Kishkindha Kanda

Sarga 4: Lakshmana speaks to Hanuman the purpose of their arrival at Rishyamuka -- Hanuman takes Rama and Lakshmana on his shoulders to Sugriva

किष्किन्धाकाण्डम् · सर्ग 4

32 shlokas

ShlokaShloka 1
ततः प्रहृष्टौ हनुमान्कृत्यवानिति तद्वचः। श्रुत्वा मधुरसम्भाषं सुग्रीवं मनसा गतः4.4.1।।
हिन्दी अर्थ देखें
श्रीरामजी की बात सुनकर तथा सुग्रीव के विषय में उनका सौम्यभाव जानकर और साथ ही यह समझकर कि इन्हें भी सुग्रीव से कोई आवश्यक काम है, हनुमान जी को बड़ी प्रसन्नता हुई। उन्होंने मनही-मन सुग्रीव का स्मरण किया
Show English Translation
After listening to the sweet words of Lakshmana, Hanuman, having done what he had to do felt happy and thought of Sugriva.
ShlokaShloka 2
भव्यो राज्यागमस्तस्य सुग्रीवस्य महात्मनः। यदयं कृत्यवान्प्राप्तः कृत्यं चैतदुपागतम्4.4.2।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘अब अवश्य ही महामना सुग्रीव को राज्य की प्राप्ति होने वाली है; क्योंकि ये महानुभाव किसी कार्य या प्रयोजन से यहाँ आये हैं और यह कार्य सुग्रीव के ही द्वारा सिद्ध होने वाला है
Show English Translation
The great Sugriva, thinks Hanuman, who had done his duty is likely to acquire his kingdom, because great Rama who would help in the work of Sugriva has also come.'
ShlokaShloka 3
ततः परमसंहृष्टो हनुमान् प्लवगर्षभः। प्रत्युवाच ततो वाक्यं रामं वाक्यविशारदः4.4.3।।
हिन्दी अर्थ देखें
तत्पश्चात् बातचीत में कुशल वानरश्रेष्ठ हनुमान जी अत्यन्त हर्ष में भरकर श्रीरामचन्द्रजी से बोले-
Show English Translation
Hanuman, the best of the monkeys, learned in conversation, felt extremely happy and enquired from Rama:
ShlokaShloka 4
किमिर्थं त्वं वनं घोरं पम्पाकाननमण्डितम्। आगतस्सानुजो दुर्गं नानाव्याळमृगायुतम्4.4.4।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘पम्पा-तटवर्ती कानन से सुशोभित यह वन भयंकर और दुर्गम है। इसमें नाना प्रकार के हिंसक जन्तु निवास करते हैं। आप अपने छोटे भाई के साथ यहाँ किसलिये आये हैं ?’
Show English Translation
'Why have you come with your brother to this dreadful, inaccessible forest surrounding Pampa, full of different varieties of serpents and wild animals?'
ShlokaShloka 5
तस्य तद्वचनं श्रुत्वा लक्ष्मणो रामचोदितः। आचचक्षे महात्मानं रामं दशरथात्मजम्4.4.5।।
हिन्दी अर्थ देखें
हनुमान जी का यह वचन सुनकर श्रीराम की आज्ञा से लक्ष्मण ने दशरथनन्दन महात्मा श्रीराम का इस प्रकार परिचय देना आरम्भ किया—
Show English Translation
Having listened to Hanuman, and urged by Rama, Lakshmana told him about the great Rama, son of Dasaratha.
ShlokaShloka 6
राजा दशरथो नाम द्युतिमान्धर्मवत्सलः। चातुर्वर्ण्यं स्वधर्मेण नित्यमेवाभ्यपालयत्4.4.6।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘विद्वन्! इस पृथ्वी पर दशरथ नाम से प्रसिद्ध जो धर्मानुरागी तेजस्वी राजा थे, वे सदा ही अपने धर्म के अनुसार चारों वर्गों की प्रजाका पालन करते थे
Show English Translation
ShlokaShloka 7
न द्वेष्टा विद्यते तस्य न च स द्वेष्टि कञ्चन। स च सर्वेषु भूतेषु पितामह इवापरः4.4.7।। अग्निष्टोमादिभिर्यज्ञैरिष्टवानाप्तदक्षिणैः।
हिन्दी अर्थ देखें
‘उन्होंने पर्याप्त दक्षिणावाले अग्निष्टोम आदि यज्ञों का अनुष्ठान किया था। ये उन्हीं महाराज के ज्येष्ठ पुत्र हैं। लोग इन्हें श्रीराम कहते हैं
Show English Translation
'He never hated any one nor did any one ever hate him. To all his subjects, he was like another father, the Creator Brahma. And he was generous in giving gifts while performing yajnas (rituals with fire) like Agnistoma.
ShlokaShloka 8
तस्यायं पूर्वजः पुत्रो रामो नाम जनैः श्रुतः।।4.4.8।। शरण्यस्सर्वभूतानां पितुर्निर्देशपारगः।
हिन्दी अर्थ देखें
‘उन्होंने पर्याप्त दक्षिणावाले अग्निष्टोम आदि यज्ञों का अनुष्ठान किया था। ये उन्हीं महाराज के ज्येष्ठ पुत्र हैं। लोग इन्हें श्रीराम कहते हैं
Show English Translation
'Here is his eldest son, popularly known as Rama. He is the protector of all beings and never failed his father's instructions.
ShlokaShloka 9
वीरो दशरथस्यायं पुत्राणां गुणवत्तमः।।4.4.9।। राजलक्षणसम्पन्नस्सम्युक्तो राजसम्पदा। राज्याद्भ्रष्टो वने वस्तुं मया सार्धमिहागतः4.4.10।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘ये सब प्राणियों को शरण देने वाले और पिता की आज्ञा का पालन करने वाले हैं। महाराज दशरथ के चारों पुत्रों में ये सबसे अधिक गुणवान् हैं
Show English Translation
ShlokaShloka 10
भार्यया च महातेजास्सीतयाऽनुगतो वशी। दिनक्षये महातेजाः प्रभयेव दिवाकरः4.4.11।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘ये राजा के उत्तम लक्षणों से सम्पन्न हैं। जब इन्हें राज्य-सम्पत्ति से संयुक्त किया जा रहा था, उस समय कुछ ऐसा कारण आ पड़ा, जिससे ये राज्य से वञ्चित हो गये और वन में निवास करने के लिये मेरे साथ यहाँ आ गये
Show English Translation
'This glorious Rama was followed by his wife, Sita, like the rays of the effulgent Sun follow him to the end of the day.
ShlokaShloka 11
अहमस्यावरो भ्राता गुणैर्दास्यमुपागतः। कृतज्ञस्य बहुज्ञस्य लक्ष्मणो नाम नामतः4.4.12।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘महाभाग! जैसे दिन का क्षय होने पर सायंकाल महातेजस्वी सूर्य अपने प्रभा के साथ अस्ताचल को जाते हैं, उसी प्रकार ये जितेन्द्रिय श्रीरघुनाथजी अपनी पत्नी सीता के साथ वन में आये थे।
Show English Translation
'I am his younger brother, called Lakshmana. I have accepted the service of this learned, virtuous and grateful man.
ShlokaShloka 12
सुखार्हस्य महार्हस्य सर्वभूतहितात्मनः। ऐश्वर्येण च हीनस्य वनवासाश्रितस्य च4.4.13।। रक्षसाऽपहृता भार्या रहिते कामरूपिणा। तच्च न ज्ञायते रक्षः पत्नी येनास्य सा हृता4.4.14।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘मैं इनका छोटा भाई हूँ। मेरा नाम लक्ष्मण है। मैं अपने कृतज्ञ और बहुज्ञ भाई के गुणों से आकृष्ट होकर इनका दास हो गया हूँ
Show English Translation
'This man who should have lived in comfort and in reverence, one who was worthy of all the wellwishers lost his wealth and was banished into the forest. He is now deprived of his wife kidnapped by an unknown demon who could assume any form at will.
ShlokaShloka 13
दनुर्नाम दितेः पुत्रश्शापाद्राक्षसतां गतः। आख्यातस्तेन सुग्रीवस्समर्थो वानरर्षभः4.4.15।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘सम्पूर्ण भूतों के हित में मन लगाने वाले, सुख भोगने के योग्य, महापुरुषों द्वारा पूजनीय, ऐश्वर्य से हीन तथा वनवास में तत्पर मेरे भाई की पत्नी को इच्छानुसार रूप धारण करने वाले एक राक्षस ने सूने आश्रम से हर लिया। जिसने इनकी पत्नी का हरण किया है, वह राक्षस कौन है और कहाँ रहता है ? इत्यादि बातों का ठीक-ठीक पता नहीं लग रहा है
Show English Translation
'Diti's son called Danu who had been cursed to live the life of a demon had said that Sugriva, the best among monkeys, would be able to locate her.
ShlokaShloka 14
स ज्ञास्यति महावीर्यस्तव भार्यापहारिणम्। एवमुक्त्वा दनुस्स्वर्गं भ्राजमानो गतस्सुखम्4.4.16।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘सम्पूर्ण भूतों के हित में मन लगाने वाले, सुख भोगने के योग्य, महापुरुषों द्वारा पूजनीय, ऐश्वर्य से हीन तथा वनवास में तत्पर मेरे भाई की पत्नी को इच्छानुसार रूप धारण करने वाले एक राक्षस ने सूने आश्रम से हर लिया। जिसने इनकी पत्नी का हरण किया है, वह राक्षस कौन है और कहाँ रहता है ? इत्यादि बातों का ठीक-ठीक पता नहीं लग रहा है
Show English Translation
'That Valiant Sugriva can spot the demon who has abducted your wife', said Danu and disappeared happily into heaven shining in brilliance.
ShlokaShloka 15
एतत्ते सर्वमाख्यातं यथा तथ्येन पृच्छतः। अहं चैव हि रामश्च सुग्रीवं शरणं गतौ4.4.17।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘ये पहले बहुत-से धन-वैभव का दान करके परम उत्तम यश प्राप्त कर चुके हैं। जो पूर्वकाल में सम्पूर्ण जगत् के नाथ (संरक्षक) थे, वे आज सुग्रीव को अपना रक्षक बनाना चाहते हैं
Show English Translation
'I have given a factual account of everything, since you asked me. Now Rama and I have arrived seeking Sugriva's shelter.
ShlokaShloka 16
एष दत्त्वा च वित्तानि प्राप्य चानुत्तमं यशः। लोकनाथः पुरा भूत्वा सुग्रीवं नाथमिच्छति4.4.18।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘ये पहले बहुत-से धन-वैभव का दान करके परम उत्तम यश प्राप्त कर चुके हैं। जो पूर्वकाल में सम्पूर्ण जगत् के नाथ (संरक्षक) थे, वे आज सुग्रीव को अपना रक्षक बनाना चाहते हैं
Show English Translation
'Having earned supreme fame through his munificence in the past, this lord of the world now craves Sugriva's indulgence.
ShlokaShloka 17
पिता यस्य पुरा ह्यासीच्छरण्यो धर्मवत्सलः। तस्य पुत्रश्शरण्यश्च सुग्रीवं शरणं गतः4.4.19।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘ये पहले बहुत-से धन-वैभव का दान करके परम उत्तम यश प्राप्त कर चुके हैं। जो पूर्वकाल में सम्पूर्ण जगत् के नाथ (संरक्षक) थे, वे आज सुग्रीव को अपना रक्षक बनाना चाहते हैं
Show English Translation
'One whose father was once a protector of dharma, a refuge to all now seeks Sugriva's shelter.
ShlokaShloka 18
सर्वलोकस्य धर्मात्मा शरण्यश्शरणं पुरा। गुरुर्मे राघवस्सोऽयं सुग्रीवं शरणं गतः4.4.20।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘ये पहले बहुत-से धन-वैभव का दान करके परम उत्तम यश प्राप्त कर चुके हैं। जो पूर्वकाल में सम्पूर्ण जगत् के नाथ (संरक्षक) थे, वे आज सुग्रीव को अपना रक्षक बनाना चाहते हैं
Show English Translation
'This righteous Rama who used to lend in the past protection to the whole world and, indeed, a refuge to all, venerable sir, now seeks Sugriva's shelter.
ShlokaShloka 19
यस्य प्रसादे सततं प्रसीदेयुरिमाः प्रजाः। स रामो वानरेन्द्रस्य प्रसादमभिकाङ्क्षते। 4.4.21।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जो मेरे धर्मात्मा बड़े भाई श्रीरघुनाथजी पहले सम्पूर्ण जगत् को शरण देने वाले तथा शरणागतवत्सल रहे हैं, वे इस समय सुग्रीव की शरण में आये हैं
Show English Translation
'This Rama for whose grace the subjects were ever bobolden to him now seeks the favour of the Chief of monkeys.
ShlokaShloka 20
येन सर्वगुणोपेताः पृथिव्यां सर्वपार्थिवाः। मानितास्सततं राज्ञा सदा दशरथेन वै4.4.22 तस्यायं पूर्वजः पुत्रस्त्रिषु लोकेषु विश्रुतः। सुग्रीवं वानरेन्द्रं तु रामश्शरणमागतः4.4.23।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जो मेरे धर्मात्मा बड़े भाई श्रीरघुनाथजी पहले सम्पूर्ण जगत् को शरण देने वाले तथा शरणागतवत्सल रहे हैं, वे इस समय सुग्रीव की शरण में आये हैं
Show English Translation
'Famous in all the three worlds, this Rama, who was the firshborn of Dasaratha, endowed with all virtues and ever respected by all the kings of this earth, now seeks shelter of Sugriva, Chief of monkeys.
ShlokaShloka 21
शोकाभिभूते रामे तु शोकार्ते शरणं गते। कर्तुमर्हति सुग्रीवः प्रसादं हरियूधपः4.4.24।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जिनके प्रसन्न होने पर सदा यह सारी प्रजा प्रसन्नता से खिल उठती थी, वे ही श्रीराम आज वानरराज सुग्रीव की प्रसन्नता चाहते हैं
Show English Translation
'Sugriva, lord of monkeys, ought to help Rama who tormented by, and overwhelmed with, grief seeks his favour.'
ShlokaShloka 22
एवं ब्रुवाणं सौमित्रिं करुणं साश्रुलोचनम्। हनुमान्प्रत्युवाचेदं वाक्यं वाक्यविशारदः4.4.25।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘श्रीराम शोक से अभिभूत और आर्त होकर शरण में आये हैं। यूथपतियोंसहित सुग्रीव को इन पर कृपा करनी चाहिये॥
Show English Translation
To Saumitri who was speaking thus in a piteous tone, his eyes filled with tears the eloquent Hanuman replied:
ShlokaShloka 23
ईदृशा बुद्धिसम्पन्ना जितक्रोधा जितेन्द्रियाः। द्रष्टव्या वानरेन्द्रेण दिष्ट्या दर्शनमागताः4.4.26।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘श्रीराम शोक से अभिभूत और आर्त होकर शरण में आये हैं। यूथपतियोंसहित सुग्रीव को इन पर कृपा करनी चाहिये॥
Show English Translation
'It is a matter of great fortune that you who have intelligence, control over your senses and conquered anger have come to see the lord of monkeys who needs instead, to approach you.
ShlokaShloka 24
स हि राज्यात्परिभ्रष्टः कृतवैरश्च वालिना। हृतदारो वने त्यक्तो भ्रात्रा विनिकृतो भृशम्4.4.27।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘श्रीराम शोक से अभिभूत और आर्त होकर शरण में आये हैं। यूथपतियोंसहित सुग्रीव को इन पर कृपा करनी चाहिये॥
Show English Translation
'(In fact) seriously offended by his brother Vali who treated him like his enemy and expelled him from the kingdom. He is now abandoned in the forest, his wife hijacked.
ShlokaShloka 25
करिष्यति स साहाय्यं युवयोर्भास्करात्मजः। सुग्रीवस्सह चास्माभि स्सीतायाः परिमार्गणे4.4.28।।
हिन्दी अर्थ देखें
नेत्रों से आँसू बहाकर करुणाजनक स्वर में ऐसी बातें कहते हुए सुमित्राकुमार लक्ष्मण से कुशल वक्ता हनुमान जी ने इस प्रकार कहा-
Show English Translation
'Sugriva, son of the Sungod, along with us will extend all help to you, in your search for Sita.'
ShlokaShloka 26
इत्येवमुक्त्वा हनुमान् श्लक्ष्णं मधुरया गिरा। बभाषे सोऽभिगच्छेम सुग्रीवमिति राघवम्4.4.29।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘राजकुमारो! वानरराज सुग्रीव को आप-जैसे बुद्धिमान्, क्रोधविजयी और जितेन्द्रिय पुरुषों से मिलने की आवश्यकता थी। सौभाग्य की बात है कि आपने स्वयं ही दर्शन दे दिया
Show English Translation
Hanuman, having spoken with sweet, gentle words said to the Raghavas, 'We will now go to Sugriva'.
ShlokaShloka 27
एवं ब्रुवाणं धर्म���त्मा हनुमन्तं स लक्ष्मणः। प्रतिपूज्य यथान्यायमिदं प्रोवाच राघवम्4.4.30।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘वे भी राज्य से भ्रष्ट हैं। वाली के साथ उनकी शत्रुता हो गयी है। उनकी स्त्री का भी वाली ने ही अपहरण कर लिया है तथा उस दुष्ट भाई ने उन्हें घर से निकाल दिया है, इसलिये वे अत्यन्त भयभीत होकर वन में निवास करते हैं
Show English Translation
Having offered reverential salutations to Hanuman as per tradition, righteous Lakshmana now spoke to Rama:
ShlokaShloka 28
कपिः कथयते हृष्टो यथाऽयं मारुतात्मजः। कृत्यवांत्सोऽपि सम्प्राप्तः कृतकृत्योऽसि राघव4.4.31।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘सूर्यनन्दन सुग्रीव सीता का पता लगाने में हमारे साथ स्वयं रहकर आप दोनों की पूर्ण सहायता करेंगे’
Show English Translation
'O Raghava this monkey, son of the Windgod appears pleased as evident from his words. As he is a man of action, take your work as accomplished now.
ShlokaShloka 29
प्रसन्नमुखवर्णश्च व्यक्तं हृष्टश्च भाषते। नानृतं वक्ष्यते वीरो हनुमान्मारुतात्मजः4.4.32।।
हिन्दी अर्थ देखें
ऐसा कहकर हनुमान जी ने श्रीरघुनाथजी से स्निग्ध मधुर वाणी में कहा—’अच्छा, अब हमलोग सुग्रीव के पास चलें’
Show English Translation
'It is evident from his words and from his cheerful face that Hanuman is pleased. (I know that) this heroic son of the Windgod will never tell a lie'.
ShlokaShloka 30
ततस्स तु महाप्राज्ञो हनुमान्मारुतात्मजः। जगामादाय तौ वीरौ हरिराजाय राघवौ4.4.33।।
हिन्दी अर्थ देखें
उस समय धर्मात्मा लक्ष्मण ने उपर्युक्त बात कहने वाले हनुमान जी का यथोचित सम्मान किया और श्रीरामचन्द्रजी से कहा-
Show English Translation
Hanuman, son of the Windgod, endowed with great wisdom carried both the Raghava warriors to the king of monkeys.
ShlokaShloka 31
भिक्षुरूपं परित्यज्य वानरं रूपमास्थितः। पृष्ठमारोप्य तौ वीरौ जगाम कपिकुञ्जरः4.4.34।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘इनके मुख की कान्ति स्पष्टतः प्रसन्न दिखायी देती । है और ये हर्ष से उत्फुल्ल होकर बातचीत करते हैं।अतः मेरा विश्वास है कि पवनपुत्र वीर हनुमान् जी झूठ नहीं बोलेंगे’
Show English Translation
Hanuman, who was an elephant among monkeys, gave up the guise of a mendicant, and assuming the form of the monkeys, lifted both the heroes on to his back and proceeded.
ShlokaShloka 32
स तु विपुलयशाः कपिप्रवीरः पवनसुतः कृतकृत्यवत्प्रहृष्टः। गिरिवरमुरुविक्रमः प्रयात स्स शुभमतिस्सह रामलक्ष्मणाभ्याम्4.4.35।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘इनके मुख की कान्ति स्पष्टतः प्रसन्न दिखायी देती । है और ये हर्ष से उत्फुल्ल होकर बातचीत करते हैं।अतः मेरा विश्वास है कि पवनपुत्र वीर हनुमान् जी झूठ नहीं बोलेंगे’
Show English Translation
The son of the Windgod, the most valiant, the supremely heroic monkey and the one welladmired, having performed his task, felt immensely happy.And with an auspicious feeling, departed for the great mountain (Rishyamuka) along with Rama and Lakshmana. इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये किष्किंधाकाण्डे चतुर्थस्सर्गः।। Thus ends the fourth sarga of Kishkindakanda of the Holy Ramayana, the first epic composed by sage Valmiki.