Kishkindha Kanda

Sarga 30: Rama's agony accentuated by autumn -- description of the beauty of autumn -- Lakshmana leaves for Sugriva.

किष्किन्धाकाण्डम् · सर्ग 30

82 shlokas

ShlokaShloka 1
गुहं प्रविष्टे सुग्रीवे विमुक्ते गगने घनैः। वर्षरात्रोषितो रामः कामशोकाभिपीडितः4.30.1।। पाण्डुरं गगनं दृष्ट्वा विमलं चन्द्रमण्डलम्। शारदीं रजनीं चैव दृष्ट्वा ज्योत्स्नानुलेपनाम्4.30.2।। कामवृत्तं च सुग्रीवं नष्टां च जनकात्मजाम्। बुद्ध्वा कालमतीतं च मुमोह परमातुरः4.30.3।।
हिन्दी अर्थ देखें
पूर्वोक्त आदेश देकर सुग्रीव तो अपने महल में चले गये और उधर श्रीरामचन्द्रजी, जो वर्षा की रातों में प्रस्रवणगिरि पर निवास करते थे, आकाश के मेघों से मुक्त एवं निर्मल हो जाने पर सीता से मिलने की उत्कण्ठा लिये उनके विरहजन्य शोक से अत्यन्त पीड़ा का अनुभव करने लगे
Show English Translation
While Sugriva was in his residence, Rama was (in Prasravana mountain) spending his rainy nights tormented by passion (for Sita). Sugriva was engaged in love, forgetting the time fixed for taking up the search for Sita. When the sky became clear of clouds after the rainy season, Rama sat gazing at the clear autumnal Moon's orb. He was besmeared with moonlight and felt perturbed as time was running out. And then fell into a swoon. (only a few months remained for the completion of the exile and Bharata will put an end to himself if Rama does not return to Ayodhya on the stipulated day. This worried Rama.)
ShlokaShloka 2
स तु संज्ञामुपागम्य मुहूर्तान्मतिमान्पुनः। मनस्स्थामपि वैदेहीं चिन्तयामास राघवः4.30.4।।
हिन्दी अर्थ देखें
उन्होंने सोचा ‘सुग्रीव काम में आसक्त हो रहा है, जनककुमारी सीता का अब तक कुछ पता नहीं लगा हैऔर रावण पर चढ़ाई करने का समय भी बीता जा रहा है।’ यह सब देखकर अत्यन्त आतुर हुए श्रीराम का हृदय व्याकुल हो उठा
Show English Translation
Gaining back the senses after a while, wise Rama started thinking about Vaidehi, who remained in his heart.
ShlokaShloka 3
आसीनः पर्वतस्याग्रे हेमधातुविभूषिते। शारदं गगनं दृष्ट्वा जगाम मनसा प्रियाम्4.30.5।।
हिन्दी अर्थ देखें
उन्होंने सोचा ‘सुग्रीव काम में आसक्त हो रहा है, जनककुमारी सीता का अब तक कुछ पता नहीं लगा हैऔर रावण पर चढ़ाई करने का समय भी बीता जा रहा है।’ यह सब देखकर अत्यन्त आतुर हुए श्रीराम का हृदय व्याकुल हो उठा
Show English Translation
Sitting on top of the mountain shining with gold and minerals, Rama gazed at the pleasant autumnal sky and started thinking of his beloved.
ShlokaShloka 4
दृष्ट्वा च विमलं व्योम गतविद्युद्वलाहकम्। सारसारावसङ्घुष्ठं विललापार्तया गिरा4.30.6।।
हिन्दी अर्थ देखें
दो घड़ी के बाद जब उनका मन कुछ स्वस्थ हुआ, तब वे बुद्धिमान् नरेश श्रीरघुनाथजी अपने मन में बसी हुई विदेहनन्दिनी सीता का चिन्तन करने लगे
Show English Translation
Looking at the sky rid of clouds and lightning, filled with the sounds of flocks of sarasa birds, Rama cried in a pitiable state.
ShlokaShloka 5
सारसारावसन्नादैस्सारसारवनादिनी। याऽऽश्रमे रमते बाला साऽद्य मे रमते कथम्4.30.7।।
हिन्दी अर्थ देखें
उन्होंने देखा, आकाश निर्मल है न कहीं बिजलीकी गड़गड़ाहट है न मेघों की घटा। वहाँ सब ओर सारसों की बोली सुनायी देती है। यह सब देखकर वे आर्तवाणी में विलाप करने लगे
Show English Translation
'How will the young lady (Sita) whose voice is like the sarasa bird's, who was revelling, listening to its sweet cackle at the hermitage be living now?
ShlokaShloka 6
पुष्पितांश्चासनान् दृष्ट्वा काञ्चनानिव निर्मलान्। कथं सा रमते बाला पश्यन्ती मामपश्यती4.30.8।।
हिन्दी अर्थ देखें
सुनहरे रंग की धातुओं से विभूषित पर्वतशिखर पर बैठे हुए श्रीरामचन्द्रजी शरत्काल के स्वच्छ आकाश की ओर दृष्टिपात करके मन-ही-मन अपनी प्यारी पत्नी सीता का ध्यान करने लगे
Show English Translation
'How will my beloved wife feel on seeing the asana flowers which are as pure as gold, when she does not find me anywhere?
ShlokaShloka 7
या पुरा कलहंसानां स्वरेण कलभाषिणी। बुध्यते चारुसर्वाङ्गी साऽद्य मे बुद्ध्यते कथम्4.30.9।।
हिन्दी अर्थ देखें
वे बोले—’जिसकी बोली सारसों की आवाज के समान मीठी थी तथा जो मेरे आश्रम पर सारसों द्वारा परस्पर एक-दूसरे को बुलाने के लिये किये गये मधुर शब्दों से मन बहलाती थी, वह मेरी भोलीभाली स्त्री सीता आज किस तरह मनोरञ्जन करती होगी?
Show English Translation
'How will my Sita with her charming limbs and sweet words, who used to get up from sleep by the cackle of swans, wake up now?
ShlokaShloka 8
निस्वनं चक्रवाकानां निशम्य नहचारिणाम्। पुण्डरीकविशालाक्षी कथमेषा भविष्यति4.30.10।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘सुवर्णमय वृक्षों के समान निर्मल और खिले हुए असन नामक वृक्षों को देखकर बार-बार उन्हें निहारती हुई भोली-भाली सीता जब मुझे अपने पास नहीं देखती होगी, तब कैसे उसका मन लगता होगा?
Show English Translation
'How will that lady with large, pale white eyes sustain her life now, since she is used to listening to the sweet notes of chakravaka birds, who were her companions?
ShlokaShloka 9
सरांसि सरितो वापीः काननानि वनानि च। तां विना मृगशाबाक्षीं चरन्नाद्य सुखं लभे4.30.11।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जिसके सभी अङ्ग मनोहर हैं तथा जो स्वभाव से ही मधुर भाषण करनेवाली है, वह सीता पहले कलहंसों के मधुर शब्द से जागा करती थी; किंतु आज वह मेरी प्रिया वहाँ कैसे प्रसन्न रहती होगी?
Show English Translation
'Even though I am wandering by lakes, rivers, wells, forests and groves,I am not happy without that fawneyed lady.
ShlokaShloka 10
अपि तां मद्वियोगाच्छ सौकुमार्याच्च भामिनीम्। सुदूरं पीडयेत्कामश्शरद्गुणनिरन्तरः4.30.12।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जिसके विशाल नेत्र प्रफुल्ल कमलदल के समान शोभा पाते हैं, वह मेरी प्रिया जब साथ विचरने वाले चकवों की बोली सुनती होगी, तब उसकी कैसी दशा हो जाती होगी?
Show English Translation
'I think even the charm of autumn must be always tormenting that lovely lady, as she is very far from me. She is too delicate to suffer the agony of separation.'
ShlokaShloka 11
एवमादि नरश्रेष्ठो विललाप नृपात्मजः। विहङ्ग इव सारङ्गस्सलिलं त्रिदशेश्वरात्4.30.13।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘कहीं ऐसा तो नहीं होगा कि शरद् ऋतु के गुणों से निरन्तर वृद्धि को प्राप्त होने वाला काम भामिनी सीता को अत्यन्त पीड़ित कर दे; क्योंकि ऐसी सम्भावना के दो कारण हैं—एक तो उसे मेरे वियोग का कष्ट है, दूसरे वह अत्यन्त सुकुमारी होने के कारण इस कष्ट को सहन नहीं कर पाती होगी’
Show English Translation
Thus the best among the princes wailed just as chakrabaka laments for water from Indra, lord of the gods.
ShlokaShloka 12
ततश्चञ्चूर्य रम्येषु फलार्थी गिरिसानुषु। ददर्श पर्युपावृत्तो लक्ष्मीवान्लक्ष्मणोऽग्रजम्4.30.14।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘कहीं ऐसा तो नहीं होगा कि शरद् ऋतु के गुणों से निरन्तर वृद्धि को प्राप्त होने वाला काम भामिनी सीता को अत्यन्त पीड़ित कर दे; क्योंकि ऐसी सम्भावना के दो कारण हैं—एक तो उसे मेरे वियोग का कष्ट है, दूसरे वह अत्यन्त सुकुमारी होने के कारण इस कष्ट को सहन नहीं कर पाती होगी’
Show English Translation
Graceful Lakshmana returned after going round and round the beautiful mountain slopes for fruits and saw his brother.
ShlokaShloka 13
तं चिन्तया दुस्सहया परीतं विसंज्ञमेकं विजने मनस्वी। भ्रातुर्विषादात्परितापदीनः समीक्ष्य सौमित्रिरुवाच रामम्4.30.15।।
हिन्दी अर्थ देखें
इन्द्र से पानी की याचना करने वाले प्यासे पपीहे की भाँति नरश्रेष्ठ नरेन्द्रकुमार श्रीराम ने इस तरह की बहुत सी बातें कहकर विलाप किया
Show English Translation
Observing Rama who had lost his senses, lying alone in unbearable agony, venerable Lakshmana became sad and miserable and spoke to his brother:
ShlokaShloka 14
किमार्य कामस्य वशंगतेन किमात्मपौरुष्यपराभवेन। अयं सदा संह्रियते समाधिः किमत्र योगेन निवर्तितेन4.30.16।।
हिन्दी अर्थ देखें
उस समय शोभाशाली लक्ष्मण फल लेने के लिये गये थे। वे पर्वत के रमणीय शिखरों पर घूम-फिरकर जब लौटे तब उन्होंने अपने बड़े भाई की अवस्था पर दृष्टिपात किया
Show English Translation
'O revered brother why do you succumb to passion and loss of selfconfidence? Why is the usual composure of your mind withdrawn? Why do you desist from yaga?
ShlokaShloka 15
क्रियाभियोगं मनसः प्रसादं समाधियोगानुगतं च कालम्। सहायसामर्थ्यमदीनसत्त्वः स्वकर्म हेतुं च कुरुष्व हेतुम्4.30.17।।
हिन्दी अर्थ देखें
वे दुस्सह चिन्ता में मग्न होकर अचेत-से हो गये थे और एकान्त में अकेले ही दुःखी होकर बैठे थे। उस समय मनस्वी सुमित्राकुमार लक्ष्मण ने जब उन्हें देखा तब वे तुरंत ही भाई के विषाद से अत्यन्त दुःखी हो गये और उनसे इस प्रकार बोले-
Show English Translation
'You are an undaunted warrior. Take to the path of action. Resort to samadhiyoga or meditation and regain the serenity of mind. Make the strength of your effort the source of your success.
ShlokaShloka 16
न जानकी मानव वंशनाथ त्वया सनाथा सुलभा परेण। न चाग्निचूडां ज्वलितामुपेत्य न दह्यते वीर वरार्ह कच्छित्4.30.18।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘आर्य! इस प्रकार काम के अधीन होकर अपने पौरुष का तिरस्कार करने से—पराक्रम को भूल जाने से क्या लाभ होगा? इस लज्जाजनक शोक के कारण आपके चित्त की एकाग्रता नष्ट हो रही है। क्या इस समय योग का सहारा लेने से—मन को एकाग्र करने से यह सारी चिन्ता दूर नहीं हो सकती?
Show English Translation
'O lord of the human race O worthy hero when you are the protector, Janaki cannot be retained by any one easily just as burning fire after it reaches its full height cannot be retained by any one.'
ShlokaShloka 17
सलक्षणं लक्ष्मणमप्रधृष्यं स्वभावजं वाक्यमुवाच रामः। हितं च पथ्यं च नयप्रसक्तं ससाम धर्मार्थसमाहितं च4.30.19।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘मानववंश के नाथ तथा श्रेष्ठ पुरुषों के भी पूजनीय वीर रघुनन्दन! जिनके स्वामी आप हैं, वे जनकनन्दिनी सीता किसी भी दूसरे पुरुष के लिये सुलभ नहीं हैं; क्योंकि जलती हुई आग की लपट के पास जाकर कोई भी दग्ध हुए बिना नहीं रह सकता’
Show English Translation
Rama said to Lakshmana, an unassailable warrior with auspicious signs, that what he had spoken was natural, beneficial, wise and useful.It is in accordance with Sama Veda and the science of statecraft, well established in dharma and artha.
ShlokaShloka 18
निस्संशयं कार्यमवेक्षितव्यं क्रियाविशेषोऽह्यनुवर्तितव्यः। ननु प्रवृत्तस्य दुरासदस्य कुमार कार्यस्य फलं च चिन्त्यम्4.30.20।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘मानववंश के नाथ तथा श्रेष्ठ पुरुषों के भी पूजनीय वीर रघुनन्दन! जिनके स्वामी आप हैं, वे जनकनन्दिनी सीता किसी भी दूसरे पुरुष के लिये सुलभ नहीं हैं; क्योंकि जलती हुई आग की लपट के पास जाकर कोई भी दग्ध हुए बिना नहीं रह सकता’
Show English Translation
'My dear, there is no doubt that I have to consider the work (ahead), give special attention to follow up. Surely I need to think over this herculian task and its achievement'.
ShlokaShloka 19
अथ पद्मपलाशाक्षीं मैथिलीमनुचिन्तयन्। उवाच लक्ष्मणं रामो मुखेन परिशुष्यता4.30.21।।
हिन्दी अर्थ देखें
लक्ष्मण उत्तम लक्षणों से सम्पन्न थे। उन्हें कोई परास्त नहीं कर सकता था। भगवान् श्रीरामने उनसे यह स्वाभाविक बात कही—’कुमार! तुमने जो बात कही है, वह वर्तमान समय में हितकर, भविष्य में भी सुख पहुँचाने वाली, राजनीति के सर्वथा अनुकूल तथा सामके साथ-साथ धर्म और अर्थ से भी संयुक्त है। निश्चय ही सीता के अनुसंधान कार्य पर ध्यान देना चाहिये तथा उसके लिये विशेष कार्य या उपाय का भी अनुसरण करना चाहिये; किंतु प्रयत्न छोड़कर पूर्णरूप से बढ़े हुए दुर्लभ एवं बलवान् कर्म के फलपर ही दृष्टि रखना उचित नहीं है’
Show English Translation
Then falling back on the memory of Maithili, the lady with eyes like lotus petals, he said to Lakshmana with parched lips:
ShlokaShloka 20
तर्पयित्वा सहस्राक्षस्सलिलेन वसुन्धराम्। निर्वर्तयित्वा सस्यानि कृतकर्मा व्यवस्थितः4.30.22।।
हिन्दी अर्थ देखें
लक्ष्मण उत्तम लक्षणों से सम्पन्न थे। उन्हें कोई परास्त नहीं कर सकता था। भगवान् श्रीरामने उनसे यह स्वाभाविक बात कही—’कुमार! तुमने जो बात कही है, वह वर्तमान समय में हितकर, भविष्य में भी सुख पहुँचाने वाली, राजनीति के सर्वथा अनुकूल तथा सामके साथ-साथ धर्म और अर्थ से भी संयुक्त है। निश्चय ही सीता के अनुसंधान कार्य पर ध्यान देना चाहिये तथा उसके लिये विशेष कार्य या उपाय का भी अनुसरण करना चाहिये; किंतु प्रयत्न छोड़कर पूर्णरूप से बढ़े हुए दुर्लभ एवं बलवान् कर्म के फलपर ही दृष्टि रखना उचित नहीं है’
Show English Translation
'Having satisfied the earth with abundant rain water and having fulfilled the task of ripening the crops, the thousandeyed Indra has done his duty, has settled down now.
ShlokaShloka 21
स्निग्धगम्भीरनिर्घोषाश्शैलद्रुमपुरोगमाः। विसृज्य सलिलं मेघाः परिश्रान्ता नृपात्मज4.30.23।।
हिन्दी अर्थ देखें
तदनन्तर प्रफुल्ल कमलदल के समान नेत्रवाली मिथिलेशकुमारी सीता का बार-बार चिन्तन करते हुए श्रीरामचन्द्रजी लक्ष्मण को सम्बोधित करके सूखे हुए (उदास) मुँह से बोले-
Show English Translation
'O prince having discharged their water the clouds (after the rains) are exhausted. They are moving now over trees and mountains, making deep and pleasant sounds.
ShlokaShloka 22
नीलोत्पलदलश्यामाश्श्यामीकृत्वा दिशो दश। विमदा इव मातङ्गाश्शान्तवेगाः पयोधराः4.30.24।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘सुमित्रानन्दन! सहस्रनेत्रधारी इन्द्र इस पृथ्वी को जल से तृप्त करके यहाँ के अनाजों को पकाकर अब कृतकृत्य हो गये हैं
Show English Translation
'The clouds, which were dark till now like the blue lotus petals darkening all the ten directions are like elephants free from all intoxication as their fury is abated৷৷
ShlokaShloka 23
जलगर्भा महामेघा कुटजार्जुनगन्धिनः। चरित्वा विरतास्सौम्य वृष्टिवातास्समुद्यताः4.30.25।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘राजकुमार! देखो, जो अत्यन्त गम्भीर स्वर से गर्जना किया करते और पर्वतों, नगरों तथा वृक्षों के ऊपर से होकर निकलते थे, वे मेघ अपना सारा जल बरसाकर शान्त हो गये हैं
Show English Translation
'O dear the moist winds have ceased to blow as before and are carrying the fragrance of kutaja and arjuna flowers.
ShlokaShloka 24
घनानां वारणानां च मयूराणां च लक्ष्मण। नादः प्रस्रवणानां च प्रशान्तस्सहसाऽनघ4.30.26।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘नील कमलदल के समान श्यामवर्णवाले मेघ दसों दिशाओं को श्याम बनाकर मदरहित गजराजों के समान वेगशून्य हो गये हैं; उनका वेग शान्त हो गया है
Show English Translation
'O sinless Lakshmana the rumblings of heavy clouds, the trumpeting of elephants, the cry of peacocks and the sound of waterfalls have become suddenly stilled.
ShlokaShloka 25
अभिवृष्टा महामेघैर्निर्मलाश्चित्रसानवः। अनुलिप्ता इवाऽभान्ति गिरयश्चित्रदीप्तिभिः4.30.27।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘महान् मेघों द्वारा बरसाये हुए जल से घुल जाने के कारण ये विचित्र शिखरों वाले पर्वत अत्यन्त निर्मल हो गये हैं। इन्हें देखकर ऐसा जान पड़ता है, मानो चन्द्रमा की किरणों द्वारा इनके ऊपर सफेदी कर दी गयी है
Show English Translation
'The mountain slopes, having been washed by the showers of rain on all sides, are cleansed. They are shining in variegated colours and look as though the mountain peaks are smeared with glowing colours (of minerals).
ShlokaShloka 26
शाखासु सप्तच्छदपादपानां प्रभासु तारार्कनिशाकराणाम्। लीलासु चैवोत्तम वारणानां श्रियं विभज्याद्य शरत्प्रवृत्ता4.30.28।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘महान् मेघों द्वारा बरसाये हुए जल से घुल जाने के कारण ये विचित्र शिखरों वाले पर्वत अत्यन्त निर्मल हो गये हैं। इन्हें देखकर ऐसा जान पड़ता है, मानो चन्द्रमा की किरणों द्वारा इनके ऊपर सफेदी कर दी गयी है
Show English Translation
'The autumn has set in, manifesting its grace on the branches of saptachada trees(sevenleafed banana plant) through the radiance of stars, Sun and Moon and through the sports of excellent elephants.
ShlokaShloka 27
सम्प्रत्यनेकाश्रय चित्रशोभा लक्ष्मीश्शरत्कालगुणोपनीता। सूर्याग्रहस्तप्रतिबोधितेषु पद्माकरेष्वभ्यधिकं विभाति4.30.29।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘महान् मेघों द्वारा बरसाये हुए जल से घुल जाने के कारण ये विचित्र शिखरों वाले पर्वत अत्यन्त निर्मल हो गये हैं। इन्हें देखकर ऐसा जान पड़ता है, मानो चन्द्रमा की किरणों द्वारा इनके ऊपर सफेदी कर दी गयी है
Show English Translation
'From the beauty of autumn manifested in a variety of ways on the clusters of lotuses, touched by the Sun, it seems the goddess of wealth shines and shines effulgently. (The lotus is goddess Laxmi's favourite flower)
ShlokaShloka 28
सप्तच्छदानां कुसुमोपगन्धी षट्पादबृन्दैरनुगीयमानः। मत्तद्विपानां पवनोऽनुसारी दर्पं विनेष्यन्नधिकं करोति।।4.30.30।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘आज शरद्-ऋतु सप्तच्छद (छितवन) की डालियों में, सूर्य, चन्द्रमा और तारोंकी प्रभामें तथा श्रेष्ठ गजराजों की लीलाओं में अपनी शोभा बाँटकर आयी है
Show English Translation
'The wind carries the fragrance of saptachada flowers. Attracted by the fragrance, swarms of bees come humming. The pride of the elephants in rut increases.
ShlokaShloka 29
अभ्यागतैश्चारुविशालपक्षै स्सरःप्रियैः पद्मरजोवकीर्णैः। महानदीनां पुलिनोपयातैः क्रीडन्ति हंसास्सह चक्रवाकैः4.30.31।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘छितवन के फूलों की सुगन्ध धारण करने वाला शरत्काल स्वभावतः वायु का अनुसरण कर रहा है। भ्रमरों के समूह उसके गुणगान कर रहे हैं। वह मार्ग के जल को सोखता और मतवाले हाथियों के दर्प को बढ़ाता हुआ अधिक शोभा पा रहा है
Show English Translation
'The swans have come face to face with chakravaka birds. They have newly arrived. Lovers of lakes, they are shaking the pollen of lotuses on their lovely wide wings and have settled on the sandy bankssporting.
ShlokaShloka 30
मदप्रगल्भेषु च वारणेषु गवां समूहेषु च दर्पितेषु। प्रसन्नतोयासु च निम्नगासु विभाति लक्ष्मीर्बहुधा विभक्ता4.30.32।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘छितवन के फूलों की सुगन्ध धारण करने वाला शरत्काल स्वभावतः वायु का अनुसरण कर रहा है। भ्रमरों के समूह उसके गुणगान कर रहे हैं। वह मार्ग के जल को सोखता और मतवाले हाथियों के दर्प को बढ़ाता हुआ अधिक शोभा पा रहा है
Show English Translation
'Goddess Laxmi with her scattered self shines there among the proud elephants, among herds of excited bulls and among streams with clear water.
ShlokaShloka 31
नभस्समीक्ष्याम्बुधरैर्विमुक्तं विमुक्तबर्हाभरणा वनेषु। प्रियास्वसक्ता विनिवृत्तशोभा गतोत्सवा ध्यानपरा मयूराः4.30.33।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जिनके पंख सुन्दर और विशाल हैं, जिन्हें कामक्रीडा अधिक प्रिय है, जिनके ऊपर कमलों के पराग बिखरे हुए हैं, जो बड़ी-बड़ी नदियों के तटों पर उतरे हैं और मानसरोवर से साथ ही आये हैं, उन चक्रवाकों के साथ हंस क्रीडा कर रहे हैं
Show English Translation
'The sky is free from clouds. The peacocks have shed their ornamental plumes. They have lost interest in their beloveds. With their glory withdrawn, the peacocks are devoid of happiness and absorbed in the thought of the clouds.
ShlokaShloka 32
मनोज्ञगन्धैः प्रियकैरनल्पैः पुष्पातिभारावनताग्रशाखैः। सुवर्णगौरैर्नयनाभिरामै रुद्योतितानीव वनान्तराणि4.30.34।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘मदमत्त गजराजों में, दर्प-भरे वृषभों के समूहों में तथा स्वच्छ जलवाली सरिताओं में नाना रूपों में विभक्त हुई लक्ष्मी विशेष शोभा पा रही है
Show English Translation
'The forests are delightful to the eyes, as if illuminated by a large number of goldencoloured, finesmelling priyaka branches bent under the heavy loads of flowers.
ShlokaShloka 33
प्रियान्वितानां नलिनीप्रियाणां वने रतानां कुसुमोद्धतानाम्। मदोत्कटानां मदलालसानां गजोत्तमानां गतयोऽद्य मन्दाः4.30.35।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘वन के भीतर बहुत-से असन नामक वृक्ष खड़े हैं, जिनकी डालियों के अग्रभाग फूलों के अधिक भार से झुक गये हैं। उनपर मनोहर सुगन्ध छा रही है। वे सभी वृक्ष सुवर्ण के समान गौर तथा नेत्रों को आनन्द प्रदान करने वाले हैं। उनके द्वारा वनप्रान्त प्रकाशित-से हो रहे हैं
Show English Translation
'Lordly elephants accompanied by their dear female mates, fond of lotus ponds and woods are out to enjoy the sweet smell of the blossoms of saptachada and excited by passion and longing for sexual union are moving slowly.
ShlokaShloka 34
व्यभ्रं नभश्शस्त्रविधौतवर्णं कृशप्रवाहानि नदीजलानि। कह्लारशीताः पवनाः प्रवान्ति तमोविमुक्ताश्च दिशः प्रकाशाः4.30.36।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘वन के भीतर बहुत-से असन नामक वृक्ष खड़े हैं, जिनकी डालियों के अग्रभाग फूलों के अधिक भार से झुक गये हैं। उनपर मनोहर सुगन्ध छा रही है। वे सभी वृक्ष सुवर्ण के समान गौर तथा नेत्रों को आनन्द प्रदान करने वाले हैं। उनके द्वारा वनप्रान्त प्रकाशित-से हो रहे हैं
Show English Translation
'Cleared of the black clouds, the sky is shining like a polished weapon. The river waters flow feebly. Winds blowing over white lotuses feel cool. All quarters clear of darkness are shining.
ShlokaShloka 35
सूर्यातपक्रामणनष्टपङ्का भूमिश्चिरोदधाटितसान्द्ररेणुः। अन्योन्यवैरेणसमायुताना मुद्योगकालोऽद्य नराधिपानाम्4.30.37।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जो अपनी प्रियतमाओं के साथ विचरते हैं, जिन्हें कमल के पुष्प तथा वन अधिक प्रिय हैं, जो छितवन के फूलों को सूंघकर उन्मत्त हो उठे हैं, जिनमें अधिक मद है तथा जिन्हें मदजनित कामभोग की लालसा बनी हुई है, उन गजराजों की गति आज मन्द हो गयी है
Show English Translation
ShlokaShloka 36
शरद्गुणाप्यायितरूपशोभाः प्रहर्षिताः पांशुसमुत्क्षिताङ्गाः। मदोत्कटास्सम्प्रति युद्धलुब्धा वृषा गवां मध्यगता नदन्ति4.30.38।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘घाम लगने से धरती का कीचड़ सूख गया है। अब उस पर बहुत दिनों के बाद घनी धूल प्रकट हुई है। परस्पर वैर रखने वाले राजाओं के लिये युद्ध के निमित्त उद्योग करने का समय अब आ गया है
Show English Translation
'The bulls surrounded by cows are bellowing with the dust settled on their limbs. Excited by passion they are happy, ready to fight. They look attractive, blessed by the attributes of Autumn.
ShlokaShloka 37
समन्मथं तीव्रगतानुरागाः कुलान्विता मन्दगतिं करिण्यः। मदान्वितं सम्परिवार्य यान्तं वनेषु भर्तारमनुप्रयान्ति4.30.39।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘घाम लगने से धरती का कीचड़ सूख गया है। अब उस पर बहुत दिनों के बाद घनी धूल प्रकट हुई है। परस्पर वैर रखने वाले राजाओं के लिये युद्ध के निमित्त उद्योग करने का समय अब आ गया है
Show English Translation
'The female elephants of good breed, deeply passionate, gather round and follow their intoxicated lord moving slowly through the forest.
ShlokaShloka 38
त्यक्त्वा वराण्यात्मविभूषणानि बर्हाणि तीरोपगता नदीनाम्। निर्भर्त्स्यमाना इव सारसौघैः प्रयान्ति दीना विमदा मयूराः4.30.40।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जिसमें कामभाव का उदय हुआ है, इसीलिये जो अत्यन्त तीव्र अनुराग से युक्त है और अच्छे कुल में उत्पन्न हुई है, वह मन्दगति से चलने वाली हथिनी वनों में जाते हुए अपने मदमत्त स्वामी को घेरकर उसका अनुगमन करती है
Show English Translation
'The peacocks have shed their ornamental wear, their plumes. They are moving on the river banks miserably, devoid of high spirit as if they are being taunted by flocks of sarasa birds (who are highspinted and cheerful).
ShlokaShloka 39
वित्रास्य कारण्डवचक्रवाका न्महारवैर्भिन्नकटा गजेन्द्राः। सरस्सु बद्धाम्बुजभूषणेषु विक्षोभ्य विक्षोभ्य जलं पिबन्ति4.30.41।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जिसमें कामभाव का उदय हुआ है, इसीलिये जो अत्यन्त तीव्र अनुराग से युक्त है और अच्छे कुल में उत्पन्न हुई है, वह मन्दगति से चलने वाली हथिनी वनों में जाते हुए अपने मदमत्त स्वामी को घेरकर उसका अनुगमन करती है
Show English Translation
'Excellent elephants in rut, with ichor exuding from their temples trumpet, frightening the ducks and chakravaka birds in the water. Strirring the water in the lakes, ornamented with lotuses, they drink it.
ShlokaShloka 40
व्य���ेतपङ्कासु सवालुकासु प्रसन्नतोयासु सगोकुलासु। ससारसारावनिनादितासु नदीषु हृष्टा निपतन्ति हंसाः4.30.42।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जिनके गण्डस्थल से मद की धारा बह रही है, वे गजराज अपनी महती गर्जना से कारण्डवों तथा चक्रवाकों को भयभीत करके विकसित कमलों से विभूषित सरोवरों में जल को हिलोर-हिलोरकर पी रहे हैं
Show English Translation
'The swans are full of joy, flocking on the sand banks of rivers crowded with cows where the water is pure and devoid of mud. The rivers are full of sarasa birds and swans who are singing delightfully.
ShlokaShloka 41
नदीघनप्रस्रवणोदकाना मतिप्रवृद्धानिलबर्हिणानाम्। प्लवङ्गमानां च गतोत्सवानां द्रुतं रवास्सम्प्रति सम्प्रणष्टाः4.30.43।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जिनके गण्डस्थल से मद की धारा बह रही है, वे गजराज अपनी महती गर्जना से कारण्डवों तथा चक्रवाकों को भयभीत करके विकसित कमलों से विभूषित सरोवरों में जल को हिलोर-हिलोरकर पी रहे हैं
Show English Translation
'Suddenly the turbulent sounds of the river waters, waterfalls and thunderclouds have stopped. The peacoks having lost the pleasure of blowing winds lost their excitement. The croaking of frogs is silent.
ShlokaShloka 42
अनेकवर्णास्सुविनष्टकाया नवोदितेष्वम्बुधरेषु नष्टाः। क्षुधार्दिता घोरविषा बिलेभ्य श्चिरोषिता विप्रसरन्ति सर्पाः4.30.44।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जिनके कीचड़ दूर हो गये हैं। जो बालुकाओं से सुशोभित हैं, जिनका जल बहुत ही स्वच्छ है तथा गौओं के समुदाय जिनके जल का सेवन करते हैं, सारसों के कलरवों से गूंजती हुई उन सरिताओं में हंस बड़े हर्ष के साथ उतर रहे हैं
Show English Translation
'With no new rainclouds (in the sky), venomous, multicoloured serpents crawl out of the anthills with emacited (hybernated) bodies, troubled by hunger due to long confinement.
ShlokaShloka 43
चञ्चच्चन्द्रकरस्पर्शहर्षोन्मीलिततारका। अहो रागवती सन्ध्या जह��ति स्वयमम्बरम्4.30.45।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘नूतन मेघों के उदित होने पर जो चिरकाल से बिलों में छिपे बैठे थे, जिनकी शरीरयात्रा नष्टप्राय हो गयी थी और इस प्रकार जो मृतवत् हो रहे थे, वे भयंकर विषवाले बहुरंगे सर्प भूख से पीड़ित होकर अब बिलों से बाहर निकल रहे हैं
Show English Translation
'While the stars appear with the soothing touch of the Moon's beams, this ruddy twilight is quitting the sky on her own.
ShlokaShloka 44
रात्रिश्शशाङ्कोदितसौम्यवक्त्रा तारागणोन्मीलितचारुनेत्रा। ज्योत्स्नांशुकप्रावरणा विभाति नारीव शुक्लांशुकसंवृताङ्गी4.30.46।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘नूतन मेघों के उदित होने पर जो चिरकाल से बिलों में छिपे बैठे थे, जिनकी शरीरयात्रा नष्टप्राय हो गयी थी और इस प्रकार जो मृतवत् हो रहे थे, वे भयंकर विषवाले बहुरंगे सर्प भूख से पीड़ित होकर अब बिलों से बाहर निकल रहे हैं
Show English Translation
'The night appears like a lady with a sweet face lit up by the rising Moon, her beautiful eyes opened up by stars, her body draped in the robe of white Moon light.
ShlokaShloka 45
विपक्वशालिप्रसवानि भुक्त्वा प्रहर्षिता सारसचारुपङ्क्तिः। नभस्समाक्रामति शीघ्रवेगाः वातावधूता ग्रथितेव माला4.30.47।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘शोभाशाली चन्द्रमा की किरणों के स्पर्शसे होने वाले हर्ष के कारण जिसके तारे किंचित् प्रकाशित हो रहे हैं (अथवा प्रियतम के कर स्पर्शजनित हर्ष से जिसके नेत्रों की पुतली किंचित् खिल उठी है) वह रागयुक्त संध्या (अथवा अनुरागभरी नायिका) स्वयं ही अम्बर (आकाश अथवा वस्त्र) का त्याग कर रही है, यह कैसे आश्चर्य की बात है ! *
Show English Translation
'Driven by the wind, the lovely sarasa birds, after eating ripened grains from paddy fields happily fly the sky in rows like a garland at great speed.
ShlokaShloka 46
सुप्तैकहंसं कुमुदैरुपेतं महाह्रदस्थं सलिलं विभाति। घनैर्विमुक्तं निशि पूर्णचन्द्रं तारागणाकीर्णमिवान्तरिक्षम्4.30.48।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘चाँदनी की चादर ओढ़े हुए शरत्काल की यह रात्रि श्वेत साड़ी से ढके हुए अङ्गवाली एक सुन्दरी नारी के समान शोभा पाती है। उदित हुआ चन्द्रमा ही उसका सौम्य मुख है और तारे ही उसकी खुली हुई मनोहर आँखें हैं
Show English Translation
'With a single swan in sleep night lotuses blooming around it, the water in the big tank appear like the sky free from clouds with the full Moon and clusters of stars scattered. (The swan is the moon, the lotuses the stars and the clean pond the sky).
ShlokaShloka 47
प्रकीर्णहंसाकुलमेखलानां प्रबुद्धपद्मोत्पलमालिनीनाम्। वाप्युत्तमानामधिकाऽद्य लक्ष्मी र्वराङ्गनानामिव भूषितानाम्4.30.49।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘पके हुए धान की बालोंको खाकर हर्ष से भरी हुई और तीव्र वेग से चलने वाली सारसों की वह सुन्दर पंक्ति वायुकम्पित गुंथी हुई पुष्पमाला की भाँति आकाश में उड़ रही है
Show English Translation
'Lakshmi, the goddess of wealth (also of autumn) appears decorated with deep wells like an excellent lady with swans as girdles and blooming lotuses and lilies as garlands.
ShlokaShloka 48
वेणुस्वनव्यञ्जिततूर्यमिश्रः प्रत्यूषकालानिलसम्प्रवृद्धः। सम्मूर्छितो गर्गरगोवृषाणा मन्योन्यमापूरयतीव शब्दः4.30.50।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘कुमुद के फूलों से भरा हुआ उस महान् तालाब का जल जिसमें एक हंस सोया हुआ है, ऐसा जान पड़ता है मानो रात के समय बादलों के आवरण से रहित आकाश सब ओर छिटके हुए तारों से व्याप्त होकर पूर्ण चन्द्रमा के साथ शोभा पा रहा हो
Show English Translation
'The whistling of bamboos enhanced by the wind in the early morning, and the bellowing of bulls echoing in the caves supplement each other as it were.
ShlokaShloka 49
नवैर्नदीनां कुसुमप्रभासै र्व्याधूयमानैर्मृदुमारुतेन। धौतामलक्षौमपटप्रकाशैः कूलानि काशैरुपशोभितानि4.30.51।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘सब ओर बिखरे हुए हंस ही जिनकी फैली हुई मेखला (करधनी) हैं, जो खिले हुए कमलों और उत्पलों की मालाएँ धारण करती हैं। उन उत्तम बावड़ियों की शोभा आज वस्त्राभूषणों से विभूषित हुई सुन्दरी वनिताओं के समान हो रही है
Show English Translation
'The river banks shining with fresh white flowers of kasa reeds swayed by the gentle breeze silken look like a lady wrapped in white silk.
ShlokaShloka 50
वनप्रचण्डा मधुपानशौण्डाः प्रियान्विताष्षट्चरणाः प्रह्रृष्टाः। वनेषु मत्ताः पवनानुयात्रां कुर्वन्ति पद्मासनरेणुगौराः4.30.52।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘वेणु के स्वर के रूपमें व्यक्त हुए वाद्यघोषसे मिश्रित और प्रातःकाल की वायु से वृद्धि को प्राप्त होकर सब ओर फैला हुआ दही मथने के बड़े-बड़े भाण्डों और साँड़ों का शब्द, मानो एक-दूसरे का पूरक हो रहा है
Show English Translation
'The butterflies glitter around in the forest fearlessly showing their skill in drinking honey, with their backs turned white with the dust of pollen grains from the lotus cups. They follow the wind along with their loved ones in the forest.
ShlokaShloka 51
जलं प्रसन्नं कुमुदं प्रभासं क्रौञ्चस्वनश्शालिवनं विपक्वम्। मृदुश्च वायुर्विमलश्च चन्द्र श्शंसन्ति वर्षव्यपनीतकालम्4.30.53।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘वन में ढिठाई के साथ घूमने वाले तथा कमल और असन के परागों से गौरवर्ण को प्राप्त हुए मतवाले भ्रमर, जो पुष्पों के मकरन्द का पान करने में बड़े चतुर हैं, अपनी प्रियाओं के साथ हर्ष में भरकर वनों में (गन्ध के लोभ से) वायु के पीछे-पीछे जा रहे हैं
Show English Translation
'The fresh blooms of night lotuses, the cackle of krauncha birds, fully ripened fields of paddy, the gentle breeze and the bright Moon indicate the coming to an end of the rainy season and setting in of autum.
ShlokaShloka 52
मीनोपसन्दर्शितमेखलानां नदीवधूनां गतयोऽद्य मन्दाः। कान्तोपभुक्तालसगामिनीनां प्रभातकालेष्विव कामिनीनाम्4.30.54।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘वन में ढिठाई के साथ घूमने वाले तथा कमल और असन के परागों से गौरवर्ण को प्राप्त हुए मतवाले भ्रमर, जो पुष्पों के मकरन्द का पान करने में बड़े चतुर हैं, अपनी प्रियाओं के साथ हर्ष में भरकर वनों में (गन्ध के लोभ से) वायु के पीछे-पीछे जा रहे हैं
Show English Translation
'Now the riverbrides, displaying their girdles of fish, have slowed down like the gait of sensuous ladies in the early morning, exhausted by sexual pleasures.
ShlokaShloka 53
सचक्रवाकानि सशैवलानि काशैर्दुकूलैरिव संवृतानि। सपत्रलेखानि सरोचनानि वधूमुखानीव नदीमुखानि4.30.55।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जल स्वच्छ हो गया है, धान की खेती पक गयी है, वायु मन्दगति से चलने लगी है और चन्द्रमा अत्यन्त निर्मल दिखायी देता है ये सब लक्षण उस शरत्काल के आगमन की सूचना देते हैं। जिसमें वर्षा की समाप्ति हो जाती है, क्रौञ्च पक्षी बोलने लगते हैं और फूल उस ऋतु के हास की भाँति खिल उठते हैं
Show English Translation
'Crowded with chakravaka birds and green moss, and covered with kasa reeds like silken veils, the river banks appear like the face of the bride decorated with designs of green leaves and gorochana tilaka.
ShlokaShloka 54
प्रफुल्लबाणासनचित्रितेषु प्रहृष्टषट्पादनिकूजितेषु। गृहीतचापोद्यतचण्डदण्डः प्रचण्डचारोऽद्य वनेषु कामः4.30.56।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘नदियों के मुख नव वधुओं के मुँह के समान शोभा पाते हैं। उनमें जो चक्रवाक हैं, वे गोरोचन द्वारा निर्मित तिलक के समान प्रतीत होते हैं, जो सेवार हैं, वे वधू के मुखपर बनी हुई पत्रभङ्गी के समान जान पड़ते हैं तथा जो काश हैं, वे ही मानो श्वेत दुकूल बनकर नदीरूपिणी वधू के मुँह को ढके हुए हैं।
Show English Translation
'Now Cupid is moving unobstructed showing his power by holding his bow indicating strict punishment to those separated from their beloveds in the forests with bana and asana flowers in bloom and bees humming happily.
ShlokaShloka 55
लोकं सुवृष्ट्या परितोषयित्वा नदीस्तटाकानि च पूरयित्वा। निष्पन्नसस्यां वसुधां च कृत्वा त्यक्त्वा नभस्तोयधराः प्रणष्टाः4.30.57।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘नदियों के मुख नव वधुओं के मुँह के समान शोभा पाते हैं। उनमें जो चक्रवाक हैं, वे गोरोचन द्वारा निर्मित तिलक के समान प्रतीत होते हैं, जो सेवार हैं, वे वधू के मुखपर बनी हुई पत्रभङ्गी के समान जान पड़ते हैं तथा जो काश हैं, वे ही मानो श्वेत दुकूल बनकर नदीरूपिणी वधू के मुँह को ढके हुए हैं।
Show English Translation
'Having showered heavy rains, and filling tanks and rivers, and producing bumper crops on the earth the clouds have disapeared.
ShlokaShloka 56
दर्शयन्ति शरन्नद्यः पुलिनानि शनैः शनैः। नवसङ्गमसव्रीडा जघनानीव योषितः4.30.58।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘फूले हुए सरकण्डों और असन के वृक्षों से जिनकी विचित्र शोभा हो रही है तथा जिनमें हर्षभरे भ्रमरों की आवाज गूंजती रहती है, उन वनों में आज प्रचण्ड धनुर्धर कामदेव प्रकट हुआ है, जो धनुष हाथ में लेकर विरही जनों को दण्ड देने के लिये उद्यत हो अत्यन्त कोप का परिचय दे रहा है
Show English Translation
'Just as bashful young brides show their loins slowly during their first sexual meet the rivers start showing their sandy banks slowly in autumn.
ShlokaShloka 57
प्रसन्नसलिलास्सौम्य कुररीभिर्विनादिताः। चक्रवाकगणाकीर्णा विभान्ति सलिलाशयाः4.30.59।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘सौम्य! सभी जलाशयों के जल स्वच्छ हो गये हैं। वहाँ कुरर पक्षियों के कलनाद गूंज रहे हैं और चक्रवाकों के समुदाय चारों ओर बिखरे हुए हैं। इस प्रकार उन जलाशयों की बड़ी शोभा हो रही है
Show English Translation
'O gentle Lakshmana the pure water in the tanks and sweet sounds of flocks of female kurari birds and chakravakas there are splendid.
ShlokaShloka 58
असनास्सप्तपर्णाश्च कोविदाराश्च पुष्पिताः। दृश्यन्ते बन्धुजीवाश्च श्यामाश्च गिरिसानुषु4.30.60।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘सौम्य! सभी जलाशयों के जल स्वच्छ हो गये हैं। वहाँ कुरर पक्षियों के कलनाद गूंज रहे हैं और चक्रवाकों के समुदाय चारों ओर बिखरे हुए हैं। इस प्रकार उन जलाशयों की बड़ी शोभा हो रही है
Show English Translation
'The asanas, saptaparna, kovida and bandhujeeva trees and shyama creepers are seen in full bloom on the mountain slopes.
ShlokaShloka 59
हंससारसचक्राह्वैः कुररैश्च समन्ततः। पुलिनान्यवकीर्णानि नदीनां पश्य लक्ष्मण4.30.61।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘सौम्य! सभी जलाशयों के जल स्वच्छ हो गये हैं। वहाँ कुरर पक्षियों के कलनाद गूंज रहे हैं और चक्रवाकों के समुदाय चारों ओर बिखरे हुए हैं। इस प्रकार उन जलाशयों की बड़ी शोभा हो रही है
Show English Translation
'Lakshmana look at the swans, sarasas, chakravakas and kurara birds scattered all over the river banks.
ShlokaShloka 60
अन्योन्यबद्धवैराणां जिगीषूणां नृपात्मज। उद्योगसमयस्सौम्य पार्थिवानामुपस्थितः4.30.62।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘सौम्य! राजकुमार! जिनमें परस्पर वैर बँधा हुआ है और जो एक-दूसरे को जीतने की इच्छा रखते हैं, उन भूमिपालों के लिये यह युद्ध के निमित्त उद्योग करने का समय उपस्थित हुआ है
Show English Translation
'O handsome prince the time has come for making expeditions by kings against the enemies waiting for victory.
ShlokaShloka 61
इयं सा प्रथमा यात्रा पार्थिवानां नृपात्मज न च पश्यामि सुग्रीवमुद्योगं वा तथाविधम्4.30.63।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘नरेशनन्दन! राजाओं की विजय-यात्रा का यह प्रथम अवसर है, किंतु न तो मैं सुग्रीव को यहाँ उपस्थित देखता हूँ और न उनका कोई वैसा उद्योग ही दृष्टिगोचर होता है
Show English Translation
'O prince this is time for the first expedition (of the year) by kings. I do not find Sugriva making effort in that direction.
ShlokaShloka 62
चत्वारो वार्षिका मासा गता वर्षशतोपमाः। मम शोकाभिभूतस्य सौम्य सीतामपश्यतः4.30.64।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘मैं सीता को न देखने के कारण शोक से संतप्त हो रहा हूँ; अतः ये वर्षा के चार महीने मेरे लिये सौ वर्षों के समान बीते हैं
Show English Translation
'O gentle one, the four months of rainy season are spent without seeing Sita. It is equal to a hundred years for my griefstricken heart.
ShlokaShloka 63
चक्रवाकीव भर्तारं पृष्ठतोऽनुगता वनम्। विषमं दण्डकारण्यमुद्यानमिव याऽगता4.30.65।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘मैं सीता को न देखने के कारण शोक से संतप्त हो रहा हूँ; अतः ये वर्षा के चार महीने मेरे लिये सौ वर्षों के समान बीते हैं
Show English Translation
'Just as a female chakravaka follows the male, Sita followed her husband into this dense Dandaka forest as though it is a pleasuregarden.
ShlokaShloka 64
प्रियाविहीने दुःखार्ते हृतराज्ये विवासिते। कृपां न कुरुते राजा सुग्रीवो मयि लक्ष्मण4.30.66।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘मैं सीता को न देखने के कारण शोक से संतप्त हो रहा हूँ; अतः ये वर्षा के चार महीने मेरे लिये सौ वर्षों के समान बीते हैं
Show English Translation
'O Lakshmana king Sugriva shows no mercy on one, who is griefstricken, separated from his wife, and banished from the kingdom.
ShlokaShloka 65
अनाथो हृतराज्योऽयं रावणेन च धर्षितः। दीनो दूरगृहः कामी मां चैव शरणं गतः4.30.67।। इत्येतैः कारणैस्सौम्य सुग्रीवस्य दुरात्मनः। अहं वानरराजस्य परिभूतः परन्तप4.30.68।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जैसे चकवी अपने स्वामी का अनुसरण करती है, उसी प्रकार कल्याणी सीता इस भयंकर एवं दुर्गम दण्डकारण्य को उद्यान-सा समझकर मेरे पीछे यहाँ तक चली आयी थी
Show English Translation
'O gentle one although I am a vanquisher of foes, this evilminded king of monkeys is slighting me because I am away from home, I have lost my kingdom, I am outraged by Ravana, I am miserable and lovesick and I have sought his help.
ShlokaShloka 66
स कालं परिसङ्ख्याय सीतायाः परिमार्गणे। कृतार्थस्समयं कृत्वा दुर्मतिर्नावबुध्यते4.30.69।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘लक्ष्मण! मैं अपनी प्रियतमा से बिछुड़ा हुआ हूँ। मेरा राज्य छीन लिया गया है और मैं देश से निकाल दिया गया हूँ। इस अवस्था में भी राजा सुग्रीव मुझपर कृपा नहीं कर रहा है
Show English Translation
'The evilminded Sugriva, having fulfilled his objective, does not realise that he has made a promise to me and has reached the time set for the search of Sita.
ShlokaShloka 67
त्वं च किष्किन्धां प्रविश्य ब्रूहि वानरपुङ्गवम्। मूर्खं ग्राम्यसुखे सक्तं सुग्रीवं वचनान्मम4.30.70।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘सौम्यलक्ष्मण! मैं अनाथ हूँ राज्य से भ्रष्ट हो गया हूँ। रावण ने मेरा तिरस्कार किया है। मैं दीन हूँ। मेरा घर यहाँ से बहुत दूर है। मैं कामना लेकर यहाँ आया हूँ तथा सुग्रीव यह भी समझता है कि राम मेरी शरण में आये हैं। इन्हीं सब कारणों से वानरों का राजा दुरात्मा सुग्रीव मेरा तिरस्कार कर रहा है। किंतु उसे पता नहीं है कि मैं सदा शत्रुओं को संताप देने में समर्थ हूँ
Show English Translation
'Go to Kishkinda and speak (on my behalf ) to that fool, Sugriva, the chief of monkeys who is revelling in habitual sensual pleasures
ShlokaShloka 68
अर्थिनामुपपन्नानां पूर्वं चाप्युपकारिणाम्। आशां संश्रुत्य यो हन्ति स लोके पुरुषाधमः4.30.71।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘सौम्यलक्ष्मण! मैं अनाथ हूँ राज्य से भ्रष्ट हो गया हूँ। रावण ने मेरा तिरस्कार किया है। मैं दीन हूँ। मेरा घर यहाँ से बहुत दूर है। मैं कामना लेकर यहाँ आया हूँ तथा सुग्रीव यह भी समझता है कि राम मेरी शरण में आये हैं। इन्हीं सब कारणों से वानरों का राजा दुरात्मा सुग्रीव मेरा तिरस्कार कर रहा है। किंतु उसे पता नहीं है कि मैं सदा शत्रुओं को संताप देने में समर्थ हूँ
Show English Translation
'He who, having promised to his friend to grant his desire and who, having been obliged, fails to implement the promise, is the lowest on earth.
ShlokaShloka 69
शुभं वा यदि वा पापं यो हि वाक्यमुदीरितम्। सत्येन प्रतिगृह्णाति स वीरः पुरुषोत्तमः4.30.72।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘उसने सीता की खोज के लिये समय निश्चित कर दिया था; किंतु उसका तो अब काम निकल गया है, इसीलिये वह दुर्बुद्धि वानर प्रतिज्ञा करके भी उसका कुछ खयाल नहीं कर रहा है
Show English Translation
'(On the other hand) he who honours his promise, whether good or bad, is truly heroic, the best of men.'
ShlokaShloka 70
कृतार्था ह्यकृतार्थानां मित्राणां न भवन्ति ये। तान्मृतानपि क्रव्यादाः कृतघ्नान्नोपभुञ्जते4.30.73।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘अतः लक्ष्मण ! तुम मेरी आज्ञा से किष्किन्धापुरी में जाओ और विषयभोग में फँसे हुए मूर्ख वानरराज सुग्रीव से इस प्रकार कहो-
Show English Translation
'Even the carnivorous animals dislike to eat the body of such ungrateful men who do not help their friends even though they have received help and have achieved their objective.'
ShlokaShloka 71
नूनं काञ्चनपृष्ठस्य विकृष्टस्य मया रणे। द्रष्टुमिच्छति चापस्य रूपं विद्युद्गणोपमम्4.30.74।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जो बल-पराक्रम से सम्पन्न तथा पहले ही उपकार करने वाले कार्यार्थी पुरुषों को प्रतिज्ञापूर्वक आशा देकर पीछे उसे तोड़ देता है, वह संसार के सभी पुरुषों में नीच है
Show English Translation
'Surely he wishes to see the form of my bow inlaid with gold bent by me to its full length, looking like a streak of lightning.
ShlokaShloka 72
घोरं ज्यातलनिर्घोषं क्रुद्धस्य मम संयुगे। निर्घोषमिव वज्रस्य पुनस्संश्रोतुमिच्छसि4.30.75।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जो अपने मुख से प्रतिज्ञा के रूप में निकले हुए भले या बुरे सभी तरह के वचनों को अवश्य पालनीय समझकर सत्य की रक्षा के उद्देश्य से उनका पालन करता है, वह वीर समस्त पुरुषों में श्रेष्ठ माना जाता है
Show English Translation
'Perhaps he wants once again to hear when enraged in a combat, the dreadful twang of my bow, resembling the peal of a thunderbolt .
ShlokaShloka 73
काममेवंगतेऽप्यस्य परिज्ञाते पराक्रमे। त्वत्सहायस्य मे वीर न चिन्ता स्यान्नृपात्मज4.30.76।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘सुग्रीव! निश्चय ही तुम युद्ध में मेरे द्वारा खींचे गये सोने की पीठवाले धनुष का कौंधती हुई बिजली के समान रूप देखना चाहते हो
Show English Translation
'O prince knowing my valour fully welI, and knowing that you are here to help me he is unhesitatingly revelling in sensual pleasures.
ShlokaShloka 74
यदर्थमयमारम्भः कृतः परपुरञ्जयः। समयं नाभिजानाति कृतार्थः प्लवगेश्वरः4.30.77।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘सुग्रीव! निश्चय ही तुम युद्ध में मेरे द्वारा खींचे गये सोने की पीठवाले धनुष का कौंधती हुई बिजली के समान रूप देखना चाहते हो
Show English Translation
'O conqueror of the enemy capital the monkey lord who has achieved his goal does not realise the importance of my mission.
ShlokaShloka 75
वर्षासमयकालं तु प्रतिज्ञाय हरीश्वरः। व्यतीतांश्चतुरो मासान्विहरन्नावबुध्यते4.30.78।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘शत्रु-नगरी पर विजय पाने वाले लक्ष्मण! जिसके लिये यह मित्रता आदि का सारा आयोजन किया गया, सीता की खोजविषयक उस प्रतिज्ञा को इस समय वानरराज सुग्रीव भूल गया है-उसे याद नहीं कर रहा है; क्योंकि उसका अपना काम सिद्ध हो चुका
Show English Translation
'Having promised (to search for Sita) after the rainy season,Sugriva is not aware that he has (already) spent the four monthsrevelling.
ShlokaShloka 76
सामात्यपरिषत्क्रीडन्पानमेवोपसेवते। शोकदीनेषु ��ास्मासु सुग्रीवः कुरुते दयाम्4.30.79।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘शत्रु-नगरी पर विजय पाने वाले लक्ष्मण! जिसके लिये यह मित्रता आदि का सारा आयोजन किया गया, सीता की खोजविषयक उस प्रतिज्ञा को इस समय वानरराज सुग्रीव भूल गया है-उसे याद नहीं कर रहा है; क्योंकि उसका अपना काम सिद्ध हो चुका
Show English Translation
'Sporting with the council of ministers surrounding him, resorting to drinking, he shows no compassion to us feeling wretched with grief.
ShlokaShloka 77
उच्यतां गच्छ सुग्रीवस्त्वया वत्स महाबल। मम रोषस्य यद्रूपं ब्रूयाश्चैवमिदं वचः4.30.80।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘शत्रु-नगरी पर विजय पाने वाले लक्ष्मण! जिसके लिये यह मित्रता आदि का सारा आयोजन किया गया, सीता की खोजविषयक उस प्रतिज्ञा को इस समय वानरराज सुग्रीव भूल गया है-उसे याद नहीं कर रहा है; क्योंकि उसका अपना काम सिद्ध हो चुका
Show English Translation
'O mighty warrior O dear, go to Sugriva and make him aware of the virulence of my anger and tell him:
ShlokaShloka 78
न च सङ्कुचितः पन्था येन वाली हतो गतः। समये तिष्ठ सुग्रीव मा वालिपथमन्वगाः4.30.81।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘सुग्रीव मन्त्रियों तथा परिजनों सहित क्रीडाजनित आमोद-प्रमोद में फँसकर विविध पेय पदार्थों का ही सेवन कर रहा है। हमलोग शोक से व्याकुल हो रहे हैं। तो भी वह हम पर दया नहीं करता है
Show English Translation
'The route by which Vali departed, killed by me has not been closed. O Sugriva you ought to abide by the pledge given. Do not follow the path of Vali.
ShlokaShloka 79
एक एव रणे वाली शरेण निहतो मया। त्वां तु सत्यादतिक्रान्तं हनिष्यामि सबान्धवम्4.30.82।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘सुग्रीव मन्त्रियों तथा परिजनों सहित क्रीडाजनित आमोद-प्रमोद में फँसकर विविध पेय पदार्थों का ही सेवन कर रहा है। हमलोग शोक से व्याकुल हो रहे हैं। तो भी वह हम पर दया नहीं करता है
Show English Translation
'Vali was killed by me in the battle with a single arrow while I shall kill you now along with your near and dear ones since you have deviated from the truth.'
ShlokaShloka 80
तदेवं विहिते कार्ये यद्धितं पुरुषर्षभ। तत्तद्भ्रूहि नरश्रेष्ठत्वर कालव्यतिक्रमः4.30.83।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘महाबली वीर लक्ष्मण! तुम जाओ सुग्रीव से बात करो। मेरे रोष का जो स्वरूप है, वह उसे बताओ और मेरा यह संदेश भी कह सुनाओ
Show English Translation
'O bull among men O hero speak to him that all that is done in time is done well. Hurry up. Ask him to do whatever is good for him as well as for us:
ShlokaShloka 81
कुरुष्व सत्यं मयि वानरेश्वर प्रतिश्रुतं धर्ममवेक्ष्य शाश्वतम्। मा वालिनं प्रेत्य गतो यमक्षयं त्वमद्य पश्येर्मम चोदितैश्शरैः4.30.84।।
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सुग्रीव! वाली मारा जाकर जिस रास्ते से गया है, वह आज भी बंद नहीं हुआ है। इसलिये तुम अपनी प्रतिज्ञा पर डटे रहो। वाली के मार्ग का अनुसरण न करो
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'O lord of monkeys Carry out the promise you made to me, consider it to be eternal dharma. Slain by my arrows, you will see Vali in the abode of the lord of death.'
ShlokaShloka 82
स पूर्वजं तीव्रविवृद्धकोपं लालप्यमानं प्रसमीक्ष्य दीनम्। चकार तीव्रां मतिमुग्रतेजा हरीश्वरे मानववंशनाथः4.30.85।।
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मानव-वंश की वृद्धि करने वाले उग्र तेजस्वी लक्ष्मण ने जब अपने बड़े भाई को दुःखी, बढ़े हुए तीव्र रोष से युक्त तथा अधिक बोलते देखा, तब वानरराज सुग्रीव के प्रति कठोर भाव धारण कर लिया
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On seeing Rama, the protector of the human race, wailing Lakshmana of terrific lustre hardened his stand against Sugriva and proceeded, charged with intense anger. इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये किष्किन्धाकाण्डे त्रिंशस्सर्गः Thus ends the thirtieth sarga of Kishkindakanda of the Holy Ramayana, the first epic, composed by sage Valmiki.