Aranya Kanda

Sarga 10: Rama's tells Sita that protection of sages is his supreme righteous duty.

अरण्यकाण्डम् · सर्ग 10

23 shlokas

ShlokaShloka 1
वाक्यमेतत्तु वैदेह्या व्याहृतं भर्तृभक्तया। श्रुत्वा धर्मे स्थितो रामः प्रत्युवाचाथ मैथिलीम्।।3.10.1।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘देवि! धर्म को जानने वाली जनककिशोरी! तुम्हारा मेरे ऊपर स्नेह है, इसलिये तुमने मेरे हित की बात कही है। क्षत्रियों के कुलधर्म का उपदेश करती हुई तुमने जो कुछ कहा है, वह तुम्हारे ही योग्य है
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Having heard these words spoken by Sita who was devoted to her husband, replied Rama who was firm in righteousness.
ShlokaShloka 2
हितमुक्तं त्वया देवि स्निग्धया सदृशं वचः। कुलं व्यपदिशन्त्या च धर्मज्ञे जनकात्मजे।।3.10.2।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘देवि! धर्म को जानने वाली जनककिशोरी! तुम्हारा मेरे ऊपर स्नेह है, इसलिये तुमने मेरे हित की बात कही है। क्षत्रियों के कुलधर्म का उपदेश करती हुई तुमने जो कुछ कहा है, वह तुम्हारे ही योग्य है
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O daughter of Janaka, you are conversant with dharma. Whatever you have admonished out of affection for me is befitting your race.
ShlokaShloka 3
किन्तु वक्ष्याम्यहं देवि त्वयैवोक्तमिदं वचः। क्षत्रियैर्धार्यते चापो नार्तशब्दो भवेदिति।।3.10.3।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘देवि! मैं तुम्हें क्या उत्तर दूँ, तुमने ही पहले यह बात कही है कि क्षत्रिय लोग इसलिये धनुष धारण करते हैं कि किसी को दुःखी होकर हाहाकार न करना पड़े (यदि कोई दुःख या संकटमें पड़ा हो तो उसकी रक्षा की जाय)
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But permit me, Devi, you have already stated, when a kshatriya holds a bow there will be no cry of distress. (it means you approve of my holding a bow)
ShlokaShloka 4
ते चार्ता दण्डकारण्ये मुनयस्संशितव्रताः। मां सीते स्वयमागम्य शरण्याश्शरणं गताः।।3.10.4।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘सीते! दण्डकारण्य में रहकर कठोर व्रत का पालन करने वाले वे मुनि बहुत दुःखी हैं, इसीलिये मुझे शरणागतवत्सल जानकर वे स्वयं मेरे पास आये और शरणागत हुए
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O Sita, the sages who perform rigorous penance in Dandaka forest came to me personally, seeking shelter although they can be their own protection.
ShlokaShloka 5
वसन्तो धर्मनिरता वने मूलफलाशनाः। न लभन्ते सुखं भीता राक्षसैः क्रूरकर्मभिः।।3.10.5।।
Show English Translation
The sages living in the forest, eating roots and fruits and ever engaged in righteous activities are afraid of the depredations of the demons, with their happiness gone.
ShlokaShloka 6
काले काले च निरता नियमैर्विविधैर्वने। भक्ष्यन्ते राक्षसैर्भीमैर्नरमांसोपजीविभिः।।3.10.6।।
Show English Translation
The sages engrossed in various austerities in the forest have been victims to the dreadful demons living on human flesh.
ShlokaShloka 7
ते भक्ष्यमाणा मुनयो दण्डकारण्यवासिनः। अस्मानभ्यवपद्येति मामूचुर्द्विजसत्तमा।।3.10.7।।
Show English Translation
The ascetics, the best of brahmins living in Dandaka forest being eaten up like that besought me to come to their rescue.
ShlokaShloka 8
मया तु वचनं श्रुत्वा तेषामेवं मुखाच्च्युतम्। कृत्वा चरणशुश्रूषां वाक्यमेतदुदाहृतम्।।3.10.8।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘महर्षियो! आप-जैसे ब्राह्मणों की सेवा में मुझे स्वयं ही उपस्थित होना चाहिये था, परंतु आप स्वयं ही अपनी रक्षा के लिये मेरे पास आये, यह मेरे लिये अनुपम लज्जा की बात है; अतः आप प्रसन्न हों। बताइये, मैं आपलोगों की क्या सेवा करूँ?’ यह बात मैंने उन ब्राह्मणों के सामने कही
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On hearing the words that came from their mouth, I bowed at their feet and said:
ShlokaShloka 9
प्रसीदन्तु भवन्तो मे ह्रीरेषा हि ममातुला। यदीदृशैरहं विप्रैरुपस्थेयैरुपस्थितः।।3.10.9।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘महर्षियो! आप-जैसे ब्राह्मणों की सेवा में मुझे स्वयं ही उपस्थित होना चाहिये था, परंतु आप स्वयं ही अपनी रक्षा के लिये मेरे पास आये, यह मेरे लिये अनुपम लज्जा की बात है; अतः आप प्रसन्न हों। बताइये, मैं आपलोगों की क्या सेवा करूँ?’ यह बात मैंने उन ब्राह्मणों के सामने कही
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Be pleased That brahmins like you have approached me while I should have come to you has put me to shame immeasurable .
ShlokaShloka 10
किं करोमीति च मया व्याहृतं द्विजसन्निधौ। सर्वैरेतैस्समागम्य वागियं समुदाहृता।।3.10.10।।
हिन्दी अर्थ देखें
इस प्रकार श्रीवाल्मीकि निर्मित आर्षरामायण आदिकाव्य के अरण्यकाण्ड में दसवाँ सर्ग पूरा हुआ
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I enquired about what I could do for them. And all the brahmins in one voice said:.
ShlokaShloka 11
राक्षसैर्दण्डकारण्ये बहुभिः कामरूपिभिः। अर्दितास्स्म दृढं राम भवान्नस्तत्र रक्षतु।।3.10.11।।
हिन्दी अर्थ देखें
रक्ष नस्त्वं सह भ्रात्रा त्वन्नाथा हि वयं वने। ‘यही कारण है कि राक्षसों के ग्रास बन जाने पर भी हम उन्हें शाप नहीं देते हैं, इसलिये दण्डकारण्यवासी निशाचरों से पीड़ित हुए हम तापसों की भाई सहित आप रक्षा करें; क्योंकि इस वन में अब आप ही हमारे रक्षक हैं’
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'O Rama, the demons who can assume any form at their will are mercilessly tormenting us in Dandaka forest. Do protect us from them'.
ShlokaShloka 12
होमकालेषु सम्प्राप्ताः पर्वकालेषु चानघ। धर्षयन्ति सुदुर्धर्षा राक्षसाः पिशिताशनाः।।3.10.12।।
हिन्दी अर्थ देखें
रक्ष नस्त्वं सह भ्रात्रा त्वन्नाथा हि वयं वने। ‘यही कारण है कि राक्षसों के ग्रास बन जाने पर भी हम उन्हें शाप नहीं देते हैं, इसलिये दण्डकारण्यवासी निशाचरों से पीड़ित हुए हम तापसों की भाई सहित आप रक्षा करें; क्योंकि इस वन में अब आप ही हमारे रक्षक हैं’
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'O sinless one, these cannibals are invincible. They arrive at the time of our sacrificial rituals, on the days of festivities or at the time of lunar conjunctions like no moon or full moon days and attack us.
ShlokaShloka 13
राक्षसैर्धर्षितानां च तापसानां तपस्विनाम्। गतिं मृगयमाणानां भवान्नः परमा गतिः।।3.10.13।।
हिन्दी अर्थ देखें
रक्ष नस्त्वं सह भ्रात्रा त्वन्नाथा हि वयं वने। ‘यही कारण है कि राक्षसों के ग्रास बन जाने पर भी हम उन्हें शाप नहीं देते हैं, इसलिये दण्डकारण्यवासी निशाचरों से पीड़ित हुए हम तापसों की भाई सहित आप रक्षा करें; क्योंकि इस वन में अब आप ही हमारे रक्षक हैं’
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'You are the supreme refuge for us ascetics, tormented by demons, helpless men in search of shelter.
ShlokaShloka 14
कामं तपःप्रभावेन शक्ता हन्तुं निशाचरान्। चिरार्जितं तु नेच्छामस्तपः खण्डयितुं वयम्।।3.10.14।।
हिन्दी अर्थ देखें
रक्ष नस्त्वं सह भ्रात्रा त्वन्नाथा हि वयं वने। ‘यही कारण है कि राक्षसों के ग्रास बन जाने पर भी हम उन्हें शाप नहीं देते हैं, इसलिये दण्डकारण्यवासी निशाचरों से पीड़ित हुए हम तापसों की भाई सहित आप रक्षा करें; क्योंकि इस वन में अब आप ही हमारे रक्षक हैं’
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ShlokaShloka 15
बहुविघ्नं तपो नित्यं दुश्चरं चैव राघव। तेन शापं न मुञ्चामो भक्ष्यमाणाश्च राक्षसैः।।3.10.15।।
हिन्दी अर्थ देखें
रक्ष नस्त्वं सह भ्रात्रा त्वन्नाथा हि वयं वने। ‘यही कारण है कि राक्षसों के ग्रास बन जाने पर भी हम उन्हें शाप नहीं देते हैं, इसलिये दण्डकारण्यवासी निशाचरों से पीड़ित हुए हम तापसों की भाई सहित आप रक्षा करें; क्योंकि इस वन में अब आप ही हमारे रक्षक हैं’
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'O Rama it is difficult to perform penance which is ever full of obstacles. Therefore, we do not pronounce curses even if eaten up by demons'.
ShlokaShloka 16
तदर्ध्यमानान्रक्षोभिर्दण्डकारण्यवासिभिः। रक्ष नस्त्वं सह भ्रात्रा त्वन्नाथा हि वयं वने।।3.10.16।।
Show English Translation
'The demons, dwelling in the Dandaka forest are tormenting us. You alone are our lord in the forest. Do protect us with your brother.'
ShlokaShloka 17
मया चैतद्वचश्श्रुत���वा कार्त्स्न्येन परिपालनम्। ऋषीणां दण्डकारण्ये संश्रुतं जनकात्मजे।।3.10.17।।
हिन्दी अर्थ देखें
महात्मा श्रीरामचन्द्रजी अपनी प्रिया मिथिलेशकुमारी सीता से ऐसा वचन कहकर हाथ में धनुष ले लक्ष्मण के साथ रमणीय तपोवनों में विचरण करने लगे
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O daughter of Janaka, on hearing the words of the sages I promised to undertake the entire protection of sages of the Dandaka forest.
ShlokaShloka 18
संश्रुत्य च न शक्ष्यामि जीवमानः प्रतिश्रवम्। मुनीनामन्यथा कर्तुं सत्यमिष्टं हि मे सदा।।3.10.18।।
हिन्दी अर्थ देखें
महात्मा श्रीरामचन्द्रजी अपनी प्रिया मिथिलेशकुमारी सीता से ऐसा वचन कहकर हाथ में धनुष ले लक्ष्मण के साथ रमणीय तपोवनों में विचरण करने लगे
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Having promised the sages, I cannot do otherwise as long as I have life in me. To me truth is always dear.
ShlokaShloka 19
अप्यहं जीवितं जह्यां त्वां वा सीते सलक्ष्मणाम्। न तु प्रतिज्ञां संश्रुत्य ब्राह्मणेभ्यो विशेषतः।।3.10.19।।
हिन्दी अर्थ देखें
महात्मा श्रीरामचन्द्रजी अपनी प्रिया मिथिलेशकुमारी सीता से ऐसा वचन कहकर हाथ में धनुष ले लक्ष्मण के साथ रमणीय तपोवनों में विचरण करने लगे
Show English Translation
O Sita I may forfeit my life forsake, even Lakshmana and you but will not break the promise made specially to the brahmins৷৷
ShlokaShloka 20
तदवश्यं मया कार्यमृषीणां परिपालनम्। अनुक्तेनापि वैदेहि प्रतिज्ञाय तु किं पुनः।।3.10.20।।
हिन्दी अर्थ देखें
महात्मा श्रीरामचन्द्रजी अपनी प्रिया मिथिलेशकुमारी सीता से ऐसा वचन कहकर हाथ में धनुष ले लक्ष्मण के साथ रमणीय तपोवनों में विचरण करने लगे
Show English Translation
Even before the sages requested me I should have protected them. What to speak of the promise I have already made ?
ShlokaShloka 21
मम स्नेहाच्च सौहार्दादिदमुक्तंत्वयाऽनघे। परितुष्टोऽस्म्यहं सीते न ह्यनिष्टोऽनुशिष्यते।।3.10.21।।
हिन्दी अर्थ देखें
महात्मा श्रीरामचन्द्रजी अपनी प्रिया मिथिलेशकुमारी सीता से ऐसा वचन कहकर हाथ में धनुष ले लक्ष्मण के साथ रमणीय तपोवनों में विचरण करने लगे
Show English Translation
O sinless one all that has been said by you is out of your love and affection for me. I am pleased. What is harmful is never advised.
ShlokaShloka 22
सदृशं चानुरूपं च कुलस्य तव चात्मनः। सधर्मचारिणी मे त्वं प्राणेभ्योऽपि गरीयसी।।3.10.22।।
हिन्दी अर्थ देखें
महात्मा श्रीरामचन्द्रजी अपनी प्रिया मिथिलेशकुमारी सीता से ऐसा वचन कहकर हाथ में धनुष ले लक्ष्मण के साथ रमणीय तपोवनों में विचरण करने लगे
Show English Translation
Your auspicious words are quite befitting your lineage. You are the follower of my dharma and so dearer to me than my life.
ShlokaShloka 23
इत्येवमुक्त्वा वचनं महात्मा सीतां प्रियां मैथिलराजपुत्रीम्। रामो धनुष्मान्सह लक्ष्मणेन जगाम रम्याणि तपोवनानि।।3.10.23।।
Show English Translation
Having said this to Sita, the princess of Mithila, Rama along with Lakshmana, bow in hand, moved about the delightful penancegrove. इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मी��ीय आदिकाव्ये अरण्यकाण्डे दशमस्सर्गः।। Thus ends the tenth sarga of Aranyakanda of the holy Ramayana the first epic composed by the sage Valmiki.