Kishkindha Kanda
Sarga 37: Countless monkeys report to Sugriva
किष्किन्धाकाण्डम् · सर्ग 37
30 shlokas
ShlokaShloka 1
एवमुक्तस्तु सुग्रीवो लक्ष्मणेन महात्मना।
हनूमन्तं स्थितं पार्श्वे सचिवन्त्विदमब्रवीत्।।4.37.1।।
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महात्मा लक्ष्मण ने जब ऐसा कहा, तब सुग्रीव अपने पास ही खड़े हुए हनुमान् जी से यों बोले-
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Having heard the great Lakshmana Sugriva said to Hanuman, the minister who stood by his side:
ShlokaShloka 2
महेन्द्रहिमवद्विन्ध्यकैलासशिखरेषु च।
मन्दरे पाण्डुशिखरे पञ्चशैलेषु ये स्थिताः।।4.37.2।।
तरुणादित्यवर्णेषु भ्राजमानेषु सर्वतः।
पर्वतेषु समुद्रान्ते पश्चिमायां च ये दिशि।।4.37.3।।
आदित्यभवने चैव गिरौ सन्ध्याभ्रसन्निभे।
पद्मातालवनं भीमं संश्रिता हरिपुङ्गवाः।।4.37.4।।
अञ्जनाम्बुदसङ्काशाः कुञ्जरप्रतिमौजसः।
अञ्जने पर्वते चैव ये वसन्ति प्लवङ्गमाः।।4.37.5।।
मनश्शिला गुहावासा वानराः कनक��्रभाः।
मेरुपार्श्वगताश्चैव ये धूम्रगिरिं संश्रिताः।।4.37.6।।
���रुणादित्यवर्णाश्च पर्वते ये महारुणे।
पिबन्तो मधुमैरेयं भीमवेगाः प्लवङ्गमाः।।4.37.7।।
वनेषु च सुरम्येषु सुगन्धिषु महत्सु च।
तापसानां च रम्येषु वनान्तेषु समन्ततः।।4.37.8।।
तांस्तां स्त्वमानय क्षिप्रं पृथिव्यां सर्ववानरान्।
सामदानादिभि: स्सर्वैराशु प्रेषय वानरान्।।4.37.9।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
‘महेन्द्र, हिमवान्, विन्ध्य, कैलास तथा श्वेत शिखर वाले मन्दराचल-इन पाँच पर्वतों के शिखरों पर जो श्रेष्ठ वानर रहते हैं, पश्चिम दिशा में समुद्र के परवर्ती तटपर प्रातःकालिक सूर्य के समान कान्तिमान् और नित्य प्रकाशमान पर्वतों पर जिन वानरों का निवास है, भगवान् सूर्य के निवासस्थान तथा संध्याकालिक मेघसमूह के समान अरुण वर्णवाले उदयाचल एवं अस्ताचल पर जो वानर वास करते हैं, पद्माचलवर्ती वन का आश्रय लेकर जो भयानक पराक्रमी वानर-शिरोमणि निवास करते हैं, अञ्जनपर्वत पर जो काजल और मेघ के समान काले तथा गजराज के समान महाबली वानर रहते हैं, बड़े बड़े पर्वतों की गुफाओं में निवास करने वाले तथा मेरुपर्वत के आस-पास रहने वाले जो सुवर्ण की-सीकान्ति वाले वानर हैं, जो धूम्रगिरि का आश्रय लेकर रहते हैं, मैरेय मधु का पान करते हुए जो महारुण पर्वत पर प्रातःकाल के सूर्य की भाँति लाल रंग के भयानक वेगशाली वानर निवास करते हैं तथा सुगन्ध से परिपूर्ण एवं तपस्वियों के आश्रमों से सुशोभित बड़े-बड़े रमणीय वनों और वनान्तों में चारों ओर जो वानर रहते हैं, भूमण्डल के उन सभी वानरों को तुम शीघ्र यहाँ ले आओ। शक्तिशाली तथा अत्यन्त वेगवान् वानरों को भेजकर उनके द्वारा साम, दान आदि उपायों का प्रयोग करके उन सबको यहाँ बुलवाओ
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'Send for the monkeys residing at the five mountains of Mahendra, Himavan, Vindhya, Kailasa and the whitepeaked mount Mandara those monkeys residing on the western mountains, on the sea shore and on mount Udaya shining like the rising Sun monkeys like dark clouds shining in the twilight Sun those at the fierce Padmatala garden and those at the Anjana mountain who resemble dark clouds like collyrium and are as strong as elephants those monkeys of golden complexion residing at the red arsenic mountain caves beside mount Meru those on mount Meru and Dhumra who are of bright red colour like the rising Sun drinking liquor Maireya the monkeys of terrific speed at mount Maharuna those staying at the delightful hermitages in the forests, and those living on the ground all must be cajoled and persuaded to report at once.
ShlokaShloka 3
प्रेषिताः प्रथमं ये च मयादूता महाजवाः।
त्वरणार्थं तु भूयस्त्वं हरीन् सम्प्रेषयापरान्।।4.37.10।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
‘महेन्द्र, हिमवान्, विन्ध्य, कैलास तथा श्वेत शिखर वाले मन्दराचल-इन पाँच पर्वतों के शिखरों पर जो श्रेष्ठ वानर रहते हैं, पश्चिम दिशा में समुद्र के परवर्ती तटपर प्रातःकालिक सूर्य के समान कान्तिमान् और नित्य प्रकाशमान पर्वतों पर जिन वानरों का निवास है, भगवान् सूर्य के निवासस्थान तथा संध्याकालिक मेघसमूह के समान अरुण वर्णवाले उदयाचल एवं अस्ताचल पर जो वानर वास करते हैं, पद्माचलवर्ती वन का आश्रय लेकर जो भयानक पराक्रमी वानर-शिरोमणि निवास करते हैं, अञ्जनपर्वत पर जो काजल और मेघ के समान काले तथा गजराज के समान महाबली वानर रहते हैं, बड़े बड़े पर्वतों की गुफाओं में निवास करने वाले तथा मेरुपर्वत के आस-पास रहने वाले जो सुवर्ण की-सीकान्ति वाले वानर हैं, जो धूम्रगिरि का आश्रय लेकर रहते हैं, मैरेय मधु का पान करते हुए जो महारुण पर्वत पर प्रातःकाल के सूर्य की भाँति लाल रंग के भयानक वेगशाली वानर निवास करते हैं तथा सुगन्ध से परिपूर्ण एवं तपस्वियों के आश्रमों से सुशोभित बड़े-बड़े रमणीय वनों और वनान्तों में चारों ओर जो वानर रहते हैं, भूमण्डल के उन सभी वानरों को तुम शीघ्र यहाँ ले आओ। शक्तिशाली तथा अत्यन्त वेगवान् वानरों को भेजकर उनके द्वारा साम, दान आदि उपायों का प्रयोग करके उन सबको यहाँ बुलवाओ
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'This is in addition to the monkeys for whom swiftfooted messengers have already been sent.
ShlokaShloka 4
ये प्रसक्ताश्च कामेषु दीर्घसूत्राश्च वानराः।
इहाऽनयस्व तान् सर्वान् शीघ्रं तु मम शासनात्।।4.37.11।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
‘महेन्द्र, हिमवान्, विन्ध्य, कैलास तथा श्वेत शिखर वाले मन्दराचल-इन पाँच पर्वतों के शिखरों पर जो श्रेष्ठ वानर रहते हैं, पश्चिम दिशा में समुद्र के परवर्ती तटपर प्रातःकालिक सूर्य के समान कान्तिमान् और नित्य प्रकाशमान पर्वतों पर जिन वानरों का निवास है, भगवान् सूर्य के निवासस्थान तथा संध्याकालिक मेघसमूह के समान अरुण वर्णवाले उदयाचल एवं अस्ताचल पर जो वानर वास करते हैं, पद्माचलवर्ती वन का आश्रय लेकर जो भयानक पराक्रमी वानर-शिरोमणि निवास करते हैं, अञ्जनपर्वत पर जो काजल और मेघ के समान काले तथा गजराज के समान महाबली वानर रहते हैं, बड़े बड़े पर्वतों की गुफाओं में निवास करने वाले तथा मेरुपर्वत के आस-पास रहने वाले जो सुवर्ण की-सीकान्ति वाले वानर हैं, जो धूम्रगिरि का आश्रय लेकर रहते हैं, मैरेय मधु का पान करते हुए जो महारुण पर्वत पर प्रातःकाल के सूर्य की भाँति लाल रंग के भयानक वेगशाली वानर निवास करते हैं तथा सुगन्ध से परिपूर्ण एवं तपस्वियों के आश्रमों से सुशोभित बड़े-बड़े रमणीय वनों और वनान्तों में चारों ओर जो वानर रहते हैं, भूमण्डल के उन सभी वानरों को तुम शीघ्र यहाँ ले आओ। शक्तिशाली तथा अत्यन्त वेगवान् वानरों को भेजकर उनके द्वारा साम, दान आदि उपायों का प्रयोग करके उन सबको यहाँ बुलवाओ
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'Get all the monkeys including those engaged in carnal pleasures and those slow in movement all at once on my command.
ShlokaShloka 5
अहोभिर्दशभिर्ये च नागच्छन्ति ममाज्ञया।
हन्तव्यास्ते दुरात्मानो राजशासनदूषकाः।।4.37.12।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
‘महेन्द्र, हिमवान्, विन्ध्य, कैलास तथा श्वेत शिखर वाले मन्दराचल-इन पाँच पर्वतों के शिखरों पर जो श्रेष्ठ वानर रहते हैं, पश्चिम दिशा में समुद्र के परवर्ती तटपर प्रातःकालिक सूर्य के समान कान्तिमान् और नित्य प्रकाशमान पर्वतों पर जिन वानरों का निवास है, भगवान् सूर्य के निवासस्थान तथा संध्याकालिक मेघसमूह के समान अरुण वर्णवाले उदयाचल एवं अस्ताचल पर जो वानर वास करते हैं, पद्माचलवर्ती वन का आश्रय लेकर जो भयानक पराक्रमी वानर-शिरोमणि निवास करते हैं, अञ्जनपर्वत पर जो काजल और मेघ के समान काले तथा गजराज के समान महाबली वानर रहते हैं, बड़े बड़े पर्वतों की गुफाओं में निवास करने वाले तथा मेरुपर्वत के आस-पास रहने वाले जो सुवर्ण की-सीकान्ति वाले वानर हैं, जो धूम्रगिरि का आश्रय लेकर रहते हैं, मैरेय मधु का पान करते हुए जो महारुण पर्वत पर प्रातःकाल के सूर्य की भाँति लाल रंग के भयानक वेगशाली वानर निवास करते हैं तथा सुगन्ध से परिपूर्ण एवं तपस्वियों के आश्रमों से सुशोभित बड़े-बड़े रमणीय वनों और वनान्तों में चारों ओर जो वानर रहते हैं, भूमण्डल के उन सभी वानरों को तुम शीघ्र यहाँ ले आओ। शक्तिशाली तथा अत्यन्त वेगवान् वानरों को भेजकर उनके द्वारा साम, दान आदि उपायों का प्रयोग करके उन सबको यहाँ बुलवाओ
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'Kill those evilminded ones within ten days for disobeying the royal orders.
ShlokaShloka 6
शतान्यथ सहस्राणां कोट्यश्च मम शासनात्।
प्रयान्तु कपिसिंहानां दिशो मम मते स्थिताः।।4.37.13।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
‘महेन्द्र, हिमवान्, विन्ध्य, कैलास तथा श्वेत शिखर वाले मन्दराचल-इन पाँच पर्वतों के शिखरों पर जो श्रेष्ठ वानर रहते हैं, पश्चिम दिशा में समुद्र के परवर्ती तटपर प्रातःकालिक सूर्य के समान कान्तिमान् और नित्य प्रकाशमान पर्वतों पर जिन वानरों का निवास है, भगवान् सूर्य के निवासस्थान तथा संध्याकालिक मेघसमूह के समान अरुण वर्णवाले उदयाचल एवं अस्ताचल पर जो वानर वास करते हैं, पद्माचलवर्ती वन का आश्रय लेकर जो भयानक पराक्रमी वानर-शिरोमणि निवास करते हैं, अञ्जनपर्वत पर जो काजल और मेघ के समान काले तथा गजराज के समान महाबली वानर रहते हैं, बड़े बड़े पर्वतों की गुफाओं में निवास करने वाले तथा मेरुपर्वत के आस-पास रहने वाले जो सुवर्ण की-सीकान्ति वाले वानर हैं, जो धूम्रगिरि का आश्रय लेकर रहते हैं, मैरेय मधु का पान करते हुए जो महारुण पर्वत पर प्रातःकाल के सूर्य की भाँति लाल रंग के भयानक वेगशाली वानर निवास करते हैं तथा सुगन्ध से परिपूर्ण एवं तपस्वियों के आश्रमों से सुशोभित बड़े-बड़े रमणीय वनों और वनान्तों में चारों ओर जो वानर रहते हैं, भूमण्डल के उन सभी वानरों को तुम शीघ्र यहाँ ले आओ। शक्तिशाली तथा अत्यन्त वेगवान् वानरों को भेजकर उनके द्वारा साम, दान आदि उपायों का प्रयोग करके उन सबको यहाँ बुलवाओ
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'The hundreds of thousands of crores of obedient lionlike monkeys should proceed in all directions at my command.
ShlokaShloka 7
मेघपर्वतसङ्काशाश्छादयन्त इवाम्बरम्।
घोररूपाः कपिश्रेष्ठा यान्तु मच्छासनादितः।।4.37.14।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
‘महेन्द्र, हिमवान्, विन्ध्य, कैलास तथा श्वेत शिखर वाले मन्दराचल-इन पाँच पर्वतों के शिखरों पर जो श्रेष्ठ वानर रहते हैं, पश्चिम दिशा में समुद्र के परवर्ती तटपर प्रातःकालिक सूर्य के समान कान्तिमान् और नित्य प्रकाशमान पर्वतों पर जिन वानरों का निवास है, भगवान् सूर्य के निवासस्थान तथा संध्याकालिक मेघसमूह के समान अरुण वर्णवाले उदयाचल एवं अस्ताचल पर जो वानर वास करते हैं, पद्माचलवर्ती वन का आश्रय लेकर जो भयानक पराक्रमी वानर-शिरोमणि निवास करते हैं, अञ्जनपर्वत पर जो काजल और मेघ के समान काले तथा गजराज के समान महाबली वानर रहते हैं, बड़े बड़े पर्वतों की गुफाओं में निवास करने वाले तथा मेरुपर्वत के आस-पास रहने वाले जो सुवर्ण की-सीकान्ति वाले वानर हैं, जो धूम्रगिरि का आश्रय लेकर रहते हैं, मैरेय मधु का पान करते हुए जो महारुण पर्वत पर प्रातःकाल के सूर्य की भाँति लाल रंग के भयानक वेगशाली वानर निवास करते हैं तथा सुगन्ध से परिपूर्ण एवं तपस्वियों के आश्रमों से सुशोभित बड़े-बड़े रमणीय वनों और वनान्तों में चारों ओर जो वानर रहते हैं, भूमण्डल के उन सभी वानरों को तुम शीघ्र यहाँ ले आओ। शक्तिशाली तथा अत्यन्त वेगवान् वानरों को भेजकर उनके द्वारा साम, दान आदि उपायों का प्रयोग करके उन सबको यहाँ बुलवाओ
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'Fierce monkeys, comparable to clouds and mountains in appearance shall go as though covering the sky from here at my command.
ShlokaShloka 8
ते गतिज्ञा गतिं ज्ञात्वा पृथिव्यां सर्ववानराः।
आनयन्तु हरीन् सर्वांस्त्वरिता शसनान्मम।।4.37.15।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
‘महेन्द्र, हिमवान्, विन्ध्य, कैलास तथा श्वेत शिखर वाले मन्दराचल-इन पाँच पर्वतों के शिखरों पर जो श्रेष्ठ वानर रहते हैं, पश्चिम दिशा में समुद्र के परवर्ती तटपर प्रातःकालिक सूर्य के समान कान्तिमान् और नित्य प्रकाशमान पर्वतों पर जिन वानरों का निवास है, भगवान् सूर्य के निवासस्थान तथा संध्याकालिक मेघसमूह के समान अरुण वर्णवाले उदयाचल एवं अस्ताचल पर जो वानर वास करते हैं, पद्माचलवर्ती वन का आश्रय लेकर जो भयानक पराक्रमी वानर-शिरोमणि निवास करते हैं, अञ्जनपर्वत पर जो काजल और मेघ के समान काले तथा गजराज के समान महाबली वानर रहते हैं, बड़े बड़े पर्वतों की गुफाओं में निवास करने वाले तथा मेरुपर्वत के आस-पास रहने वाले जो सुवर्ण की-सीकान्ति वाले वानर हैं, जो धूम्रगिरि का आश्रय लेकर रहते हैं, मैरेय मधु का पान करते हुए जो महारुण पर्वत पर प्रातःकाल के सूर्य की भाँति लाल रंग के भयानक वेगशाली वानर निवास करते हैं तथा सुगन्ध से परिपूर्ण एवं तपस्वियों के आश्रमों से सुशोभित बड़े-बड़े रमणीय वनों और वनान्तों में चारों ओर जो वानर रहते हैं, भूमण्डल के उन सभी वानरों को तुम शीघ्र यहाँ ले आओ। शक्तिशाली तथा अत्यन्त वेगवान् वानरों को भेजकर उनके द्वारा साम, दान आदि उपायों का प्रयोग करके उन सबको यहाँ बुलवाओ
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ShlokaShloka 9
तस्य वानर राजस्य श्रुत्वा वायुसुतो वचः।
दिक्षु सर्वासु विक्रान्तान्प्रेषयामास वानरान्।।4.37.16।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
‘महेन्द्र, हिमवान्, विन्ध्य, कैलास तथा श्वेत शिखर वाले मन्दराचल-इन पाँच पर्वतों के शिखरों पर जो श्रेष्ठ वानर रहते हैं, पश्चिम दिशा में समुद्र के परवर्ती तटपर प्रातःकालिक सूर्य के समान कान्तिमान् और नित्य प्रकाशमान पर्वतों पर जिन वानरों का निवास है, भगवान् सूर्य के निवासस्थान तथा संध्याकालिक मेघसमूह के समान अरुण वर्णवाले उदयाचल एवं अस्ताचल पर जो वानर वास करते हैं, पद्माचलवर्ती वन का आश्रय लेकर जो भयानक पराक्रमी वानर-शिरोमणि निवास करते हैं, अञ्जनपर्वत पर जो काजल और मेघ के समान काले तथा गजराज के समान महाबली वानर रहते हैं, बड़े बड़े पर्वतों की गुफाओं में निवास करने वाले तथा मेरुपर्वत के आस-पास रहने वाले जो सुवर्ण की-सीकान्ति वाले वानर हैं, जो धूम्रगिरि का आश्रय लेकर रहते हैं, मैरेय मधु का पान करते हुए जो महारुण पर्वत पर प्रातःकाल के सूर्य की भाँति लाल रंग के भयानक वेगशाली वानर निवास करते हैं तथा सुगन्ध से परिपूर्ण एवं तपस्वियों के आश्रमों से सुशोभित बड़े-बड़े रमणीय वनों और वनान्तों में चारों ओर जो वानर रहते हैं, भूमण्डल के उन सभी वानरों को तुम शीघ्र यहाँ ले आओ। शक्तिशाली तथा अत्यन्त वेगवान् वानरों को भेजकर उनके द्वारा साम, दान आदि उपायों का प्रयोग करके उन सबको यहाँ बुलवाओ
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Having heard Sugriva's command, Hanuman, son of the Windgod, sent powerful monkeys in all directions.
ShlokaShloka 10
ते पदं विष्णुविक्रान्तं पतत्रिज्योतिरध्वगाः।
प्रयाताः प्रहिता राज्ञा हरयस्तत्क्षणेन वै।।4.37.17।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
‘मेरी आज्ञा से पहले जो महान् वेगशाली वानर भेजे गये हैं, उनको जल्दी करने के लिये प्रेरणा देने के निमित्त तुम पुनः दूसरे श्रेष्ठ वानरों को भेजो
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The monkeys ordered by the king, traversed the pathway of birds and heavenly bodies, the path Lord Visnu had trod. [Note: the sky is called Vishnupada since Lord Visnu set his foot on the sky in his incarnation as Vamana.]
ShlokaShloka 11
ते समुद्रेषु गिरिषु वनेषु च सरस्सु च।
वानरा वानरान्सर्वान्रामहेतोरचोदयन्।।4.37.18।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
‘जो वानर कामभोग में फँसे हए हों तथा जो दीर्घसूत्री (प्रत्येक कार्य को विलम्ब से करने वाले) हों, उन सभी कपीश्वरों को शीघ्र यहाँ ले आओ।
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The messenger monkeys drove in all those living on the sea shore, mountains, forests as well as banks of lakes in order to serve the cause of Rama.
ShlokaShloka 12
मृत्युकालोपमस्याऽज्ञां राजराजस्य वानराः।
सुग्रीवस्याययु श्श्रुत्वा सुग्रीवभयदर्शिनः।।4.37.19।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
‘जो मेरी आज्ञा से दस दिन के भीतर यहाँ न आ जायँ, राजाज्ञा को कलङ्कित करने वाले उन दुरात्मा वानरों को मार डालना चाहिये
Show English TranslationEnglish Translation
In response to the command of the king, who was like death to them, the monkeys came at once, driven by fear from Sugriva.
ShlokaShloka 13
ततस्तेऽञ्जनसङ्काशा गिरेस्तस्मान्महाजवाः।
तिस्रः कोट्यः प्लवङ्गा���ां निर्ययुर्यत्र राघवः।।4.37.20।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
‘जो मेघ और पर्वत के समान अपने विशालशरीर से आकाश को आच्छादित-सा कर लेते हैं, वे घोर रूपधारी श्रेष्ठ वानर मेरा आदेश मानकर यहाँ से यात्रा करें
Show English TranslationEnglish Translation
Then three crores of swiftfooted monkeys, dark like collyrium, rushed forth to the mountain to meet Rama.
ShlokaShloka 14
अस्तं गच्छति यत्रार्कस्तस्मिन्गिरिवरे स्थिताः।
सन्तप्त हेममहाभासस्तस्मात्कोट्यो दश च्युताः।।4.37.21।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
‘जो मेघ और पर्वत के समान अपने विशालशरीर से आकाश को आच्छादित-सा कर लेते हैं, वे घोर रूपधारी श्रेष्ठ वानर मेरा आदेश मानकर यहाँ से यात्रा करें
Show English TranslationEnglish Translation
Ten crores of monkeys shining like pure molten gold, staying on the best of mountains where the Sun sets moved towards Kishkinda.
ShlokaShloka 15
कैलासशिखरेभ्यश्च सिंहकेसरवर्चसाम्।
ततः कोटिसहस्राणि वानराणामुपागमन्।।4.37.22।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
वानरराज सुग्रीव की बात सुनकर वायुपुत्र हनुमान् जी ने सम्पूर्ण दिशाओं में बहुत-से पराक्रमी वानरों को भेजा
Show English TranslationEnglish Translation
From the peaks of Kailasa mountain moved out one thousand crores of monkeys who were of bright colour like the lion's mane.
ShlokaShloka 16
फलमूलेन जीवन्तो हिमवन्तमुपाश्रिताः।
तेषां कोटिसहस्राणां सहस्रं समवर्तत।।4.37.23।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
वानरराज सुग्रीव की बात सुनकर वायुपुत्र हनुमान् जी ने सम्पूर्ण दिशाओं में बहुत-से पराक्रमी वानरों को भेजा
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Then monkeys residing at mount Himavan feeding on fruits and roots came in thousands of crores. (This number is called Shankha 1000,000,000,000,0, it is one digit higher than Mahapadma.)
ShlokaShloka 17
अङ्गारकसमानानां भीमानां भीमकर्मणाम्।
विन्ध्याद्वानरकोटीनां सहस्राण्यपतन्द्रुतम्।।4.37.24।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
राजा की आज्ञा पाकर वे सब वानर तत्काल आकाश में पक्षियों और नक्षत्रों के मार्ग से चल दिये
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From the Vindhya mountain came down thousands of crores of swiftfooted monkeys of terrific deeds. They were fierce like fire (Angaraka).
ShlokaShloka 18
क्षीरोदवेलानिलयास्तमालवनवासिनः।
नारिकेलाशनाश्चैव तेषां सङ्ख्या न विद्यते।।4.37.25।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
अपने सम्राट् सुग्रीव का, जो मृत्यु एवं काल के समान भयानक दण्ड देने वाले थे, आदेश सुनकर वे सभी वानर उनके भय से थर्रा उठे और तुरंत ही किष्किन्धा की ओर प्रस्थित हुए
Show English TranslationEnglish Translation
The monkeys residents of Tamala forest on the shores of the ocean of milk feeding on coconuts arrived from the groves in countless number.
ShlokaShloka 19
वनेभ्यो गह्वरेभ्यश्च सरिद्भ्यश्च महाजवा।
आगच्छद्वानरी सेना पिबन्तीव दिवाकरम्।।4.37.26।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
अपने सम्राट् सुग्रीव का, जो मृत्यु एवं काल के समान भयानक दण्ड देने वाले थे, आदेश सुनकर वे सभी वानर उनके भय से थर्रा उठे और तुरंत ही किष्किन्धा की ओर प्रस्थित हुए
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An army of swiftmoving monkeys came from the caves, from the banks of rivers and forests as though it was swallowing up the Sungod.
ShlokaShloka 20
ये तु त्वरयितुं याता वानरास्सर्ववानरान्।
ते वीरा हिमवच्छैलं ददृशुस्तं महाद्रुमम्।।4.37.27।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
कैलास के शिखरों से सिंह के अयाल की-सी श्वेत कान्ति वाले दस अरब वानर आये
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The monkeys sent earlier to hasten all their counterparts saw mount Himavat from the great tree.
ShlokaShloka 21
तस्मिन्गिरिवरे रम्ये यज्ञो माहेश्वरः पुरा।
सर्वदेवमनस्तोषो बभौ दिव्यो मनोहरः।।4.37.28।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
कैलास के शिखरों से सिंह के अयाल की-सी श्वेत कान्ति वाले दस अरब वानर आये
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A divine, wonderful, delightful Yagna dedicated to Lord Siva used to be performed on the beautiful (Himalayan) mountain in the past so that the minds of all deities were satisfied.
ShlokaShloka 22
अन्ननिष्यन्दजातानि मूलानि च फलानि च।
अमृतास्वादकल्पानि ददृशुस्तत्र वानराः।।4.37.29।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
कैलास के शिखरों से सिंह के अयाल की-सी श्वेत कान्ति वाले दस अरब वानर आये
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There the monkeys saw the Yajna, and partook the fruits and roots produced out of the havis which tasted sweet like nectar.
ShlokaShloka 23
तदन्नसम्भवं दिव्यं फलमूलं मनोहरम्।
यः कश्चित्सकृदश्नाति मासं भवति तर्पितः।।4.37.30।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
विन्ध्याचल पर्वत से मङ्गल के समान लाल रंगवाले भयानक पराक्रमी भयंकर रूपधारी वानरों की दस अरब सेना बड़े वेग से किष्किन्धा में आयी
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Any one who shares even a little of the divine, delicious fruits and roots grown out of that havis will have no hunger or thirst for a month.
ShlokaShloka 24
तानि मूलानि दिव्यानि फलानि च फलाशनाः।
औषधानि च दिव्यानि जगृहुर्हरियूथपाः।।4.37.31।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
विन्ध्याचल पर्वत से मङ्गल के समान लाल रंगवाले भयानक पराक्रमी भयंकर रूपधारी वानरों की दस अरब सेना बड़े वेग से किष्किन्धा में आयी
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The monkey leaders who lived on fruits collected the divine fruits, roots as well as medicinal herbs.
ShlokaShloka 25
तस्माच्च यज्ञायतनात्पुष्पाणि सुरभीणि च।
आनिन्युर्वानरा गत्वा सुग्रीवप्रियकारणात्।।4.37.32।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
क्षीरसमुद्र के किनारे और तमाल वन में नारियल खाकर रहने वाले वानर इतनी अधिक संख्या में आये कि उनकी गणना नहीं हो सकती थी
Show English TranslationEnglish Translation
The monkeys also collected finesmelling flowers from the sacrificial altar to please Sugriva with.
ShlokaShloka 26
ते तु सर्वे हरिवराः पृथिव्यां सर्ववानरान्।
सञ्चोदयित्वा त्वरिता यूथानां जग्मुरग्रतः।।4.37.33।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
वनों से, गुफाओं से और नदियों के किनारों से असंख्य महाबली वानर एकत्र हुए वानरों की वह सारी सेना सूर्यदेव को पीती (आच्छादित करती) हुई सी आयी
Show English TranslationEnglish Translation
The monkey leaders from all over the earth arrived quickly, leading the hordes of them.
ShlokaShloka 27
ते तु तेन मुहूर्तेन यूथपाश्शीघ्रगामिनः।
किष्किन्धां त्वरया प्राप्ता स्सुग्रीवो यत्र वानरः।।4.37.34।।
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जो वानर समस्त वानरों को शीघ्र आने के लिये प्रेरित करने के निमित्त किष्किन्धा से दुबारा भेजे गये थे, उन वीरों ने हिमालय पर्वत पर उस प्रसिद्ध विशाल वृक्ष को देखा (जो भगवान् शंकर की यज्ञशाला में स्थित था)
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In a short while the swiftmoving leaders of the monkeys groups reached Kishkinda quickly.
ShlokaShloka 28
ते गृहीत्वौषधीस्सर्वाः फलमूलं च वानराः।
तं प्रतिग्राहयामासुर्वचनं चेदमब्रुवन्।।4.37.35।।
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उस पर्वत पर खीर आदि अन्न (होमद्रव्य) से घृत आदि का स्राव हुआ था, उससे वहाँ अमृत के समान स्वादिष्ट फल और मूल उत्पन्न हुए थे। उन फलों को उन वानरों ने देखा
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Offering all kinds of medicinal herbs, fruits and roots collected, to Sugriva the monkeys said:
ShlokaShloka 29
सर्वे परिगताश्शैलास्समुद्राश्च वनानि च।
पृथिव्यां वानरास्सर्वे शासनादुपयान्ति ते।।4.37.36।।
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उस पर्वत पर खीर आदि अन्न (होमद्रव्य) से घृत आदि का स्राव हुआ था, उससे वहाँ अमृत के समान स्वादिष्ट फल और मूल उत्पन्न हुए थे। उन फलों को उन वानरों ने देखा
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ShlokaShloka 30
एवं श्रुत्वा ततो हृष्ट स्सुग्रीवः प्लवगाधिपः।
प्रतिजग्राह तत्प्रतीतस्तेषां सर्वमुपायनम्।।4.37.37।।
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उक्त अन्न से उत्पन्न हुए उस दिव्य एवं मनोहर फल-मूल को जो कोई एक बार खा लेता था, वह एक मासतक उससे तृप्त बना रहता था
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On hearing the report from the monkeys, Sugriva the king of vanaras, accepted all the gifts they had brought him, with great pleasure. इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये किष्किन्धाकाण्डे सप्तत्रिंशस्सर्गः।। Thus ends the thirtyseventh sarga in Kishkindakanda of the first epic, of the Holy Ramayana composed by sage Valmiki.