Aranya Kanda

Sarga 41: Maricha's admonitions and warnings to Ravana

अरण्यकाण्डम् · सर्ग 41

20 shlokas

ShlokaShloka 1
आज्ञप्तो राजवद्वाक्यं प्रतिकूलं निशाचरः। अब्रवीत्परुषं वाक्यं मारीचो राक्षसाधिपम्।।3.41.1।।
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‘राजन्! कौन ऐसा पापाचारी है, जो तुम्हें सुखी देखकर प्रसन्न नहीं हो रहा है ? किसने युक्ति से तुम्हें मौत के द्वार पर जाने की यह सलाह दी है ?
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At this royal command which was against his interest Maracha used harsh words to the demonking:
ShlokaShloka 2
केनायमुपदिष्टस्ते विनाशः पापकर्मणा। सपुत्रस्य सराष्ट्रस्य सामात्यस्य निशाचर।।3.41.2।।
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‘राजन्! कौन ऐसा पापाचारी है, जो तुम्हें सुखी देखकर प्रसन्न नहीं हो रहा है ? किसने युक्ति से तुम्हें मौत के द्वार पर जाने की यह सलाह दी है ?
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Who is that sinner who has given you this advice which will spell destruction on you, your sons, your kingdom and your ministers ?
ShlokaShloka 3
कस्त्वया सुखिना राजन्नाभिनन्दति पापकृत्। केनेदमुपदिष्टं ते मृत्युद्वारमुपायतः।।3.41.3।।
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‘राजन्! कौन ऐसा पापाचारी है, जो तुम्हें सुखी देखकर प्रसन्न नहीं हो रहा है ? किसने युक्ति से तुम्हें मौत के द्वार पर जाने की यह सलाह दी है ?
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Which sinner is not able to see you happy? O king by whom is this gate of death shown to you cunningly?
ShlokaShloka 4
शत्रवस्तव सुव्यक्तं हीनवीर्या निशाचराः। इच्छन्ति त्वां विनश्यन्तमुपरुद्धं बलीयसा।।3.41.4।।
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‘निशाचर! आज यह बात स्पष्ट रूप से ज्ञात हो गयी कि तुम्हारे दुर्बल शत्रु तुम्हें किसी बलवान् से भिड़ाकर नष्ट होते देखना चाहते हैं।
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This is clear that your enemy demons are now powerless. Hence they want you to be engaged with a stronger power and be destroyed.
ShlokaShloka 5
केनेदमुपदिष्टं ते क्षुद्रेणाहितवादिना। यस्त्वामिच्छति नश्यन्तं स्वकृतेन निशाचर।।3.41.5।।
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‘राक्षसराज! तुम्हारे अहित का विचार रखने वाले किस नीच ने तुम्हें यह पाप करने का उपदेश दिया है ? जान पड़ता है कि वह तुम्हें अपने ही कुकर्म से नष्ट होते देखना चाहता है
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O Ravana by which mean fellow is this advice given against your welfare? Who wants you to be destroyed by your own action.
ShlokaShloka 6
वध्याः खलु न हन्यन्ते सचिवास्तव रावण। ये त्वामुत्पथमारूढं न निगृह्णन्ति सर्वशः।।3.41.6।।
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‘अच्छे मन्त्रियों को चाहिये कि जो राजा स्वेच्छाचारी होकर कुमार्ग पर चलने लगे, उसे सब प्रकार से वे रोकें। तुम भी रोकने के ही योग्य हो; फिर भी वे मन्त्री तुम्हें रोक नहीं रहे हैं।
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O Ravana the ministers should have prevented you by all means from adopting this wrong path. Since they have not done so, they deserve to be spain.
ShlokaShloka 7
अमात्यैः कामवृत्तो हि राजा कापथमाश्रितः। निग्राह्यस्सर्वथा सदभिर्न निग्राह्यो निगृह्यसे।।3.41.7।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘अच्छे मन्त्रियों को चाहिये कि जो राजा स्वेच्छाचारी होकर कुमार्ग पर चलने लगे, उसे सब प्रकार से वे रोकें। तुम भी रोकने के ही योग्य हो; फिर भी वे मन्त्री तुम्हें रोक नहीं रहे हैं।
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Good ministrers should always prevent a lustful king from taking resourse to an evil path. Why were you not stopped, even though you deserve to be checked.
ShlokaShloka 8
धर्ममर्थं च कामं च यशश्च जयतां वर। स्वामिप्रसादात्सचिवाः प्राप्नुवन्ति निशाचर।।3.41.8।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘रावण! यदि स्वामी की कृपा न हो तो सब व्यर्थ हो जाता है। राजा के दोष से दूसरे लोगों को भी कष्ट भोगना पड़ता है
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O Ravana the best among the successful ministers attain piety, prosperity, pleasures and fame by the grace of the king.
ShlokaShloka 9
विपर्यये तु तत्सर्वं व्यर्थं भवति रावण। व्यसनं स्वामिवैगुण्यात्प्राप्नुवन्तीतरे जनाः।।3.41.9।।
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‘रावण! यदि स्वामी की कृपा न हो तो सब व्यर्थ हो जाता है। राजा के दोष से दूसरे लोगों को भी कष्ट भोगना पड़ता है
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Otherwise evrything will become useless, O Ravana Others will suffer calamities on account of their master's vices.
ShlokaShloka 10
राजमूलो हि धर्मश्च जयश्च जयतां वर। तस्मात्सर्वा���्ववस्थासु रक्षितव्या नराधिपाः।।3.41.10।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘विजयशीलों में श्रेष्ठ राक्षसराज! धर्म और यश की प्राप्ति का मूल कारण राजा ही है; अतः सभी अवस्थाओं में राजा की रक्षा करनी चाहिये
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O Ravana, the best among the victorious indeed the king is at the root of righteousness and victory.Therefore, the king should be protected by all at every stage.
ShlokaShloka 11
राज्यं पालयितुं शक्यं न तीक्ष्णेन निशाचर। न चापि प्रतिकूलेन नाविनीतेन राक्षस।।3.41.11।।
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‘रात्रि में विचरने वाले राक्षस! जिसका स्वभाव अत्यन्त तीखा हो, जो जनता के अत्यन्त प्रतिकूल चलने वाला और उद्दण्ड हो, ऐसे राजा से राज्य की रक्षा नहीं हो सकती
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O nightwalking demon a kingdom cannnot be governed by a king who is rude or hostile or impolite.
ShlokaShloka 12
ये तीक्ष्णमन्त्रास्सचिवा भज्यन्ते सह तेन वै। विषमे तुरगा श्शीघ्रा मन्दसारथयो यथा।।3.41.12।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘जो मन्त्री तीखे उपाय का उपदेश करते हैं, वे अपनी सलाह मानने वाले उस राजा के साथ ही दुःख भोगते हैं, जैसे जिनके सारथि मूर्ख हों, ऐसे रथ नीची-ऊँची भूमि में जाने पर सारथियों के साथ ही संकट में पड़ जाते हैं
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Ministers who adopt improper strategies go down along with the king just like swift horses driven by a slow charioteer on a rugged terrain.
ShlokaShloka 13
बहवस्साधवो लोके युक्ता धर्ममनुष्ठिताः। परेषामपराधेन विनष्टास्सपरिच्छदाः।।3.41.13।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘उपयुक्त धर्म का अनुष्ठान करने वाले बहुत-से साधुपुरुष इस जगत् में दूसरों के अपराध से परिवारसहित नष्ट हो गये हैं
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Persons who walk the righteous path go down in this world along with their kith and kin due to the mistakes committed by others .
ShlokaShloka 14
स्वामिना प्रतिकूलेन प्रजास्तीक्ष्णेन रावण। रक्ष्यमाणा न वर्धन्ते मेषा गोमायुना यथा।।3.41.14।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘रावण! प्रतिकूल बर्ताव और तीखे स्वभाव वाले राजा से रक्षित होने वाली प्रजा उसी तरह वृद्धि को नहीं प्राप्त होती है, जैसे गीदड़ या भेड़िये से पालित होने वाली भेड़ें
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O Ravana, people who are ruled by a cruel and hostile king will not grow like the sheep protected by a jackal.
ShlokaShloka 15
अवश्यं विनशिष्यन्ति सर्वे रावण राक्षसाः। येषां त्वं कर्कशो राजा दुर्बुद्धिरजितेन्द्रियः।।3.41.15।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘काकतालीय न्याय के अनुसार मुझे तुमसे अकस्मात् ही यह घोर दुःख प्राप्त हो गया। इस विषय में मुझे तुम ही शोक के योग्य जान पड़ते हो; क्योंकि सेनासहित तुम्हारा नाश हो जायगा
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Under a rude, crooked king whose senses are not under his control the demons will surely perish.
ShlokaShloka 16
तदिदं काकतालीयं घोरमासादितं मया। अत्र किं शोचनीयस्त्वं ससैन्यो विनशिष्यसि।।3.41.16।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘काकतालीय न्याय के अनुसार मुझे तुमसे अकस्मात् ही यह घोर दुःख प्राप्त हो गया। इस विषय में मुझे तुम ही शोक के योग्य जान पड़ते हो; क्योंकि सेनासहित तुम्हारा नाश हो जायगा
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I am faced with this dreadful disaster accidentally. You will not only be in a miserable state because of your misdeeds, you will perish along with your army.
ShlokaShloka 17
मां निहत्य तु रामश्च न चिरात्त्वां वधिष्यति। अनेन कृतकृत्योऽस्मि म्रियेयमरिणा हतः।।3.41.17।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘श्रीरामचन्द्रजी मुझे मारकर तुम्हारा भी शीघ्र ही वध कर डालेंगे। जब दोनों ही तरह से मेरी मृत्यु निश्चित है, तब श्रीराम के हाथ से होने वाली जो यह मृत्यु है, इसे पाकर मैं कृतकृत्य हो जाऊँगा; क्योंकि शत्रु के द्वारा युद्ध में मारा जाकर प्राणत्याग करूँगा (तुम-जैसे राजा के हाथ से बलपूर्वक प्राणदण्ड पाने का कष्ट नहीं भोगूंगा)
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Rama will kill you not long after killing me.Hence even if I die in the hands of the enemy, my desire will be fulfilled.
ShlokaShloka 18
दर्शनादेव रामस्य हतं मामवधारय। आत्मानं च हतं विद्धि हृत्वा सीतां सबान्धवम्।।3.41.18।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘राजन्! यह निश्चित समझो कि श्रीराम के सामने जाकर उनकी दृष्टि पड़ते ही मैं मारा जाऊँगा और यदि तुमने सीता का हरण किया तो तुम अपने को भी बन्धु-बान्धवोंसहित मरा हुआ ही मानो
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Yu most understand that if I die at the very sight of Rama, you along with your relatives will perish with the abduction of Sita.
ShlokaShloka 19
आनयिष्यसि चेत्सीतामाश्रमात्सहितो मया। नैवत्वमसि नाहं च नैव लङ्का न राक्षसाः।।3.41.19।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘यदि तुम मेरे साथ जाकर श्रीराम के आश्रम से सीता का अपहरण करोगे, तब न तो तुम जीवित बचोगे और न मैं ही न लंकापुरी रहने पायेगी और न वहाँ के निवासी राक्षस ही
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If you bring Sita from the hermitage with my assistance, know that none of us will surviveyou nor I, nor Lanka , nor the demons.
ShlokaShloka 20
निवार्यमाणस्तु मया हितैषिणा न मृष्यसे वाक्यमिदं निशाचर। परेतकल्पा हि गतायुषो नरा हितं न गृह्णन्ति सुहृद्भिरीरितम्।।3.41.20।।
हिन्दी अर्थ देखें
‘निशाचर! मैं तुम्हारा हितैषी हूँ, इसीलिये तुम्हें पापकर्म से रोक रहा हूँ; किंतु तुम्हें मेरी बात सहन नहीं होती है। सच है जिनकी आयु समाप्त हो जाती है, वे मरणासन्न पुरुष अपने सुहृदों की कही हुई हितकर बातें नहीं स्वीकार करते हैं
Show English Translation
O Ravana, you do not understand this word of warning coming from your wellwisher. Men who are going to die do not heed the advice given by their friends. इत्यार्ष�� श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये अरण्यकाण्डे एकचत्वारिंशस्सर्गः।। Thus ends the fortyfirst sarga of Aranyakanda of the holy Ramayana the first epic composed by sage Valmiki.