Kishkindha Kanda
Sarga 2: Sugriva becomes perturbed seeing Rama and Lakshmana -- gives directions to Hanuman to find out their details
किष्किन्धाकाण्डम् · सर्ग 2
28 shlokas
ShlokaShloka 1
तौ तु दृष्ट्वा महात्मानौ भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ।
वरायुधधरौ वीरौ सुग्रीवश्शङ्कितोऽभवत्4.2.1।।
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वे उद्विग्नचित्त होकर चारों दिशाओं की ओर देखने लगे। उस समय वानरशिरोमणि सुग्रीव किसी एक स्थान पर स्थिर न रह सके
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On seeing the two great souls, heroic Rama and Lakshmana wielding the best of weapons, Sugriva was alarmed.
ShlokaShloka 2
उद्विग्नहृदयस्सर्वा दिशस्समवलोकयन्।
न व्यतिष्ठत कस्मिंश्चिद्देशे वानरपुङ्गवः। 4.2.2।।
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वे उद्विग्नचित्त होकर चारों दिशाओं की ओर देखने लगे। उस समय वानरशिरोमणि सुग्रीव किसी एक स्थान पर स्थिर न रह सके
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Agitated at heart, the best of vanaras started in all directions and could not settle down at one spot.
ShlokaShloka 3
नैव चक्रे मनः स्थातुं वीक्षमाणो महाब���ौ।
कपेः परमभीतस्य चित्तं व्यवससाद ह4.2.3।।
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महाबली श्रीराम और लक्ष्मण को देखते हुए सुग्रीव अपने मन को स्थिर न रख सके। उस समय अत्यन्त भयभीत हुए उन वानरराज का चित्त बहुत दुःखी हो गया
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Beholding the two strong heroes, the monkey (Sugriva) was very much frightened. His heart sank.
ShlokaShloka 4
चिन्तयित्वा स धर्मात्मा विमृश्य गुरुलाघवम्।
सुग्रीवः परमोद्विग्नस्सर्वैरनुचरैस्सह4.2.4।।
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सुग्रीव धर्मात्मा थे—उन्हें राजधर्म का ज्ञान था। उन्होंने मन्त्रियों के साथ विचारकर अपनी दुर्बलता और शत्रुपक्ष की प्रबलता का निश्चय किया। तत्पश्चात् वे समस्त वानरों के साथ अत्यन्त उद्विग्न हो उठे
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Righteous Sugriva, became highly agitated, deliberated with all his followers on the pros and cons of the situation.
ShlokaShloka 5
ततस्स सचिवेभ्यस्तु सुग्रीवः प्लवगाधिपः।
शशंस परमोद्विग्नः पश्यंस्तौ रामलक्ष्मणौ4.2.5।।
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वानरराज सुग्रीव के हृदय में बड़ा उद्वेग हो गया था। वे श्रीराम और लक्ष्मण की ओर देखते हुए अपने मन्त्रियों से इस प्रकार बोले-
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Sugriva, lord of monkeys, extremely agitated at the sight of both Rama and Lakshmana, spoke to his minister:
ShlokaShloka 6
एतौ वनमिदं दुर्गं वालिप्रणिहितौ ध्रुवम्।
छद्मना चीरवसनौ प्रचरन्ताविहागतौ4.2.6।।
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‘निश्चय ही ये दोनों वीर वाली के भेजे हुए ही इस दुर्गम वन में विचरते हुए यहाँ आये हैं। इन्होंने छल से चीर वस्त्र धारण कर लिये हैं, जिससे हम इन्हें पहचान न सकें’
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ShlokaShloka 7
ततस्सुग्रीवसचिवा दृष्ट्वा परमधन्विनौ।
जग्मुर्गिरितटात्तस्मादन्यच्छिखरमुत्तमम्4.2.7।।
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उधर सुग्रीव के सहायक दूसरे-दूसरे वानरों ने जब उन महाधनुर्धर श्रीराम और लक्ष्मण को देखा, तब वे उस पर्वततट से भागकर दूसरे उत्तम शिखर पर जा पहुँचे
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On seeing these supreme bowmen, Sugriva's counsellers left for the peak of another mountain.
ShlokaShloka 8
ते क्षिप्रमधिगम्याथ यूथपा यूथपर्षभम्।
हरयो वानरश्रेष्ठं परिवार्योपतस्थिरे4.2.8।।
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वे यूथपति वानर शीघ्रतापूर्वक जाकर यूथपतियों के सरदार वानरशिरोमणि सुग्रीव को चारों ओर से घेरकर उनके पास खड़े हो गये
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The leaders of the monkey troops reached Sugriva, the lord of monkeys, in no time and stood surrounding him.
ShlokaShloka 9
एकमेकायनगताः प्लवमाना गिरेर्गिरिम्।
प्रकम्पयन्तो वेगेन गिरीणां शिखराण्यपि4.2.9।।
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इस तरह एक पर्वत से दूसरे पर्वत पर उछलते-कूदते और अपने वेग से उन पर्वत-शिखरों को प्रकम्पित करते हुए वे समस्त महाबली वानर एक मार्ग पर आ गये। उन सबने उछल-कूदकर उस समय वहाँ दुर्गम स्थानों में स्थित हुए पुष्पशोभित बहुसंख्यक वृक्षों को तोड़ डाला था
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Jumping from one mountain to another swiftly and shaking the mountain tops, the monkeys reached one spot.
ShlokaShloka 10
ततश्शाखामृगास्सर्वे प्लवमाना महाबलाः।
बभञ्जुश्च नगांस्तत्र पुष्पितान्दुर्गसंश्रितान्4.2.10।।
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इस तरह एक पर्वत से दूसरे पर्वत पर उछलते-कूदते और अपने वेग से उन पर्वत-शिखरों को प्रकम्पित करते हुए वे समस्त महाबली वानर एक मार्ग पर आ गये। उन सबने उछल-कूदकर उस समय वहाँ दुर्गम स्थानों में स्थित हुए पुष्पशोभित बहुसंख्यक वृक्षों को तोड़ डाला था
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Then the mighty monkeys jumping on the trees in full bloom shook them.
ShlokaShloka 11
आप्लवन्तो हरिवरास्सर्वतस्तं महागिरिम्।
मृगमार्जारशार्दूलांस्त्रासयन्तो ययुस्तदा4.2.11।।
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इस प्रकार सुग्रीव के सभी सचिव पर्वतराज ऋष्यमूक पर आ पहुँचे और एकाग्रचित्त हो उन वानरराज से मिलकर उनके सामने हाथ जोड़कर खड़े हो गये
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The great monkeys went on leaping all over the great (Rishyamuka) mountain, scaring the deer, wildcats and tigers.
ShlokaShloka 12
ततस्सुग्रीवसचिवाः पर्वतेन्द्रं समाश्रिताः।
सङ्गम्य कपिमुख्येन सर्वे प्राञ्जलय स्थिताः।।4.2.12।।
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इस प्रकार सुग्रीव के सभी सचिव पर्वतराज ऋष्यमूक पर आ पहुँचे और एकाग्रचित्त हो उन वानरराज से मिलकर उनके सामने हाथ जोड़कर खड़े हो गये
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Thereafter, all the ministers of Sugriva assembled together on the king of mountains and stood (in front of Sugriva), with folded hands.
ShlokaShloka 13
ततस्तं भयसंविग्नं वालिकिल्बिषशङ्कितम्।
उवाच हनुमान्वाक्यं सुग्रीवं वाक्यकोविदः4.2.13।।
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Suspecting that Vali might have sent them (Rama and Lakshmana), Hanuman, skilful in communication, said to Sugriva who was trembling in fear:
ShlokaShloka 14
सम्भ्रमस्त्यज्यतामेष सर्वैर्वालिकृते महान्।
मलयोऽयं गिरिवरो भयं नेहास्ति वालिनः4.2.14।।
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‘आप सब लोग वाली के कारण होने वाली इस भारी घबराहट को छोड़ दीजिये। यह मलय नामक श्रेष्ठ पर्वत है। यहाँ वाली से कोई भय नहीं है
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'This is a great mountain range of Malaya and there is no fear for Vali here. Give up this fear.
ShlokaShloka 15
यस्मादुद्विग्नचेतास्त्वं प्रद्रुतो हरिपुङ्गव।
तं क्रूरदर्शनं क्रूरं नेह पश्यामि वालिनम्4.2.15।।
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‘वानरशिरोमणे! जिससे उद्विग्नचित्त होकर आप भागे हैं, उस क्रूर दिखायी देने वाले निर्दय वाली को मैं यहाँ नहीं देखता हूँ
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'O chief of monkeys I do not see here any sign of the cruel Vali, of whom you are afraid.
ShlokaShloka 16
यस्मात्तव भयं सौम्य पूर्वजात्पापकर्मणः।
स नेह वाली दुष्टात्मा न ते पश्याम्यहं भयम्4.2.16।।
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'O goodnatured Sugriva you are afraid of your elder brother Vali as he is evilminded and sinful. (But) I do not see any reason for you to be frightened as he is not found anywhere here.
ShlokaShloka 17
अहो शाखामृगत्वं ते व्यक्तमेव प्लवङ्गम।
लघुचित्ततयाऽत्मानं न स्थापयसि यो मतौ4.2.17।।
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‘बुद्धि और विज्ञान से सम्पन्न होकर आप दूसरों की चेष्टाओं के द्वारा उनका मनोभाव समझें और उसी के अनुसार सभी आवश्यक कार्य करें; क्योंकि जो राजा बुद्धि-बल का आश्रय नहीं लेता, वह सम्पूर्ण प्रजापर शासन नहीं कर सकता’
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'Oh monkey, whoever is lilylivered cannot be steady. It is evident that your very nature as a monkey makes you restless.
ShlokaShloka 18
बुद्धिविज्ञानसम्पन्न इङ्गितैस्सर्वमाचर।
न ह्यबुद्धिं गतो राजा सर्वभूतानि शास्ति हि4.2.18।।
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‘बुद्धि और विज्ञान से सम्पन्न होकर आप दूसरों की चेष्टाओं के द्वारा उनका मनोभाव समझें और उसी के अनुसार सभी आवश्यक कार्य करें; क्योंकि जो राजा बुद्धि-बल का आश्रय नहीं लेता, वह सम्पूर्ण प्रजापर शासन नहीं कर सकता’
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ShlokaShloka 19
सुग्रीवस्तु शुभं वाक्यं श्रुत्वा सर्वं हनूमतः।
ततश्शुभतरं वाक्यं हनूमन्तमुवाच ह4.2.19।।
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‘इन दोनों वीरों की भुजाएँ लंबी और नेत्र बड़े-बड़े हैं। ये धनुष, बाण और तलवार धारण किये देवकुमारों के समान शोभा पा रहे हैं। इन दोनों को देखकर किसके मन में भय का संचार न होगा
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Having heard the wise words of Hanuman, Sugriva addressed him with words more auspicious.
ShlokaShloka 20
दीर्घबाहू विशालाक्षौ शरचापासिधारिणौ।
कस्य न स्याद्भयं दृष्ट्वा ह्येतौ सुरसुतोपमौ4.2.20।।
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‘इन दोनों वीरों की भुजाएँ लंबी और नेत्र बड़े-बड़े हैं। ये धनुष, बाण और तलवार धारण किये देवकुमारों के समान शोभा पा रहे हैं। इन दोनों को देखकर किसके मन में भय का संचार न होगा
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'Who would not be apprehensive of these two longarmed and largeeyed individuals comparable to sons of gods wielding arrows, bows and swords.
ShlokaShloka 21
वालिप्रणिहितावेतौ शङ्केऽहं पुरुषोत्तमौ।
राजानो बहुमित्राश्च विश्वासो नात्र हि क्षमः4.2.21।।
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‘मेरे मन में संदेह है कि ये दोनों श्रेष्ठ पुरुष वाली के ही भेजे हुए हैं; क्योंकि राजाओं के बहुत-से मित्र होते हैं। अतः उनपर विश्वास करना उचित नहीं है।
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'I support these two excellent men might have been sent by Vali. Kings have many friends and so it may not be appropriate to trust any king.
ShlokaShloka 22
अरयश्च मनुष्येण विज्ञेयाश्छद्मचारिणः।
विश्वस्तानामविश्वस्तारन्ध्रेषु प्रहरन्ति हि4.2.22।।
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‘प्राणिमात्र को छद्मवेष में विचरने वाले शत्रुओं को विशेषरूप से पहचानने की चेष्टा करनी चाहिये; क्योंकि वे दूसरों पर अपना विश्वास जमा लेते हैं, परंतु स्वयं किसी का विश्वास नहीं करते और अवसर पाते ही उन विश्वासी पुरुषों पर ही प्रहार कर बैठते हैं
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'One has to identify these men roaming in disguise. These are not trustworthy and could even be our enemies, making us believe them so as to attack us when we are not vigilant.
ShlokaShloka 23
कृत्येषु वाली मेधावी राजानो बहुदर्शिनः।
भवन्ति परहन्तारस्ते ज्ञेयाः प्राकृतैर्नरैः4.2.23।।
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‘अतः कपिश्रेष्ठ! तुम भी एक साधारण पुरुष की भाँति यहाँ से जाओ और उनकी चेष्टाओं से, रूप से तथा बातचीत के तौर-तरीकों से उन दोनों का यथार्थ परिचय प्राप्त करो
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'Vali is wise in his actions. Kings employ many strategies to annihilate their enemies. Our gullible individuals should be able to detect them.
ShlokaShloka 24
तौ त्वया प्राकृतेनैव गत्वा ज्ञेयौ प्लवङ्गम।
इङ्गितानां प्रकारैश्च रूपव्याभाषणेन च4.2.24।।
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‘अतः कपिश्रेष्ठ! तुम भी एक साधारण पुरुष की भाँति यहाँ से जाओ और उनकी चेष्टाओं से, रूप से तथा बातचीत के तौर-तरीकों से उन दोनों का यथार्थ परिचय प्राप्त करो
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'O Hanuman assume an ordinary form and approach them. Try to read them through their gestures, traits, forms and conversations.
ShlokaShloka 25
लक्षयस्व तयोर्भावं प्रहृष्टमनसौ यदि।
विश्वासयन्प्रशंसाभिरिङ्गितैश्च पुनः पुनः4.2.25।।
ममैवाभिमुखं स्थित्वा पृच्छ त्वं हरिपुङ्गव ।
प्रयोजनं प्रवेशस्य वनस्यास्य धनुर्धरौ4.2.26।।
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‘उनके मनोभावों को समझो। यदि वे प्रसन्नचित्त जान पड़ें तो बारंबार मेरी प्रशंसा करके तथा मेरे अभिप्राय को सूचित करने वाली चेष्टाओं द्वारा मेरे प्रति उनका विश्वास उत्पन्न करो
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'O best of monkeys ascertain their purpose by praising them and studying their honest intentions. Gain the confidence of the wielders of bows and if you find them agreeable, enquire the purpose of their entering this forest.
ShlokaShloka 26
शुद्धात्मानौ यदि त्वेतौ जानीहि त्वं प्लवङ्गम।
व्याभाषितैर्वा विज्ञेया स्याद्दुष्टाऽदुष्टता तयोः4.2.27।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
‘वानरशिरोमणे! तुम मेरी ही ओर मुँह करके खड़ा होना और उन धनुर्धर वीरों से इस वन में प्रवेश करने का कारण पूछना
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'O best of monkeys find out whether they are noble in their intentions or evil in their design through your conversation with them.'
ShlokaShloka 27
इत्येवं कपिराजेन सन्दिष्टो मारुतात्मजः।
चकार गमने बुद्धिं यत्र तौ रामलक्ष्मणौ4.2.28।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
‘यदि उनका हृदय शुद्ध जान पड़े तो भी तरहतरह की बातों और आकृति के द्वारा यह जानने की विशेष चेष्टा करनी चाहिये कि वे दोनों कोई दुर्भावना लेकर तो नहीं आये हैं’
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Instructed thus by the king of the monkeys, Hanuman, son of the Windgod, decided to meet both Rama and Lakshmana.
ShlokaShloka 28
तथेति सम्पूज्य वचस्तु तस्य
तत्कपेस्सुभीमस्य दुरासदस्य च।
महानुभावो हनुमान्ययौ तदा
स यत्र रामोऽतिबलश्च लक्ष्मणः4.2.29।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
वानरराज सुग्रीव के इस प्रकार आदेश देने पर पवनकुमार हनुमान जी ने उस स्थान पर जाने का विचार किया, जहाँ श्रीराम और लक्ष्मण विद्यमान थे
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Hanuman, the venerable, powerful and not easily conquerable monkey, honoured the words of the great Lord of the monkeys, offered salutations and said 'So be it'. And then proceeded towards the mighty Rama and Lakshmana. इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये किष्किन्धाकाण्डे द्वितीयस्सर्गः।। Thus ends the second sarga of Kishkindakanda of the Holy Ramayana, the first epic composed by the sage Valmiki.