Kishkindha Kanda

Sarga 31: Lakshmana arrives at Sugriva's cavepalace -- Lakshmana's anger over Sugriva's slackness -- monkeys fear Lakshamana.

किष्किन्धाकाण्डम् · सर्ग 31

46 shlokas

ShlokaShloka 1
स कामिनं दीनमदीनसत्त्वं शोकाभिपन्नं समुदीर्णकोपम्। नरेन्द्रसूनुर्नरदेवपुत्रं रामानुजः पूर्वजमित्युवाच4.31.1।।
हिन्दी अर्थ देखें
श्रीराम के छोटे भाई नरेन्द्रकुमार लक्ष्मण ने उस समय सीता की कामना से युक्त, दुःखी, उदारहृदय, शोकग्रस्त तथा बढ़े हुए रोषवाले ज्येष्ठ भ्राता महाराजपुत्र श्रीराम से इस प्रकार कहा—
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Seeing the indomitable hero, his elder brother, son of a king, lovesick, dejected and overcome by anger and grief, spoke prince Lakshmana:
ShlokaShloka 2
न वानरः स्थास्यति साधुवृत्ते न मंस्यते कर्मफलानुषङ्गान्। न भोज्यते वानरराज्यलक्ष्मीं तथाहि नाभिक्रमतेऽस्य बुद्धिः4.31.2।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘आर्य! सुग्रीव वानर है, वह श्रेष्ठ पुरुषों के लिये उचित सदाचार पर स्थिर नहीं रह सकेगा। सुग्रीव इस बात को भी नहीं मानता है कि अग्नि को साक्षी देकर श्रीरघुनाथजी के साथ मित्रता-स्थापन रूप जो सत्-कर्म किया गया है, उसी के फल से मुझे निष्कण्टक राज्यभोग प्राप्त हुए हैं। अतः वह वानरों की राज्यलक्ष्मी का पालन एवं उपभोग नहीं कर सकेगा; क्योंकि उसकी बुद्धि मित्रधर्म के पालन के लिये अधिक आगे नहीं बढ़ रही है
Show English Translation
'Sugriva has not stuck to the conduct of the virtuous, of sharing the fruits of action equally. He does not realize that he obtained the prosperous kingship of vanaras as a result of your (friendly) action. He does not have the intelligence of conducting himself in your favour (of searching Sita). Therefore he will not enjoy the kingship for long.
ShlokaShloka 3
मतिक्षयाद्ग्राम्यसुखेषु सक्त स्तव प्रसादाप्रतिकारबुद्धिः। हतोऽग्रजं पश्यतु वीर तस्य न राज्यमेवं विगुणस्य देयम्4.31.3।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘सुग्रीव की बुद्धि मारी गयी है, इसलिये वह विषयभोगों में आसक्त हो गया है। आपकी कृपा से जो उसे राज्य आदि का लाभ हुआ है, उस उपकार का बदला चुकाने की उसकी नीयत नहीं है। अतः अब वह भी मारा जाकर अपने बड़े भाई वीरवर वाली का दर्शन करे। ऐसे गुणहीन पुरुष को राज्य नहीं देना चाहिये
Show English Translation
'O hero he is too ungrateful to return the favour done to him, Engaged in rustic, vulgar pleasures, he is not thinking of it. Let him see his killed elder brother. Kingship should not be given to an individual who is a destitute of virtues.
ShlokaShloka 4
न धारये कोपमुदीर्णवेगं निहन्मि सुग्रीवमसत्यमद्य। हरिप्रवीरैस्सह वालिपुत्रो नरेन्द्रपत्न्या विचयं करोतु4.31.4।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘मेरे क्रोध का वेग बढ़ा हुआ है। मैं इसे रोक नहीं सकता। असत्यवादी सुग्रीव को आज ही मारे डालता हूँ। अब वालिकुमार अङ्गद ही राजा होकर प्रधान वानर-वीरों के साथ राजकुमारी सीता की खोज करे’
Show English Translation
'I cannot hold my overflowing anger. I shall kill this untruthful Sugriva. Let Vali's son along with the foremost of monkeys search for the queen (Sita).'
ShlokaShloka 5
तमात्तबाणासनमुत्पतन्तं निवेदितार्थं रणचण्डकोपम्। उवाच रामः परवीरहन्ता स्ववेक्षितं सानुनयं च वाक्यम्4.31.5।।
हिन्दी अर्थ देखें
यों कहकर लक्ष्मण धनुष-बाण हाथ में ले बड़े वेग से चल पड़े। उन्होंने अपने जाने का प्रयोजन स्पष्ट शब्दों में निवेदन कर दिया था। युद्ध के लिये उनका प्रचण्ड कोप बढ़ा हुआ था तथा वे क्या करने जा रहे हैं, इस पर उन्होंने अच्छी तरह विचार नहीं किया था। उस समय विपक्षी वीरों का संहार करने वाले श्रीरामचन्द्रजी ने उन्हें शान्त करने के लिये यह अनुनययुक्त बात कही—
Show English Translation
Rama, a slayer of enemy heroes but not of those who seek his refuge, spoke in a conciliatory tone to Lakshmana who jumped, wielding bow and arrows, inspired with his fierce fighting spirit.
ShlokaShloka 6
न हि वै त्वद्विधो लोके पापमेवं समाचरेत्। पापमार्येण यो हन्ति स वीरः पुरुषोत्तमः4.31.6।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘सुमित्रानन्दन! तुम-जैसे श्रेष्ठ पुरुष को संसार में ऐसा (मित्रवधरूप) निषिद्ध आचरण नहीं करना चाहिये। जो उत्तम विवेक के द्वारा अपने क्रोध को मार देता है, वह वीर समस्त पुरुषों में श्रेष्ठ है
Show English Translation
ShlokaShloka 7
नेदमत्र त्वया ग्राह्यं साधुवृत्तेन लक्ष्मण। तां प्रीतिमनुवर्तस्व पूर्ववृत्तं च सङ्गतम्4.31.7।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘लक्ष्मण! तुम सदाचारी हो। तुम्हें इस प्रकार सुग्रीव के मारने का निश्चय नहीं करना चाहिये। उसके प्रति जो तुम्हारा प्रेम था, उसी का अनुसरण करो और उसके साथ पहले जो मित्रता की गयी है, उसे निबाहो
Show English Translation
'O Lakshmana with your good conduct you should not do so. Keeping in view the affectionate friendship extended (by Sugriva) earlier, be friendly.
ShlokaShloka 8
सामोपहितया वाचा रूक्षाणि परिवर्जयन्। वक्तुमर्हसि सुग्रीवं व्यतीतं कालपर्यये4.31.8।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘तुम्हें सान्त्वनापूर्ण वाणी द्वारा कटु वचनों का परित्याग करते हुए सुग्रीव से इतना ही कहना चाहिये कि तुमने सीता की खोज के लिये जो समय नियत किया था, वह बीत गया (फिर भी चुप क्यों बैठे हो)’
Show English Translation
'Sugriva has exceeded the time limit. Avoiding harsh words, you ought to speak to him in a conciliatory manner.
ShlokaShloka 9
सोऽग्रजेनानुशिष्टार्थो यथावत्���ुरुषर्षभः। प्रविवेश पुरीं वीरो लक्ष्मणः परवीरहा4.31.9।।
हिन्दी अर्थ देखें
भाई के प्रिय और हित में तत्पर रहने वाले शुभ बुद्धि से युक्त बुद्धिमान् लक्ष्मण रोष में भरे हुए ही वानरराज सुग्रीव के भवन की ओर चले
Show English Translation
Having been duly briefed by his elder brother, the heroic Lakshmana, destroyer of enemies, a bull among men entered the city.
ShlokaShloka 10
ततश्शुभमतिः प्राज्ञो भ्रातुः प्रियहिते रतः। लक्ष्मणः प्रतिसंरब्धो जगाम भवनं कपेः4.31.10।। शक्रबाणासनप्रख्यं धनुः कालान्तकोपमः। प्रगृह्य गिरिशृङ्गाभं मन्दरः सानुमानिव।।4.31.11।।
हिन्दी अर्थ देखें
भाई के प्रिय और हित में तत्पर रहने वाले शुभ बुद्धि से युक्त बुद्धिमान् लक्ष्मण रोष में भरे हुए ही वानरराज सुग्रीव के भवन की ओर चले
Show English Translation
The noblehearted, benevolent and wise Lakshmana, eager to please Rama, picked up his bow looking like a mountain peak, comparable to the bow of Indra and agitated with the anger of the god of Death entered the mansion of Sugriva which stood like the mountain peak of Mandara.
ShlokaShloka 11
यथोक्तकारी वचनमुत्तरं चैव सोत्तरम्। बृहस्पतिसमो बुद्ध्या मत्वा रामानुजस्तदा4.31.12।। कामक्रोधसमुत्थेन भ्रातुः कोपाग्निना वृतः। प्रभञ्जन इवाप्रीतः प्रययौ लक्ष्मणस्तदा4.31.13।।
हिन्दी अर्थ देखें
उस समय वे इन्द्रधनुष के समान तेजस्वी, काल और अन्तक के समान भयंकर तथा पर्वत-शिखर के समान विशाल धनुष को हाथ में लेकर शृङ्गसहित मन्दराचल के समान जान पड़ते थे
Show English Translation
Then Lakshmana, obedient, intelligent like Brihaspati, like a tempest, encompassed by the fire of anger and deliberating in his mind as to the possible questions from Sugriva and the reply from him.
ShlokaShloka 12
सालतालाश्वकर्णांश्च तरसा पातयन्बहून्। पर्यस्यन्गिरिकूटानि द्रुमानन्यांश्च वेगतः4.31.14।। शिलाश्च शकलीकुर्वन्पद्भ्यां गज इवाशुगः। दूरामेकपदं त्यक्त्वा ययौ कार्यवशाद्द्रुतम्4.31.15।।
हिन्दी अर्थ देखें
श्रीराम के अनुज लक्ष्मण अपने बड़े भाई की आज्ञा का यथोक्त रूप से पालन करने वाले तथा बृहस्पति के समान बुद्धिमान् थे। वे सुग्रीव से जो बात कहते, सुग्रीव उसका जो कुछ उत्तर देते और उस उत्तर का भी ये जो कुछ उत्तर देते, उन सबको अच्छी तरह समझ-बूझकर वहाँ से प्रस्थित हुए थे
Show English Translation
'Lakshmana rushed on foot speedily, cutting the branches of sala, tala and asvakarna and other trees on the way and forcibly turning and crushing the mountain rocks into pieces with a single foot, like a swiftmoving elephant taking long strides, to carry out the task.
ShlokaShloka 13
तामपश्यद्बलाकीर्णां हरिराजमहापुरीम्। दुर्गामिक्ष्वाकुशार्दूलः किष्किन्धां गिरिसङ्गटे4.31.16।।
हिन्दी अर्थ देखें
सीता की खोजविषयक जो श्रीराम की कामना थी और सुग्रीव की असावधानी के कारण उसमें बाधा पड़ने से जो उन्हें क्रोध हुआ था, उन दोनों के कारण लक्ष्मण की भी क्रोधाग्नि भड़क उठी थी। उस क्रोधाग्नि से घिरे हुए लक्ष्मण सुग्रीव के प्रति प्रसन्न नहीं थे। वे उसी अवस्था में वायु के समान वेग से चले
Show English Translation
The tiger of the Ikshvaku race saw the inaccessible Kishkinda, the capital of vanara kingdom, located between mountains and fortified with the army.
ShlokaShloka 14
रोषात्प्रस्फुरमाणोष्ठ स्सुग्रीवं प्रति लक्ष्मणः। ददर्श वानरान्भीमाकनिष्किन्धाया बहिश्चरान्4.31.17।।
हिन्दी अर्थ देखें
उनका वेग ऐसा बढ़ा हुआ था कि वे मार्ग में मिलने वाले साल, ताल और अश्वकर्ण नामक वृक्षों को उसी वेग से बलपूर्वक गिराते तथा पर्वतशिखरों एवं अन्य वृक्षों को उठा-उठाकर दूर फेंकते जाते थे
Show English Translation
His lips trembling in anger, Lakshmana saw fierceful monkey guards of Sugriva at the entrance of Kishkinda city.
ShlokaShloka 15
तं दृष्ट्वा वानरास्सर्वे लक्ष्मणं पुरुषर्षभम्। शैलशृङ्गाणि शतशः प्रवृद्धांश्च महीरुहान्4.31.18।। जगृहुः कुञ्जरप्रख्या वानराः पर्वतान्तरे।
हिन्दी अर्थ देखें
शीघ्रगामी हाथी के समान अपने पैरों की ठोकर से शिलाओं को चूर-चूर करते और लंबी-लंबी डगें भरते हुए वे कार्यवश बड़ी तेजी के साथ चले
Show English Translation
Hundreds of monkeys of the size of elephants stood holding huge trees and boulders of rocks on seeing Lakshmana, the bull among men.
ShlokaShloka 16
तान्गृहीतप्रहरणान्सर्वान्दृष्ट्वा तु लक्ष्मणः4.31.19।। बभूव द्विगुणं क्रुद्धो बह्विन्धन इवानलः।
हिन्दी अर्थ देखें
इक्ष्वाकुकुल के सिंह लक्ष्मण ने निकट जाकर वानरराज सुग्रीव की विशाल पुरी किष्किन्धा देखी, जो पहाड़ों के बीच में बसी हुई थी। वानरसेना से व्याप्त होने के कारण वह पुरी दूसरों के लिये दुर्गम थी
Show English Translation
On seeing the monkeys wielding weapons, Lakshmana's anger doubled like logs of firewood put to burning.
ShlokaShloka 17
तं ते भयपरीताङ्गाः क्रुद्धं दृष्ट्वा प्लवङ्गमाः4.31.20।। कालमृत्युयुगान्ताभं शतशो विद्रुता दिशः।
हिन्दी अर्थ देखें
उस समय लक्ष्मण के ओष्ठ सुग्रीव के प्रति रोष से फड़क रहे थे। उन्होंने किष्किन्धा के पास बहुतेरे भयंकर वानरों को देखा जो नगर के बाहर विचर रहे थे
Show English Translation
Seeing enraged Lakshmana, who looked like a veritable god of Death at the time of dissolution of the universe, hundreds of monkeys, their limbs trembling in fear ran in different directions.
ShlokaShloka 18
ततस्सुग्रीवभवनं प्रविश्य हरिपुङ्गवाः4.31.21।। क्रोधमागमनं चैव लक्ष्मणस्य न्यवेदयन्।
हिन्दी अर्थ देखें
उन वानरों के शरीर हाथियों के समान विशाल थे। उन समस्त वानरों ने पुरुषप्रवर लक्ष्मण को देखते ही पर्वत के अंदर विद्यमान सैकड़ों शैल-शिखर और बड़े-बड़े वृक्ष उठा लिये
Show English Translation
Having entered Sugriva's palace, the monkeychiefs reported the arrival of angry Lakshmana.
ShlokaShloka 19
तारया सहितः कामी सक्तः कपिवृषो रहः4.31.22।। न तेषां कपिवीराणां शुश्राव वचनं तदा।
हिन्दी अर्थ देखें
उन सबको हथियार उठाते देख लक्ष्मण दूने क्रोध से जल उठे, मानो जलती आग में बहुत-सी सूखी लकड़ियाँ डाल दी गयी हों
Show English Translation
But Sugriva who was engrossed in overtures with passionate Tara, did not heed the words of the monkeychiefs.
ShlokaShloka 20
ततस्सचिवसन्दिष्टा हरयो रोमहर्षणाः। गिरिकुञ्जर मेघाभा नगर्या निर्ययुस्तदा।।4.31.23।।
हिन्दी अर्थ देखें
क्षुब्ध हुए लक्ष्मण काल, मृत्यु तथा प्रलयकालीन अग्नि के समान भयंकर दिखायी देने लगे। उन्हें देखकर उन वानरों के शरीर भय से काँपने लगे और वे सैकड़ों की संख्या में चारों दिशाओं में भाग गये
Show English Translation
Commanded by the ministers, the monkeys who looked like fierce mountains, elephants and clouds that caused horripilation, left the place at once.
ShlokaShloka 21
नखदंष्ट्रायुधा घोरास्सर्वे विकृतदर्शनाः4.31.24।। सर्वे शार्दूलदर्पाश्च सर्वे च विकृताननाः।
हिन्दी अर्थ देखें
उस समय काम के अधीन हुए वानरराज सुग्रीव भोगासक्त हो तारा के साथ थे। इसलिये उन्होंने उन श्रेष्ठ वानरों की बातें नहीं सुनीं
Show English Translation
The monkeys, their faces, deformed, their nails and teeth like weapons were dreadful and horrifying in appearance, proud as tigers
ShlokaShloka 22
दशनागबलाः केचित्केचिद्दशगुणोत्तराः4.31.25।। केचिन्नागसहस्रस्य बभूवुस्तुल्यविक्रमाः।
हिन्दी अर्थ देखें
उस समय काम के अधीन हुए वानरराज सुग्रीव भोगासक्त हो तारा के साथ थे। इसलिये उन्होंने उन श्रेष्ठ वानरों की बातें नहीं सुनीं
Show English Translation
Of them some possessed the strength of ten, some a hundred and some a thousand elephants. All of them were of equal valour.
ShlokaShloka 23
कृत्स्नांहि कपिभिर्व्याप्तां द्रुमहस्सैर्महाबलैः4.31.26।। अपश्यल्लक्ष्मणः क्रुद्धः किष्किन्धां तां दुरासदाम्।
हिन्दी अर्थ देखें
तब सचिव की आज्ञा से पर्वत, हाथी और मेघ के समान विशालकाय वानर जो रोंगटे खड़े कर देने वाले थे, नगर से बाहर निकले
Show English Translation
Enraged Lakshmana saw the huge inacccessible city of Kishkinda filled with mighty strong and fierce monkeys holding trees in hand.
ShlokaShloka 24
ततस्ते हरयस्सर्वे प्राकारपरिघान्तरात्4.31.27।। निष्क्रम्योदग्रसत्त्वास्तु तस्थुराविष्कृतं तदा।
हिन्दी अर्थ देखें
वे सब-के-सब वीर थे। नख और दाँत ही उनके आयुध थे। वे बड़े विकराल दिखायी देते थे। उन सबकी दाढ़ें व्याघ्रों की दाढ़ों के समान थीं और सबके नेत्र खुले हुए थे (अथवा उन सबका वहाँ स्पष्ट दर्शन होता था—कोई छिपे नहीं थे)
Show English Translation
The mighty monkeys came out of the entrance of the ironboundary wall from beneath and made their appearance and stood in full attention.
ShlokaShloka 25
सुग्रीवस्य प्रमादं च पूर्वजं चार्तमात्मवान्4.31.28।। बुद्ध्वा कोपवशं वीरः पुनरेव जगाम सः।
हिन्दी अर्थ देखें
किन्हीं में दस हाथियों के बराबर बल था तो कोई सौ हाथियों के समान बलशाली थे तथा किन्हीं किन्हीं का तेज (बल और पराक्रम) एक हजार हाथियों के तुल्य था
Show English Translation
The sensible warrior, recognising Sugriva's dereliction of duty and his own brother's agony once again flew into fury.
ShlokaShloka 26
स दीर्घोष्णमहोच्छवासः कोपसंरक्तलोचनः4.31.29।। बभूव नरशार्दूल स्सधूम इव पावकः।
हिन्दी अर्थ देखें
हाथ में वृक्ष लिये उन महाबली वानरों से व्याप्त हुई किष्किन्धापुरी अत्यन्त दुर्जय दिखायी देती थी। लक्ष्मण ने कुपित होकर उस पुरी की ओर देखा
Show English Translation
Sighing hot, deep breath, eyes turned red in anger, this tiger among men appeared like fire with smoke (The sigh was smoke and red eyes, fire).
ShlokaShloka 27
बाणशल्यस्फुरज्जिह्वस्सायकासनभोगवान्4.31.30।। स्वतेजोविषसङ्घातः पञ्चास्य इव पन्नगः।
हिन्दी अर्थ देखें
तदनन्तर वे सभी महाबली वानर पुरी की चहारदीवारी और खाईं के भीतर से निकलकर प्रकटरूप से सामने आकर खड़े हो गये
Show English Translation
His bow was like the hood of a snake,with the iron nails fixed on the tip of his arrows like moving fangs and his own brightness like the venom of the fivehooded snake.
ShlokaShloka 28
तं दीप्तमिव कालाग्निं नागेन्द्रमिव कोपितम्4.31.31।। समासाद्याङ्गदस्त्रासाद्विषादमगमद्भृशम्।
हिन्दी अर्थ देखें
इतना ही नहीं, वे पाँच मुखवाले सर्प के समान दिखायी देने लगे। बाण का फल ही उस सर्प की लपलपाती हुई जिह्वा जान पड़ता था, धनुष ही उसका विशाल शरीर था तथा वे सर्परूपी लक्ष्मण अपने तेजोमय विष से व्याप्त हो रहे थे
Show English Translation
Dismayed, Angada approached Lakshmana, who was glowing like fire at the time of dissolution of the world and enraged like the lord of serpents.
ShlokaShloka 29
सोऽङ्गदं रोषताम्राक्षस्सन्दिदेश महायशाः4.31.32।। सुग्रीवः कथ्यतां वत्स ममागमनमित्युत।
हिन्दी अर्थ देखें
इतना ही नहीं, वे पाँच मुखवाले सर्प के समान दिखायी देने लगे। बाण का फल ही उस सर्प की लपलपाती हुई जिह्वा जान पड़ता था, धनुष ही उसका विशाल शरीर था तथा वे सर्परूपी लक्ष्मण अपने तेजोमय विष से व्याप्त हो रहे थे
Show English Translation
Renowned Lakshmana, with his eyes turned red in anger said to Angada 'O dear, inform Sugriva, about my arrival'.
ShlokaShloka 30
एष रामानुजः प्राप्तस्वत्सकाशमरिन्दम4.31.33।। भ्रातुर्व्यसनसन्तप्तो द्वारि तिष्ठति लक्ष्मणः। तस्य वाक्यं यदि रुचिः क्रियतां साधु वानर4.31.34।। इत्युक्त्वा शीघ्रमागच्छ वत्स वाक्यमरिन्दम।
हिन्दी अर्थ देखें
इतना ही नहीं, वे पाँच मुखवाले सर्प के समान दिखायी देने लगे। बाण का फल ही उस सर्प की लपलपाती हुई जिह्वा जान पड़ता था, धनुष ही उसका विशाल शरीर था तथा वे सर्परूपी लक्ष्मण अपने तेजोमय विष से व्याप्त हो रहे थे
Show English Translation
'O subduer of enemies speak in this way: 'Lakshmana, the dear younger brother of Rama has come to you and waits for your presence at the entrance, burning in grief of his elder brother. Well, if you like to hear his words, do as you please.' 'Return swiftly after saying so.'
ShlokaShloka 31
लक्ष्मणस्य वचः श्रुत्वा शोकाविष्टोऽङ्गदोऽब्रवीत्। पितुस्समीपमागम्य सौमित्रिरयमागतः4.31.35।।
हिन्दी अर्थ देखें
इस प्रकार श्रीवाल्मीकि निर्मित आर्षरामायण आदिकाव्य के किष्किन्धाकाण्ड में इकतीसवाँ सर्ग पूरा हुआ
Show English Translation
On hearing Lakshmana's words Angada became sad. He approached his father (Sugriva) and said 'Saumitri has come'. (This sloka appears an interpolation).
ShlokaShloka 32
अथाङ्गदस्तस्य वचो निशम्य सम्भ्रान्तभावः परिदीनवक्त्रः। निपत्य तूर्णं नृपतेस्तरस्वी ततः रुमायाश्चरणौ ववन्दे4.31.36।।
हिन्दी अर्थ देखें
महायशस्वी लक्ष्मण ने क्रोध से लाल आँखें करके अङ्गद को आदेश दिया—’बेटा! सुग्रीव को मेरे आने की सूचना दो। उनसे कहना—शत्रुदमन वीर! श्रीरामचन्द्रजी के छोटे भाई लक्ष्मण अपने भ्राता के दुःख से दुःखी होकर आपके पास आये हैं और नगर द्वार पर खड़े हैं। वानरराज! यदि आपकी इच्छा हो तो उनकी आज्ञा का अच्छी तरह पालन कीजिये। शत्रुदमन वत्स अङ्गद! बस, इतना ही कहकर तुम शीघ्र मेरे पास लौट आओ’
Show English Translation
On hearing Lakshmana's words powerful Angada felt agitated. His face turned pale. He went and prostrated at once to the king and then to the queen, Ruma.
ShlokaShloka 33
संङ्गृह्य पादौ पितुरग्र्यतेजाः जग्राह मातुः पुनरेव पादौ। पादौ रुमायाश्च निपीडयित्वा निवेदयामास ततस्तमर्थम्4.31.37।।
हिन्दी अर्थ देखें
महायशस्वी लक्ष्मण ने क्रोध से लाल आँखें करके अङ्गद को आदेश दिया—’बेटा! सुग्रीव को मेरे आने की सूचना दो। उनसे कहना—शत्रुदमन वीर! श्रीरामचन्द्रजी के छोटे भाई लक्ष्मण अपने भ्राता के दुःख से दुःखी होकर आपके पास आये हैं और नगर द्वार पर खड़े हैं। वानरराज! यदि आपकी इच्छा हो तो उनकी आज्ञा का अच्छी तरह पालन कीजिये। शत्रुदमन वत्स अङ्गद! बस, इतना ही कहकर तुम शीघ्र मेरे पास लौट आओ’
Show English Translation
Highly brilliant Angada holding his father's feet first, then mother's and thereafter Ruma's, reported the matter to Sugriva.
ShlokaShloka 34
स निद्रामदसंवीतो वानरो न विबुद्धवान्। बभूव मदमत्तश्च मदनेन च मोहितः4.31.38।।
हिन्दी अर्थ देखें
महायशस्वी लक्ष्मण ने क्रोध से लाल आँखें करके अङ्गद को आदेश दिया—’बेटा! सुग्रीव को मेरे आने की सूचना दो। उनसे कहना—शत्रुदमन वीर! श्रीरामचन्द्रजी के छोटे भाई लक्ष्मण अपने भ्राता के दुःख से दुःखी होकर आपके पास आये हैं और नगर द्वार पर खड़े हैं। वानरराज! यदि आपकी इच्छा हो तो उनकी आज्ञा का अच्छी तरह पालन कीजिये। शत्रुदमन वत्स अङ्गद! बस, इतना ही कहकर तुम शीघ्र मेरे पास लौट आओ’
Show English Translation
The monkey was too drowsy with drink, too intoxicated with passion to come back to his senses.
ShlokaShloka 35
ततः किलकिलां चक्रुर्लक्ष्मणं प्रेक्ष्य वानराः। प्रसादयन्तस्तं क्रुद्धं भयमोहितचेतसः4.31.39।।
हिन्दी अर्थ देखें
लक्ष्मण की बात सुनकर शोकाकुल अङ्गद ने पिता सुग्रीव के समीप आकर कहा—’तात! ये सुमित्रानन्दन लक्ष्मण यहाँ पधारे हैं
Show English Translation
Looking at angry Lakshmana, and scared at heart, the monkeys started making a noise in order to please him.
ShlokaShloka 36
ते महौघनिभं दृष्ट्वा वज्राशनिसमस्वनम्। सिंहनादं समं चक्रुर्लक्ष्मणस्य समीपतः4.31.40।।
हिन्दी अर्थ देखें
(अब इसी बात को कुछ विस्तार के साथ कहते हैं —) लक्ष्मण की कठोर वाणी से अङ्गद के मन में बड़ी घबराहट हुई। उनके मुख पर अत्यन्त दीनता छा गयी। उन वेगशाली कुमार ने वहाँ से निकलकर पहले वानरराज सुग्रीव के, फिर तारा तथा रुमा के चरणों में प्रणाम किया
Show English Translation
They saw Lakshmana advancing like a mighty flood and went near him making sounds like the thunderbolt or a lion.
ShlokaShloka 37
तेन शब्देन महता प्रत्यबुध्यत वानरः। मदविह्वलताम्राक्षो व्याकुलस्रग्विभूषणः4.31.41।।
हिन्दी अर्थ देखें
उग्र तेजवाले अङ्गद ने पहले तो पिता के दोनों पैर पकड़े फिर अपनी माता तारा के दोनों चरणों का स्पर्श किया। तदनन्तर रुमा के दोनों पैर दबाये इसके बाद पूर्वोक्त बात कही
Show English Translation
By the great sound (of the monkeys) the drunken redeyed vanara king awakened, his garlands and ornaments in disarray.
ShlokaShloka 38
अथाङ्गदवचः श्रुत्वा तेनैव च समागतौ। मन्त्रिणौ वानरेन्द्रस्य सम्मतौ दारदर्शिनौ4.31.42।। प्लक्षश्चैव प्रभावश्च मन्त्रिणावर्थधर्मयोः। वक्तुमुच्चावचं प्राप्तं लक्ष्मणं तौ शशंसतुः4.31.43।।
हिन्दी अर्थ देखें
किंतु सुग्रीव मदमत्त एवं काम से मोहित होकर पड़े थे। निद्रा ने उनके ऊपर पूरा अधिकार जमा लिया था इसलिये वे जाग न सके
Show English Translation
On hearing Angada's words the two ministers named Plaksha and Prabhava who were perrmitted to have audience with the queens went to the harem on invitation from Angada. They reported to Sugriva about the arrival of Lakshmana who had come to speak to him about matters regading wealth and righteousness.
ShlokaShloka 39
प्रसादयित्वा सुग्रीवं वचनैस्सामनिश्चितैः। आसीनं पर्युपासीनौ यथा शक्रं मरुत्पतिम्4.31.44।।
हिन्दी अर्थ देखें
इतने में बाहर क्रोध में भरे हुए लक्ष्मण को देखकर भय से मोहितचित्त हुए वानर उन्हें प्रसन्न करने के लिये दीनतासूचक वाणी में किलकिलाने लगे
Show English Translation
Both of them sat close by Sugriva who was like Indra and said these pleasing words:
ShlokaShloka 40
सत्यसन्धौ महाभागौ भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ। वयस्यभावं सम्प्राप्तौ राज्यार्हौ राज्यदायिनौ4.31.45।।
हिन्दी अर्थ देखें
लक्ष्मण पर दृष्टि पड़ते ही उन वानरों ने सुग्रीव के निकटवर्ती स्थान में एक साथ ही महान् जलप्रवाह तथा वज्र की गड़गड़ाहट के समान जोर-जोर से सिंहनाद किया (जिससे सुग्रीव जाग उठे)
Show English Translation
'Rama and Lakshmana, both the brothers venerable and true to their promise, have conferred on you sovereignty and have extended friendship.'
ShlokaShloka 41
तयोरेको धनुष्पाणिर्द्वारि तिष्ठति लक्ष्मणः। यस्य भीताः प्रवेपन्तो नादान्मुञ्चन्ति वानराः4.31.46।।
हिन्दी अर्थ देखें
वानरों की उस भयंकर गर्जना से कपिराज सुग्रीव की नींद खुल गयी। उस समय उनके नेत्र मद से चञ्चल और लाल हो रहे थे। मन भी स्वस्थ नहीं था उनके गले में सुन्दर पुष्पमाला शोभा दे रही थी
Show English Translation
'Of the two, only Lakshmana is standing at the entrance wielding his bow in hand. The monkeys are trembling in fear and running about, making a loud noise'.
ShlokaShloka 42
स एष राघवभ्राता लक्ष्मणो वाक्यसारथिः। व्यवसायरथः प्राप्तस्तस्य रामस्य शासनात्4.31.47।।
हिन्दी अर्थ देखें
उनमें से एक वीर लक्ष्मण हाथ में धनुष लिये किष्किन्धा के दरवाजे पर खड़े हैं, जिनके भय से काँपते हुए वानर जोर-जोर से चीख रहे हैं
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'By the command of Rama, his brother has come to you, Rama's words as charioteer and his work as chariot'.
ShlokaShloka 43
अयं च दयितो राजंस्ताराया स्तनयोऽङ्गदः। लक्ष्मणेन सकाशं ते प्रेषितस्त्वरयाऽनघ4.31.48।।
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उनमें से एक वीर लक्ष्मण हाथ में धनुष लिये किष्किन्धा के दरवाजे पर खड़े हैं, जिनके भय से काँपते हुए वानर जोर-जोर से चीख रहे हैं
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'O blameless king Tara's son, Angada, has sent us into your presence. Lakshmana has come.'
ShlokaShloka 44
सोऽयं रोषपरीताक्षो द्वारि तिष्ठति वीर्यवान्। वानरान्वानरपते चक्षुषा प्रदहन्निव4.31.49।।
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उनमें से एक वीर लक्ष्मण हाथ में धनुष लिये किष्किन्धा के दरवाजे पर खड़े हैं, जिनके भय से काँपते हुए वानर जोर-जोर से चीख रहे हैं
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'O lord of monkeys Valiant Lakshmana is standing at the entrance,eyes filled with anger as if he would burn the vanaras'.
ShlokaShloka 45
तस्य मूर्ध्ना प्रणम्य त्वं सपुत्रस्सहबन्धुभिः। गच्छ शीघ्रं महाराज रोषो ह्यस्य निवर्त्यताम्4.31.50।।
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उनमें से एक वीर लक्ष्मण हाथ में धनुष लिये किष्किन्धा के दरवाजे पर खड़े हैं, जिनके भय से काँपते हुए वानर जोर-जोर से चीख रहे हैं
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'O great king Go at once with your son and relations, salute him now and avert his anger'.
ShlokaShloka 46
यदाह रामो धर्मात्मा तत्कुरुष्व समाहितः। राजं स्तिष्ठस्व समये भव सत्यप्रतिश्रवाः4.31.51।।
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उनमें से एक वीर लक्ष्मण हाथ में धनुष लिये किष्किन्धा के दरवाजे पर खड़े हैं, जिनके भय से काँपते हुए वानर जोर-जोर से चीख रहे हैं
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'O king be true to your promise to his brother, righteous Rama without fail. Honour the agreement.' इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये किष्किन्धाकाण्डे एकत्रिंशस्सर्गः।। Thus ends the thirtyfirst sarga of Kishkindakanda of the Holy Ramayana, the first epic, composed by sage Valmiki.