Kishkindha Kanda

Sarga 18: Rama explains to Vali the righteous duties of kings -- justifies his action in killing him -- Vali pleads with Rama to protect Angada

किष्किन्धाकाण्डम् · सर्ग 18

62 shlokas

ShlokaShloka 1
इत्युक्तः प्रश्रितं वाक्यं धर्मार्थसहितं हितम्। परुषं वालिना रामो निहतेन विचेतसा4.18.1।।
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वहाँ मारे जाकर अचेत हुए वाली ने जब इस प्रकार विनयाभास, धर्माभास, अर्थाभास और हिताभास से युक्त कठोर बातें कहीं, आक्षेप किया, तब उन बातों को कहकर मौन हुए वानरश्रेष्ठ वाली से श्रीरामचन्द्रजी ने धर्म, अर्थ और श्रेष्ठ गुणों से युक्त परम उत्तम बात कही। उस समय वाली प्रभाहीन सूर्य, जलहीन बादल और बुझी हुई आग के समान श्रीहीन प्रतीत होता था
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To these harsh words though seemingly wellmeaning, courteous and righteous, Vali who had been mortally wounded and confused in mind, Rama replied:
ShlokaShloka 2
तं निष्प्रभमिवादित्यं मुक्ततोयमिवाम्बुदम्। उक्तवाक्यं हरिश्रेष्ठमुपशान्तमिवानलम्4.18.2।। धर्मार्थगुणसम्पन्नं हरीश्वरमनुत्तमम्। अधिक्षिप्तस्तदा रामः पश्चाद्वालिनमब्रवीत्4.18.3।।
हिन्दी अर्थ देखें
वहाँ मारे जाकर अचेत हुए वाली ने जब इस प्रकार विनयाभास, धर्माभास, अर्थाभास और हिताभास से युक्त कठोर बातें कहीं, आक्षेप किया, तब उन बातों को कहकर मौन हुए वानरश्रेष्ठ वाली से श्रीरामचन्द्रजी ने धर्म, अर्थ और श्रेष्ठ गुणों से युक्त परम उत्तम बात कही। उस समय वाली प्रभाहीन सूर्य, जलहीन बादल और बुझी हुई आग के समान श्रीहीन प्रतीत होता था
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To righteous Vali,the best of the monkeys, the lord of the monkeys, who looked like the Sun shorn of his brilliance or a raindrained cloud or a fire that had been extinguished. Rama, under the scanner, said in reply:
ShlokaShloka 3
धर्ममर्थं च कामं च समयं चापि लौकिकम्। अविज्ञाय कथं बाल्यान्मामिहाद्य विगर्हसे4.18.4।।
हिन्दी अर्थ देखें
वहाँ मारे जाकर अचेत हुए वाली ने जब इस प्रकार विनयाभास, धर्माभास, अर्थाभास और हिताभास से युक्त कठोर बातें कहीं, आक्षेप किया, तब उन बातों को कहकर मौन हुए वानरश्रेष्ठ वाली से श्रीरामचन्द्रजी ने धर्म, अर्थ और श्रेष्ठ गुणों से युक्त परम उत्तम बात कही। उस समय वाली प्रभाहीन सूर्य, जलहीन बादल और बुझी हुई आग के समान श्रीहीन प्रतीत होता था
Show English Translation
'Without correct knowledge of dharma, artha, kama and worldly ways, how do you reproach me bitterly now in total ignorance?
ShlokaShloka 4
अपृष्ट्वा बुद्धिसम्पन्नान्वृद्धानाचार्यसम्मतान्। सौम्य वानरचापल्यात्किं मावक्तुमिहेच्छसि4.18.5।।
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(श्रीराम बोले-) ‘वानर! धर्म, अर्थ, काम और लौकिक सदाचार को तो तुम स्वयं ही नहीं जानते हो। फिर बालोचित अविवेक के कारण आज यहाँ मेरी निन्दा क्यों करते हो?
Show English Translation
'O gentle Vali why do you speak with monkeyish frivolousness, without consulting the elders and teachers endowed with intelligence?
ShlokaShloka 5
इक्ष्वाकूणामियं भूमिस्सशैलवनकानना। मृगपक्षिमनुष्याणां निग्रहप्रग्रहावपि4.18.6।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘पर्वत, वन और काननों से युक्त यह सारी पृथ्वी इक्ष्वाकुवंशी राजाओं की है; अतः वे यहाँ के पशु-पक्षी और मनुष्यों पर दया करने और उन्हें दण्ड देने के भी अधिकारी हैं
Show English Translation
'This earth including mountains, groves and forests, animals, birds and humans belongs to the Ikshvaku kings.The right of purnishment and reward also vests with them.
ShlokaShloka 6
तां पालयति धर्मात्मा भरतस्सत्यवागृजुः। धर्मकामार्थतत्त्वज्ञो निग्रहानुग्रहे रतः4.18.7।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘पर्वत, वन और काननों से युक्त यह सारी पृथ्वी इक्ष्वाकुवंशी राजाओं की है; अतः वे यहाँ के पशु-पक्षी और मनुष्यों पर दया करने और उन्हें दण्ड देने के भी अधिकारी हैं
Show English Translation
'Bharata, righteous, truthful, upright, knower of dharma, artha and kama and dispenser of punishment and rewards, rules this earth.
ShlokaShloka 7
नयश्च विनयश्चोभौ यस्मिन्सत्यं च सुस्थितम्। विक्रमश्च यथा दृष्टस्स राजा देशकालवित्4.18.8।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘धर्मात्मा राजा भरत इस पृथ्वी का पालन करते हैं। वे सत्यवादी, सरल तथा धर्म, अर्थ और काम के तत्त्व को जानने वाले हैं; अतः दुष्टों के निग्रह तथा साधु पुरुषों के प्रति अनुग्रह करने में तत्पर रहते हैं
Show English Translation
'Bharata in whom justice and discipline, truth and courage along with the knowledge of time and place for action are firmly rooted is king (of this earth).
ShlokaShloka 8
तस्य धर्मकृतादेशा वयमन्ये च पार्थिवाः। चरामो वसुधां कृत्स्नां धर्मसन्तानमिच्छवः4.18.9।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘भरत की ओर से हमें तथा दूसरे राजाओं को यह आदेश प्राप्त है कि जगत् में धर्म के पालन और प्रसार के लिये यत्न किया जाय। इसलिये हमलोग धर्म का प्रचार करने की इच्छा से सारी पृथ्वी पर विचरते रहते हैं
Show English Translation
'Following his command, in confirmity with dharma we and the other kings also move all over the entire world desirous of promoting dharma.
ShlokaShloka 9
तस्मिन्नृपतिशार्दूले भरते धर्मवत्सले। पालयत्यखिलां भूमिं कश्चरेद्धर्मनिग्रहम्4.18.10।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘भरत की ओर से हमें तथा दूसरे राजाओं को यह आदेश प्राप्त है कि जगत् में धर्म के पालन और प्रसार के लिये यत्न किया जाय। इसलिये हमलोग धर्म का प्रचार करने की इच्छा से सारी पृथ्वी पर विचरते रहते हैं
Show English Translation
'Who can stray from the path of dharma when the whole world is ruled by Bharata, a tiger among kings, and a lover of dharma?
ShlokaShloka 10
ते वयं धर्मविभ्रष्टं स्वधर्मे परमे स्थिताः। भरताज्ञां पुरस्कृत्य निगृह्णीमो यथाविधि4.18.11।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘राजाओं में श्रेष्ठ भरत धर्म पर अनुराग रखने वाले हैं। वे समूची पृथ्वी का पालन कर रहे हैं। उनके रहते हुए इस पृथ्वी पर कौन प्राणी धर्म के विरुद्ध आचरण कर सकता है ?
Show English Translation
'By the command of Bharata ,all of us are devoted to our duty of upholding dharma and virtue and duly punish those who deviate from the path of dharma.
ShlokaShloka 11
त्वं तु संक्लिष्टधर्मा च कर्मणा च विगर्हितः। कामतन्त्रप्रधानश्च न स्थितो राजवर्त्मनि4.18.12।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘हम सब लोग अपने श्रेष्ठ धर्म में दृढ़तापूर्वक स्थित रहकर भरत की आज्ञा को सामने रखते हुए धर्ममार्ग से भ्रष्ट पुरुष को विधिपूर्वक दण्ड देते हैं।
Show English Translation
'You have violated dharma. You stand condemned for your actions. Passion is your priority. You have strayed from the right path of kings.
ShlokaShloka 12
ज्येष्ठो भ्राता पिता चैव यश्च विद्यां प्रयच्छति। त्रयस्ते पितरो ज्ञेया धर्म्ये च पथि वर्तिनः4.18.13।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘इसी प्रकार छोटा भाई, पुत्र और गुणवान् शिष्य —ये तीन पुत्र के तुल्य समझे जाने योग्य हैं। उनके प्रति ऐसा भाव रखने में धर्म ही कारण है।
Show English Translation
ShlokaShloka 13
यवीयानात्मनः पुत्रशशिष्यश्चापि गुणोदितः। पुत्रवत्ते त्रयश्चिन्त्या धर्मश्चेदत्रकारणम्4.18.14।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘इसी प्रकार छोटा भाई, पुत्र और गुणवान् शिष्य —ये तीन पुत्र के तुल्य समझे जाने योग्य हैं। उनके प्रति ऐसा भाव रखने में धर्म ही कारण है।
Show English Translation
ShlokaShloka 14
सूक्ष्मः परमदुरजेयस्सतां धर्मः प्लवङ्गम। हृदिस्थस्सर्वभूतानामात्मा वेद शुभाशुभम्4.18.15।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘इसी प्रकार छोटा भाई, पुत्र और गुणवान् शिष्य —ये तीन पुत्र के तुल्य समझे जाने योग्य हैं। उनके प्रति ऐसा भाव रखने में धर्म ही कारण है।
Show English Translation
'O monkey dharma is very subtle. It is extremely difficult to understand. Installed in the hearts of all living beings the self knows good and evil (soul is the witness of good and evil).
ShlokaShloka 15
चपलश्चपलैस्सार्धं वानरैरकृतात्मभिः। जात्यन्ध इव जात्यन्धैर्मन्त्रयन् प्रेक्षसे नु किम्4.18.16।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘वानर ! सज्जनों का धर्म सूक्ष्म होता है, वह परम दुर्जेय है-उसे समझना अत्यन्त कठिन है। समस्त प्राणियों के अन्तःकरण में विराजमान जो परमात्मा हैं, वे ही सबके शुभ और अशुभ को जानते हैं
Show English Translation
'You are fickle by nature. Your consultants are frivolous, pettyminded monkeys. It is like one born blind suppporting another blind by birth. What do you know (about dharma)?
ShlokaShloka 16
अहं तु व्यक्ततामस्य वचनस्य ब्रवीमि ते। न हि मां केवलं रोषात्त्वं विगर्हितुमर्हसि4.18.17।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘तुम स्वयं भी चपल हो और चञ्चल चित्तवाले अजितात्मा वानरों के साथ रहते हो; अतः जैसे कोई जन्मान्ध पुरुष जन्मान्धों से ही रास्ता पूछे, उसी प्रकार तुम उन चपल वानरों के साथ परामर्श करते हो, फिर तुम धर्म का विचार क्या कर सकते हो?—उसके स्वरूप को कैसे समझ सकते हो?
Show English Translation
'I shall explain to you clearly (the reason for striking you down). It is not proper for you to despise me with mere anger and malice.
ShlokaShloka 17
तदेतत्कारणं पश्य यदर्थं त्वं मया हतः। भ्रातुर्वर्तसि भार्यायां त्यक्त्वा धर्मं सनातनम्4.18.18।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘मैंने यहाँ जो कुछ कहा है, उसका अभिप्राय तुम्हें स्पष्ट करके बताता हूँ। तुम्हें केवल रोषवश मेरी निन्दा नहीं करनी चाहिये
Show English Translation
'Now know the reason why I struck you down. Having abandoned the eternal law, you are living with your younger brother's wife.
ShlokaShloka 18
अस्य त्वं धरमाणस्य सुग्रीवस्य महात्मनः। रुमायां वर्तसे कामात्स्नुषायां पापकर्मकृत्4.18.19।।
हिन्दी अर्थ देखें
इस प्रकार श्रीवाल्मीकि निर्मित आपरामायण आदिकाव्य के किष्किन्धाकाण्ड में अठारहवाँ सर्ग पूरा हुआ
Show English Translation
'You are a sinner, since you live with Ruma, who is your virtual daughterinlaw, when the great self Sugriva is alive. (A younger brother is like a son and his wife, a daughterinlaw).
ShlokaShloka 19
तद्व्यतीतस्य ते धर्मात्कामवृत्तस्य वानर। भ्रातृभार्यावमर्शेऽस्मिन्दण्डोऽयं प्रतिपादितः4.18.20।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘इस महामना सुग्रीव के जीते-जी इसकी पत्नी रुमा का, जो तुम्हारी पुत्रवधू के समान है, कामवश उपभोग करते हो अतः पापाचारी हो
Show English Translation
'O monkey since you have violated morality by sinning against your brother's wife this punishment is justified.
ShlokaShloka 20
न हि धर्मविरुद्धस्य लोकवृत्तादपेयुषः। दण्डादन्यत्र पश्यामि निग्रहं हरियूथप4.18.21।
हिन्दी अर्थ देखें
वानरराज! जो लोकाचार से भ्रष्ट होकर लोकविरुद्ध आचरण करता है, उसे रोकने या राह पर लाने के लिये मैं दण्ड के सिवा और कोई उपाय नहीं देखता
Show English Translation
'O lord of monkeys I do not see any other way of controlling a person excepting punishing the one who has acted against dharma and swerved from the accepted code of conduct.
ShlokaShloka 21
न हि ते मर्षये पापं क्षत्रियोऽहं कुलोद्भवः। औरसीं भगिनीं वापि भार्यां वाप्यनुजस्य यः4.18.22।। प्रचरेत नरः कामात्तस्य दण्डो वधः स्मृतः।
हिन्दी अर्थ देखें
वानरराज! जो लोकाचार से भ्रष्ट होकर लोकविरुद्ध आचरण करता है, उसे रोकने या राह पर लाने के लिये मैं दण्ड के सिवा और कोई उपाय नहीं देखता
Show English Translation
'I am a kshatriya born of a good family. I will not pardon you for your sin. Whosoever transgresses dharma against his own daughter, sister or brother's wife out of lust should be killed according to smriti.
ShlokaShloka 22
भरतस्तु महीपालो वयं त्वादेशवर्तिनः4.18.23।। त्वं तु धर्मादतिक्रान्तः कथं शक्यं उपेक्षितुम्।
Show English Translation
'Bharata is a king and we follow his command. How can you, who have strayed from dharma, go unpunished?
ShlokaShloka 23
गुरूर्धर्मव्यतिक्रान्तं प्राज्ञो धर्मेण पालयन्4.18.24।। भरतः कामवृत्तानां निग्रहे पर्यवस्थितः।
Show English Translation
'Wise Bharata being a respectable king rules by dharma. By the command of Bharata, we are bent upon punishing those who have strayed from dharma by being addicted to sensual pleasures.
ShlokaShloka 24
वयं तु भरतादेश विधिं कृत्वा हरीश्वर। त्वद्विधान्भिन्नमर्यादान्नियन्तुपर्यवस्थिताः4.18.25।।
Show English Translation
'O Vali we have to follow Bharata's command and are bent upon punishing those wicked people who deviate from the bounds of dharma.
ShlokaShloka 25
सुग्रीवेण च मे सख्यं लक्ष्मणेन यथा तथा। दारराज्यनिमित्तं च निःश्रेयसि रत स्स मे4.18.26।। प्रतिज्ञा च मया दत्ता तदा वानरसन्निधौ। प्रतिज्ञा च कथं शक्या मद्विधेनानवेक्षितुम्4.18.27।।
Show English Translation
'My friendship with Sugriva is as strong as that with Lakshmana. Its motive is the recovery of his wife and sovereignty. I have promised this to him in the presence of monkeys. How can a pledge remain unhonoured by a person like me? How is it possible?
ShlokaShloka 26
तदेभिः कारणैस्सर्वैर्महद्भिर्धर्मसंहितैः4.18.28।। शासनं तप यद्युक्तं तद्भवाननुमन्यताम्।
हिन्दी अर्थ देखें
सुग्रीव के साथ मेरी मित्रता हो चुकी है। उनके प्रति मेरा वही भाव है, जो लक्ष्मण के प्रति है। वे अपनी स्त्री और राज्य की प्राप्ति के लिये मेरी भलाई करने के लिये भी कटिबद्ध हैं। मैंने वानरों के समीप इन्हें स्त्री और राज्य दिलाने के लिये प्रतिज्ञा भी कर ली है। ऐसी दशा में मेरे-जैसा मनुष्य अपनी प्रतिज्ञा की ओर से कैसे दृष्टि हटा सकता है
Show English Translation
'Knowing all these reasons(many violations of dharma), it is proper for you as a king to approve of the punishment accorded to you in consonance with dharma.
ShlokaShloka 27
सर्वथा धर्म इत्येव द्रष्टव्यस्तव निग्रहः4.18.29।। वयस्यस्योपकर्तव्यं धर्ममेवानुपश्यतः।
हिन्दी अर्थ देखें
सुग्रीव के साथ मेरी मित्रता हो चुकी है। उनके प्रति मेरा वही भाव है, जो लक्ष्मण के प्रति है। वे अपनी स्त्री और राज्य की प्राप्ति के लिये मेरी भलाई करने के लिये भी कटिबद्ध हैं। मैंने वानरों के समीप इन्हें स्त्री और राज्य दिलाने के लिये प्रतिज्ञा भी कर ली है। ऐसी दशा में मेरे-जैसा मनुष्य अपनी प्रतिज्ञा की ओर से कैसे दृष्टि हटा सकता है
Show English Translation
'Punishment given to you should be viewed as a right course of action in all respects. This is the duty of a trustworthy friend who follows dharma.
ShlokaShloka 28
शक्यं त्वयाऽपि तत्कार्यं धर्ममेवानुपश्यता4.18.30।। श्रूयते मनुना गीतौ श्लोकौ चारित्रवत्सलौ। गृहीतौ धर्मकुशलैस्तत्तथा चरितं हरे4.18.31।।
हिन्दी अर्थ देखें
ये सभी धर्मानुकूल महान् कारण एक साथ उपस्थित हो गये, जिनसे विवश होकर तुम्हें उचित दण्ड देना पड़ा है। तुम भी इसका अनुमोदन करो
Show English Translation
'You should also have acted in that manner considering dharma. Now listen to what Manu said, in two verses that hold good traditions dear which are accepted by men wellversed in dharma. O monkey the action taken by me is in conformity with this.
ShlokaShloka 29
राजभिर्धृतदण्डास्तु कृत्वा पापानि मानवाः। निर्मलास्स्वर्गमायान्ति सन्तस्सुकृतिनो यथा4.18.32।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘धर्मपर दृष्टि रखने वाले मनुष्य के लिये मित्र का उपकार करना धर्म ही माना गया है; अतः तुम्हें जो यह दण्ड दिया गया है, वह धर्म के अनुकूल है। ऐसा ही तुम्हें समझना चाहिये
Show English Translation
'Men who have perpetrated sins should be subjected to punishment by kings so that they become stainless and attain heaven like pious men who have performed good deeds.
ShlokaShloka 30
शासनाद्वाऽपिमोक्षाद्वा स्तेनः स्तेयाद्विमुच्यते। राजात्वशासन्पापस्य तदवाप्नोति किल्बिषम्4.18.33।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘यदि राजा होकर तुम धर्म का अनुसरण करते तो तुम्हें भी वही काम करना पड़ता, जो मैंने किया है। मनु ने राजोचित सदाचार का प्रतिपादन करने वाले दो श्लोक कहे हैं, जो स्मृतियों में सुने जाते हैं और जिन्हें धर्मपालन में कुशल पुरुषों ने सादर स्वीकार किया। उन्हीं के अनुसार इस समय यह मेरा बर्ताव हुआ है (वे श्लोक इस प्रकार हैं-)
Show English Translation
ShlokaShloka 31
आर्येण मम मान्धात्रा व्यसनं घोरमीप्सितम्। श्रमणेन कृते पापे यथा पापं कृतं त्वया4.18.34।।
हिन्दी अर्थ देखें
“तुमने जैसा पाप किया है, वैसा ही पाप प्राचीन काल में एक श्रमण ने किया था। उसे मेरे पूर्वज महाराज मान्धाता ने बड़ा कठोर दण्ड दिया था, जो शास्त्र के अनुसार अभीष्ट था
Show English Translation
'In the past a similar sin was perpetrated by Sramana, a revered soul (mendicant) and Mandhata, a noble king of my race inflicted terrible punishment on him.
ShlokaShloka 32
अन्यैरपि कृतं पापं प्रमत्तैर्वसुधाधिपैः। प्रायश्चित्तं च कुर्वन्ति तेन तच्छाम्यते रजः4.18.35।।
हिन्दी अर्थ देखें
“तुमने जैसा पाप किया है, वैसा ही पाप प्राचीन काल में एक श्रमण ने किया था। उसे मेरे पूर्वज महाराज मान्धाता ने बड़ा कठोर दण्ड दिया था, जो शास्त्र के अनुसार अभीष्ट था
Show English Translation
'Vicious deeds have been committed by others when the kings were not watchful. Kings punish such sinners when they are vigilant. Otherwise they have to atone for their negligence.
ShlokaShloka 33
तदलं परितापेन धर्मतः परिकल्पितः। वधो वा��रशार्दूल न वयं स्ववशे स्थिता:।।4.18.36।।
हिन्दी अर्थ देखें
“तुमने जैसा पाप किया है, वैसा ही पाप प्राचीन काल में एक श्रमण ने किया था। उसे मेरे पूर्वज महाराज मान्धाता ने बड़ा कठोर दण्ड दिया था, जो शास्त्र के अनुसार अभीष्ट था
Show English Translation
'O tiger among monkeys do not regret. Your death has the sanction of dharma. We are under the control of sastras. We are committed to them. We do not have the freedom to act independently.
ShlokaShloka 34
शृणु चाप्यपरं भूयः कारणं हरिपुङ्गव। यच्छ्रुत्वा हेतुमद्वीर न मन्युं कर्तुमर्हसि4.18.37।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘यदि राजा दण्ड देने में प्रमाद कर जायँ तो उन्हें दूसरों के किये हुए पाप भी भोगने पड़ते हैं तथा उसके लिये जब वे प्रायश्चित्त करते हैं तभी उनका दोष शान्त होता है
Show English Translation
'O hero O best of monkeys listen to me. I will give you one more reason. On hearing it, I hope you would not be angry with me.
ShlokaShloka 35
न मे तत्र मनस्तापो न मन्युर्हरिपुङ्गव। वागुराभिश्च पाशैश्च कूटैश्च विविधैर्नराः4.18.38।। प्रतिच्छन्नाश्च दृश्याश्च गृह्णन्ति सुबहून्मृगान्।
हिन्दी अर्थ देखें
‘अतः वानरश्रेष्ठ! पश्चात्ताप करने से कोई लाभ नहीं है। सर्वथा धर्म के अनुसार ही तुम्हारा वध किया गया है; क्योंकि हमलोग अपने वश में नहीं हैं (शास्त्र के ही अधीन हैं)
Show English Translation
'O best of monkeys I have no mental agony nor do I regret in this case. Hidden from view or out in the open, people catch animals by means of snares or ropes or through other tricks.
ShlokaShloka 36
प्रधावितान्वा वित्रस्तान्विस्रब्धांश्चापि निष्ठितान्4.18.39।। प्रमत्तानप्रमत्तान्वा नरा मांसार्थिनो भृशम्। विध्यन्ति विमुखांश्चापि न च दोषोऽत्र विद्यते4.18.40।।
हिन्दी अर्थ देखें
वानरश्रेष्ठ! इस कार्य के लिये मेरे मन में न तो संताप होता है और न खेद ही। मनुष्य (राजा आदि)बड़े-बड़े जाल बिछाकर फंदे फैलाकर और नाना प्रकार के कूट उपाय (गुप्त गड्ढों के निर्माण आदि) करके छिपे रहकर सामने आकर बहुत-से मृगों को पकड़ लेते हैं; भले ही वे भयभीत होकर भागते हों या विश्वस्त होकर अत्यन्त निकट बैठे हों
Show English Translation
'People seeking animal flesh for food kill animals alarmed or unalarmed, animals that run away or animals that stand still. They kill animals whether they are alert or not and no blemish is attached.
ShlokaShloka 37
यान्ति राजर्षयश्चात्र मृगयां धर्मकोविदाः। तस्मात्त्वं निहतो युद्धे मया बाणेन वानर4.18.41।। अयुध्यन्प्रतियुध्यन्वा यस्माच्छाखामृगो ह्यसि।
हिन्दी अर्थ देखें
वानरश्रेष्ठ! इस कार्य के लिये मेरे मन में न तो संताप होता है और न खेद ही। मनुष्य (राजा आदि)बड़े-बड़े जाल बिछाकर फंदे फैलाकर और नाना प्रकार के कूट उपाय (गुप्त गड्ढों के निर्माण आदि) करके छिपे रहकर सामने आकर बहुत-से मृगों को पकड़ लेते हैं; भले ही वे भयभीत होकर भागते हों या विश्वस्त होकर अत्यन्त निकट बैठे हों
Show English Translation
'O monkey even royal saints wellversed in dharma go for hunting. I struck you down with an arrow whether you were fighting with Sugriva or not, since you are a monkey. (You can be hit whether you are fighting face to face or not).
ShlokaShloka 38
दुर्लभस्य च धर्मस्य जीवितस्य शुभस्य च4.18.42।। राजानो वानरश्रेष्ठ प्रदातारो न संशयः।
हिन्दी अर्थ देखें
वानरश्रेष्ठ! इस कार्य के लिये मेरे मन में न तो संताप होता है और न खेद ही। मनुष्य (राजा आदि)बड़े-बड़े जाल बिछाकर फंदे फैलाकर और नाना प्रकार के कूट उपाय (गुप्त गड्ढों के निर्माण आदि) करके छिपे रहकर सामने आकर बहुत-से मृगों को पकड़ लेते हैं; भले ही वे भयभीत होकर भागते हों या विश्वस्त होकर अत्यन्त निकट बैठे हों
Show English Translation
'O best of monkeys kings are donors of dharma, life and auspiciousness to people which is difficult to acquire. There is no doubt about it.
ShlokaShloka 39
तान्न हिंस्यान्न चाक्रोशेन्नाक्षिपेन्नाप्रियं वदेत्4.18.43।। देवा मानुषरूपेण चरन्त्येते महीतले।
हिन्दी अर्थ देखें
‘मांसाहारी मनुष्य (क्षत्रिय) सावधान, असावधान अथवा विमुख होकर भागने वाले पशुओं को भी अत्यन्त घायल कर देते हैं; किंतु उनके लिये इस मृगया में दोष नहीं होता
Show English Translation
'One should not insult kings, nor shout at them, nor disregard them nor speak unpleasant words to them. They are gods in human form moving on this earth.
ShlokaShloka 40
त्वं तु धर्ममविज्ञाय केवलं रोषमास्थितः4.18.44।। प्रदूषयसि मां धर्मे पितृपैतामहे स्थितम्।
हिन्दी अर्थ देखें
‘वानर! धर्मज्ञ राजर्षि भी इस जगत् में मृगया के लिये जाते हैं और विविध जन्तुओं का वध करते हैं। इसलिये मैंने तुम्हें युद्ध में अपने बाण का निशाना बनाया है। तुम मुझसे युद्ध करते थे या नहीं करते थे, तुम्हारी वध्यता में कोई अन्तर नहीं आता; क्योंकि तुम शाखामृग हो (और मृगया करने का क्षत्रिय को अधिकार है)
Show English Translation
'Seized with improper anger, you are reproaching one who is devoted to dharma, without knowing that I follow the code of conduct that has been passed on by my fathers and forefathers.'
ShlokaShloka 41
एवमुक्तस्तु रामेण वाली प्रव्यथितो भृशम्4.18.45।। न दोषं राघवे दध्यौ धर्मेऽधिगतनिश्चयः।
हिन्दी अर्थ देखें
‘वानरश्रेष्ठ! राजा लोग दुर्लभ धर्म, जीवन और लौकिक अभ्युदय के देने वाले होते हैं। इसमें संशय नहीं है
Show English Translation
Vali was very much pained to hear Rama. He became free from confusion regarding dharma and no longer found fault with Rama.
ShlokaShloka 42
प्रत्युवाच ततो रामं प्राञ्जलिर्वानरेश्वरः।।4.18.46।। यत्त्वमात्थ नरश्रेष्ठ तदेवं नात्र संशयः।
हिन्दी अर्थ देखें
‘अतः उनकी हिंसा न करे, उनकी निन्दा न करे, उनके प्रति आक्षेप भी न करे और न उनसे अप्रिय वचन ही बोले; क्योंकि वे वास्तव में देवता हैं, जो मनुष्य रूप से इस पृथ्वी पर विचरते रहते हैं
Show English Translation
Thereafter Vali offered obeisance with folded palms to Rama, saying, 'O best among men whatever you have spoken is undoubtedly true.'
ShlokaShloka 43
प्रतिवक्तुं प्रकृष्टे हि नापकृष्टस्तु शक्नुयात्4.18.47।। यदयुक्तं मया पूर्वं प्रमादाद्वाक्यमप्रियम्। तत्रापि खलु मे दोषं कर्तुं नार्हसि राघव।
हिन्दी अर्थ देखें
श्रीराम के ऐसा कहने पर वाली के मन में बड़ी व्यथा हुई। इसे धर्म के तत्त्व का निश्चय हो गया। उसने श्रीरामचन्द्रजी के दोष का चिन्तन त्याग दिया
Show English Translation
ShlokaShloka 44
तदयुक्तं मया पूर्वं प्रमादादुक्तमप्रियम् । तत्रापि खलु मे दोषं कर्तुं नार्हसि राघव ।। 4.18.48 ।।
हिन्दी अर्थ देखें
श्रीराम के ऐसा कहने पर वाली के मन में बड़ी व्यथा हुई। इसे धर्म के तत्त्व का निश्चय हो गया। उसने श्रीरामचन्द्रजी के दोष का चिन्तन त्याग दिया
Show English Translation
In Progress
ShlokaShloka 45
त्वं हि दृष्टार्थतत्त्वज्ञ: प्रजानां च हिते रतः। कार्यकारणसिद्धौ च प्रसन्ना बुद्धिरव्यया4.18.49।।
हिन्दी अर्थ देखें
इसके बाद वानरराज वाली ने श्रीरामचन्द्रजी से हाथ जोड़कर कहा—’नरश्रेष्ठ! आप जो कुछ कहते हैं, बिलकुल ठीक है; इसमें संशय नहीं है
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'You are a wise man given to truth and righteousness.You remain devoted to people's wellbeing. As you know for certain about cause and effect your intellect is sound and words pleasant.
ShlokaShloka 46
मामप्यगतधर्माणं व्यतिक्रान्तपुरस्कृतम्। धर्मसंहितया वाचा धर्मज्ञ परिपालय4.18.50।।
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‘धर्मज्ञ! मैं धर्मभ्रष्ट प्राणियों में अग्रगण्य हूँ और इसी रूप में मेरी सर्वत्र प्रसिद्धि है तो भी आज आपकी शरण में आया हूँ। अपनी धर्मतत्त्व की वाणी से आज मेरी भी रक्षा कीजिये’
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'O knower of dharma, I did not follow dharma in the past. I have trangressed the bounds of dharma. Say, you have pardoned me, protect me in a righteous manner.
ShlokaShloka 47
न त्वात्मानमहं शोचे न तारां न च बान्धवान्। यथा पुत्रं गुणज्येष्ठमङ्गदं कनकाङ्गदम् 4.18.51।।
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‘धर्मज्ञ! मैं धर्मभ्रष्ट प्राणियों में अग्रगण्य हूँ और इसी रूप में मेरी सर्वत्र प्रसिद्धि है तो भी आज आपकी शरण में आया हूँ। अपनी धर्मतत्त्व की वाणी से आज मेरी भी रक्षा कीजिये’
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'I neither grieve for myself nor for Tara nor for my kinsmen. But I do for my son Angada adorned with golden armlets. He is embellished with all virtues.
ShlokaShloka 48
स ममादर्शनाद्दीनो बाल्यात्प्रभृति लालितः। तटाक इव पीताम्बुरुपशोषं गमिष्यति4.18.52।।
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‘धर्मज्ञ! मैं धर्मभ्रष्ट प्राणियों में अग्रगण्य हूँ और इसी रूप में मेरी सर्वत्र प्रसिद्धि है तो भी आज आपकी शरण में आया हूँ। अपनी धर्मतत्त्व की वाणी से आज मेरी भी रक्षा कीजिये’
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'I loved him very much from his childhood. He will grow depressed in my absence. He will become like a pond whose waters have been dried up.
ShlokaShloka 49
बालश्चाकृतबुद्धिश्च एकपुत्रश्च मे प्रियः। तारेयो राम भवता रक्षणीयो महाबलः4.18.53।।
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इतना कहते-कहते आँसुओं से वाली का गला भर आया और वह कीचड़ में फँसे हुए हाथी की तरह ‘ आर्तनाद करके श्रीराम की ओर देखता हुआ धीरे-धीरे बोला
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'O Rama he is my only son through Tara and dear to me. He is young,innocent but strong.He deserves to be protected by you.
ShlokaShloka 50
सुग्रीवे चाङ्गदे चैव विधत्स्व मतिम���त्तमाम्। त्वं हि शास्ता च गोप्ता च कार्याकार्यविधौ स्थितः4.18.54।।
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‘भगवन्! मुझे अपने लिये, तारा के लिये तथा बन्धु-बान्धवों के लिये भी उतना शोक नहीं होता है, जितना सुवर्ण का अङ्गद धारण करने वाले श्रेष्ठ गुणसम्पन्न पुत्र अङ्गद के लिये हो रहा है।
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'Shower equal affection from your heart on Sugriva and Angada. You are their protector and punisher also. You know what should and should not be done.
ShlokaShloka 51
या ते नरपते वृत्तिर्भरते लक्ष्मणे च या। सुग्रीवे चाङ्गदे राजंस्तां त्वमाधातुमिहासि4.18.55।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘श्रीराम! वह अभी बालक है। उसकी बुद्धि परिपक्व नहीं हुई है। मेरा इकलौता बेटा होने के कारण ताराकुमार अङ्गद मुझे बड़ा प्रिय है। आप मेरे उस महाबली पुत्र की रक्षा कीजियेगा
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'O lord of men may you have the same kind of affection for Sugriva and Angada as you have for Bharata and Lakshmana.
ShlokaShloka 52
मद्दोषकृतदोषां तां यथा तारां तपस्विनीम्। सुग्रीवो नावमन्येत तथाऽवस्थातुमर्हसि4.18.56।।
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‘श्रीराम! वह अभी बालक है। उसकी बुद्धि परिपक्व नहीं हुई है। मेरा इकलौता बेटा होने के कारण ताराकुमार अङ्गद मुझे बड़ा प्रिय है। आप मेरे उस महाबली पुत्र की रक्षा कीजियेगा
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'I hope Tara will not be made to suffer because of my offence. Make Sugriva not to run wretched Tara down.
ShlokaShloka 53
त्वया ह्यनुगृहीतेन राज्यं शक्यमुपासितुम्4.18.57।। त्वद्वशे वर्तमानेन तव चित्तानुवर्तिना। शक्यं दिवं चार्जयितुं वसुधां चापि शासितुम्4.18.58।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘राजन्! नरेश्वर! भरत और लक्ष्मण के प्रति आपका जैसा बर्ताव है, वही सुग्रीव तथा अङ्गद के प्रति भी होना चाहिये। आप उसी भाव से इन दोनों का स्मरण करें
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'It is possible for a person favoured by you to rule the kingdom.It is possible for one who is under your control and acts according to your will to rule the entire world and earn heaven.
ShlokaShloka 54
त्वत्तोऽहं वधमाकाङ्क्षन्वार्यमाणोऽपि तारया। सुग्रीवेण सह भ्रात्रा द्वन्द्वयुद्धमुपागतः4.18.59।। इत्युक्त्वा सन्नतो रामं विरराम हरीश्वरः।
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‘राजन्! नरेश्वर! भरत और लक्ष्मण के प्रति आपका जैसा बर्ताव है, वही सुग्रीव तथा अङ्गद के प्रति भी होना चाहिये। आप उसी भाव से इन दोनों का स्मरण करें
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'Even though I was prevented by Tara, I came for a duel with Sugriva since I wished to die in your hands.' Having spoken thus to Rama, Vali fell silent.
ShlokaShloka 55
स तमाश्वासयद्रामो वालिनं व्यक्तदर्शनम्4.18.60।। सामसम्पन्नया वाचा धर्मतत्त्वार्थयुक्तया।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जो दण्डनीय पुरुष को दण्ड देता है तथा जो दण्ड का अधिकारी होकर दण्ड भोगता है, उनमें से दण्डनीय व्यक्ति अपने अपराध के फलरूप में शासक का दिया हुआ दण्ड भोगकर तथा दण्ड देने वाला शासक उसके उस फलभोग में कारणनिमित्त बनकर कृतार्थ हो जाते हैं—अपना-अपना कर्तव्य पूरा कर लेने के कारण कर्मरूप ऋण से मुक्त हो जाते हैं। अतः वे दुःखी नहीं होते
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Now Vali was able to see clearly. Rama consoled him with words of peace and tranquillity, truth and righteousness.
ShlokaShloka 56
न सन्तापस्त्वया कार्य एतदर्थं प्लवङ्गम4.18.61।। न वयं भवता चिन्त्या नाप्यात्मा हरिसत्तम। वयं भवद्विशेषेण धर्मतः कृतनिश्चयाः4.18.62।।
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‘जो दण्डनीय पुरुष को दण्ड देता है तथा जो दण्ड का अधिकारी होकर दण्ड भोगता है, उनमें से दण्डनीय व्यक्ति अपने अपराध के फलरूप में शासक का दिया हुआ दण्ड भोगकर तथा दण्ड देने वाला शासक उसके उस फलभोग में कारणनिमित्त बनकर कृतार्थ हो जाते हैं—अपना-अपना कर्तव्य पूरा कर लेने के कारण कर्मरूप ऋण से मुक्त हो जाते हैं। अतः वे दुःखी नहीं होते
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'O best of monkeys, abandon all your anxiety on this score. Bother not about us or about yourself. Whatever has happened, has happened in consonance with dharma.
ShlokaShloka 57
दण्ड्ये यः पातयेद्दण्डं दण्ड्यो यश्चापि दण्ड्यते। कार्यकारणसिद्धार्था वुभौ तौ नावसीदतः4.18.63।।
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‘जो दण्डनीय पुरुष को दण्ड देता है तथा जो दण्ड का अधिकारी होकर दण्ड भोगता है, उनमें से दण्डनीय व्यक्ति अपने अपराध के फलरूप में शासक का दिया हुआ दण्ड भोगकर तथा दण्ड देने वाला शासक उसके उस फलभोग में कारणनिमित्त बनकर कृतार्थ हो जाते हैं—अपना-अपना कर्तव्य पूरा कर लेने के कारण कर्मरूप ऋण से मुक्त हो जाते हैं। अतः वे दुःखी नहीं होते
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'The sinner and the punisher, whoever gives punishment and whoever receives it, are both regulated by the law of cause and effect. So do not despair.
ShlokaShloka 58
तद्भवान्दण्डसंयोगादस्माद्विगतकल्मषः। गतस्स्वां प्रकृतिं धर्म्यं धर्मदृष्टेन वर्त्मना4.18.64।।
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‘जो दण्डनीय पुरुष को दण्ड देता है तथा जो दण्ड का अधिकारी होकर दण्ड भोगता है, उनमें से दण्डनीय व्यक्ति अपने अपराध के फलरूप में शासक का दिया हुआ दण्ड भोगकर तथा दण्ड देने वाला शासक उसके उस फलभोग में कारणनिमित्त बनकर कृतार्थ हो जाते हैं—अपना-अपना कर्तव्य पूरा कर लेने के कारण कर्मरूप ऋण से मुक्त हो जाते हैं। अतः वे दुःखी नहीं होते
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'You have been purged of your sin through punishment from the point of view of righteousness. You have regained your spiritual nature on the path of dharma.
ShlokaShloka 59
त्यज शोकं च मोहं च भयं च हृदये स्थितम्। त्वया विधानं हर्यग्र्य न शक्यमतिवर्तितुम्4.18.65।।
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‘जो दण्डनीय पुरुष को दण्ड देता है तथा जो दण्ड का अधिकारी होकर दण्ड भोगता है, उनमें से दण्डनीय व्यक्ति अपने अपराध के फलरूप में शासक का दिया हुआ दण्ड भोगकर तथा दण्ड देने वाला शासक उसके उस फलभोग में कारणनिमित्त बनकर कृतार्थ हो जाते हैं—अपना-अपना कर्तव्य पूरा कर लेने के कारण कर्मरूप ऋण से मुक्त हो जाते हैं। अतः वे दुःखी नहीं होते
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'O best of monkeys remove sorrow from your heart, delusion and fear. It is not possible for you to transgress fate.
ShlokaShloka 60
यथा त्वय्यङ्गदो नित्यं वर्तते वानरेश्वर। तथा वर्तेत सुग्रीवे मयि चापि न संशयः4.18.66।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जो दण्डनीय पुरुष को दण्ड देता है तथा जो दण्ड का अधिकारी होकर दण्ड भोगता है, उनमें से दण्डनीय व्यक्ति अपने अपराध के फलरूप में शासक का दिया हुआ दण्ड भोगकर तथा दण्ड देने वाला शासक उसके उस फलभोग में कारणनिमित्त बनकर कृतार्थ हो जाते हैं—अपना-अपना कर्तव्य पूरा कर लेने के कारण कर्मरूप ऋण से मुक्त हो जाते हैं। अतः वे दुःखी नहीं होते
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'O lord of monkeys Angada will remain with Sugriva and with me as he used to live with you. Rest assured.'
ShlokaShloka 61
स तस्य वाक्यं मधुरं महात्मन स्समाहितं धर्मपथानुवर्तिनः। निशम्य रामस्य रणावमर्दिनो वचस्सुयुक्तं निजगाद वानरः4.18.67।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जो दण्डनीय पुरुष को दण्ड देता है तथा जो दण्ड का अधिकारी होकर दण्ड भोगता है, उनमें से दण्डनीय व्यक्ति अपने अपराध के फलरूप में शासक का दिया हुआ दण्ड भोगकर तथा दण्ड देने वाला शासक उसके उस फलभोग में कारणनिमित्त बनकर कृतार्थ हो जाते हैं—अपना-अपना कर्तव्य पूरा कर लेने के कारण कर्मरूप ऋण से मुक्त हो जाते हैं। अतः वे दुःखी नहीं होते
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Having listened to the sweet, wellcomposed words of great Rama, a crusher of the enemy in war ,follower of righteous path, Vali replied in appropriate manner:
ShlokaShloka 62
शराभितप्तेन विचेतसा मया प्रदूषितस्त्वं यदजानता प्रभो। इदं महेन्द्रोपम भीमविक्रम प्रसादितस्त्वं क्षम मे नरेश्वर4.18.68।।
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‘अब तुम अपने हृदय में स्थित शोक, मोह और भय का त्याग कर दो। वानरश्रेष्ठ! तुम दैव के विधान को नहीं लाँघ सकते
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'Pray, O mighty prince, hero of immense valour, pardon me for the words of blame I unwittingly hurled at you. I said all that in excruciating pain caused by your mighty arrow and in confusion of what is right and what is wrong.' इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये किष्किन्धाकाण्डे अष्टादशस्सर्गः।। Thus ends the eighteenth sarga of Kishkindakanda of the Holy Ramayana, the first epic, composed by sage Valmiki.