Aranya Kanda
Sarga 17: Surpanakha meets Rama --reveals her identity -- expresses her desire to be his wife
अरण्यकाण्डम् · सर्ग 17
25 shlokas
ShlokaShloka 1
कृताभिषेको रामस्तु सीता सौमित्रिरेव च।
तस्माद्गोदावरीतीरात्ततो जग्मुस्वमाश्रमम्।।3.17.1।।
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उस आश्रम में आकर लक्ष्मणसहित श्रीराम ने पूर्वाणकाल के होम-पूजन आदि कार्य पूर्ण किये, फिर वे दोनों भाई पर्णशाला में आकर बैठे
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Ablution over, Rama, accompanied by Sita and Lakshmana, went back from the bank of the river Godabari to their hermitage.
ShlokaShloka 2
आश्रमं तमुपागम्य राघवस्सह लक्ष्मणः।
कृत्वा पौर्वाह्णिकं कर्म पर्णशालामुपागमत्।।3.17.2।।
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उस आश्रम में आकर लक्ष्मणसहित श्रीराम ने पूर्वाणकाल के होम-पूजन आदि कार्य पूर्ण किये, फिर वे दोनों भाई पर्णशाला में आकर बैठे
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On reaching the hermitage, Rama and Lakshmana performed the forenoon rituals and entered the leafthatched cottage.
ShlokaShloka 3
उवास सुखितस्तत्र पूज्यमानो महर्षिभिः।
लक्ष्मणेन सह भ्रात्रा चकार विविधाः कथाः।।3.17.3।।
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वहाँ सीता के साथ वे सुखपूर्वक रहने लगे। उन दिनों बड़े-बड़े ऋषि-मुनि आकर वहाँ उनका सत्कार करते थे। पर्णशाला में सीता के साथ बैठे हुए महाबाहु श्रीरामचन्द्रजी चित्रा के साथ विराजमान चन्द्रमा की भाँति शोभा पा रहे थे। वे अपने भाई लक्ष्मण के साथ वहाँ तरह-तरह की बातें किया करते थे
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Honoured by the ascetics , Rama stayed there peacefully with brother Lakshmana, discussing diverse matters (from time to time).
ShlokaShloka 4
स रामः पर्णशालायामासीनस्सह सीतया।
विरराज महाबाहुश्चित्रया चन्द्रमाः इव।।3.17.4।।
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वहाँ सीता के साथ वे सुखपूर्वक रहने लगे। उन दिनों बड़े-बड़े ऋषि-मुनि आकर वहाँ उनका सत्कार करते थे। पर्णशाला में सीता के साथ बैठे हुए महाबाहु श्रीरामचन्द्रजी चित्रा के साथ विराजमान चन्द्रमा की भाँति शोभा पा रहे थे। वे अपने भाई लक्ष्मण के साथ वहाँ तरह-तरह की बातें किया करते थे
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Longarmed Rama seated with Sita in the cottage, appeared like the Moon in conjunction with constellation Chitra.
ShlokaShloka 5
तदाऽऽसीनस्य रामस्य कथासंसक्तचेतसः।
तं देशं राक्षसी काचिदाजगाम यदृच्छया।।3.17.5।।
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उनका मुख तेजस्वी, भुजाएँ बड़ी-बड़ी और नेत्र प्रफुल्ल कमलदल के समान विशाल एवं सुन्दर थे। वे हाथी के समान मन्द गति से चलते थे। उन्होंने मस्तक पर जटामण्डल धारण कर रखा था
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While Rama was thus seated, engrossed in conversation, there incidentally appeared a demoness.
ShlokaShloka 6
सा तु शूर्पणखा नाम दशग्रीवस्य राक्षसः।
भगिनी राममासाद्य ददर्श त्रिदशोपमम्।।3.17.6।।
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उनका मुख तेजस्वी, भुजाएँ बड़ी-बड़ी और नेत्र प्रफुल्ल कमलदल के समान विशाल एवं सुन्दर थे। वे हाथी के समान मन्द गति से चलते थे। उन्होंने मस्तक पर जटामण्डल धारण कर रखा था
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Surpanakha, sister of the tenheaded demon (Ravana) approached Rama shining like a god.
ShlokaShloka 7
सिंहोरस्कं महाबाहुं पद्मपत्रनिभेक्षणम्।
आजानुबाहुं दीप्तास्यमतीव प्रियदर्शनम्।।3.17.7।।
गजविक्रान्तगमनं जटामण्डलधारिणम्।
सुकुमारं महासत्त्वं पार्थिवव्यञ्जनान्वितम्।।3.17.8।।
राममिन्दीवरश्यामं कन्दर्पसदृशप्रभम्।
बभूवेन्द्रोपमं दृष्ट्वा राक्षसी काममोहिता।।3.17.9।।
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उनका मुख तेजस्वी, भुजाएँ बड़ी-बड़ी और नेत्र प्रफुल्ल कमलदल के समान विशाल एवं सुन्दर थे। वे हाथी के समान मन्द गति से चलते थे। उन्होंने मस्तक पर जटामण्डल धारण कर रखा था
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The demoness was infatuated with Rama, whose chest was like that of a lion, who was strongarmed, who had a glowing face, pleasing to the eyes, who walked with the gait of an elephant, whose hair was matted, who was gentle and strong who was, endowed with royal traits, who had a blue lotuslike complexion, who was handsome as the god of love, and who resembled Indra.
ShlokaShloka 8
सुमुखं दुर्मुखी रामं वृत्तमध्यं महोदरी।
विशालाक्षं विरूपाक्षी सुकेशं ताम्रमूर्धजा।।3.17.10।।
प्रीतिरूपं विरूपा सा सुस्वरं भैरवस्वरा।
तरुणं दारुणा वृद्धा दक्षिणं वामभाषिणी।।3.17.11।।
न्यायवृत्तं सुदुर्वृत्ता प्रियमप्रियदर्शना।
शरीरजसमाविष्टा राक्षसी वाक्यमब्रवीत्।।3.17.12।।
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ये देखने में सौम्य और नित्य नूतन तरुण थे, किंतु वह निशाचरी क्रूर और हजारों वर्षों की बुढ़िया थी। ये सरलता से बात करने वाले और उदार थे, किंतु उसकी बातों में कुटिलता भरी रहती थी। ये न्यायोचित सदाचार का पालन करने वाले थे और वह अत्यन्त दराचारिणी थी। श्रीराम देखने में प्यारे लगते थे और शूर्पणखा को देखते ही घृणा पैदा होती थी
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Rama's face was lovely, Surpanakha's was hideous. Rama had a slender waist, she had a huge belly. His eyes were large, hers were deformed. His hair was black and beautiful, hers was coppercoloured. He was lovely in appearance, she was ugly. His voice was sweet, hers was shrill. He was young, she was dreadfully old. He was positive, she was perverted. Rama was wellbehaved, she was wicked. Rama was just and loving while she was overcome by lust. (This) demoness said to Rama :
ShlokaShloka 9
जटी तापसरूपेण सभार्यश्शरचापधृत्।
आगतस्त्वमिमं देशं कथं राक्षससेवितम्।।3.17.13।।
किमागमनकृत्यं ते तत्त्वमाख्यातुमर्हसि।
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ये देखने में सौम्य और नित्य नूतन तरुण थे, किंतु वह निशाचरी क्रूर और हजारों वर्षों की बुढ़िया थी। ये सरलता से बात करने वाले और उदार थे, किंतु उसकी बातों में कुटिलता भरी रहती थी। ये न्यायोचित सदाचार का पालन करने वाले थे और वह अत्यन्त दराचारिणी थी। श्रीराम देखने में प्यारे लगते थे और शूर्पणखा को देखते ही घृणा पैदा होती थी
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O Rama you are wearing matted hair like an ascetic, but living with your wife and holding bow and arrows. What brings you to this place haunted by demons ? You should tell me the truth ?
ShlokaShloka 10
एवमुक्तस्तु राक्षस्या शूर्पणख्या परन्तपः।।3.17.14।।
ऋजुबुद्धितया सर्वमाख्यातुमुपचक्रमे।
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ये देखने में सौम्य और नित्य नूतन तरुण थे, किंतु वह निशाचरी क्रूर और हजारों वर्षों की बुढ़िया थी। ये सरलता से बात करने वाले और उदार थे, किंतु उसकी बातों में कुटिलता भरी रहती थी। ये न्यायोचित सदाचार का पालन करने वाले थे और वह अत्यन्त दराचारिणी थी। श्रीराम देखने में प्यारे लगते थे और शूर्पणखा को देखते ही घृणा पैदा होती थी
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Thus asked by the demoness Surpanakha, Rama, scorcher of foes began telling her everything due to his simplemindedness.
ShlokaShloka 11
अनृतं न हि रामस्य कदाचिदपि सम्मतम्।।3.17.15।।
विशेषेणाऽश्रमस्थस्य समीपे स्त्रीजनस्य च।
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ये देखने में सौम्य और नित्य नूतन तरुण थे, किंतु वह निशाचरी क्रूर और हजारों वर्षों की बुढ़िया थी। ये सरलता से बात करने वाले और उदार थे, किंतु उसकी बातों में कुटिलता भरी रहती थी। ये न्यायोचित सदाचार का पालन करने वाले थे और वह अत्यन्त दराचारिणी थी। श्रीराम देखने में प्यारे लगते थे और शूर्पणखा को देखते ही घृणा पैदा होती थी
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To Rama untruth is never acceptable at the hermitage and especially in the presence of a woman.
ShlokaShloka 12
आसीद्धशरथो नाम राजा त्रिदशविक्रमः।।3.17.16।।
तस्याहमग्रजः पुत्रो रामो नाम जनैश्श्रुतः।
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तो वह राक्षसी कामभाव से आविष्ट हो (मनोहर रूप बनाकर) श्रीराम के पास आयी और बोली —’तपस्वी के वेश में मस्तक पर जटा धारण किये, साथ में स्त्री को लिये और हाथ में धनुष-बाण ग्रहण किये, इस राक्षसों के देश में तुम कैसे चले आये? यहाँ तुम्हारे आगमन का क्या प्रयोजन है? यह सब मुझे ठीक-ठीक बताओ’
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(Rama replied) There was a king named Dasaratha who was mighty like the gods. I am his eldest son known among the people as Rama.
ShlokaShloka 13
भ्राताऽयं लक्ष्मणो नाम यवीयान्मामनुव्रतः।।3.17.17।।
इयं भार्या च वैदेही मम सीतेति विश्रुता।
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तो वह राक्षसी कामभाव से आविष्ट हो (मनोहर रूप बनाकर) श्रीराम के पास आयी और बोली —’तपस्वी के वेश में मस्तक पर जटा धारण किये, साथ में स्त्री को लिये और हाथ में धनुष-बाण ग्रहण किये, इस राक्षसों के देश में तुम कैसे चले आये? यहाँ तुम्हारे आगमन का क्या प्रयोजन है? यह सब मुझे ठीक-ठीक बताओ’
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Here is Lakshmana , my younger brother, who always follows me . And this is the daughter of the king of Videha and my wife, wellknown as Sita.
ShlokaShloka 14
नियोगात् तु नरेन्द्रस्य पितुर्मातुश्च यन्त्रितः।।3.17.18।।
धर्मार्थं धर्मकाङ्क्षी च वनं वस्तुमिहागतः।
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राक्षसी शूर्पणखा के इस प्रकार पूछने पर शत्रुओं को संताप देने वाले श्रीरामचन्द्रजी ने अपने सरलस्वभाव के कारण सब कुछ बताना आरम्भ किया—
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I have come here, commanded by the king, my father and mother.Intending to obey the orders of my father, and impelled by duty to establish righteousness I have come to reside here.
ShlokaShloka 15
त्वां तु वेदितुमिच्छामि कस्य त्वं कासि कस्य वा।।3.17.19।।
त्वं हि तावन्मनोज्ञाङ्गी राक्षसी प्रतिभासि मे।
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‘देवि! दशरथ नाम से प्रसिद्ध एक चक्रवर्ती राजा हो गये हैं, जो देवताओं के समान पराक्रमी थे। मैं । उन्हीं का ज्येष्ठ पुत्र हूँ और लोगों में राम नाम से विख्यात हूँ
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I wish to know who you are. Tell me who your kins are. With lovely limbs you do not appear to be a demoness.
ShlokaShloka 16
इह वा किंनिमित्तं त्वमागता ब्रूहि तत्त्वत:।।3.17.20।।
साब्रवीद् वचनं श्रुत्वा राक्षसी मदनार्दिता।
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‘ये मेरे छोटे भाई लक्ष्मण हैं, जो सदा मेरी आज्ञा के अधीन रहते हैं और ये मेरी पत्नी हैं, जो विदेहराज जनक की पुत्री तथा सीता नाम से प्रसिद्ध हैं
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Tell me truly what you have come here for. Having heard the words of Rama and overtaken by passion, the demoness said:
ShlokaShloka 17
श्रूयतां राम वक्ष्यामि तत्त्वार्थं वचनं मम। 3.17.21।।
अहं शूर्पणखा नाम राक्षसी कामरूपिणी।
अरण्यं विचरामीदमेका सर्वभयङ्करा।।3.17.22।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
‘अपने पिता महाराज दशरथ और माता कैकेयी की आज्ञा से प्रेरित होकर मैं धर्मपालन की इच्छा रखकर धर्मरक्षा के ही उद्देश्य से इस वन में निवास करने के लिये यहाँ आया हूँ
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My name is Surpanakha. I am a demoness who can assume any form at will, I move in this forest alone, unleashing a reign of terror.
ShlokaShloka 18
रावणो नाम मे भ्राता बलीयान्राक्षसेश्वरः।
वीरो विश्रवसः पुत्रो यदि ते ���्रोत्रमागतः।।3.17.23।।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
इह वा किंनिमित्तं त्वमागता ब्रूहि तत्त्वतः। ‘अब मैं तुम्हारा परिचय प्राप्त करना चाहता हूँ। तुम किसकी पुत्री हो? तुम्हारा नाम क्या है? और तुम किसकी पत्नी हो? तुम्हारे अङ्ग इतने मनोहर हैं कि तुम मुझे इच्छानुसार रूप धारण करने वाली कोई राक्षसी प्रतीत होती हो। यहाँ किस लिये तुम आयी हो? यह ठीक-ठीक बताओ’
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My brother is Ravana, son of Visrava, and lord of all demons. You have heard his name I suppose.
ShlokaShloka 19
प्रवृद्धनिद्रश्च सदा कुम्भकर्णो महाबलः।
विभीषणस्तु धर्मात्मा न तु राक्षसचेष्टितः।।3.17.24।।
प्रख्यातवीर्यौ च रणे भ्रातरौ खरदूषणौ।
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‘श्रीराम! बल और पराक्रम में मैं अपने उन सभी भाइयों से बढ़कर हूँ। तुम्हारे प्रथम दर्शन से ही मेरा मन तुम में आसक्त हो गया है। (अथवा तुम्हारा रूप सौन्दर्य अपूर्व है। आज से पहले देवताओं में भी किसी का ऐसा रूप मेरे देखने में नहीं आया है, अतः इस अपूर्व रूप के दर्शन से मैं तुम्हारे प्रति आकृष्ट हो गयी हूँ।) यही कारण है कि मैं तुम-जैसे पुरुषोत्तम के प्रति पतिकी भावना रखकर बड़े प्रेम से पास आयी हूँ
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Kumbhakarna is another brother of mine. He is very strong. He is always in deep sleep. Vibhisna another brother. He is righteous free from any demoniac trait. My other two brothers are Khara and Dusana who are wellknown heroes of war.
ShlokaShloka 20
तानहं समतिक्रान्ता राम त्वा पूर्वदर्शनात्।।3.17.25।।
समुपेतास्मि भावेन भर्तारं पुरुषोत्तमम्।
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‘श्रीराम! बल और पराक्रम में मैं अपने उन सभी भाइयों से बढ़कर हूँ। तुम्हारे प्रथम दर्शन से ही मेरा मन तुम में आसक्त हो गया है। (अथवा तुम्हारा रूप सौन्दर्य अपूर्व है। आज से पहले देवताओं में भी किसी का ऐसा रूप मेरे देखने में नहीं आया है, अतः इस अपूर्व रूप के दर्शन से मैं तुम्हारे प्रति आकृष्ट हो गयी हूँ।) यही कारण है कि मैं तुम-जैसे पुरुषोत्तम के प्रति पतिकी भावना रखकर बड़े प्रेम से पास आयी हूँ
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Setting them aside, I came here, as soon as I saw you. You are the finest among men and I am here wishing you to be my husband.
ShlokaShloka 21
अहं प्रभावसम्पन्ना स्वच्छन्दबलगामिनी।।3.17.26।।
चिराय भव मे भर्ता सीतया किं करिष्यसि।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
‘श्रीराम! बल और पराक्रम में मैं अपने उन सभी भाइयों से बढ़कर हूँ। तुम्हारे प्रथम दर्शन से ही मेरा मन तुम में आसक्त हो गया है। (अथवा तुम्हारा रूप सौन्दर्य अपूर्व है। आज से पहले देवताओं में भी किसी का ऐसा रूप मेरे देखने में नहीं आया है, अतः इस अपूर्व रूप के दर्शन से मैं तुम्हारे प्रति आकृष्ट हो गयी हूँ।) यही कारण है कि मैं तुम-जैसे पुरुषोत्तम के प्रति पतिकी भावना रखकर बड़े प्रेम से पास आयी हूँ
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I have influence over others, I have capacity to move wherever I want. Be my husband forever. What will you do with Sita?
ShlokaShloka 22
विकृता च विरूपा च न चेयं सदृशी तव।।3.17.27।।
अहमेवानुरूपा ते भार्या रूपेण पश्य माम्।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
‘श्रीराम! बल और पराक्रम में मैं अपने उन सभी भाइयों से बढ़कर हूँ। तुम्हारे प्रथम दर्शन से ही मेरा मन तुम में आसक्त हो गया है। (अथवा तुम्हारा रूप सौन्दर्य अपूर्व है। आज से पहले देवताओं में भी किसी का ऐसा रूप मेरे देखने में नहीं आया है, अतः इस अपूर्व रूप के दर्शन से मैं तुम्हारे प्रति आकृष्ट हो गयी हूँ।) यही कारण है कि मैं तुम-जैसे पुरुषोत्तम के प्रति पतिकी भावना रखकर बड़े प्रेम से पास आयी हूँ
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She is ugly, deformed, unsuitable for you. I am alone fit for you. Look upon me as your wife.
ShlokaShloka 23
इमां विरूपामसतीं करालां निर्णतोदरीम्।।3.17.28।।
अनेन ते सह भ्रात्रा भक्षयिष्यामि मानुषीम्।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
‘श्रीराम! बल और पराक्रम में मैं अपने उन सभी भाइयों से बढ़कर हूँ। तुम्हारे प्रथम दर्शन से ही मेरा मन तुम में आसक्त हो गया है। (अथवा तुम्हारा रूप सौन्दर्य अपूर्व है। आज से पहले देवताओं में भी किसी का ऐसा रूप मेरे देखने में नहीं आया है, अतः इस अपूर्व रूप के दर्शन से मैं तुम्हारे प्रति आकृष्ट हो गयी हूँ।) यही कारण है कि मैं तुम-जैसे पुरुषोत्तम के प्रति पतिकी भावना रखकर बड़े प्रेम से पास आयी हूँ
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I will devour your brother along with this disfigured, unchaste and fearful lady with a flat belly.
ShlokaShloka 24
ततः पर्वतशृङ्गाणि वनानि विविधानि च।।3.17.29।।
पश्यन्सह मया कान्त दण्डकान्विचरिष्यसि।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
‘श्रीराम! बल और पराक्रम में मैं अपने उन सभी भाइयों से बढ़कर हूँ। तुम्हारे प्रथम दर्शन से ही मेरा मन तुम में आसक्त हो गया है। (अथवा तुम्हारा रूप सौन्दर्य अपूर्व है। आज से पहले देवताओं में भी किसी का ऐसा रूप मेरे देखने में नहीं आया है, अतः इस अपूर्व रूप के दर्शन से मैं तुम्हारे प्रति आकृष्ट हो गयी हूँ।) यही कारण है कि मैं तुम-जैसे पुरुषोत्तम के प्रति पतिकी भावना रखकर बड़े प्रेम से पास आयी हूँ
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O darling, thereafter you can keep wandering with me in this Dandaka forest, enjoying the beauty of the mountain tops and forests.
ShlokaShloka 25
इत्येवमुक्तः काकुत्स्थः प्रहस्य मदिरेक्षणाम्।।3.17.30।।
इदं वचनमारेभे वक्तुं वाक्यविशारदः।
हिन्दी अर्थ देखेंहिन्दी अर्थ
‘मैं प्रभाव (उत्कृष्ट भाव–अनुराग अथवा महान् बल-पराक्रम) से सम्पन्न हूँ और अपनी इच्छा तथा शक्ति से समस्त लोकों में विचरण कर सकती हूँ, अतः अब तुम दीर्घकाल के लिये मेरे पति बन जाओ। इस अबला सीता को लेकर क्या करोगे?
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Thus addressed, Rama, skilled in speech, laughed and started speaking to that woman of bewitching eyes. इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये अरण्यकाण्डे सप्तदशस्सर्गः।। Thus ends the seventeenth sarga of Aranyakanda of the holy Ramayana the first epic composed by sage Valmiki.