fear I have taken refuge in this inaccessible forest.
ShlokaShloka 20
सोऽहं त्रस्तो वने भीतो वसाम्युद्भ्रान्तचेतनः4.5.23।। वालिना निकृतो भ्रात्रा कृतवैरश्च राघव।
हिन्दी अर्थ देखें
वालिना निकृतो भ्रात्रा कृतवैरश्च राघव। ‘रघुनन्दन! मेरे बड़े भाई वाली ने मुझे घर से निकालकर मेरे साथ वैर बाँध लिया है। उसी के त्रास और भय से उद्भ्रान्तचित्त होकर मैं इस वन में निवास करता हूँ
Show English Translation
'O Rama humiliated by my brother Vali, I have developed enmity with him. Terribly distraught and disturbed I live in this forest in great fear.
ShlokaShloka 21
वालिनो मे महाभाग भयार्तस्याभयं कुरु4.5.24।। कर्तुमर्हसि काकुत्स्थ भयं मे न भवेद्यथा।
हिन्दी अर्थ देखें
वालिना निकृतो भ्रात्रा कृतवैरश्च राघव। ‘रघुनन्दन! मेरे बड़े भाई वाली ने मुझे घर से निकालकर मेरे साथ वैर बाँध लिया है। उसी के त्रास और भय से उद्भ्रान्तचित्त होकर मैं इस वन में निवास करता हूँ
Show English Translation
'O reverend Kakutstha, I feel helpless with fear from Vali. Save me. You should release me free from fear.'
ShlokaShloka 22
एवमुक्तस्तु तेजस्वी धर्मज्ञो धर्मवत्सलः4.5.25।। प्रत्यभाषत काकुत्स्थ: सुग्रीवं प्रहसन्निव।
हिन्दी अर्थ देखें
वालिना निकृतो भ्रात्रा कृतवैरश्च राघव। ‘रघुनन्दन! मेरे बड़े भाई वाली ने मुझे घर से निकालकर मेरे साथ वैर बाँध लिया है। उसी के त्रास और भय से उद्भ्रान्तचित्त होकर मैं इस वन में निवास करता हूँ
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The righteous and glorious Rama to whom dharma is very dear said to Sugriva with a gentle smile on his face, when he was entreated thus:
ShlokaShloka 23
उपकारफलं मित्रं विदितं मे महाकपे4.5.26।। वालिनं तं वधिष्यामि तव भार्यापहारिणम्।
हिन्दी अर्थ देखें
प्रत्यभाषत काकुत्स्थः सुग्रीवं प्रहसन्निव। सुग्रीव के ऐसा कहने पर धर्म के ज्ञाता, धर्मवत्सल, ककुत्स्थकुलभूषण तेजस्वी श्रीराम ने हँसते हुए-से वहाँ सुग्रीव को इस प्रकार उत्तर दिया-
Show English Translation
'O great monkey I know friendship is the fruit of a beneficial deed. I will kill that Vali who has usurped your wife.
ShlokaShloka 24
अमोघास्सूर्यसङ्काशा ममैते निशिताश्शराः4.5.27।। तस्मिन्वालिनि दुर्वृत्ते निपतिष्यन्ति वेगिताः। कङ्कपत्रप्रतिच्छन्ना महेन्द्राशनिसन्निभाः4.5.28।। तीक्ष्णाग्रा ऋजुपर्वाणस्सरोषा भुजगा इव।
हिन्दी अर्थ देखें
प्रत्यभाषत काकुत्स्थः सुग्रीवं प्रहसन्निव। सुग्रीव के ऐसा कहने पर धर्म के ज्ञाता, धर्मवत्सल, ककुत्स्थकुलभूषण तेजस्वी श्रीराम ने हँसते हुए-से वहाँ सुग्रीव को इस प्रकार उत्तर दिया-
Show English Translation
'These arrows covered with kanka feathers, sharp and straight at the tip, comparable to great Indra's thunderbolt are (burning bright) like the sun. Looking like angry serpents, they will unfailingly strike at the miscreant Vali soon.
ShlokaShloka 25
तमद्य वालिनं पश्य तीक्ष्णैराशीविषोपमैः4.5.29।। शरैर्विनिहतं भूमौ विकीर्णमिव पर्वतम्।
हिन्दी अर्थ देखें
अपने लिये परम हितकर वह श्रीरघुनाथजी का वचन सुनकर सुग्रीव को बड़ी प्रसन्नता हुई। वे उत्तम वाणी में बोले-
Show English Translation
'With these sharp, serpentlike arrows Vali will be killed. He will fall down on the ground like a mountain shattered.You will see it now'.
ShlokaShloka 26
स तु तद्वचनं श्रुत्वा राघवस्यात्मनो हितम्4.5.30।। सुग्रीवः परमप्रीतस्सुमहद्वाक्यमब्रवीत्।
हिन्दी अर्थ देखें
अपने लिये परम हितकर वह श्रीरघुनाथजी का वचन सुनकर सुग्रीव को बड़ी प्रसन्नता हुई। वे उत्तम वाणी में बोले-
Show English Translation
Sugriva, very much pleased with the words of Rama, spoke highly (of him).
ShlokaShloka 27
तव प्रसादेन नृसिंह राघव प्रियां च राज्यं च समाप्नुयामहम्। तथा कुरु त्वं नरदेव वैरिणं यथा निहंस्यद्य रिपुंममाग्रजम्4.5.31।।
हिन्दी अर्थ देखें
अपने लिये परम हितकर वह श्रीरघुनाथजी का वचन सुनकर सुग्रीव को बड़ी प्रसन्नता हुई। वे उत्तम वाणी में बोले-
Show English Translation
'O Rama, by your grace I will get my wife and kingdom back. O king accomplish this so that I can destroy my, elder brother, my enemy, O lion among men
ShlokaShloka 28
सीता कपीन्द्रक्षणदाचराणां राजीवहेमज्वलनोपमानि। सुग्रीवरामप्रणयप्रसङ्गे वामानि नेत्राणि समं स्फुरन्ति4.5.32।।
हिन्दी अर्थ देखें
अपने लिये परम हितकर वह श्रीरघुनाथजी का वचन सुनकर सुग्रीव को बड़ी प्रसन्नता हुई। वे उत्तम वाणी में बोले-
Show English Translation
While Sugriva was making a friendly alliance with Rama, Sita's left eye, like lotus, Vali's left eye glittering like gold and Ravana's left eye blazing (like fire) twitched at the same time for a moment (Twitching of left eye is considered auspicious to a woman and ominous to a man). इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिक���व्ये किष्किन्धाकाण्डे पञ्चमस्सर्गः।। Thus ends the fifth sarga of Kishkindakanda of the Holy Ramayana, the first epic composed by sage Valmiki.