Kishkindha Kanda
Sarga 20: Tara's lamentation over her misfortune.
किष्किन्धाकाण्डम् · सर्ग 20
25 shlokas
ShlokaShloka 1
रामचापविसृष्टेन शरेणान्तकरेण तम्।
दृष्ट्वा विनिहतं भूमौ तारा ताराधिपानना4.20.1।।
सा समासाद्य भर्तारं पर्यष्वजत भामिनी।
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चन्द्रमुखी तारा ने देखा, मेरे स्वामी वानरराज वाली श्रीरामचन्द्रजी के धनुष से छूटे हुए प्राणान्तकारी बाण से घायल होकर धरती पर पड़े हैं, उस अवस्था में उनके पास पहुँचकर वह भामिनी उनके शरीर से लिपट गयी। जो अपने शरीर से गजराज और गिरिराज को भी मात करते थे, उन्हीं वानरराज को बाण से आहत होकर जड़से उखड़े हुए वृक्ष की भाँति धराशायी हुआ देख तारा का हृदय शोक से संतप्त हो उठा और वह आतुर होकर विलाप करने लगी-
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Beholding her husband lying on the ground pierced by a deathdealing arrow released by Rama, the lovely moonfaced Tara went and embraced him.
ShlokaShloka 2
इषुणाऽभिहतं दृष्ट्वा वालिनं कुञ्जरोपमम्4.20.2।।
वानरेन्द्र महेन्द्राभं शोकसन्तप्तमानसा।
तारा तरुमिवोन्मूलं पर्यदेवयदातुरा4.20.3।।
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चन्द्रमुखी तारा ने देखा, मेरे स्वामी वानरराज वाली श्रीरामचन्द्रजी के धनुष से छूटे हुए प्राणान्तकारी बाण से घायल होकर धरती पर पड़े हैं, उस अवस्था में उनके पास पहुँचकर वह भामिनी उनके शरीर से लिपट गयी। जो अपने शरीर से गजराज और गिरिराज को भी मात करते थे, उन्हीं वानरराज को बाण से आहत होकर जड़से उखड़े हुए वृक्ष की भाँति धराशायी हुआ देख तारा का हृदय शोक से संतप्त हो उठा और वह आतुर होकर विलाप करने लगी-
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Beholding Vali, the lord of monkeys, who was strong as an elephant, splendid as a mountain, fallen down like an uprooted tree, struck by the arrow, Tara became restless and wailed bitterly:
ShlokaShloka 3
रणे दारुण विक्रान्त प्रवीर प्लवतां वर।
किं दीनामपुरोभागामद्य त्वं नाभिभाषसे।।4.20.4।।
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चन्द्रमुखी तारा ने देखा, मेरे स्वामी वानरराज वाली श्रीरामचन्द्रजी के धनुष से छूटे हुए प्राणान्तकारी बाण से घायल होकर धरती पर पड़े हैं, उस अवस्था में उनके पास पहुँचकर वह भामिनी उनके शरीर से लिपट गयी। जो अपने शरीर से गजराज और गिरिराज को भी मात करते थे, उन्हीं वानरराज को बाण से आहत होकर जड़से उखड़े हुए वृक्ष की भाँति धराशायी हुआ देख तारा का हृदय शोक से संतप्त हो उठा और वह आतुर होकर विलाप करने लगी-
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'O valiant hero, lord of monkeys you were terrifying in war. Why don't you speak now to me so forlorn and helpless?
ShlokaShloka 4
उत्तिष्ठ हरिशार्दूल भजस्व शयनोत्तमम्।
नैवंविधाश्शेरते हि भूमौ नृपतिसत्तमाः4.20.5।।
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‘रण में भयानक पराक्रम प्रकट करने वाले महान् वीर वानरराज! आज इस समय मुझे अपने सामने पाकर भी आप बोलते क्यों नहीं हैं?
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'O tiger among monkeys get up. Come and sleep on the best of beds. Best of kings, you should not lie on the ground.
ShlokaShloka 5
अतीव खलु ते कान्ता वसुधा वसुधाधिप।
गतासुरपि यां गात्रैर्मां विहाय निषेवसे4.20.6।।
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कपिश्रेष्ठ! उठिये और उत्तम शय्या का आश्रय लीजिये। आप-जैसे श्रेष्ठ भूपाल पृथ्वी पर नहीं सोते हैं।
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'O lord of the earth I know you loved the earth more than you loved me since you have forsaken me and enjoy her company by hugging her with your limbs, even after death.
ShlokaShloka 6
व्यक्तमन्या त्वया वीर धर्मत: सम्प्रवर्तिता।
किष्किन्धेव पुरी रम्या स्वर्गमार्गे विनिर्मिता4.20.7।।
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‘वीरवर! आपने धर्मयुक्त युद्ध करके स्वर्ग के मार्ग में भी अवश्य ही किष्किन्धा की भाँति कोई रमणीय पुरी बना ली है, यह बात आज स्पष्ट हो गयी (अन्यथा आप किष्किन्धा को छोड़कर यहाँ क्यों सोते)
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'O my heroic husband, you are the legitimate, righteous king of Kiskinda. You have evidently built another beautiful city Kiskinda on your way to heaven.
ShlokaShloka 7
यान्यस्माभिस्त्वया सार्धं वनेषु मधुगन्धिषु।
विहृतानि त्वया काले तेषामुपरमः कृतः4.20.8।।
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‘वीरवर! आपने धर्मयुक्त युद्ध करके स्वर्ग के मार्ग में भी अवश्य ही किष्किन्धा की भाँति कोई रमणीय पुरी बना ली है, यह बात आज स्पष्ट हो गयी (अन्यथा आप किष्किन्धा को छोड़कर यहाँ क्यों सोते)
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'Our pleasure trips to sweetscented forests have ended now. You have brought them to a close.
ShlokaShloka 8
निरानन्दा निराशाऽहं निमग्ना शोकसागरे।
त्वयि पञ्चत्वमापन्ने महायूथपयूथपे4.20.9।।
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‘आपके साथ मधुर सुगन्धयुक्त वनों में हमने जो-जो विहार किये हैं, उन सबको इस समय आपने सदा के लिये समाप्त कर दिया
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'You are the leader of leaders. Now that you have attained heaven I am bereft of all joy, plunged in a sea of grief.
ShlokaShloka 9
हृदयं सुस्थिरं मह्यं दृष्ट्वा विनिहतं पतिम्।
यन्न शोकाभिसन्तप्तं स्फुटतेऽद्य सहस्रधा4.20.10।।
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‘निश्चय ही मेरा हृदय बड़ा कठोर है, जो आज आपको पृथ्वी पर पड़ा देखकर भी शोक से संतप्त हो फट नहीं जाता—इसके हजारों टुकड़े नहीं हो जाते
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'I presume my heart is strong, for it has not broken into a thousand pieces, even though I am overwhelmed with grief to see my husband fallen on the ground.
ShlokaShloka 10
सुग्रीवस्य त्वया भार्या हृता स च विवासितः।
यत्तु त्तस्य त्वया व्युष्टिः प्राप्तेयं प्लवगाधिप4.20.11।।
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‘निश्चय ही मेरा हृदय बड़ा कठोर है, जो आज आपको पृथ्वी पर पड़ा देखकर भी शोक से संतप्त हो फट नहीं जाता—इसके हजारों टुकड़े नहीं हो जाते
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'O king of monkeys you have banished Sugriva. You have usurped his wife. This is the fruit of your action.
ShlokaShloka 11
निश्श्रेयसपरा मोहात्त्वया चाहं विगर्हिता।
यैषाऽब्रुवं हितं वाक्यं वानरेन्द्र हितैषिणी4.20.12।।
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‘वानरराज! आपने जो सुग्रीव की स्त्री छीन ली और उन्हें घर से बाहर निकाल दिया, उसी का यह फल आपको प्राप्त हुआ है
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'O lord of monkeys wishing your wellbeing I tendered salutary advice. But out of delusion you despised them.
ShlokaShloka 12
रूपयौवनदृप्तानां दक्षिणानां च मानद।
नूनमप्सरसामार्य चित्तानि प्रमथिष्यसि4.20.13।।
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‘दूसरों को मान देने वाले आर्यपुत्र ! निश्चय ही आप स्वर्ग में जाकर रूप और यौवन के अभिमान से मत्त रहने वाली केलिकला में निपुण अप्सराओं के मन को अपने दिव्य सौन्दर्य से मथ डालेंगे
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'O venerable one you will surely churn the minds of the kindhearted celestial nymphs who are endowed with youth and beauty.
ShlokaShloka 13
कालो निस्संशयो नूनं जीवितान्तकरस्तव।
बलाद्येनावपन्नोऽसि सुग्रीवस्यावशो वशम्4.20.14।।
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‘दूसरों को मान देने वाले आर्यपुत्र ! निश्चय ही आप स्वर्ग में जाकर रूप और यौवन के अभिमान से मत्त रहने वाली केलिकला में निपुण अप्सराओं के मन को अपने दिव्य सौन्दर्य से मथ डालेंगे
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'No doubt time is inexorable. The time of your death had surely arrived.Now you, whom nobody could control, have come under the sway of Sugriva.
ShlokaShloka 14
वैधव्यं शोकसन्तापं कृपणं कृपणा सती।
अदुःखोपचिता पूर्वं वर्तयिष्याम्यनाथवत्।।4.20.15।।
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‘निश्चय ही आज आपके जीवन का अन्त कर देने वाला संशयरहित काल यहाँ आ पहुँचा था, जिसने किसी के भी वश में न आने वाले आपको बलपूर्वक सुग्रीव के वश में डाल दिया’
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'I have not experienced poverty or suffering before. Immersed in grief, like an orphan, now I am reduced to the pitiable condition of a widow.
ShlokaShloka 15
लालितश्चाङ्गदो वीरस्सुकुमारस्सुखोचितः।
वर्त्स्यते कामवस्थां मे पितृव्ये क्रोधमूर्छिते।।4.20.16।।
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(अब श्रीराम को सुनाकर बोली)—’ककुत्स्थकुल में अवतीर्ण हुए श्रीरामचन्द्रजी ने दूसरे के साथ युद्ध करते हुए वाली को मारकर अत्यन्त निन्दित कर्म किया है। इस कुत्सित कर्म को करके भी जो ये संतप्त नहीं हो रहे हैं, यह सर्वथा अनुचित है’
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'To what plight will the tender Angada, who has been tended affectionately and deserves comforts, be reduced when his uncle displays anger?
ShlokaShloka 16
कुरुष्व पितरं पुत्र सुदृष्टं धर्मवत्सलम्।
दुर्लभं दर्शनं वत्स तव तस्य भविष्यति।।4.20.17।।
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(फिर वाली से बोली-) मैंने कभी दीनतापूर्ण जीवन नहीं बिताया था, ऐसे महान् दुःख का सामना नहीं किया था; परंतु आज आपके बिना मैं दीन हो गयी, अब मुझे अनाथ की भाँति शोक-संताप से पूर्ण वैधव्य जीवन व्यतीत करना होगा
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(Turning to Angada Tara said) 'O son, look at your father, a lover of dharma. See him, as it will be difficult to see him later, dear'.
ShlokaShloka 17
समाश्वासय पुत्रं त्वं सन्देशं सन्दिशस्व मे।
मूर्ध्नि चैनं समाघ्राय प्रवासं प्रस्थितो ह्यसि4.20.18।।
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‘नाथ! आपने अपने वीरपुत्र अङ्गद को, जो सुख भोगने योग्य और सुकुमार है, बड़ा लाड़-प्यार किया था। अब क्रोध से पागल हुए चाचा के वश में पड़कर मेरे बेटे की क्या दशा होगी?
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'O lord you have set out on a long journey. Kiss your son on the forehead, enjoy its sweet smell, console him and give him your message.
ShlokaShloka 18
रामेण हि महत्कर्म कृतं त्वामभिनिघ्नता।
आनृण्यं च गतं तस्य सुग्रीवस्य प्रतिश्रवे4.20.19।।
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‘बेटा अङ्गद! अपने धर्मप्रेमी पिता को अच्छी तरह देख लो। अब तुम्हारे लिये उनका दर्शन दुर्लभ हो जायगा
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'Indeed, Rama has achieved a great feat in fulfilling his promise to Sugriva. He is acquitted of the debt by killing you.
ShlokaShloka 19
सकामो भव सुग्रीव रुमां त्वं प्रतिपत्स्यसे।
भुङ्क्षव राज्यमनुद्विग्नश्शस्तो भ्राता रिपुस्तव4.20.20।।
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‘प्राणनाथ! आप दूसरे देश को जा रहे हैं। अपने पुत्र का मस्तक सूंघकर इसे धैर्य बँधाइये और मेरे लिये भी कुछ संदेश दीजिये
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'(Now turning to Sugriva she said) O Sugriva your enemy brother has been killed and your desire has been fulfilled.You will get back Ruma and enjoy the kingdom without any obstacles.'
ShlokaShloka 20
किं मामेवं विलपतीं प्रेम्णा त्वं नाभिभाषसे।
इमाः पश्य वरा बह्वीर्भार्यास्ते वानरेश्वर4.20.21।।
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इस प्रकार श्रीवाल्मीकि निर्मित आर्षरामायण आदिकाव्य के किष्किन्धाकाण्ड में बीसवाँ सर्ग पूराहुआ
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'(To Vali she said) O lord of monkeys Why don't you speak to me loving words when I am wailing this way? Here are your excellent wives'
ShlokaShloka 21
तस्या विलपितं श्रुत्वा वानर्यस्सर्वतश्च ताः।
परिगृह्याङ्गदं दीनं दुःखार्ता परिचुक्रुशुः4.20.22।।
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(अब सुग्रीव को सुनाकर कहने लगी—) सुग्रीव! तुम्हारा मनोरथ सफल हो। तुम्हारे भाई, जिन्हें तुम अपना शत्रु समझते थे, मारे गये। अब बेखट के राज्य भोगो। रुमा को भी प्राप्त कर लोगे’
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On hearing the wailing of Tara, all the other wives of Vali held the piteous (in their arms) Angada and wailed, overwhelmed with sorrow:
ShlokaShloka 22
किमङ्गदं साङ्गदवीरबाहो
विहाय यास्यद्य चिरप्रवासम्।
न युक्तमेवं गुणसन्निकृष्टं
विहाय पुत्रं प्रियपुत्र गन्तुम्4.20.23।।
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(फिर वाली से बोली-) वानरेश्वर! मैं आपकी प्यारी पत्नी हूँ और इस तरह रोती-कलपती हूँ, फिर भी आप मुझसे बोलते क्यों नहीं हैं? देखिये, आपकी ये बहुत-सी सुन्दरी भार्याएँ यहाँ उपस्थित हैं’
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'O hero, adorned with armlets, why have you departed on a long journey, deserting your dear son Angada who possesses similar virtues like you? It is not proper.
ShlokaShloka 23
किमप्रियं ते प्रिय चारुवेष
मया कृतं नाथ सुतेन वा ते।
सहाङ्गदां मां प्रविहाय वीर
यत्प्रस्थितो दीर्घ मितः प्रवासम्4.20.24।।
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ताराका विलाप सुनकर अन्य वानर-पत्नियाँ भी सब ओर से अङ्गद को पकड़कर दीन एवं दुःख से व्याकुल हो जोर-जोर से क्रन्दन करने लगीं
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'O darling, attractively dressed, you are leaving me and Angada and going too far. What unpleasant deeds we have done (to deserve this).
ShlokaShloka 24
यद्यप्रियं किञ्चिदसम्प्रधार्य
कृतं मया स्यात्तव दीर्घबाहो।
क्षमस्व मे तद्धरिवंशनाथ
व्रजामि मूर्ध्ना तव वीर पादौ।।4.20.25।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
(तदनन्तर तारा ने फिर कहा-) ‘बाजूबन्द से विभूषित वीर भुजाओं वाले वानरराज! आप अङ्गद को छोड़कर दीर्घकाल के लिये दूसरे देश में क्यों जा रहे हैं? जो गुणों में आपके सर्वथा निकट है जो आपके समान ही गुणवान् है तथा जिसका प्रिय एवं मनोहर वेश है, ऐसे प्रिय पुत्र को त्यागकर इस प्रकार चला जाना आपके लिये कदापि उचित नहीं है
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'O longarmed chief of the monkey clan O warrior pardon me any wrong done unknowingly, inconsiderately. I touch your feet with my head.'
ShlokaShloka 25
तथा तु तारा करुणं रुदन्ती
भर्तुस्समीपे सह वानरीभिः।
व्यवस्यत प्रायमुपोपवेष्टु
मनिन्द्यवर्णा भुवि यत्र वाली4.20.26।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
‘महाबाहो! यदि नासमझी के कारण मैंने आपका कोई अपराध किया हो तो आप उसे क्षमा कर दें। वानरवंश के स्वामी वीर आर्यपुत्र! मैं आपके चरणों में मस्तक रखकर यह प्रार्थना करती हूँ’
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Beautiful Tara crying pathetically sat near her husband along with other female monkeys on the ground, determined to abstain from food and drink, awaiting death. इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये किष्किन्धाकाण्डे विंशस्सर्गः।। Thus ends the twentieth sarga of Kishkindakanda of the Holy Ramayana, the first epic composed by sage Valmiki.